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9/22/2021

मनोविज्ञान का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं, प्रकृति

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मनोविज्ञान का अर्थ (manovigyan kya hai)

manovigyan ki abdharna arth paribhasha visheshta prakriti;मनोविज्ञान (Psychology) वह विद्या है जो प्राणी (मनुष्य एवं प्राणी) के मानसिक प्रक्रियाओं (mental process) अनुभवों एवं व्यक्त व अव्यक्त व्यवहारों का क्रमबद्ध तथा वैज्ञानिक अध्ययन करती है। मनोविज्ञान में मानव मस्तिष्क एवं व्यवहार का अध्ययन वातावरण के परिपेक्ष्य में किया जाता है। मनोविज्ञान एक ऐसा विज्ञान है जो (systematically) प्रेक्षणीय व्यवहार (obsarbable bahariour) का अध्ययन करता है। इस दृष्टि से मनोविज्ञान को व्यवहार एवं मानसिक प्रक्रियाओं के अध्ययन का विज्ञान कहा जाता है। व्यवहार के अंतर्गत मानव व्यवहार एवं पशु व्यवहार दोनों आते हैं । 

मनोविज्ञान का शाब्दिक अर्थ

मनोविज्ञान = मन + विज्ञान = वह विज्ञान जिसके द्वारा मन और विभिन्न पहलुओं एवं विकारों का अध्ययन किया जा सकें। अंग्रेजी में मनोविज्ञान के लिए Psychology साइकोलॉजी शब्द का प्रयोग किया जाता है । साइकोलॉजी (Psycology) शब्द ग्रीक भाषा के 'Psyche' साइके और Logos लोगोस से मिलकर बना है। Psyche शब्द का अर्थ " आत्मा " और Logos का अर्थ होता है “ अध्ययन "  अतः Psychol ogy साइकोलॉजी शब्द का अर्थ है, " आत्मा का अध्ययन।"

अमरीकी विद्वान विलियम जेम्स (1842-1910) ने मनोविज्ञान को दर्शनशास्त्र मुक्त कर एक स्वतंत्र विद्या का रूप दिया। इसलिए विलियम जेम्स को मनोविज्ञान का जनक माना जाता है।

मनोविज्ञान के अर्थ में परिवर्तन मनोविज्ञान की उत्पत्ति दर्शनशास्त्र के अंग के रूप में हुई। समय के साथ मनोविज्ञान के अर्थ में परिवर्तन होता गया जो निम्न प्रकार है-- 

आत्मा का विज्ञान 

16वीं शताब्दी में अरस्तू , प्लेटो , डेकार्ट एवं अरिस्टोटल आदि यूनानी दार्शनिकों द्वारा मनोविज्ञान को आत्मा का विज्ञान कहा गया। परन्तु आत्मा क्या है ? इसका स्वरूप कैसा है भ? इसका अस्तित्व कैसा है। (अर्थात् आत्मा को देखा जा सकता है क्या?) आदि प्रश्नों के उत्तर देने में मनोविज्ञान की इस परिभाषा को असमर्थ पाया गया। अतः मनोविज्ञान के इस अर्थ को अस्वीकार्य कर दिया गया।

मन का विज्ञान  

17वीं शताब्दी के मनोविज्ञानिकों ने मनोविज्ञान को मन या मस्तिष्क के विज्ञान के रूप में परिभाषित किया। मन मनुष्य की भावनात्मक ऊर्जा को संचालित करता है। परन्तु मन दिखता नहीं है। उसका कोई जैविक अस्तित्व नहीं है। इटली के प्रसिद्ध दार्शनिक पॉम्पोना ज , लाॅक एवं ब्रकली ने इस मत की सराहना की लेकिन कोई भी विद्वान मन की प्रकृति एवं स्वरूप का निर्धारण करने में सफल नहीं हो सका। फलस्वरूप मनोविज्ञान के इस अर्थ को भी स्वीकार नहीं किया जा सका। 

चेतना का विज्ञान 

16 वीं शताब्दी से 19वीं शताब्दी तक मनोविज्ञान के अर्थ में परिवर्तन होते रहे। 19वीं शताब्दी में विलियम जेम्स, विलियम वुंट, वाईन्स टीचनर आदि दर्शनिको ने मनोविज्ञान को चेतना के विज्ञान के रूप में परिभाषित किया। चेतना वह अनुभूति है जो मस्तिष्क में पहुंचने वाले आवेगों से उत्पन्न होती है। यह केवल चेतन मन का विश्लेषण है, जो कि काफी नहीं है क्योंकि चेतना के अंतर्गत चेतन मन के साथ अचेतन मन और अर्द्धचेतन मन भी होते है। अचेतन मन और अर्द्धचेतन मन का भी विश्लेषण इन विद्वानों ने नहीं किया। जिस कारण मनोविज्ञान की इस परिभाषा को भी भी मान्यता नहीं मिली। 

व्यवहार विज्ञान 

जे. बी. वाटसन के अनुसार," एक ऐसा मनोविज्ञान लिखना संभव है जिसको ' व्यवहार के विज्ञान के रूप में परिभाजित किया जा सके।" अंततः 20वीं शताब्दी में मनोविज्ञान को व्यवहार के विज्ञान के रूप में परिभाषित किया गया। वाटसन के अलावा वुडवर्ड , मन और स्किनर आदि इस अर्थ के प्रबल समर्थक है तथा वर्तमान में मनोविज्ञान के इसी अर्थ को स्वीकार किया गया है। इस प्रकार हम कह सकते है कि मनोविज्ञान के अंतर्गत मानव मस्तिष्क एवं व्यवहार का अध्ययन वातावरण के परिपेक्ष्य में किया जाता है। मनोविज्ञान समस्त व्यवहारो का अध्ययन करता हैं।

मनोविज्ञान की परिभाषा (manovigyan ki paribhasha)

विलिय , जेम्स के अनुसार," मनोविज्ञान की सर्वोत्तम परिभाषा यह हो सकती है कि यह चेतना की विभिन्न अवस्थाओं का वर्णन और व्याख्या करता है।"

पिल्सबरी के अनुसार," सबसे अधिक संतोषजनक रूप में मनोविज्ञान की परिभाषा मानव व्यवहार के विज्ञान के रूप में की जा सकती है।" 

वुडवर्थ के अनुसार," मनोविज्ञान वातावरण से संबंधित व्यक्ति की क्रियाओं का विज्ञान है।

मैक्ड्यूल के अनुसार," मनोविज्ञान व्यवहार अथवा आचरण का विधायक विज्ञान है।" 

वाटसन के अनुसार," मनोविज्ञान व्यवहार का शुद्ध तथा धनात्मक विज्ञान है।"  

स्किनर के अनुसार,"  मनोविज्ञान व्यवहार एवं अनुभव का विज्ञान है।" क्रो एवं क्रो के अनुसार," मनोविज्ञान मानव व्यवहार व मानव संबंधों का अध्ययन है।"

एन एल मन के अनुसार," आधुनिक मनोविज्ञान का सम्बन्ध व्यवहार की वैज्ञानिक खोज से है।"

एडविन बोरिंग के अनुसार," मनोविज्ञान मानव प्रकृति के अध्ययन का विज्ञान है।" 

विलियम वुंट के अनुसार,"  मनोविज्ञान आंतरिक अनुभूतियों की खोज करता हैं।" 

उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर यह कहा जा सकता है कि मनोविज्ञान वह विज्ञान हैं जिसमें विभिन्न परिस्थतियों के प्रति प्राणी के व्यवहारों या प्रत्युत्तरों जैसे सभी प्रकार की प्रतिक्रियाओं, समायोजन, अनुक्रियाओं तथा अभिव्यक्तियों आदि का अध्ययन किया जाता हैं, तथा साथ ही साथ व्यवहार की अवस्था में उत्पन्न अनुभवों का अध्ययन प्राणी के पर्यावरण के संबंध में किया जाता हैं।

मनोविज्ञान की विशेषताएं (manovigyan ki visheshta)

मनोविज्ञान की आधारभूत विशेषताओं को निम्न तरह व्यक्त किया जा सकता है-- 

1. मनोविज्ञान व्यवहार का विज्ञान है। इसमें मानव एवं पशु दोनों के व्यवहारों का अध्ययन किया जाता हैं। 

2. मनोविज्ञान विधायक विज्ञान हैं। इसमें क्रिया-प्रतिक्रिया, कार्य-कारण एवं उद्दीपक-प्रतिक्रियाओं का विवेचन वैज्ञानिक विधि से किया जाता हैं। 

3. मनोविज्ञान में ज्ञानात्मक क्रियाओं यथा-- स्मृति, विस्मृति, कल्पना, संवेग आदि, संवेदनात्मक क्रियाओं जैसे-- रोना, हँसना, गुस्सा होना आदि तथा क्रियात्मक क्रियाओं जैसे-- बोलना, चलना, फिरना आदि का अध्ययन करता हैं। 

4. मनोविज्ञान व्यक्ति का अध्ययननो-दैहिक प्राणी के रूप में करता हैं। 

5. मनोविज्ञान का संबंध पर्यावरण से हैं, अतः यह पर्यावरण के प्रति अनुक्रिया का भी अध्ययन करता हैं। 

6. मनोविज्ञान एक विधायक विज्ञान है। 

7. मनोविज्ञान, भौतिक तथा सामाजिक दोनों तरह के वातावरण का अध्ययन करता हैं। 

8. मनोविज्ञान, व्यक्ति को मन एवं शरीर से युक्त प्राणी मानते हुए, उसका अध्ययन करता है। दूसरे शब्दों में, मनोविज्ञान, व्यक्ति को मनो-शारीरिक

मनोविज्ञान की प्रकृति (manovigyan prakriti)

इसमें कोई संदेह नही हैं कि मनोविज्ञान एक विज्ञान है क्योंकि मनोविज्ञान की विषय सामग्री में वे सभी तत्व विद्यमान हैं, जिनके आधार पर किसी विषय को विज्ञान की श्रेणी में रखा जा सकता हैं। मनोविज्ञान की प्रकृति वैज्ञानिक इसलिए कही जाती है क्योंकि मनोविज्ञान में विज्ञान के निम्न प्रमुख तत्व पाये जाते हैं-- 

1. वैज्ञानिक विधियाँ 

किसी भी विषय को विज्ञान तभी कहा जा सकता है जबकि उस विषय की अध्ययन विधियाँ वैज्ञानिक हों। मनोविज्ञान की ज्यादातर विधियाँ वैज्ञानिक हैं। मनोविज्ञान की समस्याओं के अध्ययन में प्रयोगात्मक विधि के अतिरिक्त निरीक्षण विधि , सांख्यिकीय विधि, गणितीय विधि , मनोयिति विधि आदि का प्रयोग किया जाता है। मनोविज्ञान की समस्याओं का अध्ययन वैज्ञानिक विधियों से किये जाने से मनोविज्ञान की विषय सामग्री वैज्ञानिक है तथा यह विषय विज्ञान है।

2. प्रामाणिकता 

किसी भी विषय को विज्ञान मानने का दूसरा प्रमुख तत्व प्रामाणिकता है। मनोविज्ञान की विषय सामग्री प्रामाणिक है क्योंकि इसकी समस्याओं का अध्ययन वैज्ञानिक विधियों के द्वारा किया जाता है।

3. वस्तुनिष्ठता  

किसी भी विषय को विज्ञान मानने हेतु आवश्यक है कि उसमें वस्तुनिष्ठता हो। वस्तुनिष्ठता का अर्थ यह है कि जब किसी समस्या का अध्ययन कई अध्ययनकर्ता कर रहे हों तथा वे सभी एक ही निष्कर्ष पर पहुंचे तो कहा जा सकता है कि प्राप्त निष्कर्ष वस्तुनिष्ठ हैं। मनोविज्ञान की समस्याओं और संबंधित घटनाओं का अध्ययन उनके साम्य रूप में ही किया जाता है एवं अध्ययनकर्ता के परिणाम पर पड़ने वाले प्रभावों को नियंत्रित करके अध्ययन किया जाता है। अध्ययनकर्ता नियंत्रण के लिए कई प्रविधियों का सहारा लेता है, अतः मनोविज्ञान की समस्याओं के अध्ययन से जो परिणाम प्राप्त होते हैं, वे वस्तुनिष्ठ होते हैं। 

4. भविष्यवाणी की योग्यता 

किसी भी विषय को विज्ञान मानने के लिए उसमें भविष्यवाणी की योग्यता का होना भी आवश्यक है। भविष्यवाणी की योग्यता का अर्थ यह है कि किसी भी व्यक्ति के व्यवहार का अध्ययन करने के आधार पर यह बताना कि भविष्य में उसका व्यवहार कैसा होगा? यह भविष्यवाणी तभी की जा सकती है जब अध्ययन पूर्ण रूप से वैज्ञानिक हो। मनोविज्ञान की समस्याओं का अध्ययन वैज्ञानिक विधियों के द्वारा वैज्ञानिक ढंग से किये जाने से इन अध्ययनों के आधार पर भविष्यवाणी भी की जा सकती है । 

5. सार्वभौमिकता 

किसी भी विषय को विज्ञान तभी माना जा सकता है जबकि उसके सिद्धांत तथा नियम सार्वभौमिक हों। यदि किसी विषय के सिद्धांतों एवं नियमों का अध्ययन वैज्ञानिक विधियों के द्वारा किया जाता है तथा वे सिद्धांत व नियम प्रामाणिक , वस्तुनिष्ठ और भविष्यवाणी करने की क्षमता रखते हैं, तो वे निश्चित ही सार्वभौमिक भी होते हैं। चूंकि मनोविज्ञान के सिद्धांतों एवं नियमों का अध्ययन वैज्ञानिक विधियों के द्वारा किया जाता है तथा इसकी विषय वस्तु में प्रामाणिकता , वस्तुनिष्ठता और भविष्यवाणी करने के गुण पाये जाते हैं अत : इसके सिद्धांत तथा नियम सार्वभौमिक भी होते हैं। 

विज्ञान के ये सभी पाँचों तत्व मनोविज्ञान की विषय सामग्री में मौजूद हैं, इसलिए कहा जा सकता है कि मनोविज्ञान विज्ञान है। व्यवहार का अध्ययन करने वाला यह विषय शुद्ध विज्ञान की श्रेणी में आता हैं।

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जेम्स ट्रेवर के शब्दों में," मनोविज्ञान एक शुद्ध विज्ञान है जो मानव एवं पशु के व्यवहार का अध्ययन करता है,  यह व्यवहार उसके अंतर्जगत के मनोभावों और विचारों को अभिव्यक्त करता हैं।"

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