9/21/2020

स्वतंत्रता का अर्थ, परिभाषा, प्रकार

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स्वतंत्रता का अर्थ (swatantrata ka arth)

swatantrata meaning in hindi;स्वतंत्रता शब्द का अंग्रेजी पर्याय  " लिबर्टी " लेटिन भाषा का " लिबर " शब्द से बना है जिसका अर्थ मुक्त या स्वतंत्र या बन्धनों का अभाव होता है।

लेकिन स्वतंत्रता का सही अर्थ प्रो. लाॅस्की के अनुसार " उस वातावरण की स्थापना से है जिसमे मनुष्यों को अपने पूर्ण विकास के लिए अवसर प्राप्त होते है।

स्वतंत्रता के वास्तविक अर्थ पर राजनीतिक विचारकों मे मतैक्यता नही है। यूनानी विचारक विधि के अनुद्देश्यों के पावन को स्वतंत्रता मानते है। रूसो के अनुसार " समाज मे व्यक्ति उस स्वतंत्र होता है जब वह अपने को सामान्य इच्छा के अधीन कर देता है। स्पेन्सर बंधनों के अभाव को स्वतंत्रता मानते है। काॅन्ट ने स्वतंत्रता को स्वतंत्र नैतिक संकल्प के अनिवार्य आदेशों का पालन माना है। 

स्वतंत्रता की परिभाषा (swatantrata ki paribhasha)

मैकियावली के अनुसार " सब प्रकार के बन्धनों का अभाव नही अपितु अनुचित के स्थान पर उचित प्रतिबन्ध (बन्धन) की व्यवस्था ही स्वतंत्रता है। 

सीले के अनुसार " स्वतंत्रता अतिशासन का विरोधी है।

जी. डी. एच. कोल के अनुसार " बिना किसी बाधा के अपने व्यक्तित्व को प्रगट करने के अधिकार का नाम स्वतंत्रता है।

स्वतंत्रता के प्रकार (swatantrata ke prakar)

1. राजनीतिक स्वतंत्रता 

राज्य की राजनीतिक प्रक्रिया मे स्वतंत्रतापूर्वक सक्रिय भाग लेने की स्वतंत्रता राजनीतिक स्वतंत्रता कहलाती है। लास्की ने इस प्रकार की स्वतंत्रता की परिभाषा करते हुए कहा है, " राजनीतिक स्वतंत्रता का अभिप्राय राज्य के कार्यों व्यापारों मे सक्रिय भाग लेने के अधिकार से है। 

2. आर्थिक स्वतंत्रता 

प्रत्येक व्यक्ति को जीविका कमाने की समुचित सुरक्षा व सुविधा प्राप्त होना आर्थिक स्वतंत्रता है।

3. प्राकृतिक स्वतंत्रता 

प्राकृतिक स्वतंत्रता से तात्पर्य उस स्वतंत्रता से है जो व्यक्ति को प्रकृति द्वारा प्रदान की गई है। यह स्वतंत्रता राज्य की स्थापना से भी पहले प्रकृति की ओर से लोगों को प्राप्त होती है। 

4. नागरिक स्वतंत्रता 

नागरिक स्वतंत्रता वह स्वतंत्रता है जो व्यक्ति को समाज और राज्य के सदस्य के रूप मे प्राप्त होती। नागरिक स्वतंत्रता की गारंटी राज्य देता है। 

5. व्यक्तिगत स्वतंत्रता 

व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अर्थ है व्यक्ति को स्वयं के निजी कार्यों, विश्वासों और मामलों मे स्वतंत्रता। उदाहरण के लिए व्यक्ति के रहन-सहन, धर्म, विश्वास, वेशभूषा, परिवार आदि के मामलों मे राज्य या किसी अन्य व्यक्तियों द्वारा किसी प्रकार का हस्तक्षेप नही किया जाना चाहिए।

6. स्वाभाविक स्वतंत्रता 

यह स्वतंत्रता मानव स्वभाव के अनुरूप होती है। रूसो और तिलक इसी प्रकार की स्वतंत्रता के पक्षधर थे। तिलक ने इसीलिए कहा है कि स्वंतंत्रता मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार है। रूसो का कहना है कि मनुष्य प्राकृतिक युग (राज्य के जन्म के पूर्व से) इसी स्वतंत्रता का उपयोग कर रहा है। अब तो समाज के विकास से वह बन्धनों  मे जकड़ गया है। 

7. सामाजिक स्वतंत्रता 

यह स्वतंत्रता व्यक्ति को समाज मे प्राप्त होती है। वास्तव मे समाज का जन्म ही इसलिए हुआ है कि समाज मे रहने वाले सभी लोगों को यह स्वतंत्रता प्राप्त होनी चाहियें, जिससे वह अपने व्यक्तित्व का विकास कर सके। इस स्वतंत्रता के अंतर्गत जीवन और संपत्ति की सुरक्षा, आवागमन की स्वतंत्रता, धर्म की स्वतंत्रता इत्यादि आती है। 

8. सांस्कृतिक स्वतंत्रता

यह भी एक प्रकार की सामाजिक स्वतंत्रता है जिसमे किसी समाज मे रहने वालों को अपनी संस्कृति को बनाये रखने, उसकी रक्षा करने तथा समृद्ध करने की स्वतंत्रता प्राप्त होती है।

9. राष्ट्रीय स्वतंत्रता 

राष्ट्रीय स्वतंत्रता द्वारा परतंत्र राष्ट्र अपना शासन अपने आप करने का राजनीतिक अधिकार प्राप्त करता है। साम्राज्यवाद से मुक्ति पाने के लिए राष्टों ने राष्ट्रीय स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया है। जैसा कि भारत को 15 अगस्त, 1947 को ब्रिटिन से मुक्ति के बाद राष्ट्रीय स्वतंत्रता या स्वाधीनता प्राप्त हुई है।

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