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2/09/2020

वर्गीकरण किसे कहते है? परिभाषा, प्रकार, लक्षण, उद्देश्य

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वर्गीकरण किसे कहते है? 

vargikaran arth paribhasha prakar uddeshya;संकलित समंको का मौलिक स्वरूप अत्यन्त जटिल एवं अव्यवस्थित होता है और इन्हें इसी रूप मे विश्लेषण एवं निर्वाचन हेतु प्रयुक्त नही किया जा सकता जब तक कि इन्हें संक्षिप्त करते हुए इनको स्वजातीयता के आधार पर अलग-अलग वर्गों मे विभक्त न कर दिया जाए। वर्गीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें एकत्रित समंको को उनकी विभिन्न विशेषताएंओं के आधार पर अलग-अलग समूहों, वर्गों या उपवर्गों मे क्रमबद्ध किया जाता हैं।
आज हम इस लेख मे वर्गीकरण का अर्थ, वर्गीकरण की परिभाषा, वर्गीकरण के प्रकार और उद्देश्य जानेंगे।

वर्गीकरण का अर्थ 

वर्गीकरण वस्तुओं को समूहों अथवा वर्गों में उनकी समानता तथा सजातीयता के अनुसार क्रमानुसार रखने की क्रिया है और यह इकाईयों की भिन्नता के बीच मे उपस्थित गुणों की एकता को व्यक्त करता हैं।

वर्गीकरण की परिभाषा 

शुक्ल और सहाय के अनुसार, "वर्गीकरण द्वारा आँकड़ों के अव्यवस्थित विशाल ढेर को एक व्यवस्थित रूप दिया जाता है ताकि भविष्य का कार्य सरल हो जाये।"
काॅनर के शब्दों में, " वर्गीकरण वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा तथ्यों को यथार्थ रूप मे या कल्पित रूप से उनकी समानता और सादृश्यता के आधार पर वर्गो या विभागों मे विभाजित किया जाता है और जो इकाई की विभिन्नता के मध्य गुणों की एकता को व्यक्त करती हैं।"

वर्गीकरण के प्रकार (vargikaran ke prakar)

1. गुणात्मक वर्गीकरण 

जब तथ्यों को 'वर्णन' 'गुणों' के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है तो उसे गुणात्मक वर्गीकरण कहते हैं। उदाहरणार्थ- साक्षरता, ईमानदारी, चरित्र आदि। गुणात्मक वर्गीकरण दो प्रकार का हो सकता है---
(a) सरल वर्गीकरण
इसमे सामग्री को एक गुण के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। यह हमें स्पष्ट तथा निशिचत करना पड़ता है कि वह गुण उसमे उपस्थित है या नही।
(b) बहुगुण वर्गीकरण
जब सामग्री का विभाजन एक से अधिक गुणों के आधार पर किया जाता है तो उसे बहुगुण वर्गीकरण कहा जाता हैं। इसमें सर्वप्रथम हम एक गुण की उपस्थिति और अनुपस्थित के आधार पर वर्गीकरण करते है फिर किसी अन्य गुण के आधार पर उसे उपवर्गों मे विभाजित करते है और इसके बाद भी वर्गीकरण किसी और गुण के आधार पर हो सकता हैं।

2. वर्गान्तरानुसार वर्गीकरण 

इस वर्गीकरण मे केवल उसी सामर्गी का समावेश होता है जो संख्या मे गिनी जा सकती हो। जैसे आयु, आय, आकार, आदि। वर्गान्तरानुसार के अनुसार वर्गीकरण करते समय एक बात का सदैव ध्यान रखना चाहिए कि समग्र का प्रत्येक पद या इकाई वर्गीकरण के अंतर्गत आ चाहिए। इसके लिए सबसे छोटी तथा सबसे बड़ी संख्या को ध्यान मे रखते हुए वर्गान्तर तैयार करने चाहिए।
वर्गान्तरानुसार वर्गीकरण के प्रकार
(a) अपवर्जी विधि
वर्गान्तरानुसार की यह वह रीति है जिसमें एक वर्गान्तरानुसार 'ऊपरी सीमा' उससे अगले वर्गान्तरानुसार की 'निचली सीमा' के बराबर होती है। इसे अपवर्जी इसलिए कहा जाता है कि यदि पद या मूल्य किसी वर्गान्तरानुसार की ऊपरी सीमा के बराबर होता है तो वह पद या मूल्य उस वर्ग मे सम्मिलित न होकर उससे अगले वर्गान्तरानुसार मे सम्मिलित किया जाता हैं।
(b) समावेशी विधि
इस विधि उपर्युक्त विधि की जो संदिग्धता है उसका निराकरण करने का प्रयास किया गया है। इस विधि मे प्रथम वर्ग की उच्च सीमा और द्वितीय वर्ग कि निम्न सीमा मे एक इकाई का अन्तर दिया जाता है अर्थात वर्ग की उच्च सीमा को द्वितीय वर्ग की निम्न सीमा से एक इकाई से कम कर दिया जाता हैं।

वर्गीकरण के लक्षण या विशेषताएं

वर्गीकरण के निम्नलिखित लक्षण या विशेषताएं हैं--
1. वर्गीकरण मे संकलित समंको को विभिन्न वर्गों मे विभाजित किया जाता है।
2. वर्गीकरण का आधार गुणों की समानता या एकता होती है।
3. यह पदों की विभिन्नता के बीच भी उनकी एकता को स्पष्ट करता हैं।
4. वर्गीकरण समूह की इकाइयों को भिन्न-भिन्त्र वर्गो मे विभाजित करता हैं।
5. वर्गीकरण का निर्माण वास्तविक या काल्पनिक हो सकता है।
6. वर्गीकरण यथार्थ रूप मे या भावात्मक रूप मे होता हैं।

वर्गीकरण के उद्देश्य 

वर्गीकरण के निम्नलिखित उद्देश्य हैं--
1. वर्गीकरण का उद्देश्य जटिल तथा बिखरे हुए तथ्यों को सरल बनाना हैं।
2. समूह की इकाइयों की भिन्नता मे निहित एकता को स्पष्ट करना।
3. आँकड़ों को संक्षिप्त एवं सरल रूप देना।
4. आँकड़ों को सरलता से समझने योग्य बनाना।
5. आँकड़ों को तुलना योग्य बनाना।
6. वैज्ञानिक प्रबंध निश्चित करना।
7. तुलनात्मक अध्ययन की सुविधा प्रदान करना।
8. नियंत्रित सामग्री को नियमित रूप प्रदान करना।
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