9/23/2020

संघात्मक शासन, अर्थ, विशेषताएं, गुण एवं दोष

By:   Last Updated: in: ,

संघात्मक शासन का अर्थ (sanghatmak shasan arth)

संघात्मक शासन वह शासन है जहाँ राज्य की शक्तियों का विभाजन संवैधानिक स्तर पर केन्द्र और उसकी घटक इकाइयों के बीच होता है। संघात्मक शासन प्रणाली उस शासन-प्रणाली को कहते है जिसमे कई छोटे राज्य मिलकर एक संघ के रूप मे शासन चलाते है। संघवाद एक विचारधारा है। विद्वानों ने संघात्मक शासन की परिभाषा निम्म प्रकार की है--

डाससी के अनुसार " संघात्मक शासन वह राजनीतिक योजना है जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय एकता तथा राज्यों के अधिकारों मे सामंजस्य स्थापित करना है।

फ्रीमेन के अनुसार " संघात्मक शासन वह है जो दूसरे राष्ट्रों के साथ सम्बन्ध मे एक राज्य के समान हो, परन्तु आन्तरिक शासन की दृष्टि से अनेक राज्यों का योग हो। संघात्मक शासन वाले देश, संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, और स्विट्जरलैंड आदि है।

संघात्मक शासन प्रणाली की विशेषताएं या लक्षण (sanghatmak shasan pranali ki visheshta)

1. लिखित संविधान 

संघात्मक शासन मे लिखित संविधान अनिवार्यता है क्योंकि संघ समझौते का परिणाम है अतः समझौते का लिखित होना आवश्यक है। संविधान मे केन्द्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन और केन्द्र-राज्यों की सरकार का संगठन, संविधान संशोधन की प्रक्रिया आदि का विवरण रहता है। 

2. संविधान की सर्वोच्चता

संघात्मक शासन की एक विशेषता यह की इस शासन प्रणाली मे संविधान सर्वोच्च होता है। केन्द्र और राज्यों का अस्तित्व, उनके अधिकारों का वर्णन, प्रशासनिक शक्तियों का बंटवार, सभी कुछ संविधान मे होता है इसलिए भविष्य मे यदि संघ और राज्यों के बीच गलतफहमी हो जाये या किसी प्रश्न पर तनाव हो जाए तो दोनों ही संविधान मे लिखित व्यवस्थाओं मे अपनी स्थिति को देख सकते है। 

3. शक्तियों का विभाजन 

संघीय शासन प्रणाली मे केन्द्रीय और प्रांतीय सरकारों के मध्य शक्तियों का बँटवारा कर दिया जाता है। कुछ शक्तियाँ केन्द्र को व कुछ शक्तियाँ राज्यों को सौंप दी जाती है और अपने-अपने क्षेत्रों मे वे इन शक्तियों का उपयोग स्वतंत्रतापूर्वक कर सकते है। 

4. दोहरा शासन 

संघात्मक शासन की एक मुख्य विशेषता यह है कि इसमे दोहरी शासन व्यवस्था होती है। एक केन्द्रीय सरकार होती है जिसको संघीय सरकार कहा जाता है, दूसरी इकाइयों की सरकार होती है जो राज्य की सरकार के नाम से जानी जाती है। इन दोनों सरकारों के अलग-अलग कानून होते है। इसके अतिरिक्त दोहरी राजनैतिक व्यवस्था होती है जिसमें दोहरी नागरिकता, दोहरी चुनाव व्यवस्था और दोहरी प्रकार की सेवाएं होती है। पर कुछ संघों मे दोहरी नागरिकता व दोहरी राजनैतिक व्यवस्था नही होती जैसे की भारत मे दोहरी नागरिकता नही है। पर सत्ता का विकेन्द्रीकरण, न्यायपालिका की प्रधानता, लिखित संविधान सभी संघ की जरूरी विशेषताएं है।

5. स्वतंत्र न्यायालय 

एक स्वतंत्र न्यायालय, जो संविधान की व्याख्या करता है, राष्ट्रीय व क्षेत्रीय सरकारों के बीच पैदा झगड़ों या दो राज्यों के बीच पैदा झगड़ों का निर्णय करता है।

संघात्मक शासन प्रणाली के गुण (sanghatmak shasan pranali ke gun)

1. संघात्मक शासन प्रणाली का एक गुण यह है कि इसमे स्थानीय समस्याओं का हल सरलता से किया जा सकता है।

2. यह शासन प्रणाली विकेन्द्रीकरण के सिद्धांत पर आधारित होने के कारण अधिक लोकतांत्रिक होती है।

3. संघात्मक शासन मे राष्ट्रीय एकता व स्थानीय स्वशासन दोनों के गुण पाये जाते है।

4. संघात्मक शासन प्रणाली का एक गुण यह है कि इसमे केन्द्रीय शासन का कार्य-भार हल्का हो जाता है।

5. बड़े राज्यों के लिये तो यह बहुत ही उपयुक्त प्रणाली है।

6. संघात्मक शासन मे केन्द्र सरकार के स्वेच्छाचारी होने की संभावना नही रहती। 

7. यह राज्यों के लिए लाभदायी है।

संघात्मक शासन प्रणाली के दोष (sanghatmak shasan pranali ke dosh)

1. संघात्मक शासन खर्चीला होता है, संघात्मक शासन व्यवस्था मे दोहरा खर्च होता है।

2. इस शासन प्रणाली मे राष्ट्रीय एकता गम्भीर समस्या होती है।

3. संघात्मक व्यवस्था का एक दोष यह भी है कि इसमे सत्ता का विकेन्द्रीकरण होने से महत्वपूर्ण निर्णय लेने मे विलम्ब होता है।

4. सैद्धांतिक दृष्टि से सम्प्रभुता विभाजित नही होती है, परन्तु संघात्मक प्रभाव से यह केन्द्र और राज्य सरकारों मे बँट जाती है। 

5. संघात्मक शासन मे उत्तरदायित्व सुनिश्चित नही किया जा सकता। किसी नीति की विफलता का दायित्व केन्द्र और राज्य सरकार एक-दूसरे पर डालते है।

6. संघात्मक शासन मे संगठन जटिल होता है, अतः प्रशासन चलाना बड़ा कठिन होता है। 

7. एकात्मक शासन की तुलना मे संघात्मक शासन कमजोर माना जाता है। डायसी का कहना है कि " एकात्मक सरकार की तुलना मे संघात्मक सरकार एक कमजोर सरकार है।"

आपको यह भी जरूर पढ़ना चाहिए;अधिकार अर्थ, परिभाषा, प्रकार

आपको यह भी जरूर पढ़ना चाहिए;कर्त्तव्य का अर्थ, परिभाषा, प्रकार

आपको यह भी जरूर पढ़ना चाहिए;स्वतंत्रता का अर्थ, परिभाषा, प्रकार

आपको यह भी जरूर पढ़ना चाहिए;समानता अर्थ, प्रकार

आपको यह भी जरूर पढ़ना चाहिए;संविधान अर्थ, परिभाषा, वर्गीकरण या प्रकार

आपको यह भी जरूर पढ़ना चाहिए;एक अच्छे संविधान के लक्षण या विशेषताएं

आपको यह भी जरूर पढ़ना चाहिए;लोक कल्याणकारी राज्य अर्थ, परिभाषा, कार्य

आपको यह भी जरूर पढ़ना चाहिए;लोक कल्याणकारी राज्य की विशेषताएं

आपको यह भी जरूर पढ़ना चाहिए;एकात्मक शासन प्रणाली अर्थ, विशेषताएं, गुण एवं दोष

आपको यह भी जरूर पढ़ना चाहिए;संघात्मक शासन, अर्थ, विशेषताएं, गुण एवं दोष

आपको यह भी जरूर पढ़ना चाहिए;संसदात्मक शासन अर्थ, विशेषताएं, गुण एवं दोष

आपको यह भी जरूर पढ़ना चाहिए;अध्यक्षात्मक शासन अर्थ, विशेषताएं, गुण एवं दोष

आपको यह भी जरूर पढ़ना चाहिए;राजनीतिक दल का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं

आपको यह भी जरूर पढ़ना चाहिए;दलीय प्रणाली के गुण एवं दोष

यह भी पढ़ें; प्रजातंत्र के सिद्धांत, महत्व एवं गुण दोष
यह भी पढ़ें; प्रजातंत्र का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं विशेषताएं

यह भी पढ़ें; राजनीतिक दलों मे विपक्ष की भूमिका
यह भी पढ़ें; राजनीतिक दलों के कार्य (भूमिका) दलीय व्यवस्था के प्रकार एवं महत्व

यह भी पढ़ें; भारतीय चुनाव प्रणाली के दोष

कोई टिप्पणी नहीं:
Write comment

अपने विचार comment कर बताएं हम आपके comment का इंतजार कर रहें हैं।