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9/02/2019

आधुनिकीकरण का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं और प्रभाव

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आधुनिकीकरण (आधुनिकता modernisation)  

aadhunikikaran arth paribhasha visheshtayen prabhav;आधुनिकता का अभिप्राय जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में समकालीन को परम्परागत से अगल समझना है। समाज के अन्तिम से अन्तिम मूल्यों के अनुसार रहने वाली वस्तु को आधुनिक कहते हैं। उस वस्तु के इस प्रकार के रहने के गुण अथवा स्थिति को हम आधुनिकता कहते है। आधुनिकीकरण की प्रक्रिया वैज्ञानिक ज्ञान के विस्तार का सूचक है।
आज के इस लेख मे हम आधुनिकता (आधुनिकीकरण) का अर्थ, आधुनिकीकरण (आधुनिकता) की परिभाषा, आधुनिकीकरण की विशेषताएं और आधुनिकीकरण (आधुनिकता) के प्रभाव के बारें में चर्चा करेंगे।

आधुुनिकीकरण का अर्थ (aadhunikikaran kya hai)

आधुनिकीकरण सामाजिक परिवर्तन की एक प्रक्रिया है जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण व तर्क पर आधारित है। सैद्धांतिक तौर पर इसकी शुरुआत यूरोपीय ज्ञानोदय से हुई। आईजनस्टेड के अनुसार ऐतिहासिक रूप से आधुनिकीकरण परिवर्तन की एक ऐसी प्रक्रिया है जो पश्चिमी यूरोप जैसी सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक व्यवस्था की ओर उन्मुख है।
यहाँ यह स्पष्ट करना आवश्यक होगा कि आधुनिकीकरण और पश्चिमीकरण अलग-अलग प्रक्रियाएं है। पश्चिमीकरण मे पश्चिमी प्रतिमान जैसे प्रौद्योगिकी, जीवन शैली, विचार, मूल्य इत्यादि के अनुकरण की प्रवृत्ति विकसित होती है। जबकि आधुनिकीकरण मे पश्चिम के विकसित देशों के अनुरूप सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक विकास की प्रक्रिया के अनुरूप परिवर्तन को समझा जाता है।

आधुनिकीकरण की परिभाषा (aadhunikikaran ki paribhasha)


अलातास के अनुसार; आधुनिकीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके आधुनिक वैज्ञानिक ज्ञान का समाज मे प्रचार एवं प्रसार होता है। जिससे समाज मे व्यक्तियों के स्तर मे सुधार होता है और समाज अच्छाई की तरफ बढ़ता है।
श्मामाचरण दुबे के अनुसार; आधुनिकीकरण एक प्रक्रिया है जो परंपरागत या अर्द्धनपरंरागत अवस्था से प्रौधोगिकी के किन्ही इच्छित प्रारूपों तथा उनसे जुड़ी हुई सामाजिक संरचना के स्वरूपो, मूल्यों, प्रेरणाओं और सामाजिक आर्दश नियमों की ओर से होने वाले परिवर्तन को स्पष्ट करती है। 
डेनियल लर्नर के अनुसार; आधुनिकीकरण परिवर्तन की एक प्रक्रिया है जिसका संबंध मुख्य रूप से विचारों एवं मनोवृत्तियों के तरीको मे बदलाव, नगरीकरण मे वृध्दि, साक्षारता का बढ़ना, प्रति व्यक्ति आय का अधिक होना तथा राजनीतिक सहभागिता मे वृध्दि जैसे परिवर्तन से होता है। 
सी.ई.ब्लैक के अनुसार; आधुनिकीकरण वह प्रक्रिया है जिससे ऐतिहासिक रूप से उत्पन्न संस्थाएँ तेजी से बदलती हुई नई जिम्मेदारियों के साथ अनुकूलित होती हैं जिसमें वैज्ञानिक प्रगति से जुड़ी अपने परिवेश पर नियंत्रण की क्षमता वाले मनुष्य के ज्ञान मे अभूतपूर्व वृद्धि परिलक्षित होती हैं।

आधुनिकीकरण (आधुनिकता) की विशेषताएं (Features of modernization in Hindi)

आधुनिकीकरण की निम्न विशेषताएं है--
1.  राजनीतिक एवं सामाजिक आंदोलन 
आधुनिकीकरण के परिणामस्वरूप नवीन सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक प्रतिमान स्थापित किये जाते है। इन नवीन प्रतिमानों की स्थापना के लिए विभिन्न प्रकार के सामाजिक, राजनीतिक आंदोलन किये जाते है। इसलिए आधुनिक तथा आधुनिकता की ओर उन्मुख समाजों मे ऐसे आंदोलनों का प्रभुत्व रहता है। सामाजिक क्षेत्र में रूढ़ियों, परम्पराओं एवं प्रचलित कुप्रथाओं को समाप्त करने के लिए आंदोलन किये जाते है। 
2. शिक्षा में व्यापकता 
आधुनिकीकरण की प्रक्रिया प्रबल होने के साथ-साथ शिक्षा का प्रचार एवं प्रसार होता है। आधुनिकता का एक लक्षण शिक्षित होना भी है। आधुनिक कहलाने वाले समाज एवं राष्ट्र अपने समाज के प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षित बनाना चाहते है।
3. नगरीकरण 
आधुनिकीकरण के लक्षणों मे नगरीकरण भी प्रमुख है। आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के प्रबल होने के साथ-साथ नगरों की संख्या मे वृद्धि होती है। नगरों के आकार एवं जटिलता मे भी वृद्धि होती है। आधुनिकीकरण के परिणामस्वरूप नगरीकरण होता है। नगरीकरण के परिणामस्वरूप भी आधुनिकीकरण की प्रक्रिया तीव्र होती है। ये दोनों अन्योन्याश्रित है। 
4. संरचनात्मक विभेदीकरण तथा परिवर्तन 
आधुनिकीकरण के परिणामस्वरूप संबंधित समाज मे संरचनात्मक विभेदीकरण तथा निरन्तर परिवर्तन भी दृष्टिगोचर होता है। इस स्थिति मे पूर्व विद्यमान आर्थिक एवं सामाजिक संगठन अपना स्थान खोकर क्रमशः विघटित होने लगते है। उनके स्थान पर कुछ नये संगठन गठित होने लगते है। इसमें संरचनात्मक परिवर्तन होता है।
5. सामााजिक गतिशीलता 
सामााजिक गतिशीलता की प्रक्रिया के अंतर्गत सम्बन्धित समाज अथवा व्यक्ति परम्परागत रूप से प्रचलित सामाजिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक तत्वों को त्यागकर उनके स्थान पर व्यवहार के नये प्रतिमानों को अपनाते हैं।
6. सामाजिक विभेदीकरण 
आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन के विभिन्न पक्षों मे विभेदीकरण बढ़ता है। यह विभेदीकरण सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक तथा राजनीतिक सभी पक्षों मे देखा जा सकता है। इस विभेदीकरण के परिणामस्वरूप इन क्षेत्रों मे क्रमशः जटिलता बढ़ती है। आर्थिक क्षेत्र मे होने वाले आधुनिकीकरण का परिणाम औद्योगिकरण है।
7. अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग का विकास 
जब आधुनिकीकरण का विस्तार होता है, तो अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र मे सहयोग एवं संगठन स्थापित होते है। राष्ट्रसंघ तथा संयुक्त राष्ट्रसंघ जैसे संगठन इसके उदाहरण है।
एलेक्स इंकेल्स ने छः आधुनिक कहे जाने वाले समाजों का अध्ययन कर आधुनिकीकरण प्रक्रिया की निम्नलिखित विशेषताओं का उल्लेख किया है--
1. नये विचारों को स्वीकार करना।
2. नई पद्धतियों का उपयोग करना।
3. प्रत्येक विषय पर अपना मत तैयार करना।
4. समय कारक के प्रति सचेत रहना।
5. अतीत की अपेक्षा वर्तमान व भविष्य मे अधिक रूचि लेना।
6. समय की नियमितता का ध्यान रखना।
7. कार्य कुशलता तथा योजनाबद्ध तरीकों पर अधिक बल देना।
8. विश्व के प्रति व्यावहारिक दृष्टिकोण रखना।
9. विज्ञान तथा टेक्नोलॉजी मे विश्वास करना।
10. न्याय के समान वितरण को प्रोत्साहन देना।

आधुनिकीकरण के प्रभाव (aadhunikikaran ke prabhav)

आधुनिकीकरण के प्रभाव निम्नलिखित है--
1. कृषि और ग्रामीण उधोगों मे उन्नति 
आधुनिकीकरण का अच्छा प्रभाव कृषि और ग्रामोद्योगों पर भी पड़ा है। कृषि नवाचार मे वृध्दि हुई है। आधुनिक मशीनों उपकरणों तथा नये ज्ञान के प्रयोग से कृषि विकास मे मदद मिली है। इस सब के परिणामस्वरूप ग्रामीण निर्धनता मे कमी आई है।
2. बेरोजगारी मे वृध्दि 
आधुनिकीकरण के फलस्वरूप मशीनीकरण भी तेजी से बढ़ रहा है। मशीनीकरण के कारण श्रमिकों को रोजगार नही मिल पा रहा है क्योंकि मशीनों के कारण श्रमिकों की कम आवश्यकता होती है।
3. बाह्रा संपर्क 
आधुनिकीकरण के कारण नये ज्ञान मे वृध्दि हुई है और तार्किक दृष्टिकोण भी बढ़ा है। संचार के साधनो मे वृध्दि से समूची दुनिया से संपर्क सरल हो गया है। जिससे सांस्कृतिक परिवर्तन की गति बढ़ी है।
5. औपचारिकता में वृध्दि 
आधुनिकीकरण से फलस्वरूप औपचारिक सम्बन्धों में वृध्दि हो रही है। औपचारिक सम्बन्धों के कारण घनिष्ठ संबंधों का अभाव बढ़ता जा रहा है। अब सामाजिक संबंधों में कृत्रिमता अधिक पायी जाती है।
4. स्त्रियों की स्थिति मे परिवर्तन 
भारतीय समाज मे स्त्रियों की स्थिति मे बड़ा परिवर्तन हो गया है। उनकी शिक्षा एवं स्वतंत्रता ने पुराने बंधनों एवं पर्दा-प्रथा को तोड़ दिया है। आजकल जहाँ एक ओर भारतीय समाज मे स्त्रियां परम्परावादी है, वही दूहरी ओर वे आफिसों, बैंकों आदि मे कार्य कर रही है तथा उनमे आधुनिकता की भावना का विकास हुआ है।
6. पश्चिमीकरण
आधुनिकीकरण के कारण भारत में पश्चिमीकरण तेजी से हो रहा है। भारत में सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, शिक्षा, आदि सभी क्षेत्रो में पश्चिमीकरण के प्रभाव देखा जा सकता है।
7. नगरीकरण
 भारत में नगरीकरण तेजी से हो रहा है। नगरीकरण की इस प्रक्रिया से ग्रामीण जीवन भी प्रभावित हुआ है। ग्रामवासी अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु नगरों में जाने लगे है। नगरीकरण से भीड़-भाड़ अपराध, गंदी बस्तियों का भी जन्म हो रहा है। ये सभी प्रवृत्तियां आधुनिकता से सम्बन्धित है।
8. वैवाहिक संस्थाओं मे परिवर्तन 
भारतीय समाज मे अब विवाह मे पुरानी परंपराएं समाप्त हो रही है तथा जीवन-साथी के चुनाव मे अधिक स्वतंत्रता देखने को मिलती है। विधवा पुनर्विवाह होने लगे है तथा नगरों मे बाल विवाहों की संख्या घटती जा रही है।
9. धार्मिक पुनरूत्थान एवं सुधार 
आधुनिकीकरण के इस क्रम मे हिन्दू धर्म के पुनरूत्थान एवं सुधार के प्रयासों को भी सम्मिलित किया जा सकता है। पश्चिमी शिक्षा व मूल्यों से प्रेरित होकर भारतीय समाज मे ब्रह्रा समाज, प्रार्थना समाज, आर्य समाज, रामकृष्ण मिशन आदि महत्वपूर्ण संस्थाओं का जन्म व विकास हुआ, जिन्होंने हिन्दू धर्म अथवा आर्य धर्म मे उत्पन्न बुराइयों को दूर करने के लिए व्यावहारिक कदम उठाये, परिणामस्वरूप धार्मिक आडम्बर व कर्मकाण्डों मे कमी आयी, ज्ञान-विज्ञान का प्रसार हुआ और दुखीजनों की सेवा करने के लिए प्रेम के मार्ग का अनुसरण किया जाने लगा। वास्तव मे, परम्परागत भारतीय समाज की दृष्टि से ये परिवर्तन महत्वपूर्ण है।
10. विश्वव्यापी वैधानिक व्यवस्था 
विश्वव्यापी वैधानिक व्यवस्था का विकास आधुनिकीकरण की एक अभिव्यक्ति के रूप मे सामने आया और यह स्थिति भारतीय समाज के परम्परागत आधारों को परिवर्तित करने मे काफी प्रभावपूर्ण रही है। यह नवीन वैधानिक व्यवस्था ब्राह्मणों के अधिकारों पर आधारित परम्परागत वैधानिक व्यवस्था से भिन्न थी। इस व्यवस्था के अंतर्गत भारतीय समाज के विभिन्न क्षेत्रों के लिए अनेक कानून पारित किये गये। 
11. सामााजिक संस्थाओं मे परिवर्तन 
आधुनिकीकरण की प्रक्रिया से संबंधित कुछ अन्य कारकों, जैसे-- नगरीकरण, पश्चिमी शिक्षा, यातायात व संचार के विकसित साधनों आदि का गहरा प्रभाव भारतीय सामाजिक जीवन तथा परम्परागत तौर पर प्रभावशाली संस्थाओं पर पड़ा। इस प्रकार जाति, संयुक्त परिवार, विवाह, पंचायत आदि सभी मे बड़े  परिवर्तन हुए। जातीय संरचना एवं संस्तरण मे परिवर्तन करने मे संस्कृतिकरण की प्रक्रिया भी सहायक रही है, भले ही इसका प्रभाव सीमित रहा हो। इस प्रकार डाॅ. सिंह, डाॅ. श्रीनिवासन के सांस्कृतिकरण के सिद्धांत को सीमित रूप मे ही स्वीकार करते है।
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3 टिप्‍पणियां:
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  1. Samajik karan va adhunikikaran mein antar

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  2. बहुत ही अच्छा आलेख, छात्रोपयोगी है, आम आदमी के लिए भी ज्ञान वर्धक है।💐👍🙏👬

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    1. अपने विचार बताने के लिए धन्यवाद, 😇😇😇

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