11/13/2020

क्षेत्रवाद का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं

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क्षेत्रवाद का अर्थ/क्षेत्रवाद क्या है?

kshetravaad arth paribhasha visheshtaye;क्षेत्रीयता व क्षेत्रवाद क्षेत्रीय हितो की अभिवृद्धि के प्रति आग्रह है। यह ऐसी मानसिकता व आचरण का परिचायक है जिसके चलते व्यक्ति अन्य क्षेत्रों व उनमे रहने वाले व्यक्तियों के हितों की तुलना मे अपने क्षेत्र एवं अपने क्षेत्र मे रहने वाले व्यक्तियों के हितों की अभिवृद्धि को प्राथमिकता देता है। 

क्षेत्रवाद आमतौर पर किसी एक गाँव या मुहल्ले के सीमित क्षेत्र पर आधारित नही होता। वैसे क्षेत्रवादी भावना के विकास के लिये क्षेत्र के विस्तार का कोई निश्चित परिमाप नही होता किंतु इतना अवश्य कहा जा सकता है कि इसका संबंध एक उल्लेखनीय रूप से बड़े अथवा एक तुलनात्मक रूप से बड़े क्षेत्र से होता है जिसका विस्तार कई गांवों व जिलो तक हो सकता है। संभव है कि यह क्षेत्र किसी एक या कुछ प्रान्तों तक फैला हो। आमतौर पर इसके रहवासियों की समान भाषा, खान-पान, रहन-सहन व साझा इतिहास व सझी संस्कृति होती है। उनकी कुछ अपनी समस्यायें भी होती है। क्षेत्रीयता कभी-कभी क्षेत्रीय आधार पर राजनैतिक स्वायत्तता की माँग को लेकर राजनैतिक आन्दोलनों के रूप मे अभिव्यक्त हो सकती है। ऐसे आन्दोलन आमतौर पर पृथक राज्य के गठन या राज्य के भीतर स्वायत्तता की मांग को लेकर हो सकते है जैसे अतीत मे उत्तरप्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों के रहवासियों द्वारा पृथक उत्तरांचल राज्य के गठन की मांग या बिहार के आदिवासी क्षेत्रों के रहवासियों द्वारा झारखंड राज्य अथवा मध्यप्रदेश के छत्तीसगढ आदिवासी क्षेत्र के रहवासियों द्वारा पृथक छत्तीसगढ़ राज्य के गठन की मांग हेतु आंदोलन आदि।

क्षेत्रवाद की परिभाषा 

वेबस्टर शब्दकोश के अनुसार," क्षेत्रवाद मे एक विशिष्ट उपराष्ट्र या अधो-राष्ट्र क्षेत्र के प्रति जागरूकता और भक्ति पायी जाती है, जिसकी विशेषता सामान्य संस्कृति, पृष्ठभूमि या हित है।

बोगार्डस के अनुसार ," कोई भौगोलिक क्षेत्र, जिसके आर्थिक साधन वहां के रहने वाले लोगों के प्रति सामान्य सामुदायिक हितों के विकास के लिए एक भिन्न अर्थव्यवस्था के निर्माण का आधार प्रदान करता हो, उन निवासियों मे एक क्षेत्रीयता की भावना आ जाती है।"

इस तरह क्षेत्रवाद विभिन्न प्रकार के विचार एवं कार्य संबंधी इकाइयों को समन्वित करने की भावना है।

हेडविग हिंट्ज के अनुसार," क्षेत्रवाद एक क्षेत्र-विशेष के व्यक्तियों के विशेष अनुराग तथा पक्षपातपूर्ण धारणाओं से संबद्ध है।"

अरूण चटर्जी के अनुसार," क्षेत्रवाद को बहुपरिणाम सम्बन्धी पृथक् विभागों से निर्मित प्रघटना तथा राष्ट्रीयता मे निहित प्रक्रिया के रूप मे देखा जा सकता है।" 

आर.सी. पाण्डेय के अनुसार," हिन्दी बोलने वाले तथा न बोलने वाले क्षेत्रों मे संघर्ष के अतिरिक्त अन्य घटनाएं जैसे असम मे असमियों तथा बंगालियों मे संघर्ष, महाराष्ट्र मे दक्षिण भारतीयों का विरोध तथा तेलगांना मे आन्ध्रन का विरोध, क्षेत्रवाद की ओर इंगित करती है।"

उपरोक्त क्षेत्रवाद की परिभाषाओं से स्पष्ट है कि, क्षेत्रवाद का तात्पर्य एक क्षेत्र के व्यक्तियों द्वारा स्वयं को दूसरे क्षेत्र के व्यक्तियों से श्रेष्ठ समझना है। साथ ही अपने आर्थिक, राजनैतिक, सामाजिक सांस्कृतिक हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है।

क्षेत्रवाद की विशेषताएं 

क्षेत्रवाद की विशेषताएं इस प्रकार है--

1. क्षेत्रवाद संकीर्ण मानसिकता एवं संकीर्ण आचरण का परिचायक है।

2. क्षेत्रवाद एक प्रकार की भावना या मनोवृत्ति है।

3. इस प्रकार की भावना का संबंध विशिष्ट क्षेत्र से होता है। 

4. यह भावना या मनोवृत्ति उस विशिष्ट क्षेत्र मे निवास करने वाले सभी व्यक्तियों मे सामान्यतया कम या अधिक मात्रा मे पाई जाती है।

5. यह भावना व्यक्तिगत या क्षेत्रीय स्वार्थों और उद्देश्यों से प्रेरित रहती है।

6. क्षेत्रवाद की भावना सामाजिक और सांस्कृतिक समरूपता पर आधारित होती है।

7. क्षेत्रवाद की भावना मानव-व्यवहार और रहन-सहन के स्तर को प्रभावित करती है।

8. सामान्य अवस्था मे क्षेत्रवाद, राष्ट्रवाद के अधीन की अवस्था है, किन्तु कभी-कभी प्रबल क्षेत्रवाद की भावना राष्ट्रीय हितों और आदर्शो पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है।

9. क्षेत्रवाद क्षेत्रीय भाषा को बनाये रखने व उसे बढ़ावा देने पर बल देता है यद्यपि यह राष्ट्र भाषा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के विकास का विरोधी नही है।

10. यह क्षेत्रीय उपसंस्कृति की सुरक्षा एवं संवर्धन पर बल देता है।

11. क्षेत्रवाद क्षेतीय इतिहास को सुरक्षित रखने पर जोर देता है।

12. क्षेत्रवाद क्षेतीय इतिहास-पुरूषों के गौरव व सम्मान को महत्व देता है।

13. क्षेत्रवाद क्षेत्रीय विकास पर जोर देता है।

14. क्षेत्रवाद क्षेत्रीय राजनीति को बढ़ावा देता है।

15. इसमे अन्य क्षेत्रों की तुलना मे अपने क्षेत्र की श्रेष्ठता प्रतिपादित करने की प्रवृत्ति पाई जाती है।

16. क्षेत्रवाद एक सीखा हुआ व्यवहार है। यह सीखा हुआ व्यवहार एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तान्तरित होता रहता है।

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