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11/22/2021

अमेरिका के संविधान के स्त्रोत

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अमेरिकी संविधान के स्त्रोत 

america ke samvidhan ke srot;फिलाडेल्फिया सम्मेलन द्वारा निर्मित प्रलेख ही अमेरिकी संविधान नही हैं। यद्यपि अमेरिका के संविधान को निर्मित संविधानों की श्रेणी में रखा जाता है किन्तु इसका यह अभिप्राय नहीं हैं कि अमेरिकी संविधान का विकास नहीं हुआ। सन् 1789 में लागू होने से लेकर वर्तमान तक अमेरिकी संविधान बदलते परिवेश व आवश्यकओं के अनुकूल निरन्तर परिवर्तित तथा विकसित होता रहा हैं। 18 वीं शताब्दी का कृषि प्रधान देश आज औद्योगिक दृष्टि से विश्व की महाशक्ति बन गया हैं।

अमेरिकी संविधान के प्रमुख स्त्रोत अथवा संविधान में विकास व परिवर्तन करने में जिन तत्वों का योगदान रहा हैं, वे निम्नलिखित हैं-- 

1. लिखित संविधान 

अमेरिका में 1789 में फिलाडेल्फिया सम्मेलन में तैयार किये संविधान का ढाँचा अब भी लागू हैं। अतः फिलाडेल्फिया सम्मेलन द्वारा निर्मित संविधान-प्रलेख अमेरिकी संविधान का मूलभूत स्त्रोत हैं। 

2. संविधान संशोधन

संविधान संशोधनों ने लिखित संविधान पर आवश्यक चर्बी चढ़ाने का कार्य किया हैं। सन् 1789 में लागू होने से लेकर वर्तमान तक बदलते परिवेश व आवश्यकओं के अनुरूप निरन्तर संशोधनों ने अमेरिकी संविधान को परिस्थियों के अनुकूल ढालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं। सन् 1789 से अब तक अमेरिकी संविधान में 27 संशोधन हो चुके हैं। 

3. न्यायिक व्याख्याएँ 

अमेरिकी संविधान के विकास में सर्वोच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण भूमिका रही हैं। अमेरिकी संविधान के विकास करने में न्यायापालिका के निर्णयों का योगदान देखते हुए व्याख्याकारों ने यहाँ तक कह डाला है कि," सर्वोच्च न्यायालय अविरल गति से चलने वाली एक संवैधानिक परिषद् हैं।" 

संविधान में अनुच्छेदों की व्याख्या करने का कार्य शनैःशनैः सर्वोच्च न्यायालय ने पूरी तरह से अपने हाथ मे ले लिया हैं। न्यायालय ही निर्णय करते हैं कि कोई कानून अथवा कार्य संविधान के अनुकूल है या नहीं। इसके लिए न्यायाधीश संविधान की व्याख्या करते हैं और इस प्रक्रिया में कभी-कभी न्यायाधीशों द्वारा संविधान के उपबंधों को नवीन अर्थ प्रदान कर दिया जाता हैं। 

4. कांग्रेस द्वारा पारित अधिनियम 

अमेरिका के लघु संविधान को कांग्रेस द्वारा पारित अधिनियमों से जीवन मिला हैं। कांग्रेस ने ऐसे अनेक अधिनियम पारित किए हैं जिनके आधार पर शासन के अंगों तथा उनकी कार्यपद्धति को निश्चित किया गया हैं। उदाहरणार्थ मूल संविधान में राष्ट्रपति के मंत्रिमंडल के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है तथापि कांग्रेस द्वारा पारित अधिनियमों के परिप्रेक्ष्य में विभिन्न कार्यपालिका का गठन किया गया हैं। 

5. प्रशासकीय निर्णय

प्रशासकीय निर्णयों ने भी अमरीकी संविधान के विकास में महत्वपूर्ण योग दिया हैं। अमरीका के विभिन्न प्रशासकीय विभागों द्वारा ही संविधान को लागू किया जाता हैं। अतः संविधान व कांग्रेस द्वारा पारित अधिनियमों को क्रियान्वित करने के लिए विभिन्न विभागाध्यक्षों व प्रशासकीय अधिकारियों को स्व-विवेक से निर्णय लेना होता हैं। इस प्रक्रिया के तहत कभी-कभी ऐसे नियमों व पद्धतियों का विकास हो जाता हैं जो संवैधानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं। 

इसके अतिरिक्त ब्रिटेन की भांति अमरीका मे भी प्रदत्त व्यवस्थापन का प्रचलन हैं। अतः कांग्रेस कानून का ढाँचा तैयार कर देती हैं प्रशासनिक क्षेत्र इसे पूर्णता प्रदान करते हैं। 

6. प्रथाएं एवं परम्पराएँ 

अमरीकी संविधान में ब्रिटेन की भांति तो नहीं परन्तु फिर भी परम्पराओं व प्रथाओं का महत्व हैं। 

बीयर्ड के शब्दों में," अमेरिकी संविधान के अंतर्गत क्रान्तिकारी परिवर्तन संशोधनों तथा अधिनियमों द्वारा नहीं हुए हैं, अपितु रीति-रिवाज और प्रथाओं से हुए हैं, जिसमें संविधान की आत्मा ही बदल गई हैं।" 

प्रथाएं व परम्पराएं परिस्थितियों की उपज हैं और इनका कानून अथवा न्यायिक निर्णयों से कोई संबंध नहीं होता हैं फिर भी ये सरकार के आधारभूत नियमों की संरचना का एक अनिवार्य हिस्सा हैं। अमरीकी संवैधानिक व्यवस्था के कई महत्वपूर्ण तथ्य इन्हीं परम्परओं की ही देन हैं। उदाहरणार्थ, मंत्रिमंडल, विदेशी राज्यों के साथ संधियों को स्वीकार करने से संबंधित सीनेट के शिष्टाचार, राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति का अलग-अलग क्षेत्रों से होना एवं दल प्रणाली आदी। 

इस प्रकार 1787 में निर्मित प्रलेख का निरंतर विकास होता गया। मुनरों का कहना हैं," अमरीकी संविधान, मशीनीकृत युग में प्रस्तुत एक पुरातन विषय नहीं हैं अपितु अपनी लगभग प्रत्येक पंक्ति में यह विस्तारित आनुनिकीकृत तथा बाद के प्रत्येक युग के जीवन के अनुरूप हैं।" 

अमेरिकी संविधान में लगातार हुए बदलाव व वृद्धि के संबंध में लार्ड ब्राइस का मत है कि," जैसे अमरीका के राष्ट्रीय जीवन में परिवर्तन हुआ हैं वैसे ही अमरीका का संविधान भी बदल गया हैं। जनता की उस भावना में भी परिवर्तन हो गया हैं जिससे कि वह संविधान को देखती थी और इसलिए संविधान की अन्तर्निहित भावना भी बदल गयी हैं।"

यह जानकारी आपके के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगी

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