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11/11/2021

श्रवण कौशल शिक्षण की विधियाँ/क्रियाएं

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श्रवण कौशल शिक्षण की विधियाँ एवं क्रियाएं 

श्रवण कौशल भाषा शिक्षण का महत्वपूर्ण सोपान है। श्रवण कौशल का शिक्षण किस प्रकार किया जाना चाहिए? यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है। छात्रों में श्रवण कौशल का विकास करने के लिए शिक्षक को निम्नलिखित विधियों, कियाओं, सामग्री एवं उपकरणों की सहायता लेनी चाहिए--

1. प्रश्नोत्तर 

प्रश्नोत्तर प्रणाली एक महत्वपूर्ण विधि है। शिक्षक को पढ़ाई गई सामग्री पर कक्षा में प्रश्न पूछने चाहिए। कक्षा में प्रश्न पूछने से यह पता चल जाएगा कि छात्र सुनकर विषय वस्तु को ग्रहण कर रहे हैं या नहीं। प्रश्न कक्षा के सभी छात्रों से पूछे जाएं। प्रश्न पूछने से छात्र सावधान हो जाते हैं तथा शिक्षक की बात को ध्यानपूर्वक सुनते हैं। 

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2. सस्वर वाचन 

शिक्षक द्वारा किए गए आदर्श वाचन से छात्र शुद्ध उच्चारण, गति, विराम चिह्नों आदि का ज्ञान करते हैं। शिक्षक को चाहिए कि वह छात्रों से अनुकरण वाचन कराए। इससे यह पता चल सकेगा कि छात्र ध्यान से पाठ्यवस्तु को सुन रहे हैं या नहीं। अतः छात्रों द्वारा सस्वर वाचन कराने से उनमें श्रवण कौशल का विकास किया जा सकता है।

3. भाषण

भाषण द्वारा बालक में मौखिक भाषा का विकास किया जाता है परन्तु इसके द्वारा श्रवण कौशल का भी विकास किया जा सकता है। भाषण द्वारा बालक की श्रवणेन्द्रियों का विकास किया जा सकता है। भाषण देने से पूर्व शिक्षक बालकों को यह बता दें कि वे उसके भाषण को ध्यानपूर्वक सुनें क्योंकि उसके पश्चात् उनसे भाषण पर प्रश्न पूछे जायेंगे। शिक्षक छात्रों से प्रश्न पूछकर यह पता लगा सकता है कि उन्होंने भाषण को ध्यानपूर्वक सुना है या नहीं। 

4. कहानी कहना तथा सुनना

बालकों को रोचक कथाएँ, कहानियाँ जैसे-- परियों की, राजा-रानी की तथा पशु-पक्षियों आदि की कहानी सुनानी चाहिए। इसके पश्चात् उसी कहानी को बालकों से सुननी चाहिए। इससे यह पता लग जायेगा कि बालकों ने कहानी को सुना है या नहीं। 

5. श्रुत-लेख 

श्रुत लेखन मे शिक्षक किसी गद्यांश आदि को बोलता जाता है और छात्र सुनकर लिखते चलते हैं जो छात्र ध्यानपूर्वक सुनेगा वह संपूर्ण सामग्री की शुद्ध लिख लेगा तथा उसका कोई अंग भी शेष नहीं छूटेगा एवं जो छात्र ध्यान-पूर्वक नही सुनेगा उसके बीच-बीच में कुछ शब्द या वाक्यांश छूट जाएंगे। इस प्रकार भी बालकों में श्रवण कौशल का विकास किया जा सकता हैं। 

6. वाद-विवाद 

श्रवण कौशल का प्रशिक्षण देने के लिए वाद-विवाद भी एक महत्वपूर्ण क्रिया हैं। वाद-विवाद में छात्र को प्रत्येक बात ध्यान-पूर्वक सुननी होती है क्योंकि बिना सुने वे दूसरे पक्ष की बात का उत्तर नहीं दे सकेंगे और न अपने तर्क को प्रस्तुत कर सकेंगे। शिक्षक को सभी छात्रों को वाद-विवाद के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए तथा वाद-विवाद की समाप्ति पर सभी छात्रों से प्रश्न पूछकर यह जाँच करनी चाहिए कि वे वाद-विवाद के तर्कों को ध्यान-पूर्वक सुन रहे थे या नहीं। 

7. दृश्य-श्रव्य सहायक सामग्री का प्रयोग 

श्रवण कौशल को विकसित करने तथा उच्चारण संबंधी दोषों को दूर करने के लिए ग्रामोफोन, टेपरिकार्डर, रिडियों, चलचित्र, दूरदर्शन तथा विडियों की सहायता ली जा सकती हैं। इन साधनों की सहायता से कहानी, कविता, महापुरूषों के भाषण, नाटक तथा विभिन्न शैक्षिक व मनोरंजन कार्यक्रम सुने जा सकते हैं।

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