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9/24/2021

मनोविज्ञान के उद्देश्य, विषय वस्तु

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मनोविज्ञान के उद्देश्य (manovigyan ke uddeshy)

मनोविज्ञान में मानव के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है। मनोविज्ञान इस बात से अवगत कराता है कि क्यों, कैसे एवं किन परिस्थितियों में वह और दूसरे व्यक्ति अलग-अलग व्यवहार करते हैं? मनोविज्ञान के निम्नलिखित उद्देश्य हैं-- 

1. मानवीय व्यवहारों को जानना 

मनोविज्ञान का एक उद्देश्य मानवीय व्यवहार को जानना हैं।

2. व्यक्ति के असामान्य व्यवहार का अध्ययन करना 

मनोविज्ञान व्यक्ति के असामान्य व्यवहार का अध्ययन करता है, जिससे व्यक्ति के व्यवहार करने का ढंग का पता चलता है।

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 3. मानवीय व्यवहार पर नियंत्रण 

मनोविज्ञान मानवीय व्यवहार पर नियंत्रण किस प्रकार किया जाये? इसका अध्ययन करता है।

4. भविष्यवाणी करना

मनोविज्ञान मानवीय व्यवहार की भविष्यवाणी करता है। जिसमें मनुष्य के कार्य एवं व्यवहार के अध्ययन के द्वारा भविष्यवाणी की जाती है कि उपरोक्त कार्य एवं व्यवहार का परिणाम क्या निकलेगा। 

मनोविज्ञान की विषय-वस्तु (manovigyan ki vishay vastu)

मनोविज्ञान की विषय-वस्तु को निम्न प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है-- 

1. बुद्धि

कक्षा में कुछ बच्चे किसी भी बात को समझाने पर शीघ्र ही समझ जाते हैं लेटिन कुछ बच्चे अनेक बार समझाने पर भी नहीं समझ पाते हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि कुछ बच्चों की बौद्धिक क्षमता अच्छी होती है, तथा कुछ बच्चों की सामान्य होती है तो कुछ बच्चों की बौद्धिक क्षमता निम्न स्तर की होती है। इस बौद्धिक स्तर का मापन विभिन्न परीक्षणों के माध्यम से किया जाता है।

 2. स्मृति एवं विस्मृति

हमें यह तो ज्ञात ही है कि जब हमारा कोई मित्र हमें अपना दूरभाष नम्बर देता है, तो हमें शीघ्र याद हो जाता है लेकिन कुछ समय बाद उसे हम भूल जाते हैं। याद रखने की प्रक्रिया को स्मृति एवं भूल जाने की प्रक्रिया को विस्मृति कहते हैं। दोनों ही क्रियायें शिक्षा एवं जीवन में बहुत अधिक महत्वपूर्ण हैं। सुखद अनुभव तथा सफलता हमें याद रहते हैं जबकि दुखद स्मृतियों को हम भूल जाते हैं। यदि भूलने की प्रक्रिया न हो तो मनुष्य मानसिक रोगों से ग्रस्त हो सकता है।

3. मनुष्य प्रेरणा और सीखना 

बच्चे की कार्यक्षमता इस बात पर निर्भर है कि उसे परिवार में माता-पिता द्वारा विद्यालय में शिक्षकों के द्वारा कितना सराहा जाता है या दण्डित किया जाता है। इन दोनों तत्वों का सीखने पर कितना तथा कैसा प्रभाव पड़ेगा? इसे मनोविज्ञान के अध्ययन से समझा जा सकता है। 

5. रूचि और अभिक्षमता

कुछ बच्चे मिट्टी से खेलते हैं तो कुछ बच्चे विभिन्न औजार जैसे-- हथौड़ा, पेचकस, ड्राइवर, कैंची आदि से खेलते हैं तो कुछ बच्चे किताब पढ़ते रहते हैं, कुछ गुड़ियोरूपी खिलौनों से खेलते हैं, खाना बनाने का खेल खेलते हैं इन सभी क्रिया कलापों से उनकी पसन्द एवं नापसन्द के बारे में पता चलता है। इसी का अध्ययन हम मनोविज्ञान में करते हैं जिसे हम रुचि कहते हैं। यदि बच्चे की रुचि जानकर पढ़ाया जाये तो वह जीवन में अच्छी सफलता प्राप्त कर सकता है । अतः रुचि के साथ-साथ यदि बच्चे में किसी क्षेत्र विशेष में प्रतिभा है तो उसकी उस क्षेत्र में सफलता उच्च-स्तर की हो सकती है। बच्चे की रुचि क्या है? तथा प्रतिभा किस क्षेत्र में है तथा दोनों में क्या सम्बन्ध है? इसका मापन भी मनोविज्ञान द्वारा किया जाता है।

5. व्यक्तित्व

व्यक्तित्व का अर्थ केवल व्यक्ति के बाहरी रंग-रूप या बनावट से नहीं हैं, बल्कि व्यक्तित्व के अन्तर्गत मनुष्य की मानसिक योग्यताओं पर भी विचार किया जाता है जैसे- आपने देखा होगा कि हम किसी से बहुत शीघ्र प्रभावित हो जाते हैं तथा बहुत ही ध्यान से उसकी बातें सुनते हैं एवं हम कहते हैं कि उसका व्यक्तित्व बड़ा ही प्रभावशाली है। मनोविज्ञान में आत्म प्रत्यय, बुद्धि, सामाजिकता, संवेग मूल्य, आत्मविश्वास इत्यादि व्यक्ति के व्यक्तित्व को प्रभावित करते हैं । 

6. बाल अपराध  

किशोरावस्था में जो शारीरिक एवं मानसिक परिवर्तन होते हैं जिसके फलस्वरूप बच्चे कभी-कभी अपराध की ओर अग्रसर हो जाते हैं। ये अपराधी क्यों बन जाते हैं? इसका क्या कारण है? तथा उन्हें सुधारने के उपायों का अध्ययन मनोविज्ञान द्वारा किया जाता है।

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