11/23/2021

अमेरिकी सीनेट की संरचना शक्तियाँ व कार्य

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नमस्कार दोस्तो स्वागत है आप सभी का शक्ति व सम्मान की दृष्टि से  अमेरिकी सीनेट का विशेष महत्व है। आज के इस लेख मे हम अमेरिकी सीनेट की संरचना (संगठन) अमेरिकी सीनेट की शक्तियाँ व कार्य, अमेरिकी सीनेट के महत्व या उसके शक्तिशाली होने के कारणो के बारें में विस्तार से जानेंगे।

अमेरिकी सीनेट की संरचना/संगठन 

अमेरिका में व्यवस्थापिका को कांग्रेस के नाम से जाना जाता है। इसके दो सदन है--- 
1. प्रतिनिधि सभा और 2. सीनेट
सीनेट संसार का सर्वाधिक शक्तिशाली उच्च सदन है। वह अमेरिका के संविधान की एक अनुपम कृति हैं। विश्व के अन्य संविधानों में जहाँ द्वितीय सदन की शक्तियाँ तथा महत्ता कम हो रही हैं, वहीं अमेरिकी सीनेट की शक्तियाँ तथा महत्ता में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही हैं। 
अमेरिकी सीनेट की स्थापना का मुख्य उद्देश्य अमरीका की संघीय व्यवस्थापिका मे राज्यों को समानता के आधार पर प्रतिनिधित्व प्रदान करना है। अमेरिकी संविधान के 17 वें संशोधन के अनुसार सीनेटरों का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से मतदाताओं द्वारा होता हैं। प्रत्येक राज्य से दो सीनेट के प्रतिनिधि चुने जाते है। इस समय अमेरिका में 51 राज्य है अत: सीनेट के सदस्यों की संख्या 102  है। सीनेट के सदस्यों का निर्वाचन पहले अप्रत्यक्ष रूप से होता था, लेकिन अब अमेरिका के संविधान मे 17 वें संशोधन के अनुसार अब सीनेट प्रत्यक्ष रूप से चुने जाते है।
सीनेट के सदस्यों की योग्यताएं 
1. वह 30 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हो।
2. वह उस राज्य का निवासी हो जिसका प्रतिनिधित्व वह सीनेट में करना चाहता है।
3. वह अमरीका के किसी भी विभाग में पदाधिकारी न हो।
4. वह कम से कम 9 वर्षो से संयुक्त राज्य अमेरिका का निवासी हो।

अमेरिकी सीनेट का कार्यकाल 

अमेरीकी सीनेट एक स्थायी सदन है। इसके सदस्य 6 वर्षो के लिए निर्वाचित किये जाते है। प्रत्येक दो वर्ष बाद एक-तिहाई सदस्य अवकाश ग्रहण करते है। जिसके स्थान पर नवीन सदस्यों का चुनाव किया जाता है।

सीनेट के सदस्यों का वेतन तथा उन्मुक्तियाँ 

प्रतिनिधी सभा के समान ही सीनेट के सदस्यों को वेतन, भत्ते व उन्मुक्तियाँ प्राप्त है। सीनेट के सदस्यों को 1 लाख 33 हजार 600 डालर वार्षिक वेतन मिलता है। सीनेट के सभापति को 1 लाख 71 हजार 500 डाॅलर वार्षिक वेतन मिलता है। सीनेट के सदस्यों को भाषण देने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है जिसका समय निश्चित नही किया जाता। सदन मे दिये गये भाषण के विरूध्द किसी भी तरह की कार्यवाही नही की जा सकती।
सीनेट का अधिवेशन 
अमेरिकी संविधान के 20 वें संशोधन के अनुसार सीनेट का अधिवेशन 3 जनवरी की दोपहर को प्रतिनिधि सदन के साथ आरंभ होता हैं। दोनों सदनों का अधिवेशन उस समय तक चलता रहता है जब तक वे अधिवेशन के स्थगन या समाप्ति के लिए प्रस्‍ताव पान न करें। यदि दोनों सदनों में स्थगन की तिथि के बारे में मतभेद उत्पन्न हो जाए, तो राष्ट्रपति तिथि निश्चित करता हैं। 
फिलिबस्टर 
सीनेट की कार्यवाही की यह एक विशेष व्यवस्था हैं। जिसे विचारक एक दोष के रूप में देखते हैं। इस व्यवस्था के तहत सीनेट के सदस्यों को सदन में मनमाने समय तक बोलते रहने की आदाजी प्राप्त हैं। इस प्रकार की स्वतंत्रता का गलत उपयोग करते हुए सीनेट की कार्यवाही में विलंब उत्पन्न करना या बाधा डालने को ही "फिलिबस्टर" कहते हैं।
अमेरिकी सीनेट का सभापति 
सीनेट का सभापति अमेरिका का उपराष्ट्रपति होता हैं। वह सभापति के सभी सामान्य कर्तव्यों का पालन करता हैं लेकिन इस क्षेत्र में उसकी शक्तियाँ प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष से कम हैं। सीनेट को अपना एक सामयिक अध्यक्ष भी चुनने का अधिकार होता हैं। वह वास्तव में बहुमत दल का मनोनीत सदस्य या नेता होता हैं। उपराष्ट्रपति की अनुपस्थित में वह सदन की बैठकों की अध्यक्षता करता हैं।

अमेरिकी सीनेट की शक्तियाँ व कार्य (US Senate powers in Hindi)

अपनी शक्तियों की दृष्टि से सीनेट दुनिया का सर्वाधिक शक्तिशाली द्वितीय सदन है। इसकी शक्तियाँ इतनी व्यापक हैं कि मुनरों ने लिखा हैं," संविधान की प्रथम धारा में जहाँ पर दो सदनों वाली कांग्रेस की स्थापना की बात कही गई हैं, वहाँ सीनेट का नाम कलम फिसल जाने के कारण पहले नहीं आया। अधिकांश संविधान निर्माता सीनेट को संघीय व्यवस्था को रीढ़ की भाँति देखना चाहते हैं।" सीनेट की निम्नलिखित शक्तियाँ व कार्य हैं--
1. कार्यपालिका संबंधी शक्तियाँ 
अमेरिकी सीनेट को कार्यपालिका शक्तियाँ पर्याप्त सीमा तक प्राप्त है। सीनेट की कार्यपालिका सम्बन्धित शक्तियों मे संधि-अनुमोदन और नियुक्ति सम्बन्धित शक्तियाँ उल्लेखनीय हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति को अनेक पदाधिकारियों की नियुक्त का अधिकार है। राष्ट्रपति द्वारा की गई इन नियुक्तियों का अनुमोदन सीनेट के 2/3 बहुमत द्वारा होना आवश्यक है। इस प्रकार की नियुक्तियों में राजदूतों, अन्य राज्य प्रतिनिधियों, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों तथा मन्त्रिमण्डल के सदस्यों आदि की नियुक्तियाँ आती है।
2. कानून निर्माण सम्बन्धी
शक्ति सीनेट अमरीकी कांग्रेस का द्वितीय सदन है। सीनेट राष्ट्रीय कानूनों को निर्मित करने मे किसी भी प्रकार से प्रतिनिधि सभा से कम नही है। कोई भी विधेयक तभी पारित किया जा सकता है जब दोनों सदन उस विधेयक को पूर्ण बहुमत के साथ पारित कर दें।
3. सीनेट की न्यायिक शक्तियाँ
अमेरिकी सीनेट को न्यायिक क्षेत्र मे महत्वपूर्ण शक्तियाँ प्राप्त है जिसमें सर्वप्रथम है राष्ट्रपति सहित अन्य पदाधिकारियों के विरूध्द महाभियोग की लगाने की शक्ति। अमेरिकी संविधान के अनुसार, सीनेट को राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और सभी असैनिक अधिकारियों को महाभियोग द्वारा देशद्रोश, रिश्वत तथा गंभीर अपराध के कारण हटाने का अधिकार होगा। अभियोग लगाने का कार्य प्रतिनिधि सभा का है। सीनेट महाभियोग की जाँच न्यायालय की हैसियत से करेगी। 
4. निर्वाचन शक्तियाँ
राष्ट्रपति व उप राष्ट्रपति पद के लिए चुनावों की मतगणना का कार्य सीनेट द्वारा ही किया जाता है। यदि कभी मतदान के दौरान उप राष्ट्रपति पद के किसी भी उम्मीदवार को पूर्ण बहुमत प्राप्त होता है तो सीनेट सर्वाधिक मत प्राप्त प्रथम दो उम्मीदवारों में से किसी एक को उप राष्ट्रपति पद के लिए चुनती है।
5. संविधान में संशोधन संबंधी शक्तियाँ
अमेरिकी सीनेट को संविधान मे संशोधन सम्बन्धित शक्तियाँ प्रतिनिधि सभा का समान ही प्राप्त है।
6. अन्वेषण की शक्ति 
सीनेट को प्राप्त इस शक्ति के तहत वह विभिन्न विभागों के कामकाज की जाँच कर सकती है ताकि प्रशासनिक विभागों पर नियंत्रण स्थापित किया जा सके और उन्हे उनके दायित्वों के प्रति सर्तक बनाया जा सके। सीनेट इस कार्य के लिए भिन्न-भिन्त्र जाँच समितियों की व्यवस्था करती हैं। इस अन्वेषण की शक्ति के परिणाम ही 1924 में तीन मंत्रियों को अपने पदों से त्यागपत्र देना पड़ा था। सीनेट की इस शक्ति के कारण ही 1973 का वाटरगेट काण्ड भी प्रकाश में आया था। 
उपरोक्त विवेचन से स्पष्ट है कि सीनेट को अत्यधिक महत्वपूर्ण शक्तियां व कार्य प्राप्त हैं, जिसके द्वारा वह दुनिया के अन्य द्वितीय सदनों में सर्वाधिक शक्तिशाली द्वितीय सदन बन गया हैं।

अमेरिकी सीनेट के शक्तिशाली होने के कारण अथला अमेरिकी सीनेट का महत्व 

1. प्रत्यक्ष निर्वाचन
सन् 1918 मे हुए 17 संविधान संशोधन द्वारा सीनेट के सदस्यों की प्रत्यक्ष चुनाव की व्यवस्था की गयी है।
2. योग्य तथा अनुभवी व्यक्तियों का मंच
सीनेट में योग्य तथा अनुभवी व्यक्ति होते है। तथा प्रसिध्द राजनीतिक होते है।
3. आकार व रचना
सीनेट का आकार प्रतिनिधि सभा की अपेक्षा छोटा होता है। प्रतिनिधि सभा मे जहां 435 सदस्य होते है वही सीनेट में मात्र 102 सदस्य है। इसलिए इसका हर एक सदस्य महत्वपूर्ण हो जाता है।
4. मन्त्रिमण्डलीय प्रणाली का अभाव
अमेरिका मे अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली होने के कारण कार्यपालिक व्यवस्थापिका के प्रति उत्तरदायी नही है इसलिए प्रतिनिधि सभा को कार्यपालिका पर नियंत्रण का कोई अधिकार नही होता है। जबकी मन्त्रिमण्डनात्मक पद्धति में कार्यपालिका व्यवस्थापिका के निम्न सदन अर्थात प्रतिनिधि सभा के प्रति उत्तरदायी होता है। इस कारण कांग्रेस के प्रथम सदन की तुलना मे कांग्रेस का द्वितीय सदन सीनेट शक्तिशाली हो जाती है।
5. सीनेट में वाद-विवाद की स्वतंत्रता 
सीनेट की कार्यविधि ऐसी है कि उसमें सदस्यों के बोलने का समय निश्चित नहीं किया जाता। वहाँ कोई भी सदस्य कितने ही समय बोल सकता हैं। इसको "फिलिबस्टर" कहा जाता हैं। परिणामस्वरूप यहाँ विषयों पर विचार अधिक पूर्णता के साथ होता हैं। सीनेट में बोलने के लिए अधिक समय मिल जाता हैं, इसलिए प्रतिभाशाली व्यक्ति सीनेट का ही सदस्य बनना पसंद करता हैं। सदस्यों की संख्या बहुत अधिक होने के कारण प्रतिनिधि सदन में बोलने के लिए कम समय मिलता हैं। 
6. सीनेट की विशेष शक्तियाँ 
सीनेट के पास कुछ वेशष शक्तियाँ है। राष्ट्रपति की निरंकुशता को रोकने का काम करती है। सीनेट न्यायिक क्षेत्र मे भी एक प्रमुख जाँच निकाय का कार्य करती है। सीनेट द्वारा की जाने वाली जाँच पड़ताल काफी भयानक होती है। उसे महाभियोग को सुनने और उस पर अन्तिम निर्णय देने का अधिकार है।
7. सीनेट के सदस्यों का प्रत्यक्ष निर्वाचन 
विश्व के अन्य उच्च सदनों के विपरीत सीनेट के सदस्यों का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से जनता करती हैं। इन सदस्यों का दृष्टिकोण प्रतिनिधि सदन के सदस्यों की अनेक्षा विस्तृत होता हैं व ये सदस्य पूरे राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।

अमेरिकी सीनेट का महत्व /भूमिका

सीनेट की शक्तियों का अध्ययन करने के बाद संविधान का प्रत्येक विद्यार्थी ग्लेडस्टन के स्वर में स्वर मिलाकर कहेगा, " आधुनिक राजनीति में जितने भी सदन हुए हैं, सीनेट उनमें सबसे अद्भुत हैं।" क्योंकि जैसा कि हेनरीमेन ने कहा हैं," जब से आधुनिक लोकतंत्र का स्वर चढ़ा है तब से जितनी भी संस्थाओं का निर्माण हुआ हैं उनमें यही केवल एकमात्र पूर्ण संस्था रही हैं।" 
सीनेट के सामने लाॅर्ड सभा एकदम फीकी हैं। लार्ड सभा व भारत की राज्यसभा को वित्तीय शक्तियाँ बिल्कुल भी प्राप्त नहीं हैं। सीनेट इस क्षेत्र में सर्वशक्तिमान हैं। केवल अमेरिका ही ऐसा देश हैं जहाँ दूसरा सदन, दूसरे दर्जे का सदन नहीं हैं जबकि अन्य देशों में दूसरे सदन, दूसरे दर्जे के सदन बन गये हैं। संविधान निर्माताओं ने चाहा था कि सीनेट एक ओर राष्ट्रपति की निरंकुशता पर अंकुश लगाये और दूसरी ओर प्रतिनिधि सभा को भी बहकने न दे। सीनेट ने यह कार्य सुन्दरता से निभाया हैं।

अमेरिकी सीनेट की आलोचना 

अमेरिकी सीनेट की निम्नलिखित आधार पर आलोचना की जाती हैं--
1. सीनेट विश्व के अन्य द्वितीय सदनों की अपेक्षा बहुत अधिक समय नष्ट करती हैं। इस संबंध में फिलिबस्टरिंग का विशेष रूप से उल्लेख किया जा सकता हैं। 
2. सीनेट की कार्यवाही का एक आधार 'लाॅ रोलिंग' पद्धित, पारस्परिक सहयोग का एक भ्रष्ट साधन हैं। 
3. नियुक्तियों के संबंध में स्थापित 'सीनेट' के प्रति शिष्टाचार की व्यवस्था अत्यन्त दूषित और भ्रष्ट राजनीति की जनक हैं। 
4. सीनेट जो कि शासन के प्रति या प्रशासनिक कार्यों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं, उसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक शक्तियाँ प्राप्त होना भी किसी प्रकार से उचित नहीं कहा जा सकता हैं। 
5. सीनेट की अन्वेषण संबंधी समितियों की कार्यवाही राजनीतिक दलबंदी से प्रभावित होती हैं और इसमें राष्ट्रीय हितों की उपेक्षा की जाती हैं। 
6. सीनेट का संगठन अप्रजातंत्रात्मक हैं। सीनेट में सभी इकाइयों को समान प्रतिनिधित्व प्रदान किया गया हैं, जबकि उनमें गणसंख्या की दृष्टि से काफी भेद हैं। 
7. सीनेट के सदस्य समाज के अत्यन्त कुलीन वर्ग से आते हैं। उनके द्वारा जनसाधारण के हितों की अपेक्षा की जाती हैं। 
8. सीनेट अपने अहं से वशीभूत होकर राष्‍ट्रपति का अनावश्यक विरोध करने और राष्ट्रपति को नीचा दिखाने का प्रयास करती हैं। राष्ट्रीय संकट की स्थिति में भी सीनेट की वह स्थिति बनी रहती हैं, इससे राष्ट्रीय हितों को क्षति पहुँचती हैं।
यह जानकारी आपके के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगी

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