रिपोर्ताज किसे कहते है? riportaj kya hai

रिपोर्ताज किसे कहते हैं? (riportaj kya hai)

रिपोर्ताज मूल रूप से फ्रांसीसी भाषा का शब्द है जिसका आशय हैं सरस एवं भावात्मक अंकन। इसमे लेखक किसी भी आयोजन घटना, संस्था आदि की कलात्मक ढंग से ब्यौरे-बार रिपोर्ट तैयार करके जो प्रस्तुततीकरण करता हैं, उसे ही रिपोर्ताज कहते हैं।
आंखों देखी घटनाओं पर ही रिपोर्ताज लिखा जा सकता है। रिपोर्ताज का विषय कभी कल्पित नही होता। तथ्य को रोचकता प्रदान करने के लिए इसमें कल्पना तत्व की सहायता ली जा सकती है। रिपोर्ताज लेखक को पत्रकार तथा कलाकार दोनों की ही जिम्मेदारी निभानी पड़ती हैं।
इममे लेखक प्रत्यक्ष दर्शन के आधार पर किसी घटना की रिपोर्ट तैयार करता है और उसमें अपनी सहज साहित्यक कला से जब लालित्य ले आता है तब वही गद्य की आकर्षक विधा "रिपोर्ताज" कहलाती है। वास्तव मे रिपोर्ट के कलात्मक एवं साहित्यक रूप को ही रिपोर्ताज कहते है। सहसा घटित होने वाली अत्यन्त महत्वपूर्ण घटना ही इस विधा को जन्म देने का मुख्य कारण बन जाती है। रिपोर्ताज विधा पर सर्वप्रथम शास्त्रीय विवेचन श्री शिवदान सिंह चौहान ने मार्च 1941 मे प्रस्तुत किया था। हिन्दी मे रिपोर्ताज की विधा प्रारंभ करने का श्रेय हंस पत्रिका को है। जिसमें समाचार और विचार शीर्षक एक स्तम्भ की सृष्टि की गई। इस स्तम्भ मे प्रस्तुत सामग्री रिपोर्ताज ही होती हैं। 
रिपोर्ताज गद्य साहित्य की आधुनिक विधा है। कुछ प्रमुख रिपोर्ताज लेखक कन्हैयालाल मिश्र "प्रभाकर" विष्णू  प्रभाकर माचवे, श्याम परमार, अमृतराय, रांगेय राघव तथा प्रकाश चन्द्र गुप्त आदि हैं।

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