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7/06/2021

ग्रामीण परिवार का अर्थ, विशेषताएं, कार्य

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ग्रामीण परिवार का अर्थ 

ग्रामीण परिवार से आशय उन परिवारो से है जिनका मुख्य व्यवसाय कृषि होता और जो केवल ग्रामीण संस्कृति मे पाये जाते है। ग्रामीण परिवारों को कृषि परिवार के नाम से भी जाना जाता है। 

डाॅ. मजूमदार के परिवार को परिभाषित करते हुए लिखा है," परिवार उन व्यक्तियों का समूह है जो एक निश्चित छत के नीचे रहते है। मूल तथा रक्त समूहों से संबंधित रहते है तथा स्थान, रूचि व कृतज्ञता की अन्योन्याश्रित के आधार पर संबंध की जागरूकता रखते है।" सार्वभौमिकता, भावनात्मक आधार, सीमित आकार, रचनात्मक प्रभाव तथा सदस्यों का उत्तरदायित्व परिवार की सामान्य विशेषताएं है, किन्तु ग्रामीण परिवार की परिभाषा विद्वानों ने एक अलग ही रूप मे की है। उन्होंने ग्रामीण परिवार की परिभाषा करते हुए कृषि को विशेष महत्व प्रदान किया है। एक विद्वान ने कहा है," ग्रामीण परिवार पति-पत्नी का यौन संबंधों के आधार पर संगठित समूह है, जो गाँव के वातावरण मे निवास करते है और जिनका मुख्य व्यवसाय कृषि करना है तथा इस भाँति उत्पन्न बच्चों तथा गोद लिए बच्चों के पालन-पोषण तथा देखभाल की व्यवस्था करते है।" 

ग्रामीण परिवार की विशेषताएं 

ग्रामीण परिवार की निम्न विशेषताएं है--

1. कृषि मुख्य व्यवसाय 

अधिकांश ग्रामीण परिवार केवल कृषि पर ही निर्भर रहते है उनकी जीविका का मुख्य साधन कृषि ही होता है। इसका मुख्य कारण यह भी है कि गाँव सीमाओं मे शहरों की तरह अनेक प्रकार के उद्योग और विभिन्न प्रकार के व्यवसाय नही होते है। अतः ग्रामीण परिवार किसी न किसी रूप मे कृषि व्यवसाय से ही जुड़ा होता है।

2. संयुक्त परिवार 

ग्रामीण समाज की अनेक सामाजिक विशेषताओं मे संयुक्त परिवार भी है। भारतवर्ष मे ग्रामीण संयुक्त परिवार ही ग्रामीण परिवार के सही अर्थ का बोध कराता है। एक ग्रामीण परिवार मे अनेक पीढ़ियों के सदस्य साथ-साथ रहते है। 

3. अतिथि सत्कार 

ग्रामीण परिवार मे अतिथि को भगवान का स्वरूप माना जाता है और उसके आगमन पर उसकी विशेष सेवा की जाती है। अतिथि यदि सूर्यास्त के समय किसी के घर पहुंचता है तो उसे भोजन किया बैगर नही जाने देते और रात्रि मे उसके विश्राम की व्यवस्था भी की जाती है।

4. सदस्यों की पारस्परिक निर्भरता 

ग्रामीण परिवार का प्रत्येक सदस्य एक दूसरे पर निर्भर है। प्रत्येक परिवार का कार्य मिल-जुलकर और बाँटकर करते है। विचारों व भावनाओं मे भी एकरूपता है। परिवार के सभी सदस्य एकसा सोचते है। वैयक्तिक विचार, स्वार्थ और इच्छा का वहाँ कोई स्थान नही है। परिवार के सभी सदस्यों की प्राथमिकता तथा द्वितीयक आवश्यकताओं की पूर्ति परिवार करता है। इन समस्त कारणों से परिवार के सभी सदस्य एक दूसरे पर पूर्णतया निर्भर रहते है।

5. हम की भावना 

ग्रामीण परिवार के सदस्यों मे आपस मे मिलकर काम करने की भावना पायी जाती है। इस भावना को हम की भावना (we feeling) कहते है। परिवार के सभी सदस्य कृषि कार्य मे हाथ बँटाते है, छोटे-छोटे बच्चे भी खेत पर खाना पहुँचाने का कार्य करते है, जानवरों को पानी पिलाते है तथा अन्य छोटे-मोटे कार्यों मे हाथ बाँटते है।

6. अनुशासन बद्ध परिवार 

अनुशासन ग्रामीण परिवार की एक विशेषता है। परिवार के बड़े-बूढ़ों के आदेशों के अनुसार ही परिवार के सभी व्यक्ति कार्य करते है। परिवार की परम्परा, रीति-रिवाज, धर्म, आदर्श आदि को तोड़ने का कोई साहस नही करता है। सभी के लिए नियम समान होते है। सभी उनका पालन करते है।

7. मुखिया की सत्ता 

ग्रामीण परिवार के मुखिया का उसके सदस्यों के द्वारा अत्यधिक आदर तथा सम्मान होता है। मुखिया को व्यापक अधिकार मिल होते है। सभी क्षेत्रों मे उसका एकाधिकार होता है। ग्रामीण परिवार का मुखिया प्रशासक, पूजारी, अध्यापक एवं पूर्णरूपेण व्यवस्थापक होता है। इस तरह ग्रामीण परिवार अपने मुखिया के द्वारा अपने सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से अपने अधीन रखता है।

8. सामाजिक नियंत्रण 

ग्रामीण परिवार सामाजिक नियंत्रण का प्रमुख आधार है। परिवार के द्वारा ही व्यक्ति को जनरीतियों, प्रथाओं, रूढ़ियों आदि का ज्ञान कराया जाता है। परिवार अपने सदस्यों के व्यवहार का प्रतिमान निर्धारित करता है। साथ ही समाज में उनके व्यवहार ठीक बनाये रखने का दायित्व भी ग्रहण करता है। 

9. सामान्य पूजा तथा धर्म 

ग्रामीण परिवार के समस्त सदस्य एक ही धर्म से संबंधित कर्तव्यों को सम्मिलित रूप से निभाते है।

10. स्त्रियों की दयनीय दशा

ग्रामीण परिवार मे स्त्रियों की दशा जितनी शोचनीय और दयनीय है शायद ही कहीं देखने को मिलती हो। गुलामी का दूसरा नाम ग्रामीण स्त्रियां हो सकती है। इनकी अपनी न कोई इच्छा है और न कोई अधिकार। वे पुरूषों की इच्छाओं की दासी है। अशिक्षित, आर्थिक रूप से पराधीन, परम्परात्मक रूढ़ियों से जकड़े हुए परिवार मे स्त्री की स्थिति शताब्दियों से दयनीय है।

हालांकि अब शिक्षा के प्रसार से ग्रामीण स्त्रियों की दशा मे काफी सुधार हो रहा है। 

11. परिवार उत्पादन का केन्द्र है 

ग्रामीण समाज मे कृषि मुख्य व्यवसाय है किन्तु इसका अर्थ यह नही है कि वहाँ कोई कार्य होते ही नही है। एक ही परिवार के सदस्य खाली समय में अनेक प्रकार के कार्य करते है जैसे डलिया बनाना है, कोई सूत कातता है, कोई रस्सी बाँटता है, कोई लकड़ी काटने का कार्य करता है, कोई अन्य कुटीर-उद्योग धंधों का कार्य करता है। इसलिए परिवार उत्पादन का केन्द्र है।

12. पारिवारिकता 

परिवार के सदस्यों मे ग्रामीण परिवार के सदस्य अपने व्यक्तिगत स्वार्थों का परिवार के हित की रक्षा मे बलिदान कर देते है। परिवार के सदस्यों की स्थिति का निर्धारण भी परिवार की स्थिति पर ही निर्भर है। परिवार के सभी सदस्यों मे आपसी सहयोग एवं प्रेम की भावना होती है। परिवार मे किसी सदस्य के बीमार या अशक्त होने की स्थिति मे उसका कार्य अन्य सदस्यों द्वारा किया जाता है।

ग्रामीण परिवार के कार्य अथवा महत्व

ग्रामीण परिवार के कार्य अथवा महत्व इस प्रकार हैं--

1. ग्रामीण परिवार भावी जनसंख्या के लिए संतान की उत्पत्ति करता है।

2. ग्रामीण परिवार अपने बच्चों का पालन-पोषण करता है।

3. ग्रामीण परिवार, परिवार में जन्म लेने वाले बच्चों की शिक्षा की समुचित व्यवस्था करता है।

4. ग्रामीण परिवार बच्चों को परिवार की संस्कृति का ज्ञान कराता है। इस प्रकार संस्कृति का हस्तांतरण करना भी ग्रामीण परिवार का महत्वपूर्ण कार्य है।

5. ग्रामीण परिवार, परिवार में जन्म लेने वाले बच्चों को रीति-रिवाजों का पालन करना सिखता है और ऐसा करके वह बच्चों का समाजीकरण करता है।

6. ग्रामीण परिवार खेल, कबड्डी, आल्हा-उदल पाठ, परस्पर मजाक करने या कहानियों के माध्यम से अपने सदस्यों का मनोरंजन भी करता है।

7. ग्रामीण परिवार एक संकटकालीन बीमा है, क्योंकि परिवार के सदस्यों मे हम की भावना पाई जाती है और सभी सदस्य संकटकाल मे एक-दूसरे की सहायता करते है।

यदि परिवार का कोई सदस्य असहाय हो जाता है तो परिवार के अन्य सदस्य उसकी रक्षा करते है। इसी कारण ग्रामीण परिवार संकटकालीन बीमा है।

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