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10/07/2021

स्मृति के प्रकार

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स्मृति के प्रकार 

smriti ke prakar;मनोवैज्ञानिकों ने स्मृति के अनेक प्रकार बतलाए हैं, लेकिन स्मृति चिन्हों को संचित करने की अवधि के आधार पर स्मृति को तीन भागों में वर्गीकृत किया जा सकता हैं-- 

1. संवेदी स्मृति 

संवेदी स्मृति को स्मृति संचयन भी कहा जाता हैं जिससे सूचनाओं को सामान्यतः एक सेकण्ड या उससे कम अवधि के लिए व्यक्ति रख पाता हैं। संवेदी स्मृति के कारण ही व्यक्ति के सामने से उद्दीपक हट जाने के बाद भी उसका चिह्र थोड़े समय के लिये बना रहता हैं, अतः इसे संवेदी संचयन  (Sensory Storage) या संवेदी रजिस्टर (Sensory register) भी कहा जाता हैं। यह दो प्रकार की होती हैं--

(अ) प्रतिमा सम्बन्धित स्मृति (Iconic memory

नाईसर के अनुसार प्रतिमा सम्बन्धी स्मृति एक दृष्टि संवेदी स्मृति (Visual sensory memory) है, जिसमें व्यक्ति के सामने से उद्दीपक हटा लेने के बाद भी उसकी दृष्टि छवि ( Impressions) कुछ समय के लिये उसके मन में बनी रहती है। प्रतिमा सम्बन्धी स्मृति के अस्तित्व को दिखाने हेतु स्परलिंग (Sperling 1960) महोदय ने सबसे पहला प्रयोग किया। 

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(ब) प्रतिध्वनिक स्मृति (Echoic memory) 

प्रतिध्वनिक स्मृति एक संवेदी श्रवण स्मृति (Sensory auditory memory) है। इस स्मृति के अन्तर्गत श्रवण उद्दीपक के समाप्त हो जाने के बाद भी व्यक्ति अल्प समय के लिये उसकी श्रवण छवि का अनुभव करता है। इस स्मृति पर मासारो, डार्विन, टर्वे, क्राउडर विद्वानों ने प्रयोगात्मक अध्ययन किये हैं। 

2. अल्पकालिक स्मृति (Short-term memory of STM) 

लघु कालीन स्मृति को विलियम जेम्स ने प्राथमिक स्मृति (Primary memory or PM) कहा है। STM में किसी सूचना को अधिक से अधिक 20-30 सेकण्ड तक संचित करके रखा जा सकता है तथा इसमें प्रवेश पाने वाली सूचनायें कमजोर प्रकृति की होती हैं, क्योंकि व्यक्ति उन्हें एक दो प्रयास में ही सीख लेता है। STM को अन्य कई नामों से जाना जाता है जैसे- सक्रिय स्मृति (Active memory), तात्कालिक स्मृति (Immediate memory), चलन स्मृति (Working memor ), लघु-कालीन संचयन (Short - term store) आदि। लघु कालीन स्मृति में पाँच से नौ अलग-अलग या स्वतंत्र सूचनाओं को एक साथ संचित किया जा सकता है। इस तथ्य को सर्वप्रथम मिलर (Miller, 1956) ने बताया कि तात्कालिक स्मृति 7 + 2 चंक (Chunk) द्वारा सीमित होती है। चंकिंग (Chunking) एक ऐसी प्रक्रिया होती है जिसमें छोटी-छोटी सूचनाओं को बढ़ी इकाईयों में समूहन करके उसे याद करते हैं इसे चंक प्रत्याहान कहते हैं। STM के आकार को दो विधियों के द्वारा मापा जाता है-- 

(1) क्रमिक स्थान वक्र विधि और 

(2) स्मृति विस्तार विधि, 

जबकि STM की अवधि को मापने हेतु विकर्षण प्रविधि (Distractor technique) और तहकीकात प्रविधि (Probe technique) का प्रयोग किया जाता है। विकर्षण प्रविधि को सर्वप्रथम जॉन ब्रॉउन और पेटरसन एवं पेटरसन द्वारा स्वतंत्र रूप से विकसित किया गया। अतः इसे ब्राउन पेटरसन प्रविधि भी कहते हैं। इन मनोवैज्ञानिकों ने STM की अधिकतम अवधि 20-30 सेकण्ड मानी है । 

अल्पकालीक स्मृति में कूट संकेतीकरण (Coding) - STM में सूचनाओं व उद्दीपकों का कूट संकेतीकरण (Coding) भी होता है। व्यक्ति किसी भी प्रकार की सूचना या उद्दीपक को उसकी आवाज के आधार पर या अर्थ के आधार पर अथवा उद्दीपकों के भौतिक रूप-रंग के आधार पर कुछ संकेत बनाकर संचित करते हैं। STM में जब सूचनाओं को उनकी आवाज के आधार पर संचित किया जाता है, तो उसे ध्वनिक कूट संकेतीकरण (Acoustic coding) कहा जाता है। जब अर्थ के आधार पर संचयन किया जाता है, तो उसे अर्थगत कूट संकेतीकरण (Semantic Coding) कहा जता हैं।  जब भौतिक रंग-रूप के आधार पर संचयन किया जाता है, तो उसे दृष्टि कूट संकेतीकरण (Visual coding) कहा जाता है।

अल्पकालिक स्मृति में रिहर्सल अथवा दोहराना (Rehearsal)--

 रिहर्सल का अर्थ होता है मन ही मन उद्दीपक या सूचनाओं पर ध्यान देते हुये दोहराना रिहर्सल से STM में धारण की गयी सूचनायें अधिक मजबूत हो जाती है, जिससे उनके प्रत्याहान (Recall) करने की सम्भावना तीव्र हो जाती है। एटकिन्सन एवं शिर्फिन ने कहा कि रिहर्सल के कारण ही STM से सूचनायें दीर्घकालीन स्मृति (Long-term memory - LTM) में स्थानान्तरित होती है, जबकि क्रंक तथा वैटकिंस ने कहा STM में होने वाली रिहर्सल दो प्रकार की है--

संपोषण रिहर्सल (Maintenance rehershal) जिसमें व्यक्ति सूचना को केवल मन ही मन दोहराता है तथा STM से यह LTM में स्थानान्तरित नहीं होती, जबकि विस्तृत रिहर्सल (Elaborative rehearhal)

से सूचनायें STM में अधिक मजबूत हो जाती हैं तथा उनका अल्पकालिक स्मृति (STM) से  दीर्घकालिक स्मृति (LTM) में स्थानान्तरण भी सम्भव हो जाता है। 

3. दीर्घकालिक स्मृति (Long-term memory)

दीर्घकालिक स्मृति (LTM) का अर्थ ऐसे स्मृति संचयन से होता है जिसमें सूचनाओं को व्यक्ति बहुत लम्बे समय तक रख पाता है। इस स्मृति की न्यूनतम समय सीमा 20-30 सेकण्ड से लेकर जीवन भर तक की हो सकती है। LTM की संचयन क्षमता बहुत अधिक होती है। इसी कारण LTM की क्षमता को असीमित भी कहा गया है। LTM को कई नामों से जाना जाता है, जैसे- विलियम जेम्स इसे गौण स्मृति  (Secondary memory) कहते हैं, क्योंकि सूचनायें STM से होकर LTM तक पहुँचती हैं। LTM को असक्रिय स्मृति (Inactive memory) भी कहते हैं क्योंकि इसमें अधिकतर सूचनाओं का व्यक्ति वर्तमान में प्रयोग नहीं करता।  

दीर्घकालिक स्मृति (LTM) की विशेषतायें 

दीर्घकालिक स्मृति (LTM) की निम्नलिखित विशेषतायें अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हैं-- 

1. LTM में संचित सूचनायें सापेक्ष रूप से स्थायी होती हैं। 

2. LTM में संचित सूचनायें मौलिक उद्दीपक से प्राप्त सूचनाओं से थोड़ा भिन्न होती हैं, क्योंकि सूचनाओं का कूट संकेतीकरण किया जाता है, इस तथ्य से सम्बन्धि अध्ययन बार्टलेट महोदय ने किये। 

3. जायगारनिक प्रभाव (Zeigarnik effect) - जायगारनिक महोदय (1927) ने अपने प्रयोगों द्वारा प्रमाणित किया कि LTM में संचित ऐसी सूचनायें कम सक्रिय होती हैं जो कि किसी घटना या कार्य पूरा होने के बाद प्राप्त होती हैं बल्कि ऐस सूचनायें अधिक सक्रिय होती हैं जो कि किसी कार्य के अधूरा रह जाने के बाद सक्रिय होती हैं। इसी कारण व्यक्ति को ऐसे कार्यों की पुनः स्मृति अधिक होती है जो कि अधूरे रह गये हों। इसे ही मनोविज्ञान में जायगारनिक प्रभाव (Zeigarnik effect) कहा जाता है।

4. LTM में दृष्टि सामग्रियों की परिशुद्धता अधिक पायी जाती है, इस तथ्य की पुष्टि शेपार्ड के अध्ययनों द्वारा होती है। 

4. LTM में सूचनायें संगठित तथा साहचर्यात्मक ढंग से संचित की जाती हैं। 

दुलविंग महोदय (Tulving, 1972) ने LTM को दो भागों में विभाजित किया है-- 

(1) प्रासंगिक स्मृति ( Episodic memory) 

प्रासंगिक स्मृति में ऐसी व्यक्तिगत सूचनायें संचित होती हैं जो अस्थायी रूप से व्यक्ति के साथ घटित होती हैं। इन सूचनाओं से वस्तुतः यह ज्ञात होता है कि अमुक घटना कब हुई। इस तरह प्रासंगिक स्मृति एक ऐसी मानसिक नोटबुक का काम करती है जिसमें विभिन्न प्रकार की व्यक्तिगत घटनायें संचित होती हैं। इस स्मृति को आत्मचरित स्मृति (Autobiographical memory) भी कहा जाता है। प्रासंगिक स्मृति के कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं जैसे-- मुझे कल सुबह 10 बजे कॉलेज जाना है, मेरा बचपन आगरा में व्यतीत हुआ, आदि। 

(2) अर्थंगत स्मृति (Semantic memory) 

इस स्मृति में व्यक्ति शब्दों, संकेतों आदि के बारे में एक क्रमबद्ध ज्ञान रखता है। इस तरह के ज्ञान में शब्दों, संकेतों के परस्पर सम्बन्धों, उनके अर्थों व उनमें जोड़-तोड़ करने आदि का ज्ञान सम्मिलित होता है। हम वस्तुतः अर्थगत स्मृति को मानसिक शब्दकोश (Mental dictionary) या विश्वकोश (Encyclope dia) कह सकते हैं। अर्थगत स्मृति के कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं जैसे-- जल का सूत्र H²O होता है, वर्ष में 365 दिन होते हैं आदि।

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