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9/26/2021

व्यक्तित्व का सिद्धांत, ऑलपोर्ट

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ऑलपोर्ट का व्यक्तित्व का सिद्धांत 

allport ka vyaktitva ka siddhant;गाॅर्डन ऑलपोर्ट ने व्यक्तित्व के निर्माण तथा विकास में वंशानुक्रम, वातावरण, आदतें और विशिष्ट व्यवहार का महत्वपूर्ण योगदान बताया हैं। इसके संदर्भ में उन्होंने उपरोक्त तथ्यों का महत्वपूर्ण वर्णन किया है जो कि निम्न हैं-- 

1. गतिशील  संगठन 

व्यक्तित्व के संदर्भ में ऑलपोर्ट महोदय कहते हैं कि व्यक्तित्व एक गतिशील संगठन है अर्थात् हमारी जो मनोदशा अथवा मानसिक विकार होते हैं, उनका व्यवहारिक प्रयोग ही हमारे व्यक्तित्व का निर्धारण करता हैं, जैसे-- एक व्यक्ति अनुभव में शीघ्र प्रसन्न तथा शीघ्र दुखी होता है तो यह व्यक्ति की संवेगात्मक अस्थिरता रूपी मनोदशा का व्यवहार मे प्रदर्शन माना जायेगा क्योंकि संवेगों की अस्थिरता के कारण ही वह व्यक्ति प्रसन्न तथा दुखी होता हैं। इस तरह मनोदशाओं का गतिशील संगठन ही व्यक्तित्व के रूप मे हमारे समाने आता हैं। 

2. व्यवस्थित व्यवहार 

ऑलपोर्ट महोदय व्यवस्थित व्यवहार को भी व्यक्तित्व का निर्धारक मानते हैं। किसी विशेष परिस्थिति में किया गया व्यवहार जो कि व्यवस्थित रूप में होता हैं, व्यक्तित्व का निर्धारण करता है। उदाहरण के लिए कोई व्यक्ति विपत्ति के समय आशावादी रहता है तथा अपने व्यवहार में अव्यवस्थित रूप का प्रदर्शन नहीं होने देता हैं। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि व्यवस्थित व्यवहार उसके जीवन का जरूरी अंग है तथा वह उसके व्यक्तित्व में शामिल हो जाता हैं। 

3. वंशानुक्रम 

ऑलपोर्ट वंशानुक्रम संबंधी विशिष्ट शीलगुणों को भी अपने व्यक्तित्व सिद्धांत में शामिल करते हैं। हमारे गुण धीरे-धीरे हमारे सक्रिय संस्कारों मे परिवर्तित हो जाते है। ये गुण हमारी आदतें भी हो सकते हैं तथा वंशानुक्रम से प्राप्त हो सकते हैं। ये गुण हमारे संस्कारों के रूप में हमारे व्यवहार में प्रदर्शित होकर व्यक्तित्व निर्धारण तथा विकास का कार्य करते हैं। 

4. वातावरण 

ऑलपोर्ट वातावरण को दो रूपों में स्वीकार करता हैं-- आंतरिक वातावरण तथा बाहरी वातावरण। व्यक्ति के व्यवहार का निर्धारण तथा प्रदर्शन आंतरिक वातावरण और बाहरी वातावरण से होता हैं। उदाहरण के लिए सत्य बोलना तथा दूसरों की मदद करना जब उसका समाज में प्रदर्शन करने पर अनुकूलन का वातावरण मिलता है तो वह बाहरी वातावरण होता हैं। अगर उसे इन कार्यों हेतु समाज का समर्थन मिलता है तो वह उसके व्यवहार का स्थायी अंग बन जाता हैं। इस तरह मानव व्यक्तित्व का निर्धारण होता हैं। 

5. समायोजन 

ऑलपोर्ट महोदय वातावरण के साथ व्यापार के समायोजन को महत्व प्रदान करते हैं। किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व की आवश्यकताएं लक्ष्य प्राप्ति में प्रेरक का कार्य करती हैं। अगर आवश्यकताओं की पूर्ति में व्यक्ति को असफलता मिलती है तो उसका व्यक्तित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हैं। इसके लिए यह जरूरी होता हैं कि किसी न किसी तरह से उसकी आवश्यकता की पूर्ति की जाये एवं वातावरण के प्रति उसका समायोजन किया जाये। इसके लिए आवश्यकता की दिशा में परिवर्तन करके उसको सन्तुष्ट किया जा सकता हैं। अतः व्यवहार में वातावरण के प्रति समायोजन होना जरूरी हैं। 

इस तरह यह स्पष्ट हो जाता है कि ऑलपोर्ट महोदय ने वातावरण, समायोजन, व्यवस्थित, व्यवहार तथा वंशानुक्रम संबंधी गुणों को महत्व प्रदान किया हैं।

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