सामाजिक आन्दोलन, अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएं

सामाजिक आन्दोलन का अर्थ (samajik andolan ka arth)

सामाजिक आन्दोलन सामाजिक परिवर्तन लाने अथवा सामाजिक परिवर्तन को रोकने की दृष्टि से किया जाने वाला एक सामूहिक प्रयास है। अतः स्पष्ट से की सामाजिक आन्दोलन योजनाबद्ध तरीके से किया जाने वाला सामूहिक प्रयास है। जब किसी समाज की संस्थाएं प्रभावपूर्ण तरीके से अपनी भूमिका नही निभा पाती तब समाज मे संबंधित संस्थाओं की भूमिका को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से सामूहिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से सामाजिक आन्दोलन अस्तित्व मे आते हैं।
सामाजिक आन्दोलन क्या हैं? इसे जानने के बाद अब हम सामाजिक आन्दोलन की विभिन्न विद्वानों द्धारा दी गई परिभाषाओं को जानेंगे साथ ही सामाजिक आन्दोलन की विशेषताएं भी जानेंगे।

सामाजिक आन्दोलन


सामाजिक आन्दोलन की परिभाषा (samajik andolan ki paribhasha)

हार्टन एवं हण्ट के अनुसार " सामाजिक आन्दोलन समाज अथवा उसके सदस्यों मे परिवर्तन लाने अथवा उसका विरोध करने का एक सामूहिक प्रयास हैं।
योगेन्द्र सिंह के शब्दों में " वैचारिकी द्वारा परिभाषित सामाजिक उद्देश्य की प्राप्ति के लिए एक व्यक्ति या सामूहिक नेतृत्व के अधीन सामाजिक आन्दोलन संगठित ढंग से जनता मे सामूहिक जुटाव की प्रक्रिया है।
हाबर्ट ब्लूमर के शब्दों में " सामाजिक आन्दोलन जीवन की एक नयी व्यवस्था को स्थापित करने का सामूहिक प्रयास हैं।
एम.एस.ए.राव के शब्दों में " एक सामाजिक आन्दोलन समाज के एक भाग द्वारा समाज मे आंशिक या पूर्ण परिवर्तन लाने के लिए किया गया सामूहिक प्रयास है।

सामाजिक आन्दोलन की परिभाषा के बाद अब हम सामाजिक आन्दोलन की विशेषताओं को जानेंगे।

सामाजिक आन्दोलन की विशेषताएं (samajik andolan ki visheshta)

1. सामाजिक आन्दोलन एक सामूहिक प्रयास हैं।
2. सामाजिक आन्दोलन घटित हो रहे परिवर्तनों को एक निश्चित दिशा देने का प्रयास करता हैं।
3. सामाजिक आन्दोलन जीवन तथा समाज के किसी भी पक्ष से संबंधित हो सकता हैं।
4. सामाजिक आन्दोलन सामाजिक संरचना का प्रतिफल होते हैं अतः सामाजिक संरचना की विशेष परिस्थिति मे उत्पन्न होते हैं।
5. समाज एवं संस्कृति मे पूर्ण अथवा आंशिक परिवर्तन लाने के लिए अथवा विरोध करने के लिए सामाजिक आन्दोलन किया जाता हैं।
6. सामाजिक आन्दोलन त्वरिक परिवर्तन की इच्छा से किये जाने वाला सामूहिक प्रयास होता है।
7. सामाजिक आन्दोलन का संबंध सामाजिक गतिशीलता से होता है।
8. सामाजिक आन्दोलन मे नेतृत्व की भूमिका महत्वपूर्ण होती हैं।

9. सामाजिक आन्दोलन की एक विचारधार होती हैं।
10. सामाजिक आन्दोलन की प्रकृति परिवर्तन समर्थक भी हो सकती है और परिवर्तन प्रतिरोधी भी अर्थात् सामाजिक आन्दोलन परिवर्तन लाने अथवा परिवर्तन रोकने के उद्देश्य से संचालित किये जाते हैं।
11. सामाजिक आन्दोलन सामाजिक चेतना का विस्तार करते है। जब कभी समाज मे आन्दोलन होते है तो परिवर्तन कि प्रक्रिया तीव्र हो जाती है और उससे संबंधित चेतना समाज मे फैल जाती है। आन्दोलन की सफलता भी इस बात पर निर्भर करती है कि आन्दोलन के उद्देश्य से संबंधित चेतना का विस्तार कितना हुआ?

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