9/26/2020

अनुसूची के उद्देश्य, गुण एवं दोष

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अनुसूची के उद्देश्य (anusuchi uddeshya)

अनुसूची का मुख्य उद्देश्य आमने-समाने की स्थिति मे सूचना संकलित करना है। इस उद्देश्य के अतिरिक्त अनुसूची के कुछ सामान्य उद्देश्य भी है, जो इस प्रकार है--

1. तथ्यों का व्यवस्थित व क्रमबद्ध संकलन 

अनुसूची मे व्यवस्था व क्रमबद्धता का कारण यह है कि अनुसूची मे उत्तर अनुसंधानकर्ता द्वारा भरे जाते है और प्रश्न भी एक क्रम मे सावधानीपूर्वक सजे होते है। इस प्रकार सूचनादाताओं के वर्णनात्मक व अव्यवस्थित ढंग से बचा सकता है।

2. समस्या से सम्बंधित सूचना का संकलन 

अनुसूची मे प्रश्नों का चयन करते समय यह ध्यान रखा जाता है कि अनावश्यक या अनुपयोगी प्रश्नों से बचा जाय इस प्रकार समस्या से सम्बंधित सूचना का ही संकलन होता है।

3. वैषयिक व प्रामाणिक अध्ययन 

इन विधि मे अनुसंधानकर्ता स्वयं लोगों से संपर्क स्थापित करता है। अनुसूची के प्रश्नों की व्याख्या करता है और सही उत्तरों को पाने की प्रार्थना करता है। इस प्रकार उत्तरदाताओं को प्रश्नों के विभिन्न अर्थ समझने से बचाया जा सकता है।

4. प्रतिनिधि इकाइयों से सूचना की प्राप्ति 

चूंकि इस विधि से सूचना प्राप्त करने का कार्य पूर्ण रूप से अनुसंधानकर्ता का है इसलिए अनुसंधानकर्ता की अपनी व्यक्तिगत योग्यता, क्षमता, अनुभव आदि विशेषताओं के आधार पर सभी प्रतिनिधि इकाइयों से सूचना संकलित हो जाती है।

5. सूचनाओं के अपूर्ण संकलन से मुक्त 

बिना अनुसूची के साक्षात्कार या अवलोकन करने पर अनुसंधानकर्ता कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों का उत्तर प्राप्त करना भूल भी सकता है। इस प्रकार अनुसूची विधि के द्वारा सूचनाओं का पूर्ण संकलन सम्भव है। यही कारण है कि अनुसूची को याद दिलाने वाले प्रपत्र के नाम से पूकारा जाता है।

अनुसूची के गुण अथवा महत्व अथवा उपयोगिता (anusuchi ke gun)

1. अनुसूची प्रणाली मे अन्वेषक सूचनादाता से प्रत्यक्ष आमने-सामने के संपर्क मे होता है, इसलिए इस प्रणाली मे यथार्थ व सही सूचना की प्राप्ति की संभावना अधिक होती है।

2. एक प्रमापित उपकरण के रूप मे अनुसूची के माध्यम से एकत्रित सामग्री की विश्वसनीयता बढ़ जाती है।

3. पूर्व निर्धारित और बहुत कुछ मानकीकृत प्रश्नों के कारण अनुसूची के माध्यम से एकत्रित सामग्री मे वैयक्तिक अभिमत या पूर्वाग्रह की गुंजाइश बहुत कम होती है। दूसरें शब्दों मे कहा जा सकता है कि अनुसूची वैषयिक सामग्री के संकलन का एक उपयोगी उपकरण है।

4. अनुसूची स्वयं संचालित नही होती, अपितु इसका संचालन अन्वेषक या क्षेत्रकर्ता के माध्यम से होता है जो प्रत्यक्ष आमने-सामने की स्थिति मे सूचनादाता से साक्षात्कार के माध्यम से जानकारी प्राप्त करता है। ऐसा करते समय वह सूचनादाता के हाव-भाव से तथा आसपास की स्थितियों के अवलोकन से उसके द्वारा दी गई जानकारी की सत्यता को परख सकता है।

5. अनुसूची चूंकि डाक द्वारा न तो भेजी और न ही डाक द्वारा लौटाई जाती है, इसे अन्वेषक या क्षेत्रकर्ता द्वारा सूचनाता से साक्षात्कार के माध्यम से भरा जाता है, अतः इसके माध्यम से सूचना की प्राप्ति सुनिश्चित होती है।

6. अनुसूची के प्रमापीकृत और बहुत कुछ हद तक मानकीकृत होने तथा अन्वेषक या क्षेत्रकर्ता द्वारा भरे जाने के कारण जहाँ इससे पूरी जानकारी एकत्रित हो जाती है, वहीं इसमे जानकारी के सही अभिलेखन की संभावना भी अधिक होती है। 

अनुसूची की सीमायें या दोष (anusuchi ke dosh)

1. अनुसूची प्रणाली एक सीमित क्षेत्र मे ही उपयोगी होती है, क्योंकि इसमे अन्वेषक या क्षेत्रकर्ता को सूचनादाता से प्रत्यक्ष संपर्क कर जानकारी एकत्र करना होता है। यदि सूचनादाता विस्तृत क्षेत्र मे फैले हों तो उनसे संपर्क करना और साक्षात्कार के माध्यम से जानकारी एकत्र करना कठिन व अव्यावहारिक हो जाता है।

2. यह एक खर्चीली पद्धति है।

3. अनुसूची का एक दोष यह है कि इसके माध्यम से सामग्री एकत्र करने मे समय अधिक लगता है। 

4. यदि अध्ययन का क्षेत्र बड़ा है और सूचनादाताओं की संख्या भी अधिक है तो उससे जानकारी प्राप्त करने के लिए क्षेत्रकर्ताओं को नियुक्ति एवं प्रशिक्षित करना पड़ता है। साथ ही उनके कार्यों के पर्यवेक्षण की तथा उनके कार्यों मे समन्वय रखने की जरूरत भी पड़ती है।

5. चूंकि अनुसूची प्रणाली मे अन्वेषक या क्षेत्रकर्ता साक्षात्कार का संचालन करता है और वह सूचनादाता द्वारा प्रदत्त जानकारी को अनुसूची मे अभिलेखित करता है, इसलिए जानकारी उसकी अभिनति से प्रभावित हो सकती है।

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