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11/09/2021

सूक्ष्म शिक्षण का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं

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सूक्ष्म शिक्षण का अर्थ (sukshm shikshan kya hai)

sukshm shikshan arth paribhasha visheshtayen;सूक्ष्म शब्द अंग्रेजी के माइक्रो शब्द का हिन्दी अनुवाद हैं। सूक्ष्म या माइक्रो शिक्षण का अर्थ हैं, लघु पाठ-अवधि एवं लघु पाठ्य-सामग्री से शिक्षण। सूक्ष्म शिक्षण एक ऐसी शिक्षक-शिक्षण विधि है जो कक्षा-अध्यापन की जटिलता तथा विस्तार को घटाकर उन्हें लघु रूप देती हैं एवं शिक्षण कौशलों तथा निपुणताओं के उन्नयन के लिए कार्य करती है। इसका प्रयोग शिक्षक प्रशिक्षणार्थियों के व्यवहार-परिवर्तन हेतु भी किया जाता हैं। 

सूक्ष्म विधि के जन्मदाता डी. एलेन ने जो संयुक्त राज्य अमेरिका के स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय में कार्य करते थे, जिन्होंने सन् 1966 में सूक्ष्म शिक्षण की इस तरह व्याख्या की," सूक्ष्म शिक्षण एक विश्लेषित शिक्षण है जिसमें शिक्षणों की प्रक्रिया लघु रूप में कम विद्यार्थियों वाली कक्षा के सामने अल्प समय में सम्पन्न की जाती हैं। इसका प्रयोग सेवारत तथा सेवापूर्व शिक्षकों के व्यावसायिक विकास हेतु किया जाता हैं। सूक्ष्म शिक्षण, अध्यापकों को शिक्षण के अभ्यास हेतु ऐसी स्थिति प्रदान करता है जिससे कक्षा-शिक्षण की सामान्य जटिलताएँ कम हो जाती हैं। इसमें अध्यापक बहुत ज्यादा मात्रा में अपने शिक्षण-व्यवहार हेतु प्रतिपुष्टि प्राप्त करता हैं।" 

सूक्ष्म शिक्षण की परिभाषा (sukshm shikshan ki paribhasha)

स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय के अनुसार," सूक्ष्म-शिक्षण अध्यापन, अभ्यास, कक्षा आकार व कक्षा अवधि में न्यूनीकृत अनुमाप हैं।" 

मैक एलीज एवं अन्वन के अनुसार," शिक्षक प्रशिक्षणार्थी द्वारा सरलीकृत वातावरण में किए गए शिक्षण व्यवहारों को तत्काल प्रतिपुष्टि प्रदान करने के लिए क्लोज सर्किट टेलीविजन के प्रयोग को प्रायः सूक्ष्म-शिक्षण कहा जाता हैं।" 

ए. डब्ल्यू. डी. एलेन के अनुसार," सूक्ष्म-शिक्षण समस्त शिक्षण को लघु क्रियाओं में बाँटना हैं।" 

बी. एम. शोर के अनुसार," सूक्ष्म-शिक्षण कम अवधि, कम शिक्षण क्रियाओं वाली प्रविधि हैं।" 

वी. के. पासी के अनुसार," सूक्ष्म शिक्षण एक पशिक्षण विधि हैं जिसमें छात्राध्यापक किसी एक शिक्षण कौशल का प्रयोग करते हुए थोड़ी अवधि हेतु छोटे समूह को कोई एक सम्प्रत्यय पढ़ाता हैं। 

सूक्ष्म शिक्षण की विशेषताएं (sukshm shikshan ki visheshta)

सूक्ष्म शिक्षण की निम्नलिखित विशेषताएं हैं-- 

1. शिक्षण प्रक्रिया व्यावहारिक दृष्टिकोण में स्पष्टतः परिभाषित होते हैं, अतः अधिक सुगमता से प्राप्त किए जा सकते हैं। 

2. परम्परागत प्रशिक्षण की अपेक्षा सूक्ष्म-शिक्षण अधिक सरल व तनावमुक्त होता हैं क्योंकि इसमें प्रशिक्षणार्थी को थोड़े छात्रों पर चयनित एक कौशल के लिए ही कार्य करना होता हैं। 

3. यह अत्यधिक वैयक्तिक प्रविधि हैं जिसमें प्रशिक्षणार्थी शिक्षण अधिगम के किसी विशिष्ट पक्ष पर अवधान केन्द्रित कर सकता हैं। 

4. कक्षा सम्प्रेषण एवं अन्तःक्रियाओं को अधिक वस्तुनिष्ठता के साथ सुगमतापूर्वक अध्ययन व अवलोकन किया जा सकता हैं। 

5. इसमें प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी के पाठ का संपूर्ण निरीक्षण किया जाता हैं और तुरंत ही पृष्ठपोषण मिल जाता हैं, अतः यह अधिक प्रभावशाली हो जाती हैं। 

6. थोड़े समय एवं थोड़े छात्रों पर प्रयुक्त होने के कारण इसमें अनेक विकल्पों पर कार्य करने की सुगमता रहती हैं। इसमें अनेक प्रकार के प्रयोग भी किए जा सकते हैं। 

7. यह एक जनतान्त्रिक प्रविधि है जो शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम को लक्ष्य केन्द्रित और उद्देश्यपूर्ण बनाती हैं।

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