11/11/2020

जातिवाद का अर्थ, परिभाषा

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जातिवाद का अर्थ (jaatiwad kya hai)

jaatiwad arth paribhasha in hindi;सामान्य अर्थ मे अपनी जाति के प्रति निष्ठा का भाव ही जातिवाद है। जातिवाद जाति के सदस्यों की वह संकुचित भावना है, जो राष्ट्र तथा समाज के सामान्य हितों की अवहेलना करते हुए अपनी जाति के सदस्यों के हितों को बढ़ावा देती है तथा उन्हे आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करती है।

दुनिया मे प्रायः हर समाज चाहे वह सरल से सरल हो अथवा जटिल से जटिल हो, कमोवेश किन्ही भागों मे बँटा होता है और उसमे कुछ न कुछ संस्तरण पाया जाता है। पहले भारतीय समाज वर्णों मे बँटा था यानि की पहले भारत मे वर्ण व्यवस्था थी। वर्ण व्यवस्था लचीली थी, उसमे एक से दूसरे मे आना-जाना संभव था। धीरे-धीरे यह गमनागमन कम होता गया और वर्णों के जातियों मे रूपान्तरण के साथ यह पूर्णतया अवरूद्ध हो गया। प्राचीन तथा मध्यकाल मे जाति अपने सदस्यों के लिये अन्त:क्रिया के व्यापक क्षेत्र और सामाजिक पहचान प्रदान करती थी।

दूसरे शब्दों मे, जाति वृहद समाज के अंतर्गत अपने आप मे एक समाज थी। व्यक्ति दूसरी जातियों के संपर्क मे रहते हुए भी बहुत कुछ अपनी ही जाति मे जीता था लेकिन वह जाति के प्रति अन्ध भक्ति या अन्ध निष्ठा नही रखता था। इसके विपरीत आधुनिक युग मे विशेष रूप से आजादी के बाद लोकतांत्रिक राजनीति के चलते व्यक्ति जाति को अपने व अपने जाति समूह के हितों की अभिवृद्धि का माध्यम समझने लगा जिससे समाज मे जातिवाद की धारणा मजबूत हुई।

समाज मे लोकतंत्र की स्थापना के साथ सत्ता पर सामंत वर्ग का एकल आधिपत्य समाप्त हो गया। परिणामस्वरूप, समाज मे विभिन्न जातियां अगड़े, पिछड़े और अति पिछड़े जाति समूहों के राजनैतिक दलो के रूप मे संगठित हो सत्ता हथियाने और उसके बल पर अपने व अपने भाइयों के हितों की अभिवृद्धि की दिशा मे अग्रसर हुई है। लिहाजा जाति अब परम्परागत समाज की भाँति, खान-पान, हुक्का पानी, शादी-विवाह के कार्यक्षेत्र की निर्धारक कम, राजनैतिक शक्ति प्राप्त करने और उसके माध्यम से आर्थिक, सामाजिक व शैक्षिक हितों की पूर्ति का माध्यम अधिक बन गई है। अब लोग खान-पान, शादी-विवाह दूसरी जातियों मे कर लेते है, लेकिन राजनैतिक समर्थन आमतौर पर अपनी जाति के लोगों का ही करते है। मोटे अर्थ मे, लोगो का यह व्यवहार ही जातिवाद है। 

दूसरें शब्दों मे,  हम कह सकते है कि जातिवाद जातीय निष्ठा का राजनैतिक व सार्वजनिक जीवन मे रूपान्तरण है। 

जातिवाद की परिभाषा (jaatiwad ki paribhasha)

काका कालेलकर के अनुसार," जातिवाद एक अबाधित अंध और सर्वोच्च समूह भक्ति है जो कि न्याय, ओचित्य, समानता और विश्व बंधुत्व की उपेक्षा करता है।"

के. एम. पणिक्कर के अनुसार," राजनीति की भाषा मे उपजाति के प्रति निष्ठा का भाव ही जातिवाद है। अर्थात् जातिवाद के कारण व्यक्तियों मे उपजातियों के प्रति निष्ठा की भावना होती है। हर उपजाति अपनी ही उपजाति को लाभ पहुंचाना चाहती है चाहे इससे किसी अन्य उपजाति को कितनी ही हानि हो।" 

उपरोक्त जातिवाद की परिभाषाओं से स्पष्ट है कि, जातिवाद एक संकीर्ण भावना या विचार है। इस भावना के चलते लोग केवल अपनी जाति के सदस्यों के हितों के बारे मे सोचते है। इतना ही नही वरन् दूसरी जातियों तथा समाज के व्यापक हितों को आघात पहुँचाकर अपनी जाति के हितों को पूर्ण करने के प्रयास करते है। इससे समाज और राष्ट्र के हितों की केवल अनदेखी ही नही होती वरन् उसकी प्रगति और विकास मे बाधा भी उत्पन्न होती है।

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