5/25/2020

भारतीय चुनाव प्रणाली के दोष

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bhartiya chunav pranali ke dosh;लोकतंत्र का भविष्य चुनावों की निष्पक्षता और बिना किसी प्रलोभन और दबाव की स्वतंत्रता पर निर्भर करता है। भारतीय निर्वाचन को निर्वाचन को निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से कराने के लिए निर्वाचन आयोग पूरा प्रयास करता है, फिर भी कई समस्याएं विद्यमान है। भारत की चुनाव प्रणाली के दोषों का वर्णन निम्न प्रकार से हैं----

भारतीय चुनाव प्रणाली के दोष (bhartiya chunav pranali ke dosh)

1. मतदान मे पूर्ण भागीदारी का अभाव
सार्वभौम वयस्क मताधिकार प्रणाली का उद्देश्य सभी नागरिकों को शासन मे अप्रत्यक्ष भागीदार बनाना है। हम यह देखते है कि लोकसभा तथा राज्य विधानसभा चुनावों मे एक बड़ी संख्या मे मतदाता अपना वोट देने नही जाते हैं। इस कारण मतदाताओं के बहुमत से निर्वाचित उम्मीदवार जनता का प्रतिनिधि नही होता है। अतः यह वांछनीय है कि, सभी नागरिकों को मतदान मे भाग लेना चाहिए।
2. चुनाव में धन का प्रयोग
भारतीय चुनावों मे बहुत धन खर्च होता हैं। निर्वाचन मे बढ़ता खर्च एक बड़ी समस्या है। सभी चुनावों मे खर्च की सीमा निर्धारित है, परन्तु चुनाव मे भाग लेने वाले अनेक प्रत्याशी बहुत धन खर्च करत है। धन व बल के अभाव मे कई बार कुछ अच्छे और ईमानदार व्यक्ति चुनाव लड़ने मे असमर्थ होते हैं। चुनाव मे धन प्रयोग व्यक्ति की अनैनिक भूमिका का द्दोतक हैं, जो चुनाव व्यवस्था मे सुधार की दृष्टि से गंभीर समस्या हैं।
3. चुनाव में बाहुबल का प्रभाव 
कई बार कुछ प्रत्याशी हर तरोके से चुनाव जीतना चाहते है, वे चुनाव मे अपराधियों की मदद भी लेते है। हिंसा और बल का प्रयोग कर लोगों को डरा-धमकाकर वोट देने से रोकने, मतदान केंद्र पर कब्जा करने, जबरदस्ती अवैध तरीके से मत डलवाना आदि काम भी करवाते है।

4. सरकारी साधनों का प्रयोग 
निर्वाचन का समय आने से पहले कुछ दल जनता को लुभाने वाले वायदे करने लगते है, शासकीय कर्मचारियों/?अधिकारियों की अपनी हितों के अनुकूल पदस्थापन करते है तथा शासकीय धन और वाहनों व अन्य साधनों का प्रयोग करते है। निर्वाचन अधिकारियों को भी प्रभावित करने के प्रयास करते है। इससे चुनावों की निष्पक्षता प्रभावित होती है।
5. निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या 
चुनावों मे निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या कभी-कभी बहुत अधिक होती है इससे चुनाव प्रबन्ध मे कठिनाई आती है। मतदाता भी अधिक प्रत्याशियों के चुनाव मैदान मे होने से भ्रमित होता हैं।
6. मतदाताओं की भावना प्रभावित करना
चुनावों के समय कुछ प्रत्याशी धर्म, जाती, क्षेत्र, भाषा आदि के आधार पर मतदाताओं की भावनाओं को प्रभावित करते है। राजनीति दल जाति के आधार पर प्रत्याशी चयनित करते है। लोगों की भावनाओं को उभार कर चुनावों को प्रभावित करना भारतीय निर्वाचन का सबसे बड़ा दोष है।
7. फर्जी मतदान
कई बार कुछ व्यक्ति दूसरे के नाम पर वोट डालने चले जाते हैं, एक से अधिक स्थान पर मतदाता सूची मे नाम लिखना, नाम न होते हुये भी वोट देने जाना आदि फर्जी मतदान है। यह भी हमारी चुनाव प्रणाली की बड़ी समस्या है।
स्त्रोत; समग्र शिक्षा, मध्यप्रदेश राज्य शिक्षा केन्द्र, भोपाल।
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