2/13/2022

राजनीतिक दलों के कार्य, भूमिका, महत्व

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राजनीतिक दलीय व्यवस्था 

संसदीय लोकतंत्र के लिए विभिन्न राजनीतिक दल आवश्यक है। राजनीतिक दल नागरिकों के संगठित समूह है, जो एक सी विचारधारा रखते है। ये अपनी नीतियों और कार्यक्रमों के लिए प्रतिबद्ध होते है। राजनीतिक दल एक शक्ति के रूप मे कार्य करते है और सदैव शक्ति प्राप्त करने उसे बनाये रखने का प्रयास करते रहते है। राजनीतिक दलों मे कुछ सामान्य विशेषताएं होती है। 

राजनीतिक दलों के कार्य (rajnitik dalo ke karya)

राजनीतिक दलों के निम्नलिखित कार्य हैं--
1. प्रतिनिधित्व 
प्रतिनिधित्व करना राजनीतिक दलों का प्राथमिक कार्य है। आधुनिक समाज खासकर वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था में अप्रत्यक्ष लोकतंत्र प्रचलित है। इसमें नागरिक शासन व्यवस्था के प्रत्येक कार्य में सहभागिता न कर अपने प्रतिनिधि चुनते हैं, जो उनके एजेंट में कार्य करते हैं। सभी नागरिकों के पास सभी शासकीय कार्यों के लिए समय तथा प्रशिक्षण नहीं है इसलिए संसद, विधानसभाओं में भी प्रतिनिधि उन नागरिकों के हितानुरूप कार्य करते हैं, जिन्होंने उन्हें चुनकर भेजा है। राजनीतिक दल भी एक बड़े प्रतिनिधि (एजेंट) के रूप में कार्य करते है। वह जनता के सामने अपनी विचारधारा, सिद्धांत व नीतियाँ रखते है और उसी आधार पर (अपने सदस्यों को विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों से उम्मीदवार बनाकर) जनता से समर्थन व वैधता जुटाने का प्रयत्न करते हैं। इस प्रकार राजनीतिक दल जन-शक्ति का प्रतिनिधित्व उन्हीं के प्रतिनिधि बनकर करते हैं। इसी प्रतिनिधित्व को ही प्राप्त करने के लिए राजनीतिक दल बार-बार चुनाव के माध्यम से नागरिकों के बीच जाते है और वोट रुपी सहमति प्राप्त करने का प्रयास करते हैं, जिससे सत्ता प्राप्त की जा सके। 
2. चुनाव लड़ना तथा सत्ता की प्राप्ति  
जनता का प्रतिनिधित्व करने के लिए सामान्यत दल चुनाव लड़ते हैं। अलग-अलग चुनावी पद्धतियों में चुनाव भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं। परन्तु चुनावी अभियान चुनावी घोषणापत्र चुनावी सभाएं आदि, जो हर चुनाव में समान रहता है, से राजनीतिक प्रतिस्पर्धा निर्धारित की जाती है। प्रत्येक राजनीतिक दल सर्वाधिक विजयी होने वाले उम्मीदवार को चुनाव में प्रत्याशी व दल का उम्मीदवार बनाते है कई राजनीतिक व्यवस्थाओं में दल ही चुनावों के औपचारिक संघर्षकर्त्ता होते हैं। मतदाताओं को दलों में से ही किसी दल को चुनना होता है परन्तु कई प्रसिद्ध व्यवस्थाओं में दल अपने सक्षम उम्मीदवार खड़े करते हैं, जिन्हें ही मतदाता चुनता है। अधिक संभावना यह रहती है कि उम्मीदवार राजनीतिक दल के जुड़ाव के कारण मत प्राप्त करता है। जिस राजनीतिक दल को सर्वाधिक संख्या में संसद व विधानमंडल की सीटें मिलती है, वह ही जनता से शासन व प्रतिनिधित्व करने की वैध सत्ता प्राप्त करता है और सरकार (शासन) चलाता है। 
3. हित स्पष्टीकरण एवं हित समूहन  
राजनीतिक दलों का एक प्रमुख कार्य समाज में विद्यमान विभिन्न हितों को इकट्ठा करना तथा उनके पूर्ण होने के लिए विधानमंडल के अन्दर व बाहर प्रयास करना है। इसी प्रक्रिया में वह विभिन्न माँगे (हित), जो नागरिक या नागरिक समूह उठाते है उनकी सभी मांगों में से महत्त्वपूर्ण मांगों को पूर्ण करने का प्रयत्न (प्रदर्शन, सभा आयोजन, संसद में समर्थन व विरोध के माध्यम से) राजनीतिक दल करते है। इससे नागरिक शासन व्यवस्था राजनीतिक दलों से भी जुड़े रहते हैं और शासन व्यवस्था भी अच्छे मार्ग की ओर बढ़ती है। 
4. संचार वाहक 
राजनीतिक दल  शासक  व शासितों  के बीच पुल का कार्य करते हैं। राजनीतिक व्यवस्था में संचार का बड़ा महत्त्व है। राजनीतिक व्यवस्था में कई चरण होते हैं। इन चरणों में दो-तरफा संचार राजनीतिक व्यवस्था को उचित रूप से संचालन के लिए अनिवार्य है और राजनीतिक दल वह मध्यस्थ बनते हैं, जिनके जरिए राजनीतिक दल शासन को जनता तथा जनता को शासन से जोड़ते हैं। इससे शासन तृणमूल से अलग नहीं रहता और पर्याप्त जन संचार के कारण शासन के निरंकुश होने का भय भी नहीं विद्यमान रहता। 
5. नीति निर्माण 
राजनीतिक दलों का एक प्रमुख कार्य नीति निर्माण करना है। सत्ता प्राप्ति के लिए राजनीतिक दल विभिन्न सभाओं, चुनावी घोषणापत्रों में जनसमर्थन प्राप्त करने के लिए कुछ नीतियों, कार्यक्रमों की घोषणाएं करते हैं और सत्ता प्राप्त करने के पश्चात् वह उन नीतियों कार्यक्रमों का निर्माण करते हैं, उन्हें क्रियान्वित करते हैं । विभिन्न हित-समूहों, नागरिकों द्वारा उठाई जाने वाली उचित व आवश्यक मांगों पर भी कार्यक्रम व नीतियाँ बनायी जाती है। साथ ही जब राजनीतिक दल सत्ता में न होकर विपक्ष की भूमिका निभाते हैं, तब वह सत्ताधारी पक्ष पर जनहितकारी नीतियों के निर्माण हेतु सत्ताधारी दल पर दबाव डालते है। 
6. जन-जागरूकता तथा समाजीकरण  
जनता को जागरूक तथा उनके राजनीतिक समाजीकरण भी राजनीतिक दल करते हैं। कई दलों के वाद-विवादों विमर्शो तथा चुनावी अभियान व राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के जरिए राजनीतिक दल जनता को शिक्षित जागरूक करते हैं। राजनीतिक शिक्षा लोगों को प्रदान करते हैं, जिससे जनता राजनीतिक समस्याओं से अवगत हो तथा अपने अधिकारों व कर्तव्यों के बारे में जागरूक हो। राजनीतिक दल समय-समय पर विपक्षी दलों तथा सत्ताधारी दल के पक्ष-विपक्ष में लेख, पर्चे प्रकाशित करते रहते हैं जिससे विभिन्न मुद्दों पर राजनीतिक दलों के विचार, यथार्थ सभी तक पहुँचते रहे और नागरिक स्वयं निर्णय करे कि कौन सही है और कौन गलत इस तरह वह एक व्यापक राजनीतिक संस्कृति का निर्माण करते हैं। लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था में यह संस्कृति व उसके अनुरूप समाजीकरण लोकतांत्रिक रहता है साम्यवादी देशों में साम्यवादी समाजीकरण रहता है। 
इस प्रकार मौलिक मूल्य तथा नियम राजनीतिक दल प्रत्येक व्यवस्था में उत्पन्न करते हैं, जिससे सही-गलत, नैतिक-अनैतिक को जनता पहचान सके। 
7. राजनीतिक भर्ती  
राजनीतिक दलों का एक कार्य भर्ती भी है। यह भर्ती प्राथमिक रूप से सदस्यों की भर्ती से सम्बंधित है और दल को सुसंगठित संचालन के लिए, जिन नेताओं की आवश्यकता पड़ती है, उनसे भी सम्बंधित है (अभिजन भर्ती)। सार्वजनिक पदों पर भर्ती के लिए दल के सदस्यों को प्रशिक्षित व तैयार किया जाता है, जिससे वह समय पर राज्य अथवा राष्ट्रीय राजनीति का नेतृत्व करने की क्षमता रखे, उनमें से उचित को चुना जा सकें। व्यवहार में, ऐसा संभव है कि किसी बाहरी व्यक्ति (संभवतः करिश्माई व्यक्तित्व) के हाथों में सीधे राजनीतिक नेतृत्व सौंप दिया जाए। परन्तु ऐसा होने के लिए भी उस व्यक्ति को राजनीतिक दल की प्राथमिक सदस्यता लेनी ही पड़ती है। अतः भर्ती व नेतृत्व निर्माण दलों का अनिवार्य कार्य है। 
8. सरकार का संगठन 
राजनीतिक दल सत्ता प्राप्त कर सरकार बनाते है। सरकार बनाने के पश्चात् सरकार के संगठन के रूप भी वह दल कार्य करते हैं। वह दल सरकार की सहायता करते है तथा सरकार व दल के बीच स्थायित्व व सुसम्बद्धता बनाए रखते है। सामान्यतः सरकार के महत्त्वपूर्ण पर्दों पर राजनीतिक दल के ही महत्त्वपूर्ण सदस्यों को नियुक्त किया जाता है। इसे विधायिका व कार्यपालिका जो सरकार का महत्त्वपूर्ण अंग है, में देखा जा सकता है। इसके साथ ही सत्ताधारी दल सरकार की नीतियों, सकारात्मक कार्यों आदि को जनता के बीच भी प्रचारित करता है। इससे सरकार की उपलब्धियां जनता तक पहुँचती है और पुन: उस दल को सत्ता की प्राप्ति की संभावनाएं तैयार होती है।
यह भी पढ़ें? राजनीतिक दलों में विपक्ष की भूमिका

राजनीतिक दलों की भूमिका (rajnitik dalo ki bhumika)

राजनीतिक दलों की भूमिका को निम्नलिखित बिन्दुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता हैं--
राजनीतिक दल लोकतंत्र के पहिये है और लोकतंत्रीय व्यवस्था के अन्तर्गत जनता की भावनाओं के निर्धारण तथा अभिव्यक्तिकरण की महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करते हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों की भूमिका इस प्रकार है-- 
1. लोकमत का निर्माण करते है  
समाज के विभिन्न एवं परस्पर विरोधी विचारों को दलों द्वारा व्यवस्थित किया जाता है। वे बिखरे एवं अस्पष्ट एवं व्यवस्थित करते हैं तथा जनमत निर्माझा में योग देते हैं। सामाजिक जीवन की विभिन्न उलझी हुई समस्याओं में से प्रमुख समस्याओं को वे जनता के समक्ष प्रस्तुत करते हैं। 
2. राजनीतिक शिक्षा प्रदान करते है 
दल जनता को राजनीतिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। लॉवेल के अनुसार," दल  विचारों के दलाल हैं। विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक समस्याओं के संबंध में प्रत्येक दल द्वारा पक्ष एवं विपक्ष में विचार प्रस्तुत किये जाते हैं अपने-अपने कार्यक्रम प्रस्तुत किये जाते हैं, निर्वाचनों में जन सभायें आयोजित की जाती हैं। इससे लोगों में राजनीतिक शिक्षा एवं चेतना का प्रसार होता है। जनता सदैव सजग एवं जागरूक रहती है। 
3. चुनावों में सहायता प्रदान करते है  
दलों के कारण मतदाताओं को मतदान में काफी सुविधा रहती है। निर्वाचनों में दलों द्वारा अपने प्रत्याशी खड़े किये जाते हैं। उनके पक्ष में प्रचार करते हैं, आर्थिक सहायता प्रदान करते हैं। शासन सत्ता पर अपना अधिकार प्राप्त करते हैं। वस्तुतः लोकतांत्रिक राज्यों में राजनीतिक दलों के बिना चुनाव लड़ना एवं विजय प्राप्त करना कठिन कार्य है।
4. शासन के संचालन में सहयोग प्रदान करते है 
राजनीतिक दल चुनाव में बहुमत प्राप्त करके सरकार का निर्माण करते हैं। संसदीय एवं अध्यक्षात्मक दोनों प्रकार की शासन प्रणालियों में सरकार का निर्माण तथा शासन व्यवस्था का संचालन राजनीतिक दलों के आधार पर ही किया जाता है।
5. सरकार पर नियंत्रण रखते है 
विपक्षी दलों का उद्देश्य सरकारी नीतियों की स्वस्थ्य आलोचना करके जनमत को अपने पक्ष में करना होता है। विपक्ष के कार्यकलापों से जनता को यह ज्ञात होता है कि शासन- नीति की रूपरेखा क्या है? जब जनता शासन की वैकल्पिक नीति का समर्थन देने लगती है तब विरोधी दल शासन की बागडोर संभालने में सक्षम हो जाता है। 
6. जनता और सरकार के मध्य सेतु का कार्य करते है  
सत्तारूढ़ दल और विरोधी दलों का सम्पर्क जनता से निरंतर बना रहता है विरोधी दल जनता की कठिनाइयों और मांगों को सरकार के सामने रखते हैं। एक राजनीतिक दल का मुख्य कार्य है कि वह विचारों का आदान-प्रदान एवं सम्पर्क का रास्ता खुला रखे। इस प्रकार सरकार सार्वजनिक कल्याण के लिए एवं लोकमत के अनुसार चलती है। 
7. शासन के विभिन्न अंगों में समन्वय बनाये रखते है 
राजनीतिक दल शासन के विभिन्न अंगों में सामंजस्य स्थापित करते हैं। संसदीय शासन प्रणाली में व्यवस्थापिका एवं कार्यपालिका में दलीय अनुशासन एवं कार्यक्रम के फलस्वरूप अभिन्न संबंध बना रहता है अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली में शासन के विभिन्न अंगों में पृथक्करण के कारण राजनीतिक दल ही शासन संचालन के कार्य को सुगम बनाते हैं। दल व्यवस्था के कारण ही सांविधानिक कठोरता वांछित लचीलेपन में बदल जाती है।

राजनीतिक दलों का महत्व (rajnitik dalo ka mahatva)

राजनीतिक दल आधुनिक समय में जीवन की एक आवश्यकता बन गया है। अप्रत्यक्ष प्रजातंत्र जहाँ जनता के प्रतिनिधि ही शासन की बागडोर सम्भालते हैं, वहाँ राजनीतिक दल के बिना काम चल ही नहीं सकता। निरंकुश एकतन्त्रात्मक शासन में राजनीतिक दल का तो और भी महत्व बढ़ जाता हैं। साम्यवादी राज्यों में जहाँ दल और शासन मे कोई भेद नहीं, वहाँ राजनीतिक दल ही सर्वेसर्वा हैं। प्रजातंत्र का राज्य कैसा सी हो, राजनीतिक दल जीवन रक्त के समान हैं। राजनीतिक दलों को सरकार का चौथा अंग कहा जा सकता हैं। 
ह्रावूर के शब्दों में," प्रजातंत्रात्मक यंत्र के चालन में राजनीतिक दल ईधन के समान हैं।" 
मुनरो के अनुसार," प्रजातंत्रात्मक शासन दलीय शासन का दूसरा रूप हैं। विश्व इतिहास में कभी भी ऐसी स्वतंत्र सरकार नहीं  रही जिसमें राजनीतिक दल का अस्तित्व न हो।" 
ब्राइस का मत हैं," राजनीतिक दल अनिवार्य है। कोई भी बड़ा देश उसके बिना नही रह सकता। किसी व्यक्ति ने यह नही दिखाया हैं कि लोकतंत्र उसके बिना कैसे चल सकता हैं।" 
आज के युग में राजनीतिक दल का प्रत्येक देश में चाहे वह छोटा हो या बड़ा, राजतंत्र हो या अधिनायकतंत्र, बड़ा महत्व हैं। प्रत्येक राज्य में सरकार किसी न किसी दल की रहती ही हैं।
राजनीतिक दलों का महत्व या उपयोगिता निम्नलिखित प्रकार से स्पष्ट की जा सकती हैं--
1. राजनीतिक दल जनतांत्रिक सरकार की कार्यकारिता के लिए अपरिहार्य है। 
एडमण्ड बर्क के अनुसार, " दलीय प्रणाली चाहे पूर्ण रूप से भले के लिए हो अथवा बुरे के लिए, लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के लिए अनिवार्य है।" 
राजनीतिक दल राष्ट्रीय हित को व्यवस्थित एवं तर्कपूर्ण नीति के रूप में प्रस्तुत करते हैं, उसके पक्ष में लोकमत का निर्माण करते हैं, लोकतांत्रिक चुनाव प्रणाली को मूर्तरूप देते हैं और शासन के संचालन के साथ ही उसकी निरंकुशता को नियंत्रित करते हैं और लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं, अधिकारों एवं मूल्यों की रक्षा करते हैं। 
2. मेकाइवर का कथन है कि," दलीय संगठन के बिना किसी सिद्धान्त का व्यवस्थित एवं एकीभूत प्रकाशन नहीं हो सकता, किसी भी नीति का क्रमबद्ध विकास नहीं हो सकता संसदीय चुनावों की वैज्ञानिक व्यवस्था नहीं हो सकती और न ऐसी मान्य संस्थाओं की व्यवस्था ही हो सकती है जिनके द्वारा कोई भी दल शांति प्राप्त करता है तथा उसे स्थिर रखता है।" 
3. शासन व्यवस्था चाहे संसदात्मक हो अथवा अध्यक्षात्मक, राजनीतिक दलों के अभाव में सरकार का कुशल संचालन नहीं हो सकता। विरोधी दलों के रूप में भी दलों का बहुत महत्व है क्योंकि विरोधी दल ही सरकार की नीतियों तथा उसके कार्यों पर नियंत्रण रखता है और उसे निरंकुश एवं स्वेच्छाचारी बनने से रोकता है। इस प्रकार राजनीतिक दलों द्वारा ही प्रतिनिधि सरकार सफलता के साथ चल सकती है। 
4. एक स्वस्थ एवं जागरूक राजनीतिक वातावरण केवल राजनीतिक दल ही कायम कर सकते हैं। राजनीतिक दल जनमत निर्माण में सहायक होते हैं। लावेल का कहना है कि," राजनीतिक दल किसी प्रश्न पर जनमत तैयार करने के लिए वे कुछ सिद्धान्त या प्रश्न उपस्थित करते हैं।" 
5. लोकतांत्रिक व्यवस्था लोकमत पर आधारित होती है और लोकमत का निर्माण मुख्य रूप से राजनीतिक दलों के द्वारा ही किया जाता है। दलों के अपने निश्चित सिद्धान्त होते हैं। इन सिद्धान्तों के आधार पर ही मतदाता उनके उम्मीदवारों को चुनावों में परास्त या विजयी बनाते हैं। 
राजनीतिक दल बहुमत प्राप्त करके न केवल सरकार का निर्माण करते हैं अपितु राजनीतिक दल विरोधी पक्ष की भुमिका का निर्वाह करके सरकार के अनुचित एवं स्वेच्छाचारी कार्यों पर अंकुश भी लगाते हैं। 
6. लॉड ब्राइस का कथन है कि, " राजनीतिक दल अनिवार्य है और कोई भी बड़ा स्वतंत्र देश उनके बिना नहीं रह सकता है। किसी व्यक्ति ने यह नहीं बताया है कि प्रजातंत्र उनके बिना कैसे चल सकता है। ये मतदाताओं के समूह की अराजकता में से व्यवस्था उत्पन्न करते हैं। यदि दल कुछ बुराइयां उत्पन्न करते हैं तो वे दूसरी बुराइयों को दूर भी करते हैं। इस प्रकार राजनीतिक दल आधुनिक राज-व्यवस्था एवं शासन प्रणाली का अनिवार्य अंग हैं।
संदर्भ; समग्र शिक्षा, मध्यप्रदेश राज्य शिक्षा केन्द्र, भोपाल।
जीवन पर्यत शिक्षण संस्थान, दिल्ली विश्वविद्यालय

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7 टिप्‍पणियां:
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  1. Rajneetik dal ke karya ke bare me bahut hi achchi jankari.

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  2. बहुत बहुत धन्यवाद आपका आपने इस article को share करके बहुत सारे students की मदद की

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    1. अपने विचार बताने के लिए धन्यवाद,

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  3. आपने इसमें राजनैतिक दलों का गठन नहीं दीया

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    1. अपने विचार बताने के लिए, हम शीघ्र ही इसे इसमे जोड़गे।

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