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11/25/2021

अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय का संगठन/रचना, क्षेत्राधिकार/शक्तियाँ एवं कार्य

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अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय 

america ke sarvoch nyayalaya ka sangathan kshetradhikar shaktiyan mahatva;संयुक्त राज्य अमेरिका का सर्वोच्च न्यायालय दुनिया का सबसे शक्तिशाली न्यायालय हैं। इसे संविधान और कानूनों के संबंध में इतने अधिक अधिकार व शक्तियाँ प्राप्त हैं कि इसे सतत् संविधान सभा या तीसरा सदन कहकर पुकार जाता हैं, क्योंकि इसे संविधान की व्याख्या का अधिकार हैं, जिसे न्यायिक पुनरीक्षा अधिकार कहते हैं तथा संयुक्त-राज्य अमेरिका का वास्तविक संविधान क्या हैं? इसकी व्यख्या भी यही करता हैं। यह आज तक आज तक संयुक्त राज्य अमेरिका के शासन को एक वास्तविकता बनायें हुये हैं। 

अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय की रचना/संगठन 

अमेरिकी संविधान ने सर्वोच्च न्यायालय के संगठन और इसकी संख्या के बारे में कुछ न कहकर यह सब कार्य कांग्रेस पर छोड़ दिया हैं। इसके सदस्यों की संख्या समय-समय पर परिवर्तित होती रही हैं। सन् 1789 में जब सर्वोच्च न्यायालय का गठन हुआ तब इसमें एक मुख्य न्यायाधीश तथा 5 अन्य न्यायाधीश थे। बाद में कांग्रेस द्वारा समय-समय पर इनकी संख्या में बदलाव किये जाते रहे। जैसे 1807 में यह संख्या 7 थी और 1837 में इनकी संख्या 9 हो गई, 1863 में 10 और यह संख्या पुनः 07 कर दी गयी। इसके बाद वर्ष 1869 में कांग्रेस ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या 9 निर्धारित कर दी। 

न्यायाधीशों की नियुक्ति 

संयुक्त राज्य अमेरिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा सीनेट की अनुमति से की जाती हैं। सामान्यतः सीनेट राष्ट्रपति द्वारा की गई नियुक्तियों की पुष्टि कर देती हैं, परन्तु अनेक अवसर ऐसे भी आये हैं जबकि सीनेट ने राष्ट्रपति द्वारा न्यायाधीशों की नियुक्ति की पुष्टि नहीं की हैं। 

योग्यतायें 

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की योग्यताओं के बारे में संविधान में कोई वर्णन नहीं हैं। परन्तु अधिकांश रूप में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश बहुत ही योग्य व्यक्ति हुए हैं। अधिकांश न्यायाधीश अनुभवी वकील तथा विधि के प्रोफेसर हुए हैं। 

कार्यकाल 

न्यायाधीशों का कार्यकाल जीवन पर्यन्त होता हैं परन्तु इससे पहले वे त्याग-पत्र देकर अपने पद को छोड़ सकते हैं। 70 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर न्यायाधीश वेतन सहित कार्यनिवृत्त हो सकते हैं, परन्तु शर्त यह हैं कि उनका कार्यकाल 10 वर्ष का हो चुका हो। न्यायाधीश को केवल महाभियोग की प्रक्रिया द्वारा ही हटाया जा सकता हैं। 

वेतन 

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का वेतन कांग्रेस द्वारा निर्धारित किया जाता हैं। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन में उसके कार्यकाल के दौरान वृद्धि तो की जा सकती हैं किन्तु कटौती नहीं। 

न्यायाधीशों की पदच्युति 

अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को मात्र महाभियोग की प्रक्रिया के द्वारा ही हटाया जा सकता हैं। यह प्रस्ताव प्रतिनिधि सभा में प्रस्तावित किया जाता हैं। जब प्रतिनिधि सभा 2/3 बहुमत से प्रस्ताव पारित कर देती हैं तब सीनेट द्वारा इसकी जाँच-पड़ताल की जाती हैं। यदि सीनेट भी 2/3 बहुमत से प्रस्ताव की पुष्टि कर दे तो यह माना जाता हैं कि महाभियोग का प्रस्ताव पारित हो गया हैं और संबंधित न्यायाधीश को अपना पदत्याग करना पड़ता हैं। अब तक कुल 9 न्यायाधीशों के विरूद्ध महाभियोग प्रस्ताव रखे गये हैं जिनमें से मात्र 4 न्यायाधीशों के विरूद्ध यह पारित हो सका। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश सेम्तुअल चेंज के विरूद्ध महाभियोग प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया लेकिन वह पारित न हो सका। 

कार्य विधि 

अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय का सत्र प्रतिवर्ष अक्टूबर के प्रथम सोमवार से प्रारंभ होता है और जून के शुरू में समाप्त हो जाता हैं। आवश्यकता पड़ने पर मुख्य न्यायाधीश विशेष सत्र भी बुला सकता हैं। मुख्य न्यायाधीश बैठकों की अध्यक्षता करता हैं तथा न्यायालय के निर्णयों और आज्ञाओं की घोषणा करता हैं। मुकदमें की सुनवाई तथा निर्णय के लिए छः न्यायाधीशों की गणपूर्ति आवश्यक हैं। मुकदमे का निर्णय बहुमत से होता हैं।

अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार/शक्तियाँ अथवा कार्य 

अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियाँ यानी क्षेत्राधिकार संविधान से ही प्राप्त हैं। इनके कारण वह कार्यपालिका और विधायिका दोनों से महत्वपूर्ण बन गया हैं। अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय को अनेक शक्तियों से विभूषित किया गया हैं। अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियों और कार्यों को निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत रखा जा सकता हैं-- 

1. प्रारंभिक अधिकार क्षेत्र 

अमेरिका के संविधान के द्वारा निम्नलिखित दो प्रकार के मामलों में सर्वोच्च न्यायालय को प्रारंभिक अधिकार प्राप्त होंगे-- 

(अ) राजदूतों, वाणिज्य राजदूतों अथवा अन्य प्रकार के विदेशी प्रतिनिधियों तथा सार्वजनिक मंत्री से संबंधित मामले हों। 

(ब) वे मामले जिनमें संयुक्त राज्य अमेरिका या कोई एक या एक से अधिक राज्य पक्ष हों। 

2. अपीलीय अधिकार क्षेत्र

अन्य देशों के सर्वोच्च न्यायालयों की तरह अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय को अपील का अधिकार प्राप्त हैं। यह अधिकार अमेरिकी कांग्रेस द्वारा व्यवस्थित होता हैं। सन् 1935 के अधिकार क्षेत्र अधिनियम द्वारा सर्वोच्च न्यायालय का अपीलीय क्षेत्राधिकार उन संवैधानिक मामलों तक ही सीमित हैं जिनमें--

(अ) किसी राज्य के उच्च न्यायालय द्वारा अमेरिका की किसी संधि या कानून के विरूद्ध निर्णय किये जाने पर या किसी ऐसे कानून को वैध घोषित किया गया हो जो अमेरिकी संविधान या सन्धि के विपरीत हो। 

(ब) जिनमें किसी संघीय न्यायालय ने किसी राज्य की विधि को संघीय संविधान, संधि या कानून के विरूद्ध घोषित कर दिया हो। इसके अतिरिक्त सर्वोच्च न्यायालय में कुछ विशेष प्रकार के मामलों में जनपद न्यायालय के निर्णय के विरूद्ध अपील की जा सकती हैं। 

इस प्रकार स्‍पष्‍ट हैं कि सर्वोच्च न्यायालय का अपील संबंधी न्याय-क्षेत्र केवल संवैधानिक मामलों तक ही हैं। सामान्य मामलों में अपील राज्य के उच्चतम न्यायालय की अनुमति के आधार पर सुनी जा सकती हैं। 

3. न्यायिक पुनरावलोकन का अधिकार 

अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय को न्यायिक पुनरावलोकन का अधिकार हैं। इस अधिकार के अंतर्गत वह व्यवस्थापिका द्वारा निर्मित कानूनों तथा कार्यपालिका द्वारा प्रसारित आज्ञाओं की संवैधानिकता की जाँच करता हैं। इसका आशय यह हैं कि यदि व्यवस्थानिका द्वारा पास किया गया व संविधान के अंतर्गत निर्मित कोई कानून संविधान का अतिक्रमण करता है अथवा कार्यपालिका का कोई कार्य संविधान के विपरीत हैं तो सर्वोच्च न्यायालय उसे अवैध घोषित कर सकता हैं। अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने इस अधिकार का व्यापक प्रयोग किया हैं और अनेक कानूनों को अवैध घोषित किया हैं। 

4. संविधान का संरक्षण 

अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय संविधान का संरक्षक भी हैं। अमेरिकी संविधान में अनुच्छेद 6 में कहा गया हैं कि," संविधान और इसके अन्तर्गत निर्मित संयुक्त राज्य की समस्त विधियाँ तथा संयुक्त राज्य की ओर से की गई या की जाने वाली समस्त संधियाँ इस देश की सर्वोच्च विधियाँ होंगी और प्रत्येक राज्य में न्यायधीश उन्हें मानने के लिए बाध्य होंगे, उनसे असंगत राज्य के संविधान या विधियों को नहीं।" इस वैधता या अवैधता को निश्चित करके अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के संरक्षक के रूप में कार्य किया हैं। 

5. संघात्मकता की रक्षा

संयुक्त राज्य अमेरिका की संघीय व्यवस्था की रक्षा का दायित्व भी सर्वोच्च न्यायालय का हैं। संघात्मक व्यवस्था में केन्द्र तथा राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन होता हैं। इन शक्तियों के संबंध में केन्द्र तथा राज्यों के बीच संघर्ष की संभावना हो सकती हैं। सर्वोच्च न्यायालय ऐसे विवादों का निर्णय कर संघ तथा राज्यों के अधिकारों को सुरक्षित रखता हैं। 

6. उत्प्रेषण संबंधी न्याय क्षेत्र 

अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने अपने न्यायिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण शक्ति का विकास कर लिया हैं। इसे उत्प्रेषण संबंधी न्याय क्षेत्र कहा जाता हैं। इस अधिकार के अन्तर्गत सर्वोच्च न्यायालय निम्न न्यायालयों में चल रहे मुकदमों को अपने पास बुला सकता हैं, उन पर स्वयं निर्णय दे सकता हैं या निचले न्यायालयों को आवश्यक कार्यवाही करने के आदेश दे सकता हैं। 

अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय का महत्व 

संयुक्त राज्य अमेरिका में संघात्मक शासन व्यवस्था अपनाई गई जिसमें संविधान के द्वारा केन्द्र और राज्यों की शक्तियों और अधिकारों का विभाजन किया गया हैं। केन्द्र और राज्यों में कानून-निर्माण के क्षेत्राधिकारों में मतभेद उत्पन्न होना सर्वथा आवश्यक हैं। इस मतभेद को दूर करने के लिए संविधान निर्माताओं ने एक स्वतंत्र, सर्वोच्च और निष्पक्ष उच्चतम न्यायालय की स्थापना की व्यवस्था की हैं। संविधान के तीसरे अनुच्छेद में कहा गया हैं कि," न्याय संबंधी शक्ति एक सर्वोच्च न्यायालय व उन अन्य नीचे के न्यायालयों में निहित होगी, जिसकी स्थापना व प्रतिष्ठता कांग्रेस द्वारा समय-समय पर की जायेगी।" सर्वोच्च न्यायालय के महत्व के विषय में एलेक्जेंडर हैमिल्यन का विचार है कि," सभी राष्ट्रों में एक स्वतंत्र तथा सर्वोच्च न्यायालय का होना अति आवश्यक हैं। उनके बिना विधियाँ निष्प्राण होती हैं।" इसी प्रकार मुनरो का कथन है कि," संविधान निर्माताओं ने यह निश्चित किया कि संविधान तथा उसके अधीन बने काननों तथा नियमों को क्रियान्वित करने के लिये एक स्वतंत्र तथा शक्तिशाली संघीय न्याय व्यवस्था की स्थापना हो।"

अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय कांग्रेस के तृतीय सदन के रूप में 

अमेरिका में सर्वोच्च न्यायालय को प्राप्त न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति के कारण ही सर्वोच्च न्यायालय को कांग्रेस का तृतीय सदन कहा जाने लगा हैं। न्यायिक पुनरावलोकन के कार्य का सम्पादन करते समय वह व्यवस्थापिका और कार्यपालिका के कृत्यों तथा संविधान के शाब्दिक रूप पर ही विचार नहीं करता बल्कि उसकी आत्मा पर भी विचार करता हैं। आलोचकों का कहना हैं कि न्यायिक पुनरीक्षण के कारण सर्वोच्च न्यायालय ने अपनी शक्ति इतनी बढ़ा ली है कि वह अनिर्वाचित उच्चतर व्यवस्थापिका बन बैठा हैं। उसका रूप एक तीसरे व्यवस्थापक सदन का हो गया हैं। यह तीसरा सदन अपने को संघीय अथवा राज्यों के न्याय क्षेत्र तक अथवा कानून निर्माण के कार्य का पुनरीक्षण करने तक ही सीमित नही रखता, बल्कि राज्यों के विविध कानूनों की वैधता के संबंध में विचार करते समय, वह उनके सामान्य औचित्य पर भी विचार कर लेता हैं जबकि उसे वैधता-अवैधता पर ही विचार करना चाहिए।

यह जानकारी आपके के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगी

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