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11/08/2021

कविता शिक्षण का महत्व

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कविता शिक्षण का महत्व 

kavita shikshan ka mahatva;पाठ्यक्रम में कविता शिक्षण को क्यों महत्व दिया गया हैं? क्या कारण है कि कविता-पाठ गद्य-पाठ से अधिक प्रभावशाली होता हैं? प्रश्न स्वाभाविक है और इसका उत्तर भी आसान हैं। कविता शिक्षण का महत्व निम्नलिखित प्रकार से हैं-- 

1. हैडो महान शिक्षाविद् कहा करते थे कि," कविता विद्यार्थियों में सौंदर्य भावना (Aesthetics sense) पैदा करती हैं।" यदि छात्र अपने विचार और कार्य में, ध्वनि और ह्रदय में सौंदर्य की ओर स्वाभाविक रूप से उन्मुख हो जाएँ तो हम शिक्षा का उद्देश्य प्राप्त कर लेंगे। कविता जिस सौंदर्य की अनुभूति कराती है, उस सौंदर्य का दर्शन यदि छात्र विद्यालय छोड़ने के बाद भी कर सकें तो शिक्षा का उद्देश्य पूरा हो जायेगा। 

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2. कविता छात्रों की भावनाओं का परिष्करण करती है। उनमें शक्ति और साहस के भाव पैदाकर उनको उत्तम और उत्कृष्ट बनाती हैं। वे दीन-दुखियों की सहायता करने के लिए प्रेरित होते हैं। उनमें देश-प्रेम की भावना का विकास होता हैं। कवियों की सूक्तियाँ उनके आचरण को सुधारती हैं। अतः कविता का शिक्षण किया जाता हैं। 

3. छात्रों में कल्याणकारी भावनाएँ विकसित हों, वे काव्य में रामायण, महाभारत जैसे महाकाव्यों में पढ़े हुए आदर्श पुरूषों के जीवन चरित्रों से जीवन भर मार्ग-दर्शन लेते रहें, इसलिए कविता शिक्षण किया जाता हैं। 

4. जीवन एक कला हैं। उसको कलात्मक बनाने के लिए पाठ्यक्रम में सर्वोच्च कला काव्य को स्थान दिया जाता है। मानव-जीवन का उद्देश्य हैं अलौकिक आनन्द की प्राप्ति, कविता उस अलौकिक आनंद का साधन हैं। कविता सर्वश्रेष्ठ कला इसलिए है कि उसमें मूर्त आधार बहुत कम लिया जाता हैं। कविता ललित कलाओं में सर्वोत्तम कला हैं, जो हमको चिरन्तन आनंद देने वाली वस्तु हैं। 

5. लेमैन एक शिक्षाविद् हुए हैं। उन्होंने कविता शिक्षण को पाठ्यक्रम में रखने के लिए विशेष जोर दिया है। लेमैन के अनुसार," यदि हम बालक को पूर्ण शिक्षा देना चाहते हैं तो हमें उसके ह्रदय को शिक्षा देनी चाहिए। ह्रदय की वास्तविक शिक्षा कविता में अन्तःदृष्टि प्राप्त करने से होती है। कविता के भावों को समझने में छात्रों में जो सौंदर्य-भावना पैदा होती हैं, वह उनके जीवन को समृद्ध बना देती हैं।" 

प्रत्येक कविता के शब्द में छात्र के लिए संदेश होता हैं। कविता छात्रों को जीवन के चिरन्तन सत्यों की ओर ले जाती हैं। 

यदि हम चाहते है कि कविता के शिक्षण से छात्रों के व्यक्तित्तव का समुचित विकास हो तो हमें उनके लिए उपयुक्त काव्य का चयन करना चाहिए। मैथ्य आर्नल्ड के अनुसार," चयनित काव्य में भावना और अभिव्यक्ति का वास्‍तविक सौंदर्य होना चाहिए और वह सौंदर्य ऐसा हो जो छात्रों के मस्तिष्क और मन को प्रभावित कर सकें।" 

कविता का चयन छात्र विकास की अवस्था के अनुकूल होना चाहिए। उसकी भाषा, भाव, छन्द और स्वरूप बालकों की आयु के अनुरूप होना चाहिए। यही कारण है कि उच्च प्राथमिक कक्षाओं में हम ऐसी कविताओं का चुनाव करते हैं, जिनकी भाषा सरल, भाव आसानी से ग्रहण करने योग्य और छन्द संगीतमय होता हैं। सुदामा चरित्र (आख्यान कविता), किसान, सियारामशरण गुप्त की जय-जय हिन्द हमारे, भक्ति-सरोशर, सूर, तुलसी, मीरा की कविताएँ आदि का चयन करते हैं। जबकि उच्च माध्यमिक कक्षाओं में केशव, महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रसाद की काव्य रचनाओं को पाठ्यक्रम में स्थान देते हैं। 

छोटी आयु स्तर के बालकों में प्रेम, लज्जा आदि के संवेग तो होते हैं, किन्तु दाम्पत्य भाव नही होता। इसलिए कक्षा 6,7, और 8 में ऐसी रचनाओं को स्थान दिया जाता हैं, जो बालकों में दाम्पत्य प्रेम से सम्बंधित संवेगों को जाग्रत न करें। वात्सल्य रस की कविताएँ बच्चों को प्रिय लगती हैं। इसलिए सुभद्राकुमारी चौहान, सूरदास आदि कवियों की रचनाएँ इन कक्षाओं के लिए संकलित की जाती हैं। बच्चों को प्रकृति से प्रेम होता हैं, इसलिए प्रकृति-सुषमा, प्रकृति-चित्रण जैसी रचनाएँ उनकी पाठ्य-वस्तु में स्थान पाती हैं।

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