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10/24/2019

सामाजिक संगठन का अर्थ और परिभाषा

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आप सभी का समाजशास्त्र में सामाजिक संगठन की बात सर्वप्रथम ऑगस्ट काम्टे ने की थी। उन्होंने समाज में संगठन का आधार एक मत को माना। आज के इस लेख में हम सामाजिक संगठन के अर्थ और परिभाषा के बारें चर्चा करेंगे।
सामाजिक संगठन का अर्थ

सामाजिक संगठन का अर्थ

समाज का निर्माण करने वाली विभिन्न इकाइयों में पाये जाने वाले प्रकार्यात्मक सम्बन्ध के आधार पर होता है। समाज में इन इकाइयों की अपनी एक निश्चित स्थिति होती है। इनकी स्थिति के अनुसार ही कार्यों को निर्धारित किया जाता है। जब ये इकाइयां अपने निर्धारित कार्यों के अनुसार क्रियाशील रहती हैं तो समाज में संगठन दिखायी देता है और इसी को सामाजिक संगठन कहा जाता है।
सामाजिक संगठन व्यक्तियों का ऐसा संग्रह है जिनके सम्मिलित उद्देश्य होते है। सदस्यों के बीच कार्य का बँटवारा होता है, संगठन के कुछ निश्चित नियम होते हैं जिनके आधार पर व्यक्ति पर व्यक्ति अपनी भूमिका का निर्वाह करते है।
समाज का निर्माण करने वाली अनेक इकाइयां होती हैं। उनके निश्चित पद तथा कार्य होते हैं। ये इकाइयां अपने निश्चित पदों के अनुसार कार्य करती है। यदि ये इकाइयां अपने निश्चित पदों के अनुसार कार्य करती रहती है तो समाज मे व्यवस्था बनी रहती है।

सामाजिक संगठन की परिभाषा

रेडक्लफ ब्राउन के अनुसार परिभाषा; दो या दो से अधिक व्यक्तियों की क्रिया की वह व्यवस्था सामाजिक संगठन कहलाती है जिसमें सामूहिक क्रियाएं संभव होती है।
ऑगबर्न तथा निमकाॅफ के अनुसार परिभाषा; "एक संगठन विभिन्न कार्यों को करने वाले विभिन्न अंगों की एक सक्रिय सम्बध्दता है।
आर. एच. लोवी के अनुसार परिभाषा; "समाज में व्यक्तियों और गतिविधियों का सुसंगत संग्रह ही सामाजिक संगठन है।
जोंस के अनुसार; " सामाजिक संगठन वह व्यवस्था है जिसके द्वारा समाज के विभिन्न अंग परस्पर और संपूर्ण समाज में एक अर्थ पूर्ण तरीके से जुड़े होते है।
तो दोस्तो इस लेख मे हमने जाना सामाजिक संगठन क्या है? सामाजिक संगठन या इस लेख से सम्बन्धित आपका किसी भी प्रकार का कोई विचार है तो नीचे comment कर जरूर बताए।

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