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9/14/2019

9/14/2019

Need to का प्रयोग (use of need to in hindi)

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आप सभी kailasheducation.com में, आज के इस लेख मे मैं आपको सरल और स्पष्ट भाषा में need to के use के बारें में Present, past, और future तीनों tense में need to के प्रयोग के बारें में बताऊंगा। आप इस लेख को अंत तक ध्यान पूर्वक पढ़े। तो चलिए शुरू करते है--

Need to ka use (use of need to in hindi)

Need to एक english modals verb हैं, Need to का प्रयोग वहाँ होता है जहाँ हमें किसी काम की जरूरत होती है या जब हम किसी वाक्य में जरूरत या आवश्कता का प्रयोग करते है वहाँ पर need to का प्रयोग किया जाता हैं।
Need to ka use

  Present tense में Need to ka use (नीड टू का प्रयोग)

Rule one
I+you+we+they+need to+verb ki first form
उदाहरण (example)
simple sentence में need to ka use
मुझे अंग्रेजी सिखने की जरूरत हैं
I need to learn English
interrogative sentence में need to ka  प्रयोग 
क्या मुझे अंग्रजी सिखने की जरूरत हैं।
Do i need to learn English
negative sentence में need to ka use 
मुझें अंग्रेजी सिखने की जरूरत नही है।
I do not need to learn English
कुछ और उदाहरण
मुझे वहाँ जानें की आवश्यकता हैं।
I need to go there
Do i need to go there
I do not go there
हमें इंतजार करने की जरूरत हैं।
we need to wait for
Do we need to wait
We do not need to wait
उन्हें बात करने की जरूरत हैं।
They need to talk
Do they need to talk
They do not need to talk
हमें पैंसे कामने की जरूरत है।
We need to earn money
Do we need to earn money
We do not need to earn money
हमें कार चलाने की जरूरत है।
We need to drive a car
Do need to drive a car
We do not need to drive a car
मुझें ध्यान से सुनने की जरूरत है।
I need to listen carefully
Do i need to listen carefully
I do not need to listen carefully
हमें काम करने की जरूरत हैं।
We need to work
Do we need to work
We do not need to work
उन्हें पैसे निकालने की जरूरत हैं।
We need to withdraw money
Do need to withdraw money
We do not withdraw money

Present tense में Need to ka use (use of need to) rule two

Smiple sentence में  need to ka use
He+she+it+needs to+verb ki first form
He, she, it, के साथ need to में s जुड़ जाता हैं लेकिन does के साथ s का प्रयोग नही होता।
Interrogative or negative में do के स्थान पर does का प्रयोग होता हैं।
उदाहरण (example)
Simple sentence में need to ka use
उसे भोपाल जाने की जरूरत है।
He needs to go to bhopal.
Interrogative sentence में need to ka use
क्या उसे भोपाल जाने की जरूरत है।
Dose he need to go to bhopal
Negative sentence में  need to ka use
उसे भोपाल जाने की जरूरत नही है।
He does not need to go to bhopal
कुछ और sentence
उस लड़की को लिखने की जरूरत है।
She needs to write
Does she need to write
She does not need to write
उस लड़के को पैंसे जमा करने की जरूरत हैं।
He boy needs to collect money.
Does he boy need to collect money.
He boy does not need to collect money.
बारिश होने की जरूरत है।
It needs to rain
Does it need to rain
It does not need to rain
विद्यार्थी को पढ़ने की जरूरत है।
Student needs to read
Does student need to read
Student does not need to read
Past tens में need to ka use (प्रयोग)

Past tens में need to (नीड टू का प्रयोग ) 

Past tens में एक ही rule हैं। 

Simple
All subject + needed to
Interrogative में did पहले आता है।
Did+subject+need to
Negative में subject+did not+need to
उदाहरण (example) 
हमें विदिशा जाने की जरूरत थी।
We needed to go to vidisha
Past Interrogative sentence में need to का प्रयोग
did we need to go to vidisha
Past negative sentence में need to  का प्रयोग
We did not need go to vidisha.
Need to के कुछ और sentence
आज बारिश होने की जरूरत थी।
It needed to rain today
Did it need to rain today
It did not rain today
उसे लिखने की जरूरत थी।
He needed to write
Did he need to write
He did not need to write
मुझे मेरे दोस्तों से मिलने की जरूरत थी।
I needed to meet my friends
Did i need to meet my friends
I did not need to my friends
उसे कार सुधरवाने की जरूरत थी।
He needed to repair car
Did he need to repair car
He did not repair car
उसे आने की जरूरत थी।
He needed to come
Did he need to come
He did not need to come
Future tense में need to ka use

Future tense में  need to का प्रयोग 

Future tenes में एक ही rule हैं। 

Smiple
All subject+will+need to
Future tense me interrogative sentence में will पहले आता है।
Will+subject+need to+object
Negative में subject+will not+need to+object
उदाहरण (exmple) 
Future tense Smiple में need to ka use
तुम्हें घर जाने की जरूरत होगी।
You will need to go to home.
Future tense Interrogative में need to ka use
क्या तुम्हें घर जाने की जरूरत होगी।
Will you need to go to home
Future tense Negative में need to ka use 
You will not need to go to home.
कुछ और sentence
हमें मिलने की जरूर होगी।
We will need to meet
Will we need to meet
We will not need to meet
तुम्हें इंतजार करने की जरूरत होगी।
You will need to wait
Will you need to wait
You will not need to wait.
तो दोस्तों इस लेख में हमने जाना need to का प्रयोग किस तरह होता है अगर इस लेख से सम्बन्धित आपको कोई विचार या सवाल हैं तो  नीचे comment कर जरूर बताएं।

9/11/2019

9/11/2019

ब्रिटिश संविधान की विशेषताएं

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आप सभी का https://www.kailasheducation.com में, आज के इस लेख में हम ब्रिटेन जिसे इंग्लैड के नाम से भी जाना जाता है के संविधान कि परिभाषा तथा बिशेषताएं जानेंगे।

ब्रिटिश संविधान का अर्थ  

ब्रिटिश संविधान दुनिया का एक मात्र ऐसा संविधान है, जिसका निर्माण न तो किसी योजनानुसार हुआ है और न ही इसे कभी लेखबध्द किया गया है। ब्रिटिश संविधान एक लम्बे समय के ऐतिहासिक विकास का परिणाम है। ब्रिटिश संविधान वास्तव में एक विकासशील संविधान है। समय तथा परिस्थितियों ने इस  मे बहुत सी नई परम्पराएं डाल दी है।

ब्रिटिश संविधान की परिभाषा

मुनरो के अनुसार= "" यह बुध्दिमत्ता व संयोग के मिलन से उत्पन्न बालक है जिसका मार्गदर्शन कभी आकस्मिक घटनाओं और कभी उच्च कोटी की योजनाओं ने किया है। यह एक नदी की भाँती है जिसका तलपृष्ठ मानों किसी के पैर से इधर-उधर से निकलता है और कभी-कभी पत्तों के झुरमुट मे भी खो जाता है।
जार्ज बर्नार्ड के अनुसार= ब्रिटेन मे संविधान नही क्योंकि यह कहीं भी लिखा हुआ नही है और न ही इसमें कोई संशोधन किया जा सकता है क्योंकि यह संविधान कही भी लेखध्द ही नही है।
ब्रिटिश संविधान का अर्थ और परिभाषों को जाने के बाद हम यह कह सकते है कि ब्रिटिश संविधान ब्रिटेन की प्रथाओं और परम्पराओं का एक सम्मलित रूप है जो लिखित नही है।
तो चलिए अब ब्रिटिश संविधान के इस संक्षिप्त परिचय के बाद अब हम ब्रिटिश संविधान की विशेषताओं के बारें मे जानते है।
ब्रिटिश संविधान

ब्रिटिश संविधान की विशेषताएं

1. राजतंत्र, कुलीनतंत्र, तथा प्रजातंत्र का मिश्रण
जी हाॅ दोस्तो ब्रेटेन का संविधान इन तीनों का मिश्रित संविधान है। ब्रिटेन मे एक राजा भी होता है जिसे क्राॅउन के नाम से जाना जाता है लेकिन वह भारत के राष्ट्रपति के समान नाममात्र का कार्यपालक होता है। लार्ड सभा कुलीनतंत्र और लोकसभा प्रजातंत्र का प्रतिनिधित्व करती है।
2. प्रचीन संविधान
ब्रिटिश संविधान की एक विशेषता यह है कि यह विश्व के सबसे प्रचीन संविधानों मे से एक है। ब्रिटेन में ही सर्वप्रथम संवैधानिक शासन आरंभ हुआ था।
3. विकसित संविधान
ब्रिटिश संविधान विकास का परिणाम है। इसे निर्मित करने के लिए सोवियत संघ(रूस) अमेरिकि, फ्रांस, भारत आदि देशो की तरह संविधान सभा का गठन नही किया गया था। न ही इस संविधान कि कोई घोषणा की गई थी यह तो अंग्रेजी समाज के साथ ही विकसित हुआ है।
4. लचीलापन
ब्रिटिश संविधान अपने लचीलेपन से विश्व विख्याक्त है। ब्रिटिश के संविधान मे आसानी है संशोधन किया जा सकता है इस में संशोधन करने की प्रकिया सामान्य कानूनो की तरह ही है।
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5. संसद की सर्वोच्चता
ब्रिटेश संसद सर्वोच्च है उसे ब्रिटेन मे कानून बनाने की असीम शक्ति है। कानून की दृष्टि से ब्रिटेन की संसद को टक्कर देन वाली विश्व में कोई भी संसद नही है। एक विध्दावन के शब्दों मे",  ब्रिटिश संसद स्त्री को पुरूष और पुरूष को स्त्री बनाने के अतरिक्त सब कुछ कर सकती है। ब्रिटिश संसद को संविधान मे संशोधन करने की भी असीमित शक्ति प्राप्त है।
6. विधि का शासन
ब्रिटेन मे विधि का शासन है वहा कानून से ऊपर कोई नही सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता है ब्रिटेन के हर नागरिक पर एक सा कानून लागू है।
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7. अभिसमयों का महत्व
दुनिया के लगभग सभी संविधानों मे कुछ न कुछ रीति-रिवाज परम्पराएं, परिपाटियाँ व अभिसमयों का अंश होता है लेकिन ब्रिटिश संविधान मे इनकी मुख्य भूमिका है। अभिसमयों के कारण ही ब्रिटिश संविधान का स्वारूप अलिखित है। फ्रीमैन के अनुसार= हमारे पास राजनीतिक नैतिकता की पूरी व्यवस्था है। जो परिनियमों या सामान्य विधियों के किसी पृष्ठ पर नही पाई जाएगी परन्तु व्यवहार मे मे घोषणा-पत्र या पिटीशन ऑफ राइट्स मे शामिल किसी भी सिध्दांत से कम पवित्र नही है।
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8. पितृगत सिध्दांत
ब्रिटिश संविधान प्रजातंत्र के साथ-साथ राजतंत्र पैतृक सिध्दान्त पर आधारित है। यह पैतृक व आनुवांशिक सिध्दांत का समर्थक है। अतः लार्ड सभा अधिकांश सदस्य आनुवांशिक पीयर है। इसका मुख्य कारण है-अंग्रेजों की रूढ़िवादिता और अपनी प्रचानी संस्थाओं  व मान्यताओं के प्रति अगाध श्रध्दा व निष्ठा। यह एक ही संविधान के तहत अनुदार व प्रगतिशील दृष्टिकोण का सम्मिलन अद्भुत है।
9. प्रधानमंत्री
ब्रिटेन मे शासन का मुख्य कार्यपालक व वास्तविक स्वामी प्रधानमंत्री ही होता है।
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10. अलिखित संविधान
ब्रिटिश संविधान अलिखित संविधान है यह संविधान अमेरिका, फ्रांस, चीन, भारत आदि देशो की तरह लेखद्व नही है।
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11. क्राउन
ब्रिटेन में एक संस्थागत राजा विद्यमान है। जो एक सत्ताधारी सरकार का प्रतिक है।
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12. निष्पक्ष अध्यक्ष 
ब्रिटेन में निर्दलीय तथा निष्पक्ष स्पीकर की परम्परा है। यह हाउस  ऑफ कामन्स का अध्यक्ष चुने जाने पर अपने दल से विच्छेद कर लेता है।
13. मंत्रीमंडलात्मक शासन
ब्रिटेन मे मंत्रीमण्डलात्क शासन है यहा मंत्रीमंडल शासन की धुरी है।
14. एकत्मक शासन
ब्रिटेन में एकात्मक शासन है। यहाँ पर पूरे देश का शासन लंदन से चलता है। स्थानीय सरकारें नही है तथा प्रांतो की अपनी पृथक सरकार और शासन भी नही है।
दोस्तो इस लेख मे हमने जानी ब्रिटिश संविधान की मुख्य विशेषताएं अगर आप का ब्रिटिश संविधान के बारें मे कोई सवाल या प्रशन है तो comment कर जरूर बताए।
9/11/2019

चीन के संविधान की विशेषताएं

चीन

चीनी संविधान की व्यवस्था विश्व में अपने ढंग की अद्वितीय व्यवस्था है। यूनान, रोम, बेबीलोनिया, मिस्त्र, व भारत के इतिहास के भांति चीन का इतिहास भी काफी पुराना रहा है। लगभग 7 हजार वर्षो के इतिहास में चीन में अनके राजवंशों ने यहाँ राज किया है। इस लेख में हम चीन के संविधान की विशेषताएं जानेगे जिससे चीन के संविधान की इन विशेषताओं को जानने के बाद आपको जनवादी चीन की शासन व्यवस्था को समझने में काफी मदद मिलेगी।
चीन का संविधान सन् 1982
चीन के संविधान में 138 अनुच्छेद और चार अध्याय है। चीन का संविधान एक लिखित संविधान है जिसे 4 दिसम्बर 1982 को चीन की व्यवस्थापिका द्वारा स्वीकृत किया गया था। चीन में गणराज्य की व्यवस्था की गई इस प्रकार जनवादी चीन की सम्पूर्ण सत्ता जनता में ही निहित है। चीन के संविधान के तृतीय अनुच्छेद मे कहा गया है, "कि जनवादी चीन के सभी शासकीय अंग लोकतान्त्रिक केन्द्रवाद के सिध्दांत को लागू करेंगे। लोकतांत्रिक केन्द्रवाद उस व्यवस्था को कहते हैं जिसमें दल में विचार-विमर्श से पहले लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाई जाती है।
चीन का संविधान

चीन के संविधान की विशेषताएं

1. शक्ति जनता में निहित
गणराज्य की सारी शक्ति जनता मे निहित है और उसका प्रयोग वह राष्ट्रीय जन-कांग्रेस और स्थानीय जन-कांग्रेसों के माध्यम से करती है। ये और राज्य के अन्य अंग लोकतन्त्रीय केन्द्रीय शासन के सिध्दांत को व्यवहार में लाते है।
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2. संक्षिप्त संविधान
जनवादी चीन का संविधान विश्व मे सबसे छोटा संविधान तो नही है लेकिन फिर भी यह अन्य देशो की में एक संक्षिप्त संविधान है।
3. लोकतांत्रिक केन्द्रीकरण
चीन के संविधान के तीसरे अनुच्छेद के अनुसार, " जनवादी चीन के सभी शासकीय अंग लोकतान्त्रिक केन्द्रवाद के सिध्दांत को लागू करेंगे।
4. गणतंत्र
चीन के जनवादी गणतन्त्र में सम्पूर्ण सत्ता जनता मे निहित है। चीन में सम्प्रभुता का वास किसी वंशानुगत शासक या किसी वर्ग विशेष में न होकर सम्पूर्ण जनता मे निहित है। जिसका प्रयोग जनता अपने प्रतिनिधियों के सहयोग से करती है।
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5. चीन का संविधान कठोर लेकिन व्यवहार में लचीला
चीन का संविधान सैद्धान्तिक दृष्टि से कठोर है। संविधान मे संशोधन राष्ट्रीय जनवादी कांग्रेस द्वारा किया जाता है जो कि सामान्य कानूनों का निर्माण करती है परन्तु सामान्य विधि निर्माण व संविधान मे संशोधन की पद्धति भिन्न-भिन्न है। राष्ट्रीय जनवादी कांग्रेस सामान्य कानूनों का निर्माण साधारण बहुमत द्वारा करती है। जबकि संविधान में संशोधन की प्रक्रिया का प्रावधान अनुच्छेद 64 मे उल्लेखित है जिसके अनुसार "" संविधान मे संशोधन का प्रस्ताव राष्ट्रीय जनवादी कांग्रेस 1/5 सदस्यों द्वारा प्रस्तावित किये जाना चाहिए जो राष्ट्रीय कांग्रेस के कुल सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पारित होना चाहिए। व्यवहार में राष्ट्रीय जनवादी कांग्रेस अकेले ही संविधान में संशोधन कर सकती है। और "एक दलीय व्यवस्था" होने के कारण 2/3 बहुमत का समर्थन प्राप्त करना काफी आसान है।
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6. श्रम का महत्व
चीन के संविधान में श्रम को पवित्र स्थान दिया गया है। संविधान में यह निर्धारित किया गया है कि श्रम प्रत्येक समर्थक नागरिक के लिए सम्मान की वस्तु है और वह इस बात की गारंटी देता है कि आर्थिक विकास के द्वारा धीरे-धीरे लोगों को अधिक रोजगार दिया जाएगा, काम की दशाओं में सुधार किया जायेगा तथा मजदूरी बढ़ाई जाएगी जिससे सब काम करने के अधिकार का लाभ उठा सकें।
7. मूलभूत अधिकार और कर्त्तव्य का वर्णन 
चीनी संविधान में राजनैतिक और नागरिक अधिकारों को प्राथमिकता दी गई है। काम करने, विश्राम करने और अवकाश पाने तथा वृध्दावस्था और बीमारी या असमर्थता की अवस्था में आर्थिक सहायता प्राप्त करने के अधिकार उसमें हैं तो किन्तु उन्हे प्रमुख स्थान नहीं दिया गया है। संविधान में निर्धारित नागरिकों के कर्त्तव्य न्यूनाधिक हैं। सैनिक सेवा करना और अपने देश की रक्षा करना, संविधान का पालन करना, सार्वजनिक सम्पत्ति का आदर करना तथा उसकी सुरक्षा करना, काम के समय अनुशासन रखना, शान्ति और व्यवस्था रखना चीन के नागरिको के कर्त्तव्य है।
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8. लिखित तथा निर्मित संविधान
चीन का संविधान लिखित संविधानों की श्रेणी मे आता है। इस संविधान के कुल अध्यायों मे चीनी गणराज्य के विभिन्न अंगो अर्थात व्यवस्थापिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की शक्तियों का विस्तृत विवरण है।
9. बहुराष्ट्रीय राज्य 
एकात्मक शासन होते हुए भी चीन मे यह तथ्य स्वीकार किया गया है कि उनका समाज एक बहुराष्ट्रीय राज्य है। वहा लगभग 60 जातियाँ है, जिनके रीति-रिवाज व संस्कृति को सुरक्षित रखने का आश्वासन दिया गया है। चीन में विभिन्न जाति के लोगों को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक कहा गया है। चीन के संविधान की प्रस्तावना में भी लिखा है कि "चीन का जन गणतंत्र एक एकात्मक बहु-राष्ट्रीय राज्य है।
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10. व्यक्तिगत स्वतन्त्रताए
चीनी संविधान द्वारा नागरिकों को  भाषण, अभिव्यक्ति व्यक्त करने करने की, सभा प्रदर्शन स्वतंत्रता, हड़ताल का अधिकार और धर्मिक स्वतंत्रता आदि दी गयी है।
11. राजनैतिक शरण 
चीन के जनवादी गणराज्य में प्रत्येक ऐसे विदेशी राष्ट्रीयजन को शरण पाने का अधिकार है जिसे उचित कार्य समर्थन करने, शान्ति आन्दोलन में भाग लेने अथवा वैज्ञानिक कार्य करने से रोका जाए। इसका अर्थ है कि चीन भी रूस की भाँती प्रख्यात क्रांतिकारियों का शरण-स्थल है।
12. साम्यवादी दल
जनवादी चीन का साम्यवादी दल, वहाँ के तीनों प्रमुख केन्द्र, राज्य सरकार, तथा सेना मे एक लेकिन इन सबसे ज्यादा शक्तिशाली है। जनवादी चीन का साम्यवादी दल दुनिया का सबसे विशाल साम्यवादी दल है। इस समय इसकी संख्या 9 करोंड़ है।
13. संक्रमण-काल के लिए निर्मित शासन विधान
यह संक्रमण-काल के लिए निर्मित शासन-विधान है। इसलिए इसकी कुछ धाराओं का स्वरूप कार्यक्रम जैसी और इसके सामान्य सिध्दांतों का स्वरूप राज्य के उद्देश्य-निर्दशक तत्वो जैसा है।
14. एकात्मक शासन
चीन में प्रारम्भ से ही एकात्मक शासन प्रणाली विद्यमान रही है। चीन मे सम्पूर्ण शासन व्यवस्था का संचालन केन्द्र से ही होता है।
15. राष्ट्रपति के पद की पुनर्स्थापना
सन् 156 और 1975 के चीनी संविधान मे राष्ट्रपति के पद की व्यवस्था थी लेकिन सन् 1978 के संविधान मे राष्ट्रपति का पद समाप्त कर दिया गया है। वर्तमान चीनी संविधान 1982 में राष्ट्रपति के पद की पुन: स्थापना की गयी है।
दोस्तों उम्मीद करता हूं मैंने जो आपको चीन के संविधान की विशेषताएं बताई है उन्हें पढ़कर आपको चीन की शासन व्यवस्था को समझने मैं काफी मदद मिली होगी। चीनी के संविधान या विशेषताओं से सम्बन्धित आपका किसी भी प्रकार का कोई विचार या सवाल है तो नीचे comment कर जरूर बताए।
9/11/2019

नेपाल के संविधान की विशेषताएं

नेपाल

आधुनिक नेपाल की स्थापना 1768 में गोरखा सम्राट पृथ्वी नारायण शाह ने की थी। उन्होनें 1768 में काठमाण्डू घाटी के तीन मल्ल राजाओं को पारिजत कर शाह राजवंश तथा आधुनिक नेपाल की नींव रखी।
नेपाल संविधान

नेपाल का संविधान

ठंडी जलवायु वाले देश नेपाल में कई सालों से शनै:शनै: राजनीतिक आक्रोश पनप रहा था। बरसों के राजनैतिक उथल-पुथल और हिंसक संघर्षों के बाद 20 सितम्बर को नेपाल का नया संविधान लागू हुआ। जिसने नेपाल के अंतरिम संविधान 2007 की जगह ली है। नेपाल का 2015 का प्रस्तावित संविधान अब तक का नेपाल का बड़ा संविधान है। नेपाल के वर्तमान संविधान मे 296 अनुच्छेद तथा 7 अनुसूचियाँ हैं, नेपाल के संविधान को 37 भागों में विभाजित किया गया है। इस संविधान के लागू होते ही दुनिया का एकमात्र " हिन्दू राष्ट्र " धर्मनिरपेक्ष गणराज्य मे तब्दील हो गया।
नेपाल के संविधान की मुख्य विशेषताएं

नेपाल के संविधान की विशेषताएं

1. जनता का संविधान
नेपाल की संप्रभुता नेपाल की जनता में निहित है। नेपाल के संविधान में कहा गया है कि " हम, नेपाल वासी नेपाल की स्वतंत्रता, सार्वभौमिकता, भौगोलिक निष्ठा, राष्ट्रीय एकता, स्वतंत्रता और गरिमा को बनाए रखने उन्हें सार्वभौमिक शक्ति और स्वायत्तता और स्वशासन का अधिकार देते है।
2. पंथ निरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य
नेपाल का वर्तमान संविधान एक पंथनिरपेक्ष संविधान है अर्थात नेपाल का कोई राज धर्म नही है। नेपाल की सारी सत्ताओं का अन्तिम स्त्रोत नेपाल की जनता है अर्थात नेपाल में लोक सम्प्रभुता के सिध्दांत को लागू किया गया है।
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3. मध्यम आकार
नेपाल का संविधान मध्यम आकार का है वह ना तो ज्यादा बड़ा है और ना सी ज्यादा छोटा है।
4. नेपाल का संविधान एक मौलिक कानून
नेपाल के संविधान की प्रस्तावना के अनुसार नेपाल मे संविधान मौलिक कानून है अर्थात नेपाल का संविधान ही सर्वोच्च है तथा व्यवस्थापिका द्वारा बनायें गयें सभी कानून तथा कार्यपालिका द्वारा जारी किये गए सभी आदेश इस संविधान के अनुसार होंगे।
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5. एकल नागरिकता
नेपाल के संविधान में भारत के संविधान की तरह ही एकल नागरिकता की व्यवस्था की गई है। संविधान मे कहा गया है " कोई भी नेपाली नागरिकता प्राप्त करने के अधिकार से वंचित नही होगा। नेपाली महिलाओं को विदेशी पुरूष से शादी करने पर अपने बच्चों को नेपाली नागरिकता देने का भी अधिकार प्रदान किया गया है।
6. मौलिक अधिकारों का वर्णन 
नेपाल के संविधान मे नागरिकों को मौलिक अधिकार भी दिये गये है। जिसके अंतर्गत आर्थिक सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों सहित मौलिक अधिकार की एक लम्बी सूची तैयार की गयी है। महिलाओं, दलितों, स्वदेशी लोगों और अल्पसंख्याकों के अधिकार भी शामिल है।
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7. संसदीय प्रणाली
नेपाल के नये संविधान के अनुसार नेपाल में भारत की तरह संसदीय प्रणाली की स्थापना की गयी है, जिसमें राष्ट्रपति नाममात्र का शासक होगा तथा वास्तविक कार्यपालिका शक्तियाँ प्रधानमंत्री व मंत्रिपरिषद मे निहित होगी। मंत्रिपरिषद् सामूहिक रूप से व्यवस्थापिका के निम्म सदन प्रतिनिधि सभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होगी। इसके साथ ही मंत्रिपरिषद् के सदस्य व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री के प्रति उत्तरदायी होगे।
8. विकेन्द्रीकरण
नेपाल में शक्ति को तीन भागों में विकेन्द्रीकृत किया गया है। केंन्द्र मे संघीय सरकार, प्रांतों मे प्रांतीय सरकार और जिला और ग्राम स्तर पर भी शासन व्यवस्था है। संविधान में प्रत्येक स्तर पर शक्तियों का प्रयोग किया जाएगा।
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9. नीति निदेशक सिध्दांत
नेपाल के संविधान मे नीति निदेशक सिध्दांतों का वर्णन भी किया गया है। ये निदेशक तत्व राज्य की नीतियों के लिए मार्गदर्शक सिध्दान्त की भाँति है, जिन्हें न्यायालय द्वारा लागू नही किया जा सकता। इसका तात्पर्य यह है कि यदि कोई सरकार इन निर्दशों का पालन नही करती तो न्यायालय उसे ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।
10. संविधान में संशोधन
अनुच्छेद 274 के तहत नेपाल के संविधान मे संशोधन का प्रावधान है। संशोधन प्रस्ताव किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है। प्रस्तुत विधेयक दोनों सदनों में प्रस्तुति करने के लिए 30 दिनों के भीतर सामान्य जनता के अवलोकन के लिए प्रकाशित किए जातें है। प्रान्तों से संबंधित विधेयकों संबंधित प्रांतीय विधानसभा के पास सहमति के लिए भेजा जाता है। उन्हें 30 दिनों अंदर विधेयक संघीय विधायिका को वापस भेजना होता है। प्रांतीय विधानसभा विधेयक पर सहमति या असहमति व्यक्त कर सकती है। यदि प्रांतीय विधानसभा समय सीमा के भीतर संघीय विधायिका को सूचित करती है कि बहुमत द्वारा बिल को अस्वीकार कर दिया गया है, तो बिल खारिज कर दिया जाएगा। यदि समय के भीतर बहुमत प्रांतीय विधानसभाएं बिल की अस्वीकृति के संघीय संसद को सूचित करती है, तो ऐसा बिल शून्य हो जाएगा। अनुमोदित विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति को पंद्रह दिनो के भीतर अपनी स्वीकृति देना होगी। जब राष्ट्रपति की स्वीकृत मिल जाती है तो संविधान संशोधन की प्रक्रिया पूर्ण हो जायी है। यह भी पढ़े; अफगानिस्तान के संविधान की विशेषताएं
11. लिखित संविधान
नेपाल का संविधान लिखित संविधानों की श्रेणी मे आता है।
तो दोस्तो यह थी नेपाल के संविधान की मुख्य विशेषताएं अगर आप नेपाल या नेपाल के संविधान से सम्बन्धित किसी भी प्रकार का कोई विचार है तो नीचे comment कर जरूर बताए। 
9/11/2019

अफगानिस्तान के संविधान की विशेषताएं

अफगानिस्तान

अफगानिस्तान को 1747 में अहमद शाह दुर्रानी द्वारा एक राज्य बनाया गया था। अफगानिस्तान कई सम्राटों आक्रमणकारियों तथा विजेताओं की कर्मभूमि रहा है। इन आक्रमणकारियों में सिकन्दर, फारसी शासक दारा प्रथम, तुर्क, मुगल शासक बाबर, मुहम्मद गोरी , नादिरशाह आदि प्रमुख है। अफगानिस्तान या अफगान इस्लामिक गणराज्य जंबूद्वीप एशिया का एक छोटा सा देश है। सन् 2008 की जनगणना के हिसाब से इसकी जनसंख्या 32,738, 376 है। अफगानिस्तान आर्यो की पुरातन भूमि है। अफगानिस्तान में 1800 साल पहले आर्यों का आगमन हुआ। 700 साल पहले इसकी उत्तरी क्षेत्र में गांधार महाजनपद था जिसका उल्लेख भारतीय महाभारत तथा अन्य ग्रंथों मे वर्णन मिलता है। महाभारत की कौरवों की माता गान्धारी और उनके मामा शकुनी गांधार के ही थे।
अफगानिस्तान
अफगानिस्तान के संक्षिप्त परिचय के साथ अब हम आफगानिस्तान के संविधान के संक्षिप्त परिचय को जानने के बाद अफगानिस्तान के संविधान की विशेषताएं जानेंगे।

अफगानिस्तान का संविधान

अफगानिस्तान एक इस्लामिक गणराज्य है जिसे अफगान के नाम से भी जाना जाता है। अफगानिस्तान का संविधान राज्य का सर्वोच्च कानून है। अफगानिस्तान के संविधान मे प्रस्तावना के अतिरिक्त 162 अनुच्छेद हैं तथा इन अनुच्छेदों को विषयों के अनुसार 12 भागों/ अध्यायों मे विभक्त किया गया है। अफगानिस्तान के संविधान का आधिकारिक पाठ दारी/पश्तो भाषा में है। इसका अर्थ यह है कि यदि इसके अंग्रेजी संस्करण अथवा दारी संस्करण मे कोई अन्तर पाया जाता है तो दारी संस्करण ही आधिकारिक तौर पर मान्य होगा। अफगानिस्तान का संविधान मे इस्लाम के पवित्र कानूनेका वर्णन करता है और अफगानिस्तान के विशाल देश मे सबसे अधिक प्रचलित विश्वास इस्लाम है। दूसरे धर्म के अनुयाय " कानून की सीमाओं के भीतर ही अपने विश्वास का पालन करने और अपने धार्मिक संस्कार करने के लिए स्वतंत्र है।
अफगानिस्तान का संविधान

अफगानिस्तान के संविधान की विशेषताएं

1. लिखित व निर्मित संविधान
अफगानिस्तान का संविधान एक लिखित संविधान है। इस संविधान में 162 लेख है जिन पर अधिकारिक तौर पर 26 जनवरी 2004 को हामिद करजई द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे।
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2. नागरिकों के मौलिक अधिकार व कर्त्तव्य 
अफगानिस्तान के संविधान मे अनुच्छेद 22 से 59 तक नागरिकों के मौलिक अधिकारों तथा कर्त्तव्यों का वर्णन किया गया है। संवैधानिक दृष्टि से अफगानिस्तान के नागरिकों को प्राप्त मौलिक अधिकार भारत के मौलिक अधिकारों से भी अधिक विस्तृत है। अफगानिस्तान के नागरिकों के मौलिक मुख्य अधिकार इस प्रकार है---
1. समानता का अधिकार
2. जीवन तथा व्यक्तिगत स्वतन्त्रता का अधिकार
3. शिक्षा का अधिकार
4. प्राकृतिक न्याय का अधिकार
5. राजनीतिक पद पाने का अधिकार
6. सम्पति का अधिकार आदि।
इन मौलिक अधिकारों के साथ ही अफगानिस्तान मे नागरिकों के बाध्यकारी मौलिक कर्त्तव्यों का वर्णन भी अफगानिस्तान के संविधान मे किया गया है।
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3. आस्थिर संविधान
अफगानिस्तान का संविधान आस्थिर है। यहाँ पर राष्ट्रपति व मंत्रिमण्डल को संचालित व नियंत्रित करने वाली शक्तियां बदलती रहती है।
4. इस्लामिक गणराज्य
अफगानिस्तान एक इस्लामिक राष्ट्र है यहाँ का राज धर्म इस्लाम है अफगानिस्तान मे इस्लाम को सर्वोच्च कानून माना जाता है।
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5. एकात्मक शासन व्यवस्था
अफगानिस्तान मे एकात्मक शासन व्यवस्था लागू है। अफगानिस्तान मे शक्तियों का निवास केन्द्रीय सरकार मे रहता है। सम्पूर्ण राष्ट्र को राष्ट्रपति व मंत्रिमंडल संचालित व नियंत्रित करते है।
6. त्रिस्तरीय न्याय प्रणाली
 अफगानिस्तान मे त्रिस्तरीय न्याय प्रणाली है। यहाँ उच्च न्यायालय, अपील न्यायालय और स्थानीय जिला न्यायालय की भी व्यवस्था है। न्यायलय के न्यायधीश राष्ट्रपति द्वारा 10 बर्ष के लिए नियुक्त किए जाते है।
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7. आर्थिक पिछडापन का उल्लेख
कृषि उत्पादन अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। अफगानिस्तान एक पिछड़ा हुआ देश है। राष्ट्र का " "लक्ष्य अफगान अर्थव्यवस्था का विकास करना है।
 8. राज्य सरकारें
अफगानिस्तान प्रशासनिक रूप से 34 प्रांतो में विभक्त है। प्रत्येक प्रांत में एक यू. एस. काउंटी होता है जो राज्यपाल के अधीन होता है। देश को 400 प्रांतीय जिलों मे विभाजित किया गया है।
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9. स्थानीय सरकारें
संविधान के अनुच्छेद 140 के तहत राष्ट्रपति शहरों के महापौरों को चार साल की अवधि के लिए चुने जाने की व्यवस्था है। कानूनी प्रावधानों के अनुसार यह निर्वाचन नि:शुल्क व प्रत्यक्ष रूप से आयोजित किये जाने चाहिए।
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10. कठोर संविधान
अफगानिस्तान का संविधान कठोर संविधानों की श्रेणी मे आता है क्योंकि इसे संशोधित करने की प्रक्रिया कानून बनाने से  कठीन है। संविधान के 149 और 150 अनुच्छेदों मे संविधान संशोधन की प्रक्रिया का वर्णन किया गया है।
तो दोस्तो यह थी अफगानिस्तान के संविधान की मुख्य विशेषताएं। अगर आप का अफगानिस्तान से सम्बन्धित कोई विचार है तो नीचे comment कर जरूर बताए।

9/10/2019

9/10/2019

जजमानी व्यवस्था का अर्थ, परिभाषा और विशेषताएं

जजमानी व्यवस्था 

जजमानी प्रथा के अन्तर्गत प्रत्येक जाति का एक निश्चित परम्परागत व्यवसाय होता है। इस व्यवस्था के अंर्तगत सभी जातियाँ  परस्पर एक-दूसरे की सेवा करती है ब्राहमण विवाह, उत्सव, त्यौहारो के समय दूसरी जातियों के यहां पूजा-पाठ करते है। नाई बाल काटने का काम करता है, धोबी कपड़े धोने का काम करता है, चमार जूते बनाने, जुलाहा कपड़े बनाने का काम करता है इसी प्रकार सभी जातियों एक-दूसरे के लिए सेवाएं प्रदान करती है। इसके बदले में भुगतान के रूप मे कुछ वस्तुऐ या रूपये दिये जाते है। इसी व्यवस्था को हम जजमानी प्रथा या जजमानी व्यवस्था के नाम से जानते है।
जजमानी प्रथा (व्यवस्था) का संक्षिप्त विवरण के बाद अब हम जजमानी (प्रथा) व्यवस्था का अर्थ, जजमानी व्यवस्था की परिभाषा और जजमानी व्यवस्था की विशेषताएं जानेंगे।
जजमानी व्यवस्था का अर्थ

जजमानी व्यवस्था का अर्थ 

जजमानी व्यवस्था परम्परागत व्यवस्था पर निर्भर है। इस व्यवस्था में प्रत्येक जाति का एक निश्चित व्यवसाय तय हो जाता है जो परम्परागत होता है तथा यह पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तान्तरित होता रहता है।

जजमानी व्यवस्था की परिभाषा 

आस्कर लेविस के अनुसार; इस प्रथा के अन्तर्गत एक गाँव में रहने वाले प्रत्येक जाति-समूह से यह अपेक्षा की जाती है कि वह अन्य जातियों के परिवारों को कुछ प्रमाणित सेवायें प्रदान करें।
जजमानी व्यवस्था का अर्थ और परिभाषा को जानें के बाद अब हम जजमानी व्यवस्था की विशेषताएं जानेंगे----
जजमानी व्यवस्था की विशेषताएं

जजमानी व्यवस्था की विशेषताएं

1. सामुदायिक संगठन में सहायक 
जजमानी व्यवस्था के अन्तर्गत विभिन्न ऊँची-नीची जातियाँ को पारस्परिक रूप से एक-दूसरे की सेवाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। इस पारस्परिक आश्रितता तथा निर्भरता के कारण ग्रामीण समाज का संगठन सुदृढ़ बना रहता है। इस प्रकार ग्रामीण समुदाय के लोगों में सामूहिक इच्छा और संगठन की भावना विकसित होती है।
2. मानसिक सुरक्षा 
जजमानी प्रथा के कारण परिजन के जीवन निर्वाह का साधन पूर्व निश्चित होता है। व्यक्ति को यह सोचना नही पड़ता है कि उसको क्या व्यवसाय करना है।
3. शान्ति व सन्तोष की भावना 
यह व्यवस्था ग्रामीण समुदाय के सदस्यों को सन्तोष व शांति प्रदान करती है। परजनों के व्यवसाय पैतृक तथा परम्परागत होने के कारण उन्हें नये धंधे को ढूंढना नहीं पड़ता है।
4. स्थायी सम्बन्ध
इस व्यवस्था का प्रथम लक्षण यह है कि इसमें जजमान और परजन के मध्य स्थायी सम्बन्ध पाये जाते हैं।
5. पैतृक सम्बन्ध
जजमान और परजन के मध्य पाये जाने वाले सम्बन्धों का स्वरूप पैतृक होता है। जजमानी अधिकार सम्पत्ति के अधिकारों के समान ही होते ।
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6. घनिष्ठ सम्बन्ध
जजमानी व्यवस्था मे परजन और जजमान के सम्बन्धों मे घनिष्ठा होती है। वे एक-दूसरे के कार्यों को लगन से करते है।
दोस्तो इस लेख मे हमने जजमानी व्यवस्था के बारें में जाना अगर आपका जजमानी व्यवस्था या इस लेख से सम्बन्धित कोई सवाल या विचार है तो नीचे comment कर जरूर बताए मैं आपके comment कि इंतजार कर रहा हूं। 
9/10/2019

भूटान के संविधान की विशेषताएं

भूटान

प्राकृतिक सुन्दरता से परिपूर्ण भूटान एक छोटा सा देश है। उत्तर मे भूटान की सीमाएं तिब्बत से लगी है तथा दक्षिण में इसकी सीमाएं भारतीय राज्यों असम तथा पश्चिम बंगाल से मिलती है। इसके पूर्व में भारत का अरूणाचल प्रदेश राज्य है तथा पश्चिम मे इसकी भारत के सिक्किम से मिलती है। इस प्रकार भूटान की तीनों सीमाएं भारत से मिलती है। उत्तर मे इसकी सीमाएं चीन-तिब्बत से भी जुड़ी हुई है। भूटान का लगभग 70% हिस्सा वनों से आच्छादित है। देश की ज्यादातर आबादी देश के मध्यवर्ती हिस्सों मे रहती है।
दोस्तो भूटान का संक्षिप्त परिचय के साथ अब हम भूटान के संविधान का संक्षिप्त परिचय और भूटान के संविधान की विशेषताएं जानेंगे।
भूटान

भूटान का संविधान

भूटान सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से तिब्बत से जुड़ा है लेकिन भौगोलिक और राजनीतिक परिस्थितियों के मद्देनजर भारत के करीब है। दुनिया के मानचित्र मे भूटान राज्य की अपनी पृथक पहचान है। राजतंत्र पर अटूट आस्था व पाकृतिक परिस्थियों मे जीवन दर्शन का अनुकरण करने इस राज्य का औपचारिक संविधान अभी शिशु अवस्था में है। वर्ष 2008 में लागू भूटान के नए संविधान में केवल 35 अनुच्छेद व चार अनुसूचितयाँ है। इस संविधान द्वारा भूटान में ब्रिटेन की तर्ज पर निरंकुश जनतंत्र के स्थान पर संवैधानिक राजतंत्र को अपनाया है।
भूटान का संविधान

भूटान के संविधान की विशेषताएं

भूटान के संविधान की मुख्य 9 विशेषताएं इस प्रकार है---

1. लिखित व निर्मित संविधान
2008 से पहले भूटान मे कोई औपचारिक संविधान नही था। राजतंत्र पर जन सामान्य की आस्था थी। विश्व के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के उद्देश्य से राजा ने अपनी इच्छा व्यक्त की कि भूटान राज्य के लिए अब एक औपचारिक संविधान निर्मित किया जाए। भूटान के 2008 के संविधान मे भूटान की सरकार के बुनियादी प्रावधान का उल्लेख किया है।
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2. लोकतांत्रिक संवैधानिक राजतंत्र
भूटान के 2008 के संविधान के अनुच्छेद 1 मे ही कहा गया है कि भूटान एक लोकतांत्रिक संवैधानिक राजतंत्र होगा तथा सम्प्रभु किंगडम है, जिसकी सम्प्रभुता भूटान की जनता मे निहित होगी। ब्रिटेन मे इसी तरह की शासन व्यवस्था है। जिसमें राजा का पद तो है तथा वंश परम्परा से ही शक्तियों का वास्तविक प्रयोग एक सरकार अथवा कार्यपालिका द्वारा किया जाता है।
3. कानून के समक्ष समानता
कानून के समक्ष सभी नागरिकों को समानता है। भूटान मे नस्ल, लिंग, भाषा, धर्म, या किसी अन्य आधार पर किसी के साथ भेदभाव नही किया जाता।
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4. बौध्द धर्म आध्यात्मिक विरासत
भूटान के संविधान के अनुच्छेद 3 के अनुसार बौध्द धर्म भूटान की आध्यात्मिक विरासत है जो शान्ति, अहिंसा, तथा सहिष्णुता की इस आध्यात्मिक विरासत की रक्षा करे। भूटान मे बौध्द धर्म को राज्य का पूरा संरक्षण प्राप्त है। बौध्द धर्म के धार्मिक प्रमुख अर्थात जे. खेनपो की नियुक्ति सम्राट द्वारा की जाती है। बौध्द मठों तथा बौध्द संस्थाओं को राज्य से आर्थिक सहायता पाने का अधिकार है।
 भूटान के संविधान की विशेषताएं
5. संसदीय व्यवस्था
भूटान में राजा राज्य का प्रधान तो होता है लेकिन राज्य की कार्यपालिका शक्ति मंत्रिपरिषद् मे निहित होती है। जिसका अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है।
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6. सामाजिक न्याय
भूटान का संविधान उत्पीड़न भेदभाव और हिंसा से मुक्त समाज निमार्ण करने का प्रयास करता है। कानून के समक्ष मानव अधिकारों और गरिमा की सुरक्षा के आधार पर सामाजिक न्याय कायम रखने की कोशिश करता है।
7. आर्थिक नीति का प्रावधान
भूटान का संविधान राज्य के आर्थिक प्रयासों की घोषणा करता है। राज्य के विभिन्न भागों में रहने वाले व्यक्तियों के बीच की असमानताओं धन के संग्रह को कम करने और सार्वजनिक सुविधाओं के न्यायसंगत वितरण को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक नीतियों को विकसित और निष्पादित करने का प्रयास किया गया है।
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8. स्वतंत्र एकीकृत न्यायपालिका
भूटान में लोकतांत्रिक सुधारों के साथ ही नागरिकों के अधिकारों की रक्षा तथा विधि के शासन को सुरक्षित करने के लिए एक एकीकृत तथा स्वतन्त्र न्यायपालिका की व्यवस्था की गई है। न्यायधीशों को हटाने की प्रक्रिया कठिन है, जिससे वे सरकार के दबाव के बिना अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकते है।
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9. आपातकाल की व्यवस्था
भूटान के संविधान के अनुच्छेद 33 के अन्तर्गत भारत की ही तरह आपातकाल की व्यवस्था की गई है। यदि किसी भी समय भूटान की सम्प्रभुता अखण्डता तथा सुरक्षा को खतरा हो तो प्रधानमंत्री को लिखित सलाह पर सम्राट द्वारा राष्ट्रीय आपात कि घोषणा की जा सकती है।
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दोस्तो इस लेख मे हमने जानी भूटान के संविधान की 9 विशेषताएं अगर आपका इस लेख से सम्बन्धित किसी भी प्रकार का कोई विचार है तो नीचे comment कर जरूर बताए।