5/23/2020

राजनीतिक दलों मे विपक्ष की भूमिका

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राजनीतिक दलों मे विपक्ष की भूमिका [rajnitik dalo me vipaksh ki bhumika]

प्रजातंत्र या लोकतांत्रिक्र राष्ट्रों मे विपक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती हैं, बुहमत प्राप्त दल की गलत नीतियों का विपक्षी राजनीतिक दल खुलकर विरोध करते हैं। वह उसकी त्रुटियों से जनता को अवगत करते हैं, उनका विरोध करते हैं।
आम चुनाव के पश्चात राजनीतिक दलों मे से बहुमत प्राप्त दल या दलों का गठबंधन सरकार का निर्माण करता हैं अथवा सत्तारूढ़ होता है बहुमत प्राप्त न करने वाला/वाले दल विपक्ष दल कहलाते है। बहुमत प्राप्त दल से सरकार का गठन होता है। विपक्षी दल सरकार के कार्यों पर निगाह रखते है। संसदीय लोकतंत्र मे शासक दल के कार्यों पर जनता सीधे नियन्त्रण नही करती है। विपक्षी दल ही इस उद्देश्य को पूरा करते है। संसदीय लोकतंत्र पर आधारित हमारे देश मे सत्तारूढ़ दल और विपक्षी दल दोनों का महत्व है।
संसद और विधान मण्डलों मे विपक्षी दल की सक्रियता से सरकार सजग होकर लोक कल्याणकारी कार्य सजगता से करने को बाध्य रहती है। विपक्षी दल संसद और विधान सभाओं मे सरकार की आलोचना भी करते है और नवीन नीतियों तथा कार्यों के सुझाव भी देते हैं।
विपक्ष की उपस्थिति से सरकार जनता के प्रति अधिक सजगता से अपने दायित्वों का निर्वहन करते करती है। विधायिका मे कोई भी कानून पारित होने से पूर्व उस पर विचार विमर्श और चर्चा होती है। विपक्ष के सहयोग से कानून के दोषों को दूर किया जा सकता है। विधान मण्डल और संसद की बैठकों के समय विपक्ष की भूमिका और बढ़ जाती है। विपक्ष सदन मे प्रश्न पूछकर या स्थगन प्रस्ताव लाकर सरकार पर दबाव बनाता है। इस प्रकार विपक्ष जनता के सामने अपनी योग्यता को स्थापित करता है, विपक्ष सरकार की त्रुटियों को जनता के सामने लाता है, सरकार की नीतियों और कार्यों की आलोचना करके सरकार को भूल सुधार के लिए बाध्य किया जाता है। विपक्ष द्वारा अपने दायित्व का पालन करने से प्रभावित होती है।
स्त्रोत; समग्र शिक्षा, मध्यप्रदेश राज्य शिक्षा केन्द्र, भोपाल।

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