9/26/2020

प्रश्नावली अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं, प्रकार, गुण एवं दोष

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प्रश्नावली का अर्थ (prashnavali kya hai)

prashnavali meaning in hindi:प्रश्नावली विभिन्न प्रश्नों की सूची है जिसे डाक द्वारा सूचनादाता के पास पहुंचा दिया जाता है जो स्वयं इन प्रश्नों के उत्तर लिखकर पुनः डाक द्वारा अध्ययनकर्ता को लौटाते है। इस प्रकार एक वृहद् क्षेत्र से प्राथमिक सूचनाओं का संकलन जब करना होता है तब प्रश्नावली का प्रयोग किया जाता है। 

चूंकि बड़े क्षेत्र मे सूचनादाता फैले हुये होते है अतः अध्ययनकर्ता के लिये प्रत्येक सूचनादाता से प्रत्यक्ष सम्पर्क स्थापित कर साक्षात्कार प्रविधि से सूचनायें प्राप्त करना अत्यधिक कठिन हो जाता है, क्योंकि दूर-दूर रहने वाले व्यक्तियों से साक्षात्कार करने के लिये अधिक समय, धन तथा परिश्रम की आवश्यकता होती है। अतः प्रश्नावली प्रविधि ऐसे समय मे प्राथमिक सूचनाओं की प्राप्ति मे महत्वपूर्ण सहयोग देती है। इसीलिए प्रश्नावली को साक्षात्कार प्रविधि का विकल्प कहा जाता है। आगे प्रश्नावली की परिभाषा, विशेषताएं, प्रकार प्रश्नावली निर्माण की प्रविधि और गुण दोष जानेंगे।

प्रश्नावली की परिभाषा (prashnavali ki paribhasha)

सेलिज, जहोदा व अन्य ने, " प्रश्नावली की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया है कि इसमे मानकीकृत, पूर्व क्रमित सीमित प्रश्न होते है जिन्हें उत्तरदाताओं के पास डाक से भेजा जाता है या उन्हें दिया जाता है।

पोप " एक प्रश्नावली को प्रश्नों के एक समूह के रूप मे परिभाषित किया जा सकता है, जिसका उत्तर सूचनादाता को बिना अनुसंधानकर्ता या प्रगणक की व्यक्तिगत सहायता के देना होता है।

बोगार्डस के अनुसार " प्रश्नावली विभिन्न व्यक्तियों से उत्तर प्राप्त करने के लिए प्रश्नों की एक सूची होती है। यह प्रमाणीकृत प्रमाणों को प्राप्त करती है, जिनका सारणीकरण एवं सांख्यिकी सम्बन्धी उपयोग किया जा सकता है।

गुडे एवं हाॅट के शब्दों मे " सामान्य रूप से प्रश्नावली से अर्थ प्रश्नों के उत्तरों को प्राप्त करने के लिए साधन से है, जिसमें पत्रक का प्रयोग किया जाता है, जिसे सूचनादाता स्वयं भरता है।" 

इस प्रकार प्रश्नावली को हम अधिकांशतया मानकीकृत प्रश्नों की एक व्यवस्थित सूची कह सकते है जो उत्तरदाताओं को इस आश्य के साथ कि वे उसमे अपना उत्तर लिखकर वापस करें डाक से भेजी या व्यक्ति द्वारा पहुँचाई जाती है।

प्रश्नावली की विशेषताएं (prashnavali ki visheshta)

1. प्रश्नवली प्रश्नों की एक सूची होती है, जिसे अनुसंधानकर्ता उत्तरदाता के पास डाक द्वारा भेजता है। 

2. प्रश्नावली मे जिन प्रश्नों को सम्मिलित करके प्रयोग किया जाता है, उन्हें टाइप अथवा साइक्लोस्टाइल्ड या प्रकाशित कर लिया जाता है। 

3. प्रश्नावली प्राथमिक सामग्री के संकलन की एक प्रविधि है जिसमे सूचनाता से अप्रत्यक्ष सम्पर्क के आधार पर जानकारी एकत्र की जाती है।

4. इसमे सरल व स्पष्ट प्रश्न होते जिनकी संख्या सामान्यतया सीमित होती है जिससे उनका उत्तर देने से सूचनादाता को अधिक समय न लगे।

5. प्रश्नावली मे अन्वेषक की ओर से सूचनादाता को कुछ निर्देश दिये गये होते है जिससे उसे प्रश्नों को भरने मे आसानी हो।

6. प्रश्नावली का उपयोग केवल शिक्षित व्यक्तियों से आंकड़ों को एकत्रित करने हेतु किया जाता है।

7. अधिकांशतया प्रश्नावली मे प्रश्नों को युक्तिसंगत आधार पर कुछ वर्गों मे व्यवस्थित क्रम के अनुसार रखा गया होता है।

8. इसमे सामान्यतः मानकीकृत बन्द या पूर्व निश्चित विकल्प के प्रश्न होते है। इनके अलावा इसमे खुले प्रश्न भी हो सकते है, यद्यपि कोशिश यही होती है कि यथासंभव प्रश्नों को मानकीकृत किया जाय।

9. प्रश्नावली के अन्त मे प्रायः कुछ स्थान रिक्त होता है जिसमे उत्तरदाता अपनी ओर से कोई जानकारी या मत दे सकता है।

10. प्रश्नावली के प्रश्नों का निर्माण खोज के विषय के उद्देश्य एवं प्रकृति को ध्यान मे रखकर किया जाता है।

11. प्रश्नावली का प्रयोग एक विस्तृत क्षेत्र मे कम व्यय से किया जा सकता है।

12. सामान्यतया प्रश्नावली के साथ एक संलग्न पत्र होता है जिसमे अनुसंधानकर्ता की ओर से उत्तरदाताओं से प्रश्नावली को भरकर लौटाने का अनुरोध किया जाता है। 

प्रश्नावली के निर्माण की प्रविधि 

प्रश्नावली प्रणाली मे अनुसंधानकर्ता सूचनाताओं के पास डाक द्वारा प्रश्नावली भेजता है। सूचनादाता प्रश्नों के उत्तर लिखकर अनुसंधानकर्ता के पास वापस भेज देता है। इस प्रकार सूचनादाता तथा अनुसंधानकर्ता एक-दूसरे के समक्ष नही आते है। इसी कारण उन कठिनाइयों का समाधान नही हो पाता जो उत्तरदाता के द्वारा अस्पष्ट उत्तर देने के कारण उत्पन्न हो जाती है। अतः यह आवश्यक है कि अनुसंधानकर्ता प्रश्नावली मे इस प्रकार की विधियाँ तथा प्रविधियाँ प्रयुक्त करे जिनसे प्रश्नावली अच्छी बन सके और उत्तरदाता सही उत्तर दे सके।

प्रश्नावली के प्रकार (prashnavali  ke prakar)

1. मिश्रित प्रश्नावली 

मिश्रित प्रश्नावली मे कई प्रश्नों का सम्मिश्रण रहता है। इस प्रश्नावली मे बंद और खुली दोनों प्रकार की प्रश्नावली की विशेषताएं होती है। सामाजिक सर्वेक्षण मे इसी प्रकार की प्रश्नावली का उपयोग किया जाता है।

2. चित्रमय प्रश्नावली 

चित्रमय प्रश्नावली मे प्रश्नों के उत्तर चित्रों द्वारा प्रदर्शित किए जाते है। जिस चित्र को व्यक्ति उत्तर के लिए समझता है, वहां वह निशान लगा देता है।

3. बन्द प्रश्नावली 

बंद प्रश्नावली को सीमित अथवा प्रतिबंध प्रश्नावली भी कहते है। इस प्रश्नावली मे प्रत्येक प्रश्न के आगे जितने भी संबंधित उत्तर होते है लिख दिये जाते है। सूचनादाता अपना उत्तर इन्ही प्रश्नो के माध्यम से भरता है। जैसा कि सिन पाओ यंग ने कहा है," बंद प्रश्नावली मे प्रायः पूछे गये प्रश्नों के पद के क्रमानुसार उत्तर सम्मिलित होते है।

4. खुली प्रश्नावली 

इस प्रश्नावली को असीमित अथवा अप्रतिबंधित प्रश्नावली भी कहते है। यह प्रश्नावली बंद प्रश्नावली के विपरीत होती है। खुली प्रश्नावली मे केवल प्रश्न होते है और उत्तर के लिए स्थान रिक्त छोड़ दिया जाता है। उत्तर देने वाले व्यक्ति पर उतर देने के लिए कोई बंधन नही होता। वह अपनी इच्छानुसार कुछ भी उत्तर दे सकता है।

इसके अतिरिक्त प्रो. पी. यंग के अनुसार प्रश्नावली दो तरह की होती है--

(अ) संरचित प्रश्नावली 

जब प्रश्नावली के प्रश्नों की रचना अनुसंधान करने के पहले ही हो जाती है तो उसे संरचित प्रश्नावली कहते है। इसमे प्रश्न सबके लिए एक समान होते है, क्योंकि वे निश्चित है। इसमे ऐसे प्रश्न भी होते है जिनके द्वारा अपर्याप्त उत्तरों का स्पष्टीकरण किया जाता है।

(ब) असंरचित प्रश्नावली 

इस प्रकार की प्रश्नावली मे पहले से ही प्रश्नों का निर्माण नही होता वरन् सिर्फ उन विषय या बिन्दुओं का उल्लेख होता है जिसके बारे मे सूचना एकत्रित की जाती है। अतः इसे साक्षात्कार निर्देशिका भी कहा जाता है। इसमे वास्तव मे प्रश्न लिखे ही नही होते केवल कुछ संकेत होते है।

प्रो. लुम्डबर्ग ने सूचनाओं के आधार पर प्रश्नवली की दो श्रेणियां बताई है--

(अ) तथ्य संबंधी प्रश्नावली

इस प्रकार की प्रश्नावली का प्रयोग सामाजिक तथ्यों की जानकारी प्राप्त करने हेतु किया जाता है। जैसे-- व्यक्ति की आयु, विवाह, जाति, शिक्षा व्यवसाय या ऋणग्रस्तता से संबंधित सूचनाओं का संकलन।

(ब) मत अथवा मनोवृत्ति प्रश्नावली 

जब प्रश्नावली का प्रयोग व्यक्तियों के किसी घटना, परिस्थिति या अन्य वस्तु से संबंधित मतों एवं मनोवृत्तियों को जानने हेतु किया जाता है तो उसे मत एवं मनोवृत्ति संबंधी प्रश्नावली कहते है। उदाहरण हेतु जनमत संग्रह, बाजार सर्वेक्षण, रेडियो एवं टेलीविजन कार्यक्रमों के बारे मे लोगों के विचार जानने के लिए इसी प्रकार की प्रश्नावलियों का निर्माण और प्रयोग किया जाता है।

प्रश्नावली का महत्व अथवा गुण अथवा लाभ (prashnavali ke gun)

1. विशाल जनसंख्या का अध्ययन 

प्रश्नावली के द्वारा विशाल क्षेत्र मे फैले हुये सूचनादाताओं से आसानी से एवं शीघ्रतापूर्वक सूचनायें एकत्रित की जा सकती है। 

2. कम खर्च 

चूंकि इस प्रविधि मे क्षेत्रिय कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की आवश्यकता नही होती, अतः व्यय अत्यंत कम होता है। केवल छपाई एवं डाक मे ही सूचनायें एकत्रित हो जाती है।

3. शीघ्र सूचनायें 

प्रश्नावली के अंतर्गत सभी प्रश्नावलियाँ डाक द्वारा एक ही समय मे सभी सूचनाताओं के पास पहुँचा दी जाती है। अतः लगभग थोड़े से अंतराल मे ही अधिकांश प्रश्नावलियां भरकर वापस लौटती है।

4. सुगमता 

इस प्रविधि मे अनुसंधानकर्ता को परिश्रम, धन तथा समय अधिक नही लगाना पड़ता है। सूचनादाता भी अपनी सुविधानुसार प्रश्नावली को भरता है। इस प्रकार प्रश्नावली पद्धति अत्यंत सुगम है। 

5. स्वतंत्र तथा प्रामाणिक सूचनायें 

प्रश्नावली प्रविधि मे सूचनादाता सूचना देने के लिये स्वतंत्र होता है। उसे किसी प्रकार का दबाव नही होता। वह स्वतंत्र रूप से सोच विचार कर सूचनायें देता है। इस प्रकार पक्षपात रहित सूचनायें प्राप्त होती है।

6. स्वयं प्रशासित 

प्रश्नावली प्रविधि मे अनुसंधानकर्ता को न तो अध्ययन क्षेत्र मे जाने की आवश्यकता होती है न सूचनादाताओं एवं कार्यकर्ताओं मे दिमाग खपाना पड़ता है। प्रश्नावली छपवाकर केवल डाक द्वारा भेजने से ही उसे सूचनायें अपने आप घर बैठ उपलब्ध हो जाती है।

प्रश्नावली की सीमायें अथवा दोष (prashnavali ke dosh)

1. केवल शिक्षितों का अध्ययन सम्भव 

प्रश्नावली का सबसे बड़ा दोष यह है कि इसका प्रयोग सभी प्रकार के सूचनाताओं से सूचना एकत्रित करने के लिए नही किया जा सकता। क्योंकि प्रश्नावली मे उतर सूचनादाता को ही भरने पड़ते है। अतः इसका प्रयोग केवल शिक्षित सूचनादाताओं का अध्ययन करने के लिए ही किया जा सकता है।

2. प्रत्युत्तर प्राप्त न होना 

प्रायः सभी भेजी गई प्रश्नावलियां वापस नही लौटतीं। एक तो पढ़े-लिखे लोग इसमे ज्यादा रूचि नही लेते और दूसरा डाक व्यवस्था ठीक न होने से इनकी प्राप्ति सरलता से नही होती।

3. अपूर्ण सूचना 

सूचनादाता को किसी प्रकार की प्रेरणा इसके अंतर्गत नही मिलती, अतः वह लापरवाही से प्रश्नावली को भरता है। इससे सम्पूर्ण सूचनाओं की प्राप्ति नही होती।

4. अनुसंधानकर्ता की सहायता का अभाव 

कई बार प्रश्नों को ठीक संदर्भ मे नही समझा जाता। अतः उनसे संबंधित सुचानायें बेकार हो जाती है। अनुसूची या साक्षात्कार मे अनुसंधानकर्ता की सहायता सूचनादाता को प्राप्त होती। इससे प्रश्नों को सही अर्थ मे समझा कर उत्तर प्राप्त किये जाते है।

5. खराब लेख 

प्रश्नावली मे सूचनायें सूचनादाताओं को स्वयं लिखनी पड़ती है चूँकि सभी लेखन सुन्दर नही होता, अतः खराब लिखावट मे लिखी सूचनाओं का कोई उपयोग नही हो पाता।

6. गहन अध्ययन असंभव 

प्रश्नावली द्वारा गहन सूचनाओं की प्राप्ति संभव नही होती। इसके द्वारा केवल सतही और छोटी-मोटी सूचनायें प्राप्त की जा सकती है।

7. भावात्मक प्रेरणा का अभाव 

अनुसूची तथा साक्षात्कार मे अनुसंधानकर्ता सूचनादाता के लिये उत्प्रेरक का कार्य करता है। इससे सूचनादाता कई बार अनिच्छुक होने के बावजूद अनुसंधानकर्ता के कारण सूचनायें प्रदान कर देता है। प्रश्नावली मे इस प्रकार की प्रेरणा नही मिल पाती।

8. सार्वभौमिक प्रश्न असम्भव 

प्रश्नावली मे सूचनादाता स्वयं प्रश्नों को पढ़ता है और उनके उत्तर लिखता है। ऐसे सार्वभौमिक प्रश्नों का निर्माण करना वास्तव मे एक कठिन कार्य है जिसे सभी सूचनाता एक समान अर्थ मे समझ सकें।

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