6/23/2020

समाजीकरण की प्रक्रिया

By:   Last Updated: in: ,

समाजीकरण की प्रक्रिया (samajikaran ki prakriya)

समाजीकरण व्यक्ति के जन्म से लेकर मृत्यु तक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। व्यक्ति उन सभी व्यक्तियों, समूहों तथा संस्थाओं से कुछ न कुछ अनुभव प्राप्त करता हैं, सीखता है जिनके कि वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सम्पर्क मे आता है। समाजीकरण से व्यक्ति सामाजिक आदर्शों, मूल्यों, मान्यताओं, रूढ़ियों आदि से अपना सामन्जस्य करता हैं और उसी की मर्यादाओं के साथ अपना आत्मसात करते हैं। समाजीकरण की प्रक्रिया इस प्रकार से हैं---
1. पालन-पोषण
पालन-पोषण प्रणाली समाजीकरण की प्रक्रिया का प्रथम चरण हैं। पालन-पोषण प्रणाली बच्चे को अत्यधिक प्रभावित करती है। बच्चे का पालन-पोषण किस ढंग से हो रहा है, उसकी सुख-सुविधाओं के लिए कैसा वातावरण प्रदान किया जाता है इसी के अनुरूप बच्चों मे भावनाओं, रूचियों एवं अनुभूतियों का विकास होता है। अगर माता नियन्त्रत और सामाजिक रूप से बच्चों को दूध पिलाती है, खाना खिलाती है तो बच्चे समय के अनुसार खाने-पीने, पेशाब-पखान करने की आदत पड़ जाती है। यदि प्रारंभ मे बच्चे की देखभाल ठीक ढंग से नही हो पाती तो उसे सदैव अनेक अभावों का सामना करना पड़ता है तो उसमे प्रायः समाज विरोधी भावना विकसित होने की सम्भावना रहती है।
2. सहानुभूति
सहानुभूति से बच्चे मे प्रेम और अपनत्व की भावना का विकास होता है तथा वह अपने पराये को पहचानने मे समर्थ होता है। यदि बालक के साथ सहानुभूतिपूर्वक व्यवहार नही किया जाता तो उसमे भय और घृणा की भावना का विकास होगा जो उसको विचलनकारी बना सकता है। बच्चा अपने माता-पिता, परिवार, पड़ोसी, दोस्तों से सहानुभूतिपूर्वक बर्ताव के कारण उनमे विश्वास करता है, उनको अपना समझता है और उनके व्यवहारों को अपनाने की कोशिश करता हैं।
3. सामाजिक प्रशिक्षण
बच्चों का समाजीकरण सामाजिक प्रशिक्षण के द्वारा भी होता हैं। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होने लगता है वह अपने समाज के मूल्यों, आदर्शों, मान्यताओं के अनुरूप व्यवहार करना सीखने लगता है तथा परिस्थितियों के साथ सामन्जस्य करने लगता है।
4. अनुकरण
अनुकरण के द्वारा भी बच्चा सीखता है। बालक के समाजीकरण मे अनुकरण का बहुत अधिक महत्व होता है क्योंकि आरंभ से ही वह दूसरों का अनुकरण करके अनेक बातों को सीखता है। इसलिए अनुकरण को समाजीकरण का महत्वपूर्ण तत्व कहा जाता है। जैसा घर और समाज के लोग बोलते-चलाते और व्यवहार करते है, बच्चे उसी का अनुकरण करते है और फिर वैसा ही व्यवहार करते है।
5. आत्मीकरण
माता-पिता, परिवार और पड़ौस के स्नेह, प्रेम और सुन्दर व्यवहारों के कारण बच्चा उनको अपना रक्षक, शुभ-चिन्तक, हित-चिन्तक समझने लगता है। ऐसा समझकर वह अपने माता-पिता, परिवार और समाज के साथ आत्मीकरण कर लेता है और उनके आदर्शों को सीखता है।
6. परिस्थिति का प्रत्यक्षीकरण
सामाजिक जीवन मे प्रत्येक परिस्थिति मे समान व्यवहार से काम नही चलता। अलग-अलग प्रकार की परिस्थितियों मे भी समय-समय और स्थान-स्थान पर अनेक प्रकार की भूमिकाएं अदा करनी होती है। प्रत्येक परिस्थिति मे एक समान व्यवहारों से लक्ष्यों की पूर्ति नही हो पाती है। ऐसी स्थिति मे मनुष्यों को बहुत कुछ प्रत्यक्ष जीवन मे घटित घटनाओं से सीखना पड़ता है।
7. निर्देश
समाजीकरण की सम्पूर्ण प्रक्रिया वस्तुतः सहयोग पर आधारित है। समाज व्यक्ति को सामाजिक बनने मे सहयोग देता है। समाज की सहयोगी भावना व्यक्ति को सामाजिक बनने मे सहयोग देती है। व्यक्ति अपने साथ जब अन्य लोगों का सहयोग
8. सहयोग
समाजीकरण की सम्पूर्ण प्रक्रिया वस्तुतः सहयोग पर आधारित हैं। समाज व्यक्ति को सामाजिक बनने मे सहयोग देता है। समाज की सहयोगी भावना व्यक्ति को सामाजिक बनने मे सहयोग देती हैं। व्यक्ति अपने साथ जब अन्य लोगों का सहयोग पाता है तो वह दूसरे के साथ स्वयं भी सहयोग करने लगता है। फलस्वरूप मनुष्य की सामाजिक प्रवृत्तियां संगठित होती हैं।
9. पारस्परिक व्यवहार
दूसरों के सम्पर्क मे आने के बाद व्यक्ति उनसे प्रभावित होता है और साथ-साथ अन्य लोगों को प्रभावित भी करता है। अपने प्रति दूसरों के जिस व्यवहार को वह स्वयं पसंद करता है, उसी प्रकार का व्यवहार दूसरों के प्रति भी करता हैं।
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; समाजशास्त्र का अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएं
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; समाजशास्त्र की प्रकृति (samajshastra ki prakriti)
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; समाज का अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएं
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; समुदाय का अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएं
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; समाज और समुदाय में अंतर
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; समिति किसे कहते है? अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएं
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; संस्था किसे कहते है? संस्था का अर्थ, परिभाषा, कार्य एवं विशेषताएं
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; सामाजिक समूह का अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएं
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; प्राथमिक समूह का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं एवं महत्व
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; द्वितीयक समूह किसे कहते है? द्वितीयक समूह की परिभाषा विशेषताएं एवं महत्व
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; प्राथमिक समूह और द्वितीयक समूह मे अंतर
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; सामाजिक संरचना अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएं
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; सामाजिक संरचना के प्रकार (भेद)
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; हित समूह/दबाव समूह किसे कहते हैं? परिभाषा एवं अर्थ
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; संस्कृति क्या है, अर्थ परिभाषा एवं विशेषताएं
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए;भूमिका या कार्य का अर्थ एवं विशेषताएं
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; सामाजिक मूल्य का अर्थ और परिभाषा
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; प्रस्थिति या स्थिति का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं एवं प्रकार
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; समाजीकरण का अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएं
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; समाजीकरण की प्रक्रिया
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; समाजीकरण के सिद्धांत
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए;सामाजिक नियंत्रण अर्थ, परिभाषा, प्रकार या स्वरूप, महत्व
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; सामाजिक स्तरीकरण का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं एवं आधार
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; सामाजिक गतिशीलता का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं एवं प्रकार या स्वरूप
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए;सामाजिक परिवर्तन का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं एवं कारक
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; क्रांति का अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएं
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; सामाजिक प्रगति का अर्थ व परिभाषा
आपको यह जरूर पढ़ना चाहिए; विकास का अर्थ और परिभाषा

कोई टिप्पणी नहीं:
Write comment

अपने विचार comment कर बताएं हम आपके comment का इंतजार कर रहें हैं।