कविता किसे कहते है? कविता का क्या अर्थ हैं



कविता किसे कहते है? कविता का क्या अर्थ हैं {kavita kise kahte hai}

सुप्रसिद्ध समालोचक एवं चिन्तक आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने कविता को परिभाषित करते हुए लिखा है कि " कविता वह साधन है जिसके द्वारा सृष्टि के साथ मनुष्य के रागात्मक संबंध की रक्षा और निर्वाह होता है।" 
रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार दी गई परिभाषा के अनुसार कविता की तीन विशेषताएं स्पष्ट होती है---
1. कविता मानव एकता की प्रतिष्ठा करने का एक साधन है और यहि उसकी उपयोगिता है।
2. कविता में भावों एवं कल्पना की प्रधानता रहती है। 
3. कविता मे कवि की अनुभूति की अभिव्यक्ति रहती हैं।

कविता के दो स्वरूप है--

(अ) कविता का बाहरी स्वरूप 
कविता के दो पक्ष है--- अनुभूति और अभिव्यक्ति। अनुभूति पक्ष का संबंध कविता के आंतरिक स्वरूप से है, जबकि अभिव्यक्ति पक्ष का संबंध बाहरी रूप से से है।
कविता के बाहरी रूप के निर्धारण मे निम्नलिखित कारकों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है----
1. लय 2. तुक 3. छन्द 4. शब्द योजना 5. काव्य भाषा 6. अलंकार 7. काव्य गुण
(ब) कविता का आन्तरिक स्वरूप 
कविता का आन्तरिक पक्ष काव्य की आत्मा होती है। रसात्मकता, अनुभूति की तीव्रता, भाव और विचारों का समावेश तथा कल्पना की सृजनात्मकता से उत्पन्न सौन्दर्यबोध का सम्बन्ध कविता के आन्तरिक पक्ष से है। इसके अन्तर्गत भाव सौन्दर्य, विचार सौन्दर्य, नाद सौन्दर्य और अप्रस्तुत योजना का सौन्दर्य शामिल किया जाता है।

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां