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10/08/2021

दीर्घकालिक स्मृति क्या हैं? विशेषताएं, प्रकार

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दीर्घकालिक स्मृति क्या हैं? (dirghkalik smriti ka arth)

dirghkalik smriti arth visheshta prakar;दीर्घकालिक स्मृति का अर्थ ऐसी स्मृति से हैं, जो अधिक समय तक ठहरती हैं। मौर्गन तथा किंग ने दीर्घकालिक स्मृति को परिभाषित करते हुये कहा हैं," दीर्घकालिक स्मृति उसे कहते हैं, जिसमें सामग्री घण्डों, दिनों, वर्षों अथवा एक जीवन काल के लिये संचिय या इकट्ठी रहती हैं।"

दूसरे शब्दों में जब तक सामग्री को एक से अधिक बार अनुभवों द्वारा सीखा जाता हैं तो वह दीर्घकालिक अधिगम या स्मृति कहलाती है। 

ग्लीटमैन के अनुसार," दीर्घकालिक स्मृति ऐसी स्मृति प्रणाली है जिसमें स्मृतियाँ दीर्घकाल तक रहती हैं, जिसकी क्षमता काफी अधिक होती हैं और जो सामग्रियों को अपेक्षाकृत प्रक्रमित संसाधित रूप में संचित किये रहती हैं।" 

प्राइस इत्यादी के अनुसार," जगत के बारे में सूचना या ज्ञान तथा कर्मक्रमों और बाहरी व्यवहार एवं मानसिक क्रिया अनुक्रमों का संगठित भण्डार दीर्घकालिक स्मृति कहा जाता हैं।" 

इस प्रकार स्‍पष्‍ट होता हैं कि दीर्घकालिक स्मृति अपेक्षाकृत अधिक स्थाई, संसाधित (Processed) तथा असीमित क्षमतायुक्त होती हैं। मानव-जीवन में इसका सर्वाधिक उपयोग होता हैं क्योंकि आज हम जो याद करते हैं या सीखते हैं, उसका उपयोग हम प्रायः लम्बे अन्तरालों पर करते हैं। कक्षा में पढ़े प्रश्‍न या पाठ को परीक्षा में लिखना, ऐसा ही एक उदाहरण हैं। इससे यह स्पष्ट है कि दीर्घकालिक स्मृति में विस्मरण की गति मंद होती हैं। इसके बारे में मान्यता हैं कि इस अवस्था में विस्मरण प्रायः पुनरूद्धार की असफलता (Failure of retrieval)    के कारण न कि क्षय (ह्रास) के कारण होता हैं। इसमें किसी घटना, सूचना, सामग्री या कहानी का सारा विवरण नहीं संग्रहीत रहता हैं बल्कि उसके विशिष्ट या महत्वपूर्ण अंश ही संचित किये जाते हैं।

दीर्घकालिक स्मृति की विशेषताएं (dirghkalik smriti ki visheshta)

दीर्घकालिक स्मृति में निम्‍नलिखित विशेषताएं पाई जाती हैं--

1. संगठित संचयन (Organized Storage) 

दीर्घकालिक स्मृति में सूचनाएँ अपेक्षाकृत अधिक संगठित रूप में भण्डारित रहती हैं। इसी कारण उनमें विस्मरण की गति मन्द होती है।

 2. दीर्घकालिक संचयन (Longer Storage)

इसमें स्मृतियों का भण्डारण अपेक्षाकृत दीर्घकालीन तक रहता है, जैसे- कई दिनों, सप्ताहों, महीनों या वर्षो तक। 

3. असीमित क्षमता (Unlimited Capacity) 

दीर्घकालिक स्मृति की क्षमता असीमित होती है, इसमें अधिक से अधिक सूचनाएँ संग्रहित रहती हैं। 

4. संसाधित या प्रक्रमित संचयन (Processed Storage) 

इसमें ज्ञान या सूचनाएँ अपेक्षाकृत अधिक प्रक्रमण के बाद संचित होती हैं। इसमें इस कार्य में संकेतीकरण (Encoding), विस्तारण (Elaboration), मानसिक अभ्यास (Rehearsal), संगठन (Organization), प्रयत्न (Effort), अर्थगत विस्तारण (Semantic elaboration) एवं श्रेणी गुच्छन (Category clustering) आदि जैसी प्रक्रियाओं से सहायता मिलती है। 

5. शुद्धता (Accuracy)  

इस स्मृति (LTM) में शुद्धता की मात्रा अधिक पाई जाती है। यदि सीखी गई सामग्री चाक्षुष (Visual material) है (जैसे- शब्द, वाक्य आदि) तो पुनस्मरण की और भी बढ़ जाती है (Shepard, 1967)।

6. रूपान्तरण (Transformation) 

दीर्घकालिक स्मृति की अवस्था में संचित सूचनाओं की जानकारियों का रूपान्तरण भी हो सकता है। इसे बार्टलेट (Bartlet, 1932) ने स्मृति में पुनर्रचना (Reconstruction in memory) का नाम दिया है, अर्थात् मूल सामग्री का पुनरोत्पादन करते समय प्रयोज्य कुछ नया अंश उसमें जोड़ देते हैं। पुराने अंश विस्मरित हो जाते हैं और तथ्यों का विरूपण (Distortion) भी होता है।

दीर्घकालिक स्मृति के प्रकार (dirghkalik smriti ke prakar)

दीर्घकालिक स्मृति को विवरणात्मक एवं प्रक्रियात्मक वर्गों में विभक्त किया जाता है-- 

1. विवरणात्मक स्मृति (Declarative Memory)

 विवरणात्मक स्मृति का आशय किसी वस्तु, व्यक्ति, सामग्री या घटना के बारे में विस्तृत जानकारी से है। जैसे- यह कहना कि हम जानते है कि गाँधीजी सत्य, अहिंसा एवं मानवता के पुजारी, गरीबों के मसीहा थे, विवरणात्मक स्मृति का उदाहरण है। विवरणात्मक स्मृति को भी दो वर्गों में विभक्त किया जाता है। इन्हें प्रासंगिक या वृत्तात्मक स्मृति (Episodic memory) एवं अर्थगत या शब्दार्थ स्मृति (Semantic memory) कहते हैं। "किसी घटना या जानकारी का क्रमवार वर्णन करना प्रासंगिक या वृत्तात्मक स्मृति कहा जाता है। इसमें व्यक्तिगत अनुभवों का समय आधारित (Time based) वर्णन भी सम्मिलित है। इसीलिए इसे आत्मचरित स्मृति (Autobiographical memory) भी कहते हैं। दूसरी तरफ, किसी वस्तु के बारे में सम्प्रत्यात्मक अवधारणाएँ विकसित करना शब्दार्थ या अर्थगत स्मृति कहा जाता है, जैसे- अमुक वस्तु में ये विशेषताएँ हैं। यह अर्थगत स्मृति हैं। इसे सामान्य या व्यापक स्मृति (Generic memory) भी कहते हैं।

2. प्रक्रियात्मक स्मृति (Procedural Memory) 

प्रक्रियात्मक स्मृति का आशय किसी कार्य, क्रिया व कौशल की तकनीक की जानकारी से है, जैसे- गाड़ी चलाना, मशीन बनाना, साइकिल चलाना या टाइप करना आदि इसके उदाहरण हैं। क्योंकि इनमें कार्य करने की प्रक्रिया व्यक्ति जानता है आवश्यकता पड़ने पर उसका उपयोग भी करता है।

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