8/06/2020

प्रकार्य की विशेषताएं

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प्रकार्य की विशेषताएं (prakay ki visheshta)

1. प्रत्येक समाज की संरचना मे इकाइयों मे प्रकार्यात्मक संबध्दता पायी जाती है। तात्पर्य यह है कि सामाजिक संरचना मे प्रत्येक इकाई की एक निश्चित स्थिति होती है। उसी के अनुसार भूमिका निर्धारित होती है। इकाइयों के द्वारा संपादित ऐसी भूमिकाएं जिनसे संरचना मे संतुलन आता है, प्रकार्य कहलाती है। प्रकार्य का संबंध आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाले कार्यों से है।
प्रकार्य विशेषता
2. प्रकार्य वे कार्य है जो सामाजिक संगठन व व्यवस्था कायम रखने मे सहायक है।
3. प्रकार्य सकारात्मक अवधारणा है।
4. प्रकार्य समाज द्वारा मान्य तथा वर्गीकृत कार्यों का प्रतिनिधित्व करते है। एक रूप मे ये सामाजिक प्रतिमानों तथा मूल्यों के अधिक निकट होते है।
5. प्रकार्य संरचना मे अनुकूलन व संतुलन बढ़ाने मे सहायक होते है। अतः स्वाभाविक है कि प्रकार्य व्यवस्था द्वारा निर्धारित प्रतिमानित व्यवस्था द्वारा स्वीकृत एवं मान्य होते है।
6. प्रकार्य संरचना का गतिशील पक्ष है।
7. प्रकार्य का अभिप्राय सदैव किसी आवश्यकता को संतुलित करता है।
8. प्रकार्य के माध्यम से सामाजिक ढांचे की विभिन्न इकाइयों मे अनुकूलन सामंजस्य की क्षमता का विकास होता है।
9. समाज की इकाइयां सदैव प्रकार्य ही करें यह आवश्यक नही है जब इकाइयां व्यवस्था मे अनुकूलन को कम करने वाले कार्य संपादित करती है तब उसे अकार्य कहा जाता है।
10. प्रकार्य कभी-कभी तो स्पष्ट प्रकट होते है पर कभी-कभी अप्रगट भी होते है। जब समाज द्वारा मान्य और इच्छित उद्देश्यों को प्राप्त किया जाता है तो उन्हें प्रकट प्रकार्य कहते है पर कभी-कभी ऐसे परिणाम भी अस्तित्व मे आते है जिनके बारे मे कभी सोचा भी ना हो, इन्हें अप्रगट प्रकार्य कहते है।
11. प्रकार्य हमेशा समाज की संस्कृति एवं सामाजिक मूल्यों के अनुरूप होता है, अर्थात् केवल वे कार्य प्रकार्य है जो समाज द्वारा मान्य है।
12. हर प्रकार्य का कोई न कोई उद्देश्य होता है। प्रकार्य का प्रमुख उद्देश्य सामाजिक एवं मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति है।

13. प्रकार्य इकाइयों द्वारा किये जाने वाले उन्ही कार्यों को कहेगे जो समाज द्वारा स्वीकृत और मान्य हो।
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