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6/19/2021

साक्षात्कार के उद्देश्य

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साक्षात्कार के उद्देश्य 

sakshatkar ke uddeshy;साक्षात्कार कोई साधारण बातचीत नहीं है इसके पीछे एक विशिष्ट प्रयोजन या कुछ विशिष्ट प्रयोजन होते हैं। मूल रूप से इसका प्रमुख उद्देश्य किसी विषय पर किसी व्यक्ति के विचारों की जानकारी प्राप्त करना है। आधुनिक जटिल द्वैतीयक समाजों में अलग-अलग प्रकार के अनुभव होते रहते हैं। बहुत कम लोगों के विचार परस्पर मिलते हैं। प्रत्येक व्यक्ति का सोचने विचारने का अपना एक अलग तरीका होता है। सब के दृष्टिकोण एवं मूल्य अलग-अलग होते हैं। नगरीय जीवन के विकास के साथ-साथ यह जटिलता औपचारिकता के परिवेश में और अधिक व्यापक एवं विस्तृत हो गई है। ऐसे में यह पूर्णता संभव है, कि लोग अपरिचितता का नकाब डालकर या गोपनीयता की सुरक्षित दीवार के पीछे अपने को छुपा ले तथा अन्य से दूरी रखकर अपना जीवन व्यतीत करें। नगरी जीवन में पारस्परिक आमने-सामने के घनिष्ठ संबंध यहां तक कि स्वयं प्राथमिक समूह में भी कम होते जा रहे हैं।  

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ऐसे में साक्षातकार का यह प्रमुख कार्य हो जाता है कि वह साक्षात्कारदाता के बाहरी एवं आंतरिक जीवन में प्रवेश कर उसके विचारों, दृष्टिकोण, मूल्यों, आदतों ,मनोवृत्तिओं तथा विषय से संबंधित उसकी अनुभूतियों में तो प्रत्यक्ष रूप से जानकारी प्राप्त करें। इस प्रकार सामग्री संकरण के एक उपकरण के रूप में साक्षात्कार के निम्न उद्देश्य हैं---

1. प्रत्यक्षतः सूचनाओं की प्राप्ति 

आमने-सामने के संपर्क द्वारा सूचना प्राप्ति जिससे मानव व्यक्तित्व या सामाजिक घटना का वास्तविक चित्र उभर कर सामने आ सके। 

2. उपकल्पनाओं का निर्माण 

विभिन्न व्यक्तियों के विचारों भावनाओं एवं मनोवृत्तियों की जानकारी प्राप्त होने से प्राप्त ज्ञान एवं अनुभवों के आधार पर नवीन उपकल्पओं का निर्माण करना।

3. हावभावों का अवलोकन 

साक्षात्कार की प्रक्रिया का एक प्रमुख उद्देश्य व्यक्ति से संबंधित विभिन्न तथ्यों  का उत्तर देते समय उसके चेहरे पर आए हुए हावभावों का प्रत्यक्ष अवलोकन का अवसर प्राप्त करना है।

4. आतंरिक एवं व्यक्तिगत सूचनाओं का संकलन 

साक्षात्कार के माध्यम से अनेक गुणात्मक तथ्यों जैसे विचार, भावनाएं अवस्थाएं, मनोवृत्तियों तथा वैयक्तिक उद्वेगों के विषय में जानकारी प्राप्त करना संभव होता है। क्योंकि यह व्यक्ति के अंतःकरण में उसके मस्तिष्क में स्थित होते हैं तथा इन्हें बाहरी तौर पर नहीं देखा जा सकता पारस्परिक वार्तालाप के दौरान ही व्यक्ति इन्हें  प्रकट करता है।

5. अवलोकन का अवसर 

साक्षात्कार के दौरान साक्षात्कारकर्ता ना केवल वार्तालाप करता है बल्कि वह खुले नेत्रों से आसपास के परिवेश का अवलोकन भी करता है। इस अवलोकन से साक्षात्कारकर्ता को उत्तरदाता के कथनों का सत्यापन करने व मूल्यांकन करने का अवसर भी मिलता है।

6. भिन्न-भिन्न व्यक्तियों के दृष्टिकोणों को जानना

किसी एक ही समस्या या घटना के विषय में अलग-अलग व्यक्तियों के दृष्टिकोण अलग अलग हो सकते हैं। कुछ समस्या या घटना के अध्ययन एवं यथार्थ निष्कर्ष निरूपित करने की दृष्टि से यह जरूरी होता है कि इस प्रकार के अलग-अलग दृष्टिकोणओं को जाना जाए। यह उद्देश्य साक्षात्कार के माध्यम से पूरा होता है। 

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