har din kuch naya sikhe

हर दिन कुछ नया सीखें।

11/09/2021

सूक्ष्म शिक्षण के स्तर

By:   Last Updated: in: ,

सूक्ष्म शिक्षण के स्तर 

सूक्ष्म शिक्षण के निम्नलिखित स्तर हैं-- 

1. अभिविन्यास

सबसे पहले शिक्षक प्रशिक्षणार्थियों के सामने सूक्ष्म-शिक्षण के अर्थ, उसके घटकों, विशेषताओं, गुणों तथा दोषों पर प्रकाश डालता है। 

2. शिक्षण कौशलों की चर्चा 

प्रशिक्षणार्थियों को शिक्षण कौशलों के अर्थ तथा मनोवैज्ञानिक आधारों की जानकारी देता है। 

यह भी पढ़े; सूक्ष्म शिक्षण का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं

यह भी पढ़े; सूक्ष्म शिक्षण के गुण/लाभ, दोष

यह भी पढ़े; सूक्ष्म शिक्षण की प्रक्रिया/सोपान

3. आदर्श पाठ 

प्रस्तुतीकरण शिक्षण कौशलों की पूरी जानकारी देने हेतु प्रशिक्षणकर्ता सूक्ष्म पाठ का स्वरूप आदर्श पाठ के रूप में करता है। आदर्श पाठ प्रदर्शित करने की निम्न विधियाँ हैं --

(अ) शिक्षक प्रशिक्षक स्वयं सूक्ष्म पाठ पढ़ाकर दिखा सकता है। 

(ब) सूक्ष्म-शिक्षण का आदर्श पाठ लिखित रूप में भी प्रशिक्षणार्थियों को दिया जा सकता है। 

इस लिखित पाठ में शिक्षण कौशलों की पूरी - पूरी जानकारी दी जाए एवं पाठ योजना के प्रस्तुतीकरण का विवरण भी दिया जाए। 

(स) आदर्श पाठ को वीडियो टेप पर रिकार्ड कर, टेलीविजन पर भी प्रदर्शित किया जा सकता है। 

(द) आदर्श पाठ को साधारण टेपरिकार्डर पर टेप कर प्रशिक्षणार्थियों को सुनाया जाता है। 

4. पाठ का पर्यवेक्षण तथा समालोचन

आदर्श पाठ के पर्यवेक्षण तथा समालोचन की विधि छात्राध्यापकों को विस्तृत रूप से बताई जाती है। पाठ की समालोचना करने हेतु हर प्रशिक्षणार्थी को हर शिक्षण कौशल हेतु पृथक-पृथक पर्यवेक्षण प्रपत्र दिये जाते हैं। प्रपत्र का समुचित उपयोग करने की विधि उन्हें बताई जाती है। 

5. सूक्ष्म शिक्षण पाठ योजना 

प्रशिक्षक किसी एक शिक्षण-कौशल तथा पाठ्य-वस्तु की इकाई पर एक सूक्ष्म पाठ योजना बनाता है। 

6. शिक्षण स्तर

पाठ योजना के आधार पर पाँच मिनट तक पाँच अथवा दस छात्रों की कक्षा को पढ़ाया जाता। प्रशिक्षक द्वारा दिये गये पाठ को वीडियो टेप अथवा साधारण कैसेट पर टेप किया जाता हैं। जहाँ पर यह व्यवस्था नहीं हो सकती, वहाँ शिक्षक प्रशिक्षक या सह-प्रशिक्षणार्थी पाठ का अवलोकन करते हैं तथा पर्यवेक्षण प्रपत्रों पर पाठ हेतु समालोचना संकेत बनाते हैं। 

7. प्रतिपुष्टि

हर छात्राध्यापक को व्यक्तिशः तत्कालीन प्रतिपुष्टि प्रदान करना बहुत जरूरी है। प्रतिपुष्टि हेतु प्रायः पाँच मिनट का समय दिया जाता है। 

8. पुनर्योजना 

प्राप्त प्रतिपुष्टि के आधार पर छात्राध्यापक सुझाव संकेतों को अपनाते जाता है। अपने सूक्ष्म पाठ का पुनर्नियोजन करता है । इसके लिए करीब 10 मिनट का समय दिया जाता हैं।

9. पुनः अध्यापन

पुनर्निर्मित अथवा परिमार्जित पाठ योजना को छात्राध्यापक पढ़ाता हैं। 

10. पुनः प्रतिपुष्टि 

इस सोपान पर भी छात्राध्यापक को पुनः प्रतिपुष्टि प्रदान की जाती हैं।

संबंधित पोस्ट,

यह भी पढ़े; भाषा का विकास

कोई टिप्पणी नहीं:
Write comment

आपके के सुझाव, सवाल, और शिकायत पर अमल करने के लिए हम आपके लिए हमेशा तत्पर है। कृपया नीचे comment कर हमें बिना किसी संकोच के अपने विचार बताए हम शीघ्र ही जबाव देंगे।