संस्मरण किसे कहते है? संस्मरण का क्या अर्थ हैं

संस्मरण किसे कहते है? संस्मरण का क्या अर्थ हैं

संस्मरण शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, सम् + स्मरण। इसका अर्थ सम्यक् स्मरण अर्थात् किसी घटना, किसी व्यक्ति अथवा वस्तु का स्मृति के आधार पर कलात्मक वर्णन करना संस्मरण कहलाता है। इसमें स्वयं अपेक्षा उस वस्तु की घटना का अधिक महत्व होता है जिसके विषय मे लेखक संस्मरण लिख रहा होता हैं। संस्मरण की सभी घटनाएं सत्यता पर ही आधारित होती हैं। इसमें लेखक कल्पना का अधिक प्रयोग नही करता है। 
लेखक के स्मृति पटल पर अंकित किसी विशेष व्यक्ति के जीवन की कूछ घटनाओं का रोचक विवरण संस्मरण कहलाता है। इसमें लेखक उसी का वर्णन करता है जो उसने स्वयं देखा या अनुभव किया हो। इसका विवरण सर्वथा प्रामाणिक होता है। संस्मरण लेखक जब अपने विषय मे लिखता है तो उसकी रचना आत्मकथा के निकट होती है और जब दूसरे के विषय मे लिखता है तो जीवनी के। 
अत: स्पष्ट है कि संस्मरण किसी व्यक्ति विशेष के जीवन की घटनाओं का रोचक ढंग से प्रस्तुत विवरण संस्मरण कहलाता है, वर्णन प्रत्यक्ष घटनाओं पर आधारित होता हैं

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