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10/11/2021

बुद्धि परीक्षणों का अर्थ, प्रकार

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बुद्धि परीक्षणों का अर्थ (buddhi parikshan kya hai)

buddhi parikshan arth avyshkta itihas prakar;जब भी वैयक्तिक भिन्नताओं के मापन पर विचार किया जाता है तो बुद्धि को भी उसी संदर्भ में देखा जाता है। प्रत्येक व्यक्ति में बौद्धिक या मानसिक योग्यता भिन्न होती है। शिक्षा तथा समाज के अन्य क्षेत्रों में बुद्धि मापन को अत्यधिक महत्त्वपूर्ण माना जाता रहा है। आधुनिक शिक्षा मनोविज्ञान की एक सबसे महत्त्वपूर्ण देन है-- बुद्धि का मापन करने के लिए बुद्धि  परीक्षायें या बुद्धि परीक्षण। बुद्धि मापन का अर्थ है-- बालक की मानसिक योग्यता का माप करना या यह ज्ञात करना कि उसमें कौन-कौन-सी मानसिक योग्यताएँ हैं और कितनी? प्रत्येक बालक में इस प्रकार की कुछ जन्मजात योग्यताएँ होती हैं। बुद्धि परीक्षणों द्वारा उसकी इन्हीं योग्यताओं या उसके मानसिक विकास का अनुमान लगाया जाता है। ड्रेवर के शब्दों में," बुद्धि परीक्षा किसी प्रकार का कार्य या समस्या होती है, जिसकी सहायता से एक व्यक्ति के मानसिक विकास के स्तर का अनुमान लगाया जा सकता है या मापन किया जा सकता है।"

बुद्धि परीक्षणों की आवश्यकता 

शिक्षा प्राप्त करने वाले बालकों की योग्यताओं में स्वाभाविक अन्तर होता है। इस अन्तर के कारण सब बालक समान रूप से प्रगति नहीं कर पाते हैं। ऐसी स्थिति में शिक्षक के समक्ष एक जटिल समस्या उपस्थित हो जाती है। बुद्धि परीक्षण, बालकों में पाये जाने वाले अन्तर का ज्ञान प्रदान करके शिक्षक को समस्या का समाधान करने में सहायता प्रदान करती है। ब्लेयर, जोन्स एवं सिम्पसन का कथन है," विद्यालय में बुद्धि-परीक्षणों का प्रयोग व्यावहारिक कार्यों के लिए और साधारणतया यह ज्ञात करने के लिए किया जाता है कि बालक, विद्यालय के कार्य में कितनी सफलता प्राप्त कर सकते हैं।"

बुद्धि परीक्षणों का इतिहास 

बी.बी. सामन् के अनुसार भारत के लिए बुद्धि-परीक्षाएँ कोई नई बात नहीं है। वेदों और पुराणों में भी जहाँ-तहाँ बुद्धि परीक्षाओं के उल्लेख मिलते हैं। यक्ष व युधिष्ठिर का सम्वाद बुद्धि परीक्षा का प्रत्यक्ष उदाहरण है। छात्रों की बुद्धि परीक्षा हेतु जटिल प्रश्नों, पहेलियों, समस्याओं आदि का प्रयोग किया जाता था। तक्षशिला और नालन्दा विश्वविद्यालयों की अध्ययन विधियों में बुद्धि परीक्षणों का महत्त्वपूर्ण स्थान था। आज परिस्थिति ऐसी है कि भारत विदेशी विद्वानों द्वारा बनाई गई बुद्धि की विधियों का प्रयोग कर रहा है। यूरोप में बुद्धि  परीक्षा की दिशा में अठारहवीं शताब्दी में कार्य प्रारम्भ किया गया। सर्वप्रथम भारत के समान वहाँ भी शारीरिक लक्षणों के बुद्धि के माप का आधार बनाया गया। जैसे- हम भारत में आज भी सुनते हैं," छिद्दन्ता क्वचित् मूर्खा", अर्थात् छितरे दाँतों वाला कोई-कोई ही मूर्ख होता है। इसी तरह स्विट्जरलैण्ड के प्रसिद्ध विद्वान लैवेटर ने 1772 में विभिन्न शारीरिक लक्षणों को बुद्धि का आधार घोषित किया। उस समय से बुद्धि के मापन का कार्य किसी-न-किसी रूप में यूरोप चलता रहा। 1879 में विलियम वुण्ट ने जर्मनी के लीपजिग नामक नगर में प्रथम मनोवैज्ञानिक प्रयोगशाला स्थापित करके बुद्धि  मापन के कार्य को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया। इस प्रयोगशाला में बुद्धि का माप यंत्रों की सहायता से किया जाता था।

वुण्ट के कार्य से प्रोत्साहित होकर अन्य देशों के वैज्ञानिकों ने भी बुद्धि परीक्षणों का कार्य आरम्भ किया। इनमें उल्लेखनीय हैं-- फ्रांस में बिने (Binet), इंग्लैण्ड में विंच (Winch), जर्मनी में मैनमान (Menmann) और अमेरिका में थॉर्नडाइक (Thorndike) एवं टर्मन (Terman)। इन मनोवैज्ञानिकों में सबसे अधिक सफलता प्राप्त हुई बिने (Binet) को जिसने साइमन (Siman  की सहायता से "बिने-साइमन बुद्धि मानक्रम" का निर्माण किया। टरमन ने उसमें संशोधन करके उसे "स्टेनफोर्ड-बिने -मानक्रम" का नाम दिया। बुद्धि परीक्षण के क्षेत्र में विश्व के सभी उन्नत देशों में असंख्य परीक्षण बनाये गये हैं। भारत में भी राज्यों की मनोविज्ञान शालाओं, विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय शिक्षक प्रशिक्षण अनुसंधान परिषद् और अन्य अनेक निजी एवं सार्वजनिक संस्थान इस दिशा में सक्रिय हैं। 

बुद्धि परीक्षणों के प्रकार (buddhi parikshan ke prakar)

बुद्धि परीक्षणों को सामान्य रूप से दो वर्गों में विभाजित किया जा सकता है।-- 

1. शाब्दिक या वाचिक बुद्धि परीक्षण 

शाब्दिक बुद्धि परीक्षणों से अभिप्राय उन परीक्षणों से है, जिनमें शब्दों या भाषा के माध्यम से प्रश्नों या समस्याओं को प्रस्तुत किया जाता है व परीक्षार्थी भी शब्दों या भाषा के माध्यम से इन प्रश्नों या समस्याओं का उत्तर प्रदान करते हैं। अन्य शब्दों में कहा जा सकता है कि जिन परीक्षणों में भाषा का प्रयोग करके समस्याएँ प्रस्तुत की जाती हैं, उन्हें वाचिक परीक्षण कहा जाता है। शाब्दिक परीक्षण प्रायः कागज-कलम परीक्षण (Paper Pencil Tests) या लिखित परीक्षण होते हैं, फिर भी कभी-कभी इनको मौखिक रूप में भी प्रयुक्त किया जाता है। शाब्दिक बुद्धि परीक्षण व्यक्तिगत भी हो सकते हैं व सामूहिक भी हो सकते हैं। बिने-साइमन परीक्षण तथा जलोटा, टंडन व मेहता के बुद्धि परीक्षण वाचिक बुद्धि परीक्षणों के कुछ उदाहरण हैं ।

शाब्दिक बुद्धि परीक्षणों का प्रशासन अधिक सरल होता है। इन परीक्षणों का अंकन वस्तुनिष्ठ होता है। इनकी विश्वसनीयता तथा वैधता अधिक होती है। शाब्दिक बुद्धि परीक्षण अल्पव्ययी होते हैं। इनका उपयोग व्यक्तिगत परीक्षण तथा सामूहिक परीक्षण दोनों के रूप में किया जा सकता है। छात्रों की बुद्धि का मापन करने हेतु शाब्दिक बुद्धि परीक्षणों का बहुतायात से प्रयोग किया जाता है। भाषा के प्रयोग के कारण वाचिक बुद्धि परीक्षणों का क्षेत्र सीमित हो जाता है। परीक्षण में प्रयुक्त भाषा का लिखना तथा पढ़ना जानने वाले व्यक्तियों पर ही शाब्दिक बुद्धि परीक्षणों का प्रयोग किया जा सकता है। छोटे बच्चों, अशिक्षितों, अन्य भाषा वाले व्यक्तियों तथा बुद्धि व्यक्तियों के लिए इनका प्रयोग करना संभव नहीं होता है। सांस्कृतिक कारकों, सामाजिक परिस्थितियों, आर्थिक स्थिति और वातावरणीय हीनता आदि के कारण इन परीक्षणों पर व्यक्तियों की बुद्धि का मापन प्रभावित हो सकता है। 

2. अशाब्दिक या अवाचिक बुद्धि परीक्षण  

अवाचिक बुद्धि परीक्षण से तात्पर्य उन बुद्धि परीक्षणों से है, जिनमें शब्दों या भाषा का प्रयोग न करके चित्रों व अन्य स्थूल वस्तुओं के माध्यम से समस्यायें प्रस्तुत की जाती हैं। अन्य शब्दों में कहा जा सकता है कि अशाब्दिक बुद्धि परीक्षाओं में चित्रों या स्थूल सामग्री की सहायता से प्रश्नों की रचना की जाती है तथा परीक्षार्थी को सही चित्र या वस्तु को छंटकर या कुछ क्रिया करके अपने उत्तर को बताना होता है। इस प्रकार के बुद्धि परीक्षण व्यक्तिगत बुद्धि परीक्षण भी हो सकते हैं व सामूहिक बुद्धि परीक्षण भी हो सकते हैं। अशाब्दिक बुद्धि परीक्षण के निर्देश प्रायः भाषा के माध्यम से ही व्यक्त किये जाते हैं । अशाब्दिक बुद्धि परीक्षण दो प्रकार 

(अ) कागज-कलम परीक्षण (Paper - Pencil Tests) तथा 

(ब) निष्पादन परीक्षण (Performance Tes ) 

के हो सकते हैं। कागज-कलम परीक्षणों को लिखित परीक्षण भी कहा जाता है व इस प्रकार के परीक्षणों में चित्रों, आकृतियों या संख्याओं आदि की सहायता से कागज पर मुद्रित रूप में समस्यायें प्रस्तुत की जाती हैं, जिनका उत्तर परीक्षार्थी कागज पर कुछ निशान लगाकर देता है। इनके विपरीत निष्पादन परीक्षणों में निर्जीव वस्तुओं जैसे विभिन्न प्रकार के लकड़ी के गुटके आदि की सहायता से समस्यायें प्रस्तुत की जाती हैं। परीक्षार्थीगण इन गुटकों को व्यवस्थित करके अपनी-अपनी मानसिक योग्यता का प्रमाण देते हैं। निष्पादन परीक्षण प्रायः व्यक्तिगत परीक्षण ही होते हैं। रेविन की प्रोग्रेसिव मैट्रिक्स कागज-कलम प्रकार का अवाचिक बुद्धि परीक्षण है, जबकि भाटिया बैटरी निष्पादन प्रकार का अवाचिक बुद्धि परीक्षण है। अशाब्दिक बुद्धि परीक्षणों का प्रयोग छोटे बच्चों, अशिक्षितों, अन्य भाषा जानने वाले व्यक्तियों के लिए सफलतापूर्वक किया जा सकता है। भाषायी योग्यता में पिछड़े परीक्षार्थियों व वातावरणीय हीनता से प्रभावित व्यक्तियों के लिए तो अशाब्दिक बुद्धि परीक्षण विशेष रूप से प्रभावशाली सिद्ध होते हैं। सामाजिक, सांस्कृतिक तथा आर्थिक कारकों से अप्रभावित रहने के कारण अवाचिक बुद्धि परीक्षण अधिक विश्वसनीय तथा वैध होते हैं। ये परीक्षण व्यक्ति की योग्यता के संबंध में विस्तृत तथा अपरोक्ष सूचना भी प्रदान कर सकते हैं। भाषा का प्रयोग न होने के कारण अशाब्दिक बुद्धि परीक्षण व्यावहारिक दृष्टि से कम उपयोगी होते हैं। इनका निर्माण व प्रयोग करना भी शाब्दिक बुद्धि परीक्षणों की तुलना में अधिक व्ययसाध्य होते हैं। इनकी रचना व प्रशासन का कार्य कुशल तथा प्रशिक्षित व्यक्तियों के द्वारा ही किया जा सकता है । निष्पादन परीक्षणों के अंकन के व्यक्तिनिष्ठ होने की अधिक संभावना रहती है।

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