10/05/2021

दृष्टि संवेदना क्या हैं?

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प्रश्न; दृष्टि संवेदना से आप क्या समझते है? आँख की संरचना तथा उसके कार्य स्पष्ट कीजिए।

दृष्टि संवेदना क्या हैं? 

दृष्टि संवेदना का संबंध प्रकाश एवं आँख से है। जब 'उत्तेजना' (Simulus) के रूप में प्रकाश का आँख पर प्रभाव पड़ता है तो उसके परिणामस्वरूप प्रकाश की लहरें 'कार्निया' (Cornia) से होती हुई 'ताल' (Lense) द्वारा केन्द्रित हो जाती है तत्पश्चात् वे 'दृष्टि पटल' (Retina) पर पड़ती हैं, फिर यहाँ से 'दृष्टि स्नायुओं' (Optic Nerves) द्वारा जैसे ही वे मस्तिष्क केन्द्र में पहुँचती है वैसे ही 'दृष्टि संवदेना' (Visual sensation) होती हैं।

आँख की संरचना और उसके कार्य मनुष्य कि आँख की बनावट फोटो खींचने वाले कैमरे की तरह होती हैं। आँख के गोल भाग में नेत्र द्रव (Viterous humor) भरा होता हैं जो आँख को फुलाएँ रखता हैं। आँख तीन आवरणों से ढकी रहती हैं। ये आवरण निम्नलिखित हैं-- 

1. श्वेत पटल 

श्वेत पटल आँख का बाहरी भाग होता है। यह आँख को चारों ओर से घेरे रहता हैं। आँख के सामने इसका 'कार्निया' (Cornia) नामक भाग पारदर्शी होता है जिससे लैन्स की रक्षा होती हैं एवं शेष भाग अपारदर्शी होता हैं। 

2. मध्य पटल 

यह काले एवं भूरे रंग का होता हैं। इसका आगे वाला भाग 'उपतारा' (Iris) कहलाता हैं। इनका मुख्य कार्य प्रकाश को ग्रहण करना होता हैं। उपतारा के बीच मे एक छिद्र होता हैं जिसे पुतली कहा जाता हैं। पुतली का आकार प्रकाश की तीव्रता के अनुसार निर्धारित होता हैं। अधिक प्रकाश में पुतली सिकुड़ जाती हैं एवं मध्यम प्रकाश में फैल जाती हैं। इस फैली अवस्था में आवश्यकतानुसार प्रकाश आँख से प्रवेश कर सकता हैं। उपतारा के पीछे 'लेंस' (Lense) की स्थिति रहती हैं जो कि प्रकाश को आँख के उचित स्थान पर स्थापित कर देता हैं। 

3. अन्तः पटल 

आँख का अन्दुरूनी भाग अन्तः पटल हैं। इसमें दृष्टि संवेदना (Visual sensation) के ग्राहक (Receptors) उपस्थित रहते हैं। ये संग्राहक प्रकाश तरंगे पाकर उत्तेजित हो जाते हैं और यह दो प्रकार के होते हैं-- 

(अ) दण्ड (Rods) 

(ब) शंकु (Cones)।

दण्ड से प्रकाश एवं अन्धकार की संवेदना होती हैं और यह रात्री में संवेदनशील होते हैं तथा शंकु से विभिन्न रंगों की संवेदना होती हैं और यह दिन के प्रकाश में संवेदनशील होती हैं। पीत बिन्दु (Fovea or yellow spot) पर शंकु अधिक घने होते हैं। यहाँ लगभग 50,000 शंकु पाए जाते हैं। 

अन्तः पटल का वह स्थान जहाँ से दृष्टि स्नायु मस्तिष्क की ओर जाते हैं, अन्ध बिन्दु कहलाता हैं। अन्ध बिन्दु (Blind spot) पर दण्ड तथा शंकु न्यून मात्रा में होते हैं। उद्दीपक से संबंधित प्रकाश यदि अन्ध बिन्दु पर पड़ता है तो अन्ध बिन्दु पर उद्दीपक की प्रतिमा नहीं बनती हैं। इस बिन्दु पर दृष्टि का एक भी संग्राहक नही पाया जाता हैं।

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