9/22/2020

लोक कल्याणकारी राज्य अर्थ, परिभाषा, कार्य

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लोक कल्याणकारी राज्य का अर्थ, लोक कल्याणकारी राज्य किसे कहते है? 

लोक कल्याणकारी राज्य वह राज्य है जिसमे शासन की शक्तियों का प्रयोग किसी वर्ग विशेष के हितों के लिए नही अपितु सम्पूर्ण जनता के हितों के लिए किया जाता है। लोक कल्याणकारी राज्य एक ऐसा राज्य होता है जो जनता के कल्याण के लिए अधिकाधामिक कार्य करता है तथा जो अपने सभी नागरिकों को न्युनतम जीवन-स्तर प्रदान करना अपना अनिवार्य उत्तरदायित्व समझता है। 

लोक कल्याणकारी राज्य की परिभाषा (lok kalyanakari rajya ki paribhasha)

टी. डब्ल्यू. केन्ट के अनुसार " लोकहितकारी वह राज्य है जो अपने नागरिकों के लिए व्यापक समाज सेवाओं की व्यवस्था करता है। इन समाज सेवाओं के अनेक रूप होते है। इनके अंतर्गत शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और वृद्धावस्था मे पेंशन, आदि की व्यवस्था होती है। इनका मुख्य उद्देश्य नागरिकों को सभी प्रकार की सुरक्षा प्रदान करना होता है। 

पंडित नेहरू के अनुसार " सबके लिए समान अवसर प्रदान करना, अमीरों-गरीबों के बीच अंतर मिटाना व जीवन-स्तर को ऊपर उठाना, कल्याणकारी राज्य के आधारभूत तत्व है।

लास्की के शब्दों मे " कल्याणकारी राज्य लोगों का वह संगठन है, जिसमे सबका सामूहिक रूप से अधिक हित हो सके। 

डाॅ. अब्राहम के अनुसार " कल्याणकारी राज्य वह है जो अपनी आर्थिक व्यवस्था का संचालन आय के अधिकाधिक समान वितरण के उद्देश्य से करता है।"

उपरोक्त सभी परिभाषाओं मे लोक कल्याणकारी राज्य के अर्थिक पक्ष पर अधिक बल दिया गया है, जबकि कल्याण सामाजिक पक्ष से अधिक सम्बद्ध है। इसकी विवेचना करते हुये एस.सी. छावड़ा ने उचित ही कहा था, कि लोक कल्याणकारी राज्य का कार्य एक ऐसे पुल का निर्माण करना है, जिसके द्वारा व्यक्ति जीवन को पतित अवस्था से निकालकर एक ऐसी अवस्था मे प्रवेश करा सके जो उत्थानकारी और उद्देश्यपूर्ण हो।

लोक कल्याणकारी राज्य के कार्य (lok kalyanakari rajya ke karya)

लोक कल्याणकारी राज्य के कार्य काफी व्यापक है। व्यक्तिवादी विचारक राज्य के कार्यों को दो वर्गों मे बाँटते है एक राज्य के अनिवार्य कार्य दूसरा राज्य के ऐच्छिक कार्य/ लोक कल्याणकारी राज्य के समर्थक विचारक इस वर्गीकरण मे विश्वास नही करते वे जनहित मे किए जाने वाले सभी कार्यों को आवश्यक और अनिवार्य मानते है। इस दृष्टि से लोक कल्याणकारी राज्य राज्य के निम्म प्रमुख कार्य है--

1. नागरिक स्वतंत्रता 

कल्याणकारी राज्य का आदर्थ लोकतन्त्रीय व्यवस्था मे भली प्रकार प्राप्त और पूरा किया जा सकता है और लोकतंत्र मे नागरिक स्वतंत्रता दी जानी चाहिए। राज्य को चाहिए कि वह अपने नागरिकों को विचार अभिव्यक्ति, सम्मेलन, संगठन निर्माण, आने-जाने, बसने, व्यवसाय करने की पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान करे। इससे कल्याणकारी राज्य की व्यवस्था का औचित्य सही होता है।

2. स्वास्थ्य की व्यवस्था करना 

रोगों की रोकथाम, टीकों की व्यवस्था, चलते-फिरते औषधालयों की व्यवस्था राज्य को करनी चाहिए। नशीले वस्तुओं की बिक्री पर रोक लगाना चाहिए और निर्धन लोगों की मदद करनी चाहिए।

3. सामान्य ज्ञान मे वृद्धि 

कुछ लोगों का कथन है कि कल्याणकारी राज्य को सामान्य ज्ञान-वृद्धि के साधनों की व्यवस्था करनी चाहिये। ऐसा करके राज्य नागरिकों के जीवन-स्तर को ऊँचा उठा सकता है।

4. सार्वजनिक शिक्षा की व्यवस्था करना

यदि राज्य के नागरिक सुसंस्कृत व शिक्षित होगे तो राज्य भी मजबूत होगा। अतः राज्य को शिक्षा के विभिन्न साधन उपलब्ध कराने चाहिए तथा ऐसी व्यवस्था हो कि सभी को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार व अवसर प्राप्त हो सके।

5. श्रमिकों का कल्याण 

लोक-हितकारी राज्य के समर्थकों का कथन है कि राज्य को ऐसे साधनों को प्रोत्साहिन देना चाहिए जिसमे श्रमिकों का अधिक से अधिक हित सम्भव हो सके। 

6. आन्तरिक शांति एवं व्यवस्था की स्थापना करना

जब तक राज्य मे शांति व्यवस्था स्थापित नही होती राज्य के नागरिक प्रगति नही कर सकते, उनका जीवन भी सुरक्षित नही रहेगा। शांति व्यवस्था के लिए कानूनों का बनाना, उनका पालन कराना तथा उल्लंघन करने वालों को दण्डित करना राज्य का कार्य है। अपने इन कार्यो को भली प्रकार सम्पन्न करने के लिए राज्य सरकारी कर्मचारियों, न्यायालय, पुलिस आदि की व्यवस्था करता है।

7. बाहरी आक्रमण से रक्षा करना 

राज्य की और राज्य के नागरिकों की बाहरी आक्रमण से सुरक्षा करना राज्य का कार्य है। यदि राज्य बाहरी आक्रमण से रक्षा करने मे असमर्थ रहता है तब उसके परिणामस्वरूप उसका अस्तित्व ही समाप्त हो जाता है। अतः बाह्रा आक्रमण से समुचित सुरक्षा आवश्यक है।

8. समाज सुधार के कार्य करना

लोक कल्याणकारी राज्य का लक्ष्य व्यक्तियों का न केवल आर्थिक वरन सामाजिक कल्याण भी होता है। इस दृष्टि से राज्य के द्वारा मद्यपान, बाल-विवाह, छुआछूत, जाति-व्यवस्था आदि परम्परा सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के उपाय किये जाने चाहिए।

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