सामाजिक गतिशीलता का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं एवं प्रकार या स्वरूप

सामाजिक गतिशीलता का अर्थ (samajik gatishilta ka arth)

गतिशीलता का मतलब है स्थान या स्थिति मे परिवर्तनशीलता। जब भौगोलिक या भौतिक दृष्टि से स्थान परिवर्तन होता है तो इसे भौगोलिक गतिशीलता कहते हैं, किन्तु जब किसी व्यक्ति या समूह के सामाजिक स्थान या प्रस्थिति मे परिवर्तन घटिट होता है तो इसे सामाजिक गतिशीलता कहते हैं।
इस लेख मे हम सामाजिक गतिशीलता क्या हैं? सामाजिक गतिशीलता किसे कहते हैं? सामाजिक गतिशीलता की परिभाषा, विशेषताएं और प्रकार या स्वरूप को जानेंगे।
सामाजिक गतिशीलता

सामाजिक गतिशीलता से मोटेतौर पर हमारा आशय व्यक्ति अथवा समूह की प्रस्थिति मे परिवर्तन से होता है। प्रस्थिति का एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु मे जाना क्षैतिज अथवा ऊर्ध्वाधर हो सकता है, जो किसी क्षेत्र विशेष जैसे, शिक्षा, व्यवसाय, आय, सामाजिक शक्ति एवं सामाजिक वर्ग या इनमे से कुछ अथवा सभी क्षेत्रों मे हो सकता है। यदि परिवर्तन कुछ या सभी क्षेत्रों मे हुआ है तो संभव है कि यह किन्ही मे क्षैतिज या किन्हीं मे उदग्र हो और उदग्र मे भी गतिशीलता किन्ही क्षेत्रों मे ऊपर की ओर और किन्ही मे नीचे की ओर हो। ऐसे मे अलग-अलग क्षेत्रों मे हुई गतिशीलता के आधार पर सामाजिक गतिशीलता के एक संयुक्त सूचकांक की गणना जरूरी हो जाती है जिसके लिए स्केल का निर्माण या गणना विधि का निरूपण गतिशीलता के परिमापन संबंधी प्रयास के अन्तर्गत रखा जा सकता है। गतिशीलता के परिमापन का आकलन स्थान अथवा काल (या पीढ़ी) अथवा सामाजिक संरचना के प्रारूप (बन्द, प्रतिबंधित अथवा खुली) के संदर्भ मे हो सकता है। इसी प्रकार गतिशीलता व्यक्ति अथवा समूह के स्वयं के प्रयास से अथवा राज्य प्रावधानों आदि से किसी एक अथवा कई कारणों से हो सकती हैं।

सामाजिक गतिशीलता की परिभाषा (samajik gatishilta ki paribhasha)

मिलर व वुक " सामाजिक गतिशीलता, व्यक्तियों या समूहों का एक सामाजिक ढांचे से दूसरे सामाजिक सामाजिक ढांचे मे संचलन है।"
सोरोकिन के शब्दों मे " सामाजिक गतिशीलता का अर्थ है-- सामाजिक समूहों तथा स्तर के पुंज मे किसी व्यक्ति का एक सामाजिक स्थिति से दूसरे सामाजिक स्थिति मे पहुंच जाना।"
एंथोनी गिडेन्स " समाज मे व्यक्तियों व समूहों के भिन्न सामाजिक आर्थिक स्थानों मे गमन को सामाजिक गतिशीलता निरूपित किया है।
पी. बी. हार्टन व सी. एल. हन्ट ने सामाजिक गतिशीलता की संक्षिप्त परिभाषा इस प्रकार दी हैं " हम सामाजिक गतिशीलता को व्यक्ति अथवा समूह के एक सामाजिक प्रस्थिति से दूसरी सामाजिक प्रस्थिति मे जाने की क्रिया के रूप मे परिभाषित कर सकते हैं।
इलियट तथा मैरिल " गतिशीलता मे भौतिक के ही समान मनोवैज्ञानिक परिवर्तन भी संलग्न होते है।

सामाजिक गतिशीलता की विशेषताएं (samajik gatishilta ki visheshta)

1. सामाजिक गतिशीलता एक सार्वभौमिक प्रक्रिया है जो हर समाज मे पाई जाती है। किसी समाज मे इसके अवसर कम होते है और किसी मे अधिक।
2. सामाजिक गतिशीलता सामाजिक प्रस्थिति मे परिवर्तन दर्शाती है।
3. सामाजिक गतिशीलता एक जटिल प्रघटना भी है क्योंकि इसमे दिशा, समय और संदर्भ तीनों के ही तत्व निहित है। दिशा की दृष्टि से गतिशीलता ऊपर की और नीचे की ओर या समानांतर हो सकती है। समय की दृष्टि से स्तर की भिन्नता एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी मे हो सकती हैं।
4. परिवर्तन समाज मे व्यक्ति एवं समूह दोनों अथवा दोनों मे से किसी एक की प्रस्थिति मे हो सकता है।
5. यह परिवर्तन समय के अन्तराल मे होता है। प्रस्थितियों मे परिवर्तन वर्तमान पीढ़ी मे देखा जा सकता है अथवा दो या अधिक पीढ़ियों के बीच मे देखा जा सकता है।
6. सामाजिक गतिशीलता के दो पहलू है-- वस्तुनिष्ठ तथा व्यक्तिनिष्ठ। वस्तुनिष्ठ दृष्टि से यह देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति का पहला पद क्या वेतन रखता था और अब उसे नये पद पर कितना वेतन मिलता है? अगर आधिक वेतन वाले पद पर वह गया है तो कहा जा सकता है कि वह उसने ऊपर की ओर सामाजिक गतिशीलता की है। परन्तु व्यक्तिनिष्ठ दृष्टि से यह देखा जाना जरूरी है कि क्या वह भी इस नये पद से संतुष्ट है? वह भी यह समझता है कि वह स्तर मे ऊपर या ऊंचा उठा है? यह भी सकता है कि पहले की तुलना मे अब महंगाई बढ़ गई हो कि व्यक्ति यह समझा हो कि उसकी वास्तविक स्थिति मे कोई परिवर्तन नही हुआ है।
7. सामाजिक गतिशीलता का माप भी कठिन है क्योंकि इसमे तुलनात्मक विधि का प्रयोग हो सकता है और दो स्थितियों की तुलना करना काफी कठिन है।
8. सामाजिक गतिशीलता व्यक्तियों या समूहों के निजी प्रयास पर ही आधारित नही है अर्थात् यह सामाजिक संरचना का भी फल है क्योंकि सामाजिक संरचना ही ऐसे अवसर प्रदान कर सकती है जहाँ गतिशीलता हो सके। एक पिछड़े हुए समाज मे व्यवसाय के अवसर कम होते है अपेक्षाकृत एक उन्नत और औधोगिक समाज मे कितने नित नये व्यवसाय या नौकरी के क्षेत्र पैदा होते जाते हैं।
9. सामाजिक गतिशीलता राजनीति से भी संबंधित है। एक जनतांत्रिक समाज मे आशा की जाती है कि सामाजिक गतिशीलता के अवसर बिना भेदभाव के सभी को प्राप्त हो सकेंगे। दूसरी तरफ एक राजतंत्र वाले सामंती समाज मे स्वभावतः ही कुछ चुने हुए व्यक्तियों और वर्गों को ही गतिशीलता के अवसर प्राप्त हो सकेंगे।

सामाजिक गतिशीलता के प्रकार या स्वरूप (samajik gatishilta ke prakar)

सामाजिक गतिशीलता कई प्रकार की होती है। सामाजिक गतिशीलता के प्रकार भेद का निर्धारण इस बात पर निर्भर करता है कि उसे किस आधार पर वर्गीकृत किया जाता हैं। विभिन्न विद्वानों ने सामाजिक गतिशीलता के विभिन्न स्वरूप बताये है। उनमे मे से प्रमुख प्रकार निम्न हैं---
1. लंबवत गतिशीलता एवं समानांतर गतिशीलता 
सोरिकिन ने सामाजिक गतिशीलता की दिशा के आधार पर इसके दो स्वरूपों का वर्णन किया है लंवबत गतिशीलता तथा समानांतर गतिशीलता। लंबवत गतिशीलता वह गतिशीलता है जिसमे एक सामाजिक स्थिति से दूसरी सामाजिक स्थिति मे जाने से सोपानक्रम मे व्यक्ति की प्रस्थिति या तो ऊपर उठती है या नीचे गिरती है। इस प्रकार लंबवत् गतिशीलता के दो रूप है-- एक आरोही, तथा दूसरी, अवरोही गतिशीलता।
समांतर (समकक्ष) सामाजिक गतिशीलता वह गतिशीलता है जिसमे व्यक्ति जब एक समूह से दूसरे समूह मे सदस्यता परिवर्तित करता है तो उसके पर सोपन क्रम मे कोई अंतर नही पड़ता, जैसे यदि कोई रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का प्रवक्ता वहां नौकरी छोड़कर देहली विश्वविद्यालय मे प्रवक्ता पद ग्रहण कर लेता है तो इसे समानांतर सामाजिक गतिशीलता कहा जायेगा क्योंकि उसकी प्रस्थिति-क्रम मे कोई अंतर नही पड़ा।
2. अंतर्पीढ़ी एवं अंतरा-पीढ़ी सामाजिक गतिशीलता
विद्वानों ने सामाजिक गतिशीलता को उसमे निहित समय के आगाम की दृष्टि से दो प्रकार की गतिशीलता का वर्णन किया है-- अंतर्पीढ़ी सामाजिक गतिशीलता तथा अंतरा-पीढ़ी सामाजिक गतिशीलता। पहले प्रकार की गतिशीलता मे पिता की सामाजिक प्रस्थिति और पुत्र की सामाजिक प्रस्थिति की तुलना की जाती है तथा यह देखा जाता है कि किसी प्रकार की गतिशीलता हो रही है। यह भी आरोही, अवरोही समानांतर हो सकती है। इसी प्रकार एक ही व्यक्ति की उसके जीवन वृत्त मे गतिशीलता का माप किया जा सकता है। यह देखा जा सकता है कि जब उसने व्यावसायिक जीवन प्रारंभ किया तो वह किस पद पर नियुक्त हुआ था और आज उसका किस क्षेत्र मे क्या पद है? इसे अंतर्पीढ़ी सामाजिक गतिशीलता कहते है।
3. लघु रेंज अथवा दूरी तथा दीर्घ रेंज अथवा दीर्घ दूरी सामाजिक गतिशीलता 
कोई व्यक्ति या समूह निश्चित समय अवधि मे कितनी सामाजिक गतिशीलता करता है, इस आधार पर लघु रेंज अथवा दीर्घ रेंज मे सामाजिक गतिशीलता का वर्गीकरण किया गया है। पीटर वोर्सल ने इसका वर्णन करते हुए लिखा है कि प्रायः व्यक्ति अपने जीवन काल मे कुछ कम दूरी तक ही स्थिति परिवर्तन कर पाते है। एक सेठ अगर किसी व्यापार मे नुकसान भी उठता है तो थोड़ी ही सीमा तक अवरोही सामाजिक गतिशीलता का शिकार होता है। ऐसे ही एक क्लर्क प्रायः अपनी सेवा अवधि मे मुख्य लिपिक अथवा आफिसर पद की पहली श्रेणी तक ही पहुंच सकता है। ऐसे तो बहुत कम उदाहरण होते है कि एक व्यक्ति एक दीर्घ रेंज या दीर्घ दूरी तक सामाजिक गतिशीलता कर जाये कि एक श्रमिक से मिल का मालिक हो जाये या राज्य का मुख्यमंत्री बन जाये।
4. व्यक्तिगत एवं सामूहिक गतिशीलता
सामाजिक गतिशीलता की इकाई को ध्यान मे रखते हुए गतिशीलता को व्यक्तिगत अथवा सामूहिक के रूप मे भी समझा जा सकता है। समूह से दूसरे सामाजिक समूह मे सदस्यता परिवर्तित करता हैं। दूसरी तरफ कभी-कभी सामूहिक प्रयासों द्वारा पूरे समूह के हितों मे भी वृद्धि का प्रयास किया जाता है। हमारे समाज मे जाति संघ इस प्रकार की सामूहिक गतिशीलता के उदाहरण है। जाति संघ माध्यम से पूरी जाति के उत्थान का प्रयास किया गया है। इसी भांति श्रम संघों के माध्यम से श्रमिकों के लिए अधिक वेतन एवं सुविधायें प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है। यदि ये प्रयास सफल होते है, जैसे कि हुआ भी हैं, इसे सामूहिक गतिशीलता का उदाहरण कहा जाएगा।
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