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11/09/2021

पाठ योजना का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं

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पाठ योजना का अर्थ (path yojna kya hai)

path yojna arth paribhasha visheshta;पाठ योजना से आशय शिक्षक की उस तैयारी से है जिसमें वह कक्षा में प्रवेश करने से पहले यह निश्चित कर लेता है कि उसे विद्यार्थियों को क्या, क्यों, कैसे और किसकी सहायता से पढ़ाना हैं। इस प्रकार से स्पष्ट है कि पाठ योजना शिक्षक की शिक्षण के लिए एक तैयारी है जिसमें वह कक्षा में प्रवेस करने से पहले उन बहुत सी बातों को लिखित रूप में निश्चित कर लेता है जिनके द्वारा व सहायता से उसे अपने शिक्षार्थियों को कक्षा में एक घंटे सुचारू रूप से पढ़ाना हैं। 

पाठ योजना को परिभाषित करते हुए बासिंग लिखते हैं," पाठ संकेत उन उपलब्धियों की सूची का शीर्षक है, जिन्हें अध्यापक कक्षा में प्राप्त करना चाहता हैं। इनमें वे सब वे सब साधन एवं क्रियाएं भी आ जायेंगी जिनकी सहायता से वे उपलब्धियाँ प्राप्त की जाती हैं।" 

इस प्रकार पाठ-योजना अध्ययन का लिखित कथन है। जिसमें वह नवीन पाठ से संबंधित सभी बातों को अंकित कर देता है। इसके द्वारा यह ज्ञात किया जा सकता है कि उनके शिक्षण के सामान्य उद्देश्य क्या हैं? छात्रों का पूर्व ज्ञान क्या हैं? एवं उसे अपने पाठ का प्रस्तुतीकरण किस तरह से करना हैं? तथा छात्रों के ज्ञान का मूल्यांकन किस तरह करना हैं? 

पाठ योजना की परिभाषा (path yojna ki paribhasha)

एल. बी. सैडस के अनुसार," पाठ-योजना वस्तुतः कार्य करने की योजना है। इसमें अध्यापक का कार्य दर्शन, दर्शन ज्ञान अपने विद्यार्थियों के संबंध में उनकी जानकारी, शिक्षा-लक्ष्यों का बोध, विषय-वस्तु का ज्ञान एवं प्रभावपूर्ण विधियों का प्रयोग में उसकी योग्यता का समावेश होता हैं।" 

एन. एल. बाॅसिंग के अनुसार," शिक्षण क्रियाओं तथा उद्देश्यों के आलेख को पाठ योजना कहते हैं। शिक्षण उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए शिक्षक जिन क्रियाओं का नियोजन करता है उनके आलेखन को पाठ योजना की संज्ञा दी जाती है। इसे लिखित व अलिखित दोनों ही रूपो में तैयार किया जाता हैं।" 

बिनिंग एण्ड बिनिंग के अनुसार," दैनिक पाठ योगना के निर्माण में उद्देश्यों को परिभाषित करना, पाठ्य-वस्तु का चयन करना तथा उसे क्रमबद्ध रूप में व्यवस्थित करना और प्रस्तुतीकरण की विधियों एवं प्रक्रियाओं का निर्धारण करना।" 

जोसफ लैण्डन के अनुसार," पाठ योजना को हम कागज पर स्पष्ट रूप से अंकित की जाने वाली पाठ की रूपरेखा कहकर परिभाषित कर सकते हैं जिसमें पाठ से संबंधित सभी महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट रूप से आ जाते हैं चाहे उनका संबंध विषय सामग्री से ही या विधि से।" 

योकम तथा सिम्पसन के अनुसार," शिक्षक अपनी पाठ्य-सामग्री एवं अपने छात्रों के बारे में जो कुछ भी जानता है, उन सबका प्रयोग पाठ-योजना में किया जाना जरूरी होता हैं।" 

इस प्रकार शिक्षण व्यवस्था के सभी पक्षों के व्यावहारिक रूप का उल्लेख नही, पाठ योजना हैं। पाठ योजना का निर्माण शिक्षण की पूर्व-अवस्था में किया जाता है। शिक्षण प्रक्रिया को तीन अवस्थाओं में बाँटा जा सकता हैं-- 

1. शिक्षण से पूर्व की अवस्था, 

2. शिक्षण की अवस्था तथा 

3. शिक्षण के बाद की अवस्था। 

पाठ योजना का संबंध शिक्षण से पहले की अवस्था से होता है। इस अवस्था में शिक्षक को शिक्षण से संबंधित विभिन्न क्रियाओं को नियोजन करना पड़ता है। साधारण भाषा में, शिक्षक अनुदेशनात्मक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए जिन क्रियाओं को कक्षा में करता है उन्हें नियोजित ढंग से लिख देना ही पाठ योजना कहलाती हैं। 

पाठ योजना की विशेषताएं (path yojna ki visheshta)

एक अच्छी पाठ योजना में निम्नलिखित विशेषताएं निहित होनी चाहिए-- 

1. सबसे पहले तो पाठ योजना का लिखित होनी आवश्यक हैं। 

2. पाठ योजना में सामान्य और विशेष उद्देश्य को स्पष्ट रूप से लिखना चाहिए। 

3. इसमें पाठ्य-वस्तु एवं अन्य क्रियाओं के चयन तथा संगठन का समुचित प्रबन्ध होना चाहिए। 

4. पाठ योजना उत्तम/अच्छी शिक्षण विधियों पर आधारित होनी चाहिए। 

5. पाठ योजना में प्रसंग एवं पाठ्यक्रम लिखे होने चाहिए। 

6. यह पूर्व पाठ से नवीन पाठ को संबोधित करे। 

7. इसमें बालक को अच्छे कार्य देने की व्यवस्था हो। 

8. पाठ योजना में व्यक्तिगत भेदों पर ध्यान रखने के लिए समुचित स्थान हो।

9. पाठ योजना में मूल प्रश्न सम्मिलित होने चाहिए। 

10. पाठ योजना में विषय, समय, कक्षा, विद्यार्थियों के औसत आदि भी लिखे होने चाहिए। 

11. पाठ योजना में सम्पूर्ण पाठ की रूप रेखा या सारांश हो। 

12. पाठ योजना में महत्वपूर्ण उदाहरण निहित हों। 

13. पाठ योजना में प्रेरणादायक विधियों का प्रयोग किया जाना चाहिए। 

14. पाठ योजना में इस बात पर ध्यान दिया जाए कि तात्कालिक पक्ष आगामी परिस्थिति में प्रविष्टि हो जाए। 

15. पाठ योजना में प्रत्येक सोपान के लिए समय निर्धारित हो। 

16. पाठ योजना में स्वयं की आलोचना के लिए व्यवस्था हो। जब योजना पूर्ण हो जाए तो शिक्षक को चाहिए कि इसकी आलोचना करके सुधार लाने वाली बातों को लिख दे। 

17. पाठ योजना में शिक्षा के उपकरणों तथा सहायक सामग्रियों, जैसे-- यंत्रों, चार्टों, खाके, मानचित्र, फिल्म तथा अन्य दृश्य-श्रव्य सामग्री तथा उनके उपयोग करने के संबंध में उल्लेख होना चाहिए। 

18. पाठ योजना में परीक्षात्मक अभ्याओं की भी व्यवस्था होनी चाहिए। 

19. पाठ योजना के पुनर्निर्माण की भी व्यवस्था होनी चाहिए। 

20. पाठ योजना सुन्दर तथा स्पष्ट रूप से लिखी होनी चाहिए।

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