5/23/2020

राजनीतिक दलों के कार्य (भूमिका) दलीय व्यवस्था के प्रकार एवं महत्व

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राजनीतिक दलीय व्यवस्था 

संसदीय लोकतंत्र के लिए विभिन्न राजनीतिक दल आवश्यक है। राजनीतिक दल नागरिकों के संगठित समूह है, जो एक सी विचारधारा रखते है। ये अपनी नीतियों और कार्यक्रमों के लिए प्रतिबद्ध होते है। राजनीतिक दल एक शक्ति के रूप मे कार्य करते है और सदैव शक्ति प्राप्त करने उसे बनाये रखने का प्रयास करते रहते है। राजनीतिक दलों मे कुछ सामान्य विशेषताएं होती है। इस लेख मे हम राजनीतिक दलों के कार्य, दलीय व्यवस्था के प्रकार, दलीय व्यवस्था का महत्व, राजनीतिक दलों का महत्व जानेंगे।

राजनीतिक दलों के कार्य (भूमिका) {rajnitik dalo ki bhumika}

1. ये सरकार और जनता के मध्य सेतु का कार्य करते है।
2. ये राष्ट्र हित के अनुकूल जनमत बनाते है।
3. निर्वाचन के समय प्रत्याशियों का चयन करते हैं।
4. शासक दल की निरंकुशता पर रोक लगाने का प्रयास करते है।
5. निर्वाचन मे विजय प्राप्त करना और सरकार बनाना इनका प्रमुख कार्य है।
6. मतदाता सूची बनवाने मे यह सहयोग करते है।
7. जनता को राजनीतिक प्रशिक्षण देते हैं।
8. ये सामाजिक और आर्थिक कार्य भी करते हैं।
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दलीय व्यवस्था के प्रकार {daleey vyavastha ke prakar}

किसी देश मे राजनीतिक दलों की संख्या के आधार पर दल व्यवस्था को तीन वर्गों मे विभाजित किया जाता हैं---
1. एकल दल प्रणाली
यदि किसी देश मे एक ही राजनीतिक दल होता है तो वह एकल दल प्रणाली कहलाती है, एक दल वाले देशों के संविधान मे प्रायः उस राजनीतिक दल का उल्लेख होता है। जैसे-- जनवादी चीन मे एकदलीय प्रणाली है, वहां केवल साम्यवादी दल को ही मान्यता है अन्य राजनैतिक विचार रखने वाले राजनितीक दल पर पाबंदी है।
2. द्दि दलीय प्रणाली
किसी देश मे दो प्रधान दल होते है और सत्ता इन्ही दो दलों के बीच आती जाती रहती है। यह प्रणाली द्धिदलीय प्रणाली कहलाती है जैसे-- अमेरिका मे डेमोक्रेटिक दल और रिपब्लिकन दल प्रमुख है ब्रिटेन मे अनुदारवादी व श्रमिक दल प्रमुख है। इस प्रकार संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन की शासन व्यवस्था मे द्विदलीय प्रणाली प्रचलित हैं।
3. बहु दलीय प्रणाली
यह प्रणाली हमारे भारत मे प्रचलित है यहाँ पर सैकड़ों की संख्या मे अनेक राजनीतिक दल हैं। जहाँ अनेक राजनीतिक दल होते है उसे बहुदलीय प्रणाली के नाम से जाना जाता है। हमारे देश मे बहु दलीय प्रणाली है। निर्वाचन मे किसी एक दल का बहुमत आना आवश्यक नहीं हैं।
जब किसी एक दल का बहुमत नही आता है तो देश या प्रान्त मे साझा सरकार बनाई जाती है। साझा अथवा गठबंधन सरकार मे 2 या 2 से अधिक दल शामिल होते हैं।
बहुदलीय प्रणाली मे दल-बदल एक प्रमुख बुराई है। चुनावों के समय अनेक प्रकार की कठिनाईयाँ आती है। इस प्रणाली मे राजनीतिक दलों की नीतियों मे स्पष्ट अंतर करना कठिन हो जाता है। बहुदलीय प्रणाली मे व्यक्तिनिष्ठ दलों की संख्या बढ़ जाती है। राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से राजनीतिक दल टूटने लगते हैं और नये दल बबने लगते है।

दलीय व्यवस्था का महत्व {daleey vyavastha ka mahatva}

दलीय व्यवस्था प्रजातांत्रिक शासन को सम्भव बनती है। आधुनिक युग मे शासन कार्य राजनीतिक दलों के सहयोग से होता है। यह शासन को नीति बनाने मे सहयोग करते है, साथ ही इनके सहयोग से नीतियों मे बदलाव आसान होता है। दल व्यवस्था के प्रभाव से सरकार जनोन्मुखी होती है व लोकहित के कार्य करती है। राजनैतिक दल शासन की निरंकुशता पर रोक लगाते है। इससे जनता की आशायें और अपेक्षायें सरकार तक पहुंचती है। यह जनता को राजनीतिक प्रशिक्षण देते है  । इनके माध्यम से सभी को शासन मे भाग लेने का अवसर मिलता है। राजनीतिक दल नागरिक स्वतंत्रताओं के रक्षक होते हैं। इनके राष्ट्र की एकता स्थापित होती है।

राजनीतिक दलों का महत्व {rajnitik dalo ka mahatva}

1. प्रजातंत्र मे लोकमत का निर्माण तथा उसकी अभिव्यक्ति राजनीतिक दलों द्वारा ही संभव है। लोकतंत्र का निर्माण करने के लिए राजनीतिक दल जुलूस एवं अधिवेशन आदि आयोजित करते हैं।
2. वर्तमान मे विश्व  के सभी देशों मे वयस्क मताधिकार को अपनाया गया है। राजनीतिक दल अपने दल की ओर से उम्मीदवारों को चुनाव मे खड़ा करते है तथा उसके पक्ष मे प्रचार करते है। आज के विशाल लोकतांत्रिक राज्यों मे चुनावों का संचलान करने के लिए राजनीतिक दलों का होना अति आवश्यक है।
3. लोकतांत्रिक शासन मे जनता के सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व राजनीतिक दलों द्वारा ही प्रदान किया जाता हैं।
4. संसदीय तथा अध्यक्षात्मक दोनों ही प्रकार की शासन व्यवस्थाओं मे निर्वाचन के बाद सरकार का गठन राजनीतिक दलों द्वारा ही किया जा सकता है।
5. लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था मे प्रभावशाली विरोधी दल का होना भी अति आवश्यक है। लोकतंत्र मे अल्पमत या विपक्षी दल का भी बहुमत प्राप्त दल के समान ही महत्व होता हैं।
स्त्रोत; समग्र शिक्षा, मध्यप्रदेश राज्य शिक्षा केन्द्र, भोपाल।
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