9/02/2019

नगरीकरण का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं और प्रभाव

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नगरीकरण (शहरीकरण)

नगर सामाजिक रूप से विषम जातीय व्यक्तियों का एक अपेक्षाकत वृहद् सघन एवं स्थाई होता है। समाजशास्त्री नगरीय और ग्रामीण जीवन की तुलना सामाजिक संबंधो में कार्य दशाओं मे परिवर्तन के आधार पर करते हैं। नगरीय सामाजिक संबंधो मे घनिष्ठ संबंधो का अभाव पाया जाता है।  भारत में बढ़ती जनसंख्या, औद्योगीकरण एवं उन्नति से नगरों के निर्माण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नगर बनने की यह प्रक्रिया अधिक पुरानी न होकर एक प्रकार से नवीनतम प्रक्रिया है।
आज के इस लेख मे हम नगरीकरण का अर्थ, नगरीकरण की परिभाषा, नगरीकरण की विशेषताएं और नगरीकरण के प्रभाव जानेंगे।

नगरीकरण का अर्थ 

ग्राम से नगर बनने की प्रक्रिया को नगरीकरण (शहरीकरण) कहा जाता है। नगरीकरण का अर्थ इस प्रकार स्पष्ट होता है कि जनसंख्या के घनत्व में वृध्दि ही नगरीकरण की ध्घोतक नही है अपितु वहां के सामाजिक व आर्थिक सम्बन्धो में  परिवर्तन, अनौपचारिक सम्बन्धों का औपचारिक सम्बन्धों में परिवर्तन, प्रथमिक समूहों का द्वितीय समूहों में परिवर्तन भी नगरीकरण का ध्घोतक है। जो पहले से ही नगर है उन्हें नगरीकरण नही कहा जा सकता नगरीकरण का तात्पर्य उन स्थानों से है जहाँ नगर बनने की प्रक्रिएं चल रही हो।
नगरीकरण के अर्थ को और भी अच्छे से समझने के लिए हम नगरीकरण की विभिन्न विद्वानों द्वारा दी गई परिभाषों को जानेंगे।

नगरीकरण की परिभाषा 

श्री निवास के अनुसार "नगरीकरण से तात्पर्य केवल सीमित क्षेत्र में जनसंख्या वृध्दि से नहीं है वरन् सामाजिक आर्थिक संबंधो में परिवर्तन से है।

किंग्सले डेविस के अनुसार " नगरीकरण एक निश्चित प्रक्रिया है, परिवेश का वह चक्र है जिससे कोई समाज खेतिहर से औघोगिक समाज में परिवर्तित हो जाता है।"

मारविन ओलसन के अनुसार " नगरीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके अन्तर्गत एक समाज के समुदाय के आकार और शक्ति में वृध्दि होती रहती है।
नगरीकरण का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं और प्रभाव

नगरीकरण की विशेषताएं (nagrikaran ki visheshta)

नगरीकरण की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार है--

1. उद्योगों का केन्द्रयकरण बड़े नगरों मे दृष्टिगोचर होता है।
2. नगरीकरण नगर बनने की प्रक्रिया है।
3. नगरीकरण की प्रक्रिया मे नये नगर बनते हैं एवं महानगरों की उत्पत्ति होती है।
4. कम स्थान में अधिक व्यक्ति निवास करते है।
5. नगरीकरण की प्रक्रिया के दौरान नगरों मे निवासरत व्यक्ति नगरीय जीवन शैली को आत्मसात कर लेते हैं।
6. शिक्षितों की संख्या का अनुपात ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक होता है।

7. अनौपचारिक संबन्ध औपचारिक सम्बन्धों मे परार्वतति होने लगते है।
9. भिन्न-भिन्न संस्कृतियों, भाषाओं एवं धर्म के लोग एक साथ रहने लगते है।
10. औद्योगिकरण की प्रक्रिया होने लगती है।

नगरीकरण के प्रभाव

भारत में नगरीकरण के प्रभाव इस प्रकार से हैं--

1. ग्रामीण जीवन पर प्रभाव
नगरीकरण ने ग्रामीण जीवन को प्रभावित किया है। ग्रामीण लोग शहर की और उद्योगोन्मुखी व्यवसायों, शिक्षा आदि सुविधाओं के लिए नगर की ओर आकृष्ट हो रहे है।

2. जीवन में कृत्रिमता
नगरीकरण के कारण आज जीवन में वास्तविकता नही रही है। नगरीकरण से पूर्व मानव 'सादा जीवन उच्च विचारों में विश्वास रखता था लेकिन उसका झुकाव कृत्रिमता की ओर होता जा रहा है। मानव जीवन मे अब कृत्रिमता आ गई है अब वह दिखावे एवं शान-शौकत में अधिक विश्वास रखने लगा है।

3. सामाजिक मूल्यों में परिवर्तन
नगरीकरण के फलस्वरूप अब सामाजिक मूल्यों मे परिवर्तन होने लगा है। यह नगरीकरण का एक सामाजिक प्रभाव हैं। व्यक्तिवादी जीवन मूल्यों में सामूहिकता की भावना मे निरंतर कमी होती जा रही है। जीवन में नैतिकता और विश्वास का अभाव होने लगा है और स्वार्थ की भावना बढ़ती जा रही है।

4. धार्मिक जीवन पर प्रभाव
नगरीकरण का धार्मिक जीवन पर भी व्यापक प्रभाव पड़ रहा है।   धार्मिक विश्वास, परंपरा, कर्मकाण्ड आदि के तौर तरीक बदल ने लगे है। अब अंधविश्वासों को बढ़वा देने वाले तत्व समाप्त होने लगे है। शिक्षा की सहायता से अब वैज्ञानिक और तर्क प्रधान सोच विकसित होने लगी है।

5. मनोरंजन का व्यापारीकरण
ग्रामीण समाज मे मनोरंजन का उद्देश्य धन कामना कभी नही रहा है ग्रामीण समाज मे मनोरंजन तनावमुक्ति एवं साथ-मिलजुकर बैठने के लिए किया जाता है। लेकिन नगरीकरण मे मनोरंजन का उद्देश्य धन कामना रहा है।

6. महिलाओं कि स्थति में परिवर्तन
नगरीकरण के प्रभाव से महिलाओं की स्थिति मे परिवर्तन आने लगे है। अब वह घर के अंदर अपनी लैंगिक भूमिकाओं तक सीमित नही है। बल्कि आर्थिक रूप से भी वह आत्मनिर्भर रहने लगी है। अब शिक्षा एवं राजनीति जैसे क्षेत्रों मे महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है।

7. हम की भावना का अभाव
नगरीकरण के कारण अब हम की भावना मे कम आने लगी है। नगरीकयण ने व्यक्तिवादीता को जन्म दिया है। प्रत्येक व्यक्ति यहां केवल अपने ही हित के बारें मे सोचता है।

8. सामाजिक संस्थाओं में परिवर्तन
नगारीकरण के प्रभाव से परिवार और विवाह में निरंतर परिवर्तन बढ़ता जा रहा है। अब संयुक्त परिवार प्रणाली एकल परिवार प्रणाली मे बदलने लगी है। नगरीकरण के प्रभाव से व्यक्तिवादी सोच पनने लगी है।

9. सेवा क्षेत्रों का विकास 
नगरीकरण की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप नगरीय जनसंख्या के प्रबंधन हेतु सेवा क्षेत्रों का विकास हुआ है। कई तरह की शासकीय व अशासकीय सेवाओं मे वृद्धि हुई, जैसे; अस्पताल, पुलिस, न्यायालय, शिक्षण संस्थान, गैर शासकीय संस्थान इत्यादि।
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दोस्तो इस लेख मे हमने नगरीकरण का अर्थ,परिभाषा, विशेषताएं और नगरीकरण के भारतीय समाज पर पड़ने वाले प्रभावों के बारें मे जाना। इस लेख से सम्बन्धित आपका कोई सवाल या प्रश्न है तो नीचे comment कर जरूर बताए।
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