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11/21/2021

अमेरिका के संविधान की विशेषताएं

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अमेरिका का संविधान 

ब्रोगन के अनुसार," अमेरिकी शासन पद्धित की यह विशेषता हैं कि उसके अंतर्गत न तो तानाशाही के अत्याचार के लिए स्थान हैं और न अराजकता के लिए प्रोत्साहन हैं। इसके विपरीत इस व्यवस्था के अन्तर्गत रहते हुए अमेरिकी जनता समृद्ध हुई हैं।" 
ब्रिटिश संविधान की तरह ही अमेरिकी संविधान भी विश्व के संविधानों में विशिष्ट स्थान रखता हैं। संयुक्त राज्य अमेरीका का संविधान वर्तमान लिखित संविधानों में सबसे अधिक प्राचीन हैं। इसका जन्म उस वक्त हुआ जबकि फ्रांस में "राजतंत्र" रोम में "पवित्र साम्राज्‍य" पेकिंग में "स्वर्ग के आदेश" और "संत साम्राज्‍य" का अस्तित्व था। कालांतर में राज्य शनै:शनै: अतीत के गर्भ में समाहित होते गये और अमेरीकी संविधान तमाम संघर्षों व टकराव के बावजूद आज भी जीवंत हैं। एक आदर्श हैं। 
संयुक्त राज्य अमेरिका का संविधान राष्ट्रीय एकता और स्थानीय स्वशासन का सुन्दर समन्वय हैं। यह संविधान आन्तरिक गड़बड़ी व बाहरी आक्रमणों के विरूद्ध ढाल बनकर रहा है। संविधान में व्यक्ति के अधिकारों को महत्वपूर्ण माना गया हैं तथा सभी संवैधानिक संस्थाओं का लोकतन्त्रीय आधार रखा गया है।
संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान के मुताबिक अमेरिका मे राष्ट्रपति ही मुख्य कार्यपालिका का मुखिया तथा स्वामी होतो है जबकि भारत मे मुख्य कार्यपालिका का वास्तविक स्वामी प्रधानमंत्री होता है, आज हम जानेंगे विश्व के सबसे संक्षिप्त संविधान अर्थात अमेरिका के संविधान की विशेषताएं।
अमेरिका का संविधान

अमेरिका के संविधान की विशेषताएं (america ka samvidhan ki visheshta)

1. विश्व का सबसे संक्षिप्त संविधान
दोस्तो अमेरिका का संविधान आकार में विश्व मे सबसे छोटा संविधान है अगर कोई इसे अमेरिकी संविधान को पढ़ने बैठे तो वह इसे केवल 30 मिनट में ही पूरे संविधान को पढ़ सकता है। इसीलिए अमेरिकी संविधान के बारें में जॉन्सन महोदय ने कहा है कि", संविधान का ढाँचा बनाने वालों ने हमें अच्छा श्री गणेश कराया किन्तु आवश्यकतावश   उन्होंने शेष बातों को भविष्य पर ही छोड़ दिया है।
भारतीय संविधान में 395 अनुच्छेद है जबकि अमेरिका के संविधान मे 7 अनुच्छेद है।  अमेरिका के संविधान में केवल मूल बातों को ही लिखा गया है।
2. दोहरी नागरिकता
अमेरिकी संविधान की दूसरी प्रमुख विशेषता यह है कि अमेरिका का प्रत्येक नागरिक दोहरी नागरिकता को धारण करता है। पहली नागरिकता उस राज्य की जहाँ वह रहता है और दूसरी नागरिकता अमेरिका की धारण करता है। उदाहरण के लिए आप अमेरिका के नागरिक है और अमेरिका के राज्य अलास्का के निवासी है तो आपकी एक नागरिकता अलास्का की होगी और दूसरी अमेरिका की।
3. मौलिक अधिकारों का वर्णन
अमेरिकी संविधान में प्रत्येक नागरिक के लिए मौलिक अधिकारों का वर्णन किया गया है। नागरिको के मौलिक अधिकारों का लेखबध्द रूप से उल्लेख विश्व के अन्य संविधानों के लिए अमेरिका की ही देन है। जिसका अनुकरण भारत, जापान, पाकिस्तान, आयरलैंड आदि देशो के द्वारा भी किया गया है। अमेरिका के मौलिक अधिकारों में यह अधिकार शामिल है---
1. धर्म स्वतन्त्रता का अधिकार।
2. भाषा अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतन्त्रता का अधिकार।
3. शिक्षा का अधिकार।
4 . आवेदन पत्र देने का अधिकार।
5. शोषण के विरूध्द अधिकार।
इसके अलावा और भी अनके अधिकारों का वर्णन किया गया है।
4. कठोर संविधान
अमेरिका के संविधान की प्रमुख विशेषता यह है कि यह विश्व के सभी संविधानों में सबसे कठोर संविधान है। कठोर संविधान हम उस संविधान को कहते है, जिसमें परिवर्तन व संशोधन के साधारण व्यवस्थापन की विधि से भिन्न एक प्रकिया की व्यवस्था हो अर्थात साधारण कानूनों की तरह जिसमें परिवर्तन न किया जा सकें। अमेरिकी संविधान एक ऐसा ही संविधान है, जिसमें संविधान संशोधन के लिए उस प्रक्रिया से भिन्न प्रकिया को प्रयोग मे लाया जाता है। वस्तुतः संघीय संविधान के लिए यह अचलता (कठोरता) आवश्यक है। इसीलिए अमेरिका के संविधान को अचल बनाया गया है।
अमेरिका
5. जनता का संविधान
अमेरिका के संविधान को जनता का संविधान भी कहा जाता है। क्योंकि इसका निर्माण जनता के प्रतिनिधियों द्वारा किया गया है। अमेरिका की जनता इसे सदियों से स्वीकार करती चली आयी है। संविधान की भूमिका मे लिखा गया है", हम संयुक्त राज्य अमेरिका के लोग संविधान का निर्माण करते व उसे प्रतिष्ठित करते है। इस संविधान का निर्माण इस सिध्दांत के आधार पर हुआ है कि जनता को आत्म निर्णय का अधिकार प्राप्त है। अमेरिका के संविधान को जनता का संविधान इसलिए भी कहा जाता है कि उसमें प्रभुता देश कि जनता में ही निहित है। जनता ने ही देश के शासन के ढाँचे को निर्धारित किया है तथा वही लोकतान्त्रिक ढंग से यह निर्णय करती है कि उसके प्रशासक कैसे होंगे। प्रभुता सम्पन्न होने के नाते जनता को यह अधिकार है कि वह किसी भी सरकार जो अपनी शक्तितों का दुरूपयोग करती है तो उसे अमेरिका की जनता बदल सकती है।
6. संघात्मक व्यवस्था
अमेरिका के संविधान के स्वरूप संघात्म है। अमेरिका मे 51 राज्य है और भारत की ही तरह केन्द्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन किया गया है। अमेरिका मे न्यायपालिका संविधान के संविधान के संरक्षक के रूप मे काम करती है।
7. नियन्त्रण व सन्तुलन की व्यवस्था
अमेरिका मे सरकार के तीनों अंगो के लिए ऐसा प्रबन्ध कर दिया गया है कि तीनों आपस मे एक-दूसरे पर ऐसा नियन्त्रण बनाये रखें कि शक्ति का सन्तुलन बना रहे।
उदाहरण के लिए राष्ट्रपति देश का प्रमुख कार्यपालक या स्वामी है। उसके बारें मे कहा जाता है", कि दुनिया मे वह सबसे अधिक शक्तिशाली कार्यपालक है। राष्ट्रपति कि शक्तियों पर अमेरिकी काँग्रेस का नियन्त्रण रहता है।
वह राष्ट्रपति को अपनी शक्तियों के दुरूपयोग करने से रोकती है। काँग्रेस को अधिकार है कि वह प्रति वर्ष देश का बजट स्वीकार करे। यदि अमेरिका का राष्ट्रपति मनमानी करना चाहे और यदि धन व्यय करने की स्वीकृति न मिले तो राष्ट्रपति ऐसा नहीं कर सकता। दूसरी ओर राष्ट्रपति भी काँग्रेस की विधायी शक्तियों पर नियन्त्रण रखता है। काँग्रेस द्वारा पारित सभी विधायकों के लिए यह जरूरी है कि कानून बनाने से पहले राष्ट्रपति उन्हें स्वीकृति प्रदान करें। राष्ट्रपति को विधेयकों पर वीटो करने का अधिकार है। राष्ट्रपति को अधिकार है कि वह किसी विधेयक को स्वीकार करें या न करें इसी के साथ कांग्रेस को भी यह अधिकार है की वह राष्ट्रपति द्वारा अस्वीकृत विधेयक को पुनः पारित कर दे। तीसरी ओर विधायिका तथा कार्यपालिका पर न्यायपालिका का भी नियन्त्रण रहता है। न्यायपालिका, विधायिका तथा कार्यपालिका दोनों के कार्यों का पुनरीक्षण कर सकती है। यदि उनके कार्य संविधान के विरूध्द हैं तो वह उन्हें असंवैधानिक घोषित कर सकती है। इस प्रकार हम देखते है कि अमेरिका मे नियन्त्रण व सन्तुलन की व्यवस्था की गई है।
8. लिखित संविधान
अमेरिका का संविधान लिखित संविधान है जिसका निर्माण अमेरिका की जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों द्वारा किया गया है।
9. शक्तियों का विभाजन
अमेरिका के संविधान की विशेषता यह है कि यहाँ कि अमेरिका में कार्यपालिका, विधायिका तथा न्यायपालिका तीनों की शक्तियों का अलग-अलग विभाजन है। संविधान के पहले अनुच्छेद में यह यह की गयी है कि", संविधान में दि गयी विधायी शक्तियाँ कांग्रेस में निहित होगी।"" संविधान के तीसरे अनुच्छेद मे लिखा है न्याय सम्बन्धी शक्ति एक सर्वोच्च न्यायालय तथा उन के नीचे के न्यायालय में होगी।
10. अध्यक्षात्मक शासन
अमेरिका मे अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली है। वहाँ राज्य का अध्यक्ष राष्ट्रपति होता है जो कार्यपालिका का वास्तविक स्वामी होता है। अमेरिका का राष्ट्रपति ब्रिटेन के राजा और भारत के राष्ट्रपति की तरह नाममात्र का कार्यपालक नही होता है। उसकी शक्तियाँ वास्तविक होती है उसके सभी मंत्री उसके प्रति उत्तरदायी होते है। अमेरिका का राष्ट्रपति 4 बर्ष के लिए चुना जाता है।
11. सीनेट के शिष्टाचार की परम्परा 
संयुक्त राज्य अमेरिका के शासन में सीनेट के शिष्टाचार की एक अनोखी परम्परा पड़ गई हैं। इसके अनुसार राष्ट्रपति किसी राज्य में नियुक्‍ति करते समय उस राज्य के सीनेटर से परामर्श करता हैं इसके एवज में वह अनौपचारिक रूप से सीनेटरों का उन विधेयकों को पारित कराने में सहयोग प्राप्त कर लेता हैं जिन्हें वह प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए पारित कराना आवश्यक मानता हैं। इससे सीनेट के सदस्यों का महत्व बढ़ जाता है और राष्ट्रपति को अपने उन विधेयकों को आवश्यक बहुमत जुटाने में सुविधा होती हैं, जिनमें संसद में प्रायः (विरोधी दल बहुमत में होने से) पारित होने की उम्मीद नहीं होती। 
12. संविधान की सर्वोच्चता 
अमेरिका में संविधान की सर्वोच्चता के सिद्धांत को अपनाया गया हैं। संविधान सर्वोच्च है तथा उसका उल्लंघन करने का अधिकार शासन के किसी भी अंग-- व्यवस्थापिका, कार्यपालिका अथवा न्यायपालिका को नहीं हैं। संविधान के अनुच्छेद 6 में व्यवस्था की गई कि," यह संविधान और इसके बनाये गये सभी कानून तथा भविष्य में की जाने वाली संधियाँ इस देश का सर्वोच्च कानून होगा। किसी भी राज्य के संविधान अथवा कानून की कोई बात जो इस संविधान के विरूद्ध होगी, अवैध समझी जायेगी।" 
13. शक्तिशाली द्वितीय सदन 
संयुक्त राज्य अमेरिका का द्वितीय और उच्च सदन सीनेट दुनियां का सबसे शक्तिशाली द्वितीय सदन हैं इसको विधायन संबंधी शक्तियों में तो प्रथम सदन के बराबर बनाया ही गया हैं, इसे विदेश नीतियों के निर्माण एवं नियुक्ति को रद्द करने का अधिकार देकर कार्यपालिका संबंधी शक्तियां भी दी गई हैं। इसे जांच करने का महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में राष्ट्रपति और सीनेट मिलाकर प्रतिनिधि सभा की अवहेलना कर सकते हैं। जबकि प्रतिनिधियों (प्रतिनिधि सभा वे सदस्यों का कार्यकाल केवल दो वर्ष हैं) वर्तमान में सीनेट में 100 सदस्य ही होते हैं, अतः सदन छोटा होने से सीनेटर को बोलने और विचार अभिव्यक्ति की अधिक स्वतंत्रता व समय मिलता हैं। सीनेटर पूरे ही राज्य से चुनकर आता हैं अतः सीमित निर्वाचन क्षेत्र में चुने गये प्रतिनिधि (सभासद) से वह अधिक लोकप्रिय होता हैं।
यह जानकारी आपके के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगी

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