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10/14/2021

फासीवाद क्या था? उदय के कारण

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फासीवाद क्या था?

प्रथम के विश्‍व के युद्ध के बाद पश्चिमी विजेता राष्‍ट्रों के व्‍यवहार और उससे पैदा परिस्थितियों से हारे हुऐ राष्‍ट्रों में असन्‍तोष की भावना उत्‍पन्‍न हुई तथा उन्‍होंने अपने अपमान और पराजय के कलंक को समाप्‍त करने के लिये ऐसी प्रणालियों को जन्‍म दिया जिन्‍हें ‘सर्वाधिकारवाद‘ या ‘अधिनायकवाद‘ कहा जाता है। हिटलर का चाहे नाजीवाद हो अथवा मुसोलिनी का फासीवाद हो दोनों ही ‘सर्वाधिकारी‘ थे। 

फासीवाद शब्‍द की उत्पत्ति लेटिन शब्‍द फेसियों से हुई है। प्राचीन रोम के निवासी छडि़यों के बंडल को फेसेज कहते थे, जिसे सत्ता का प्रतीक समझा जाता था, इस चिन्‍ह को शक्ति एकता व अनुशासन का प्रतीक भी माना जाता था। इसी शब्‍द का इस्‍तेमाल मुसोलिनी ने अपने आंदोलन को प्रेरित करने के लिये किया था। 

फासीवाद की परिभाषा 

प्रो.आशीर्वादम् के अनुसार,‘‘ सर्वाधिकार वाद के अनुसार मनुष्‍य का अपने जीवन पर अधिकार नही होता। मनुष्‍य का जीवन राज्‍य की धरोहर है और इसका उपयोग राज्‍य के हित में होना चाहिए।‘‘ 

हीगल नामक दार्शनिक के शब्‍दो,‘‘ राज्‍य साध्‍य है तथा मनुष्‍य उसका साधन है।‘‘ 

सर्वाधिकार वादी इस सिद्धांत से बहुत ही प्रभावित है। सर्वाधिकार के सिद्धांत में लोकतंत्र का कोई स्‍थान नहीं है। सर्वाधिकार वाद में राज्‍य को सर्वोपरि बताकर मनुष्‍य के लियें राज्‍य के आदेश का बिना किसी आपत्ति अथवा सन्‍देह के पालन करना आवश्‍यक कहा गया है। सर्वाधिकार में न-न-नुच अथवा ‘‘क्‍यों और कैसे‘‘ का कोई अस्तित्‍व नहीं है। तानाशाही नेता तथा दल के विरूद्ध कोई भी आवाज नहीं उठा सकता। 

फासीवाद के उदय के कारण

मुसोलिनी तथा फासीवाद का उदय इटली में एक-साथ हुआ। इटली में फासीवाद के अभ्‍युदय के लिए सन् 1919 ई. के पूर्व इटली की ऐतिहासिक पृष्‍ठभूमि अवलोकन करना बहुत जरूरी हैं। 

सन् 1919 ई. से पूर्व तक की संक्षिप्‍त ऐतिहासिक पृ‍ष्‍ठभूमि का अवलोकन

इटली शुरू से ही महत्‍वाकांक्षी प्रवृत्ति का रहा हैं। इसलिए उसने अपनी महत्‍वाकांक्षाओं की सिद्धि के लिए सदैव एक श्रृगांल नीति का अनुकरण किया। यह के शासक हमेशा छोटे और निर्बल राष्‍ट्रों को अपने हमलें का शिकार बनाते रहे। पहले से घायल एंव चोट खाए हुओं को नोचते रहे और बड़े हिंसक प्राणियों की दावतों में बची हुई हड्डीयों को लूटते-खसोटते रहे। बिस्‍मार्क के समय से इटली ने राजनीतिक क्षेत्र में श्रृगांल की भूमिका अदा की। 

इटली में नई चेतना का विकास 1870 ई. के पश्‍चात् दिखाई देता हैं। जर्मनी और इटली में 1870 ई. के फ्रेंच-प्रशियन युद्ध के पश्‍चात् एकीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ हुई। इसके पश्‍चात् इन देशों की गिनती यूरोप की महाशक्तियों में होने लगी। यद्यपि इटली का स्‍थान भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों के कारण छोटी शक्ति के रूप में बना रहा। इटली में 1870 ई. के बाद उसकी विदेश नीति की तीन महत्‍वाकांक्षाएं रहीं--

1. इटालियन भाषा-भाषी प्रदेशों को विदेशी शासन से मुक्‍त करा कर इटली में सम्मिलित करना। 

2. अफ्रीका में विशाल साम्राज्‍य की स्‍थापना करना। 

3. भूमध्‍य सागर पर प्रभुत्‍व स्‍थापित करना ताकि उसे रोम की झील कहा जा सके। 

त्रिगुट जिसमें इटली, जर्मनी तथा ऑस्ट्रिया  शामिल थे, इटली इसका सदस्‍य 1882 ई. बना था। नवनिर्मित इटली के सामने में कई समस्‍याएं थीं, जिसका मुख्‍य कारण सदियों से चली आ रही विभिन्‍न भागों में पृथकता थी। आर्थिक दृष्टि से भी इटली में समानता नहीं थी। इटली कृषि-प्रधान देश था, परंतु औद्योगिक उन्‍नति भी हुई थी जो कि उत्तरी भागों तक सीमित थी। शासन व्‍यवस्‍था की दृष्टि से जहां पीटमाउण्‍ट में जनता को संवैधानिक शासन का अनुभव था, वहीं दक्षिणी इटली पिछड़ा देश था। वहां की 70 प्रतिशत जनता अनपढ़ थी। उत्तर की अपेक्षा दक्षिण में उसका अनुपात तिगुना था। सबसे बड़ी समस्‍या विभिन्‍न प्रदेशों में पूराने ईर्ष्‍या-द्वेष का निरोकरण करने की थी। इस प्रकार इटली की समस्‍यांए जर्मनी की समस्‍याओं से मिलती-जुलती थीं, तथा उनका समाधान भी उसी तरीके से करना था। 

फासीवाद के उदय के निम्नलिखित कारण थे‌--

1. प्रथम विश्‍व युद्ध में इटली की भूमिका का प्रभाव 

इटली ने प्रथम विश्‍व युद्ध में मित्र राष्‍ट्रों की ओर से भाग लिया। मित्र राष्‍ट्रों ने इसे दक्षिण के मोर्चो पर ऑस्ट्रिया से मुकाबला करने का भार सौंपा था, लेकिन ऑस्ट्रिया ने इसे केपोरटो के युद्ध में बुरी तरह से पराजित किया। इसके बाद पियापे नदी के मोर्चे पर भी पराजित किया। पर जुन, 1918 ई. में अमेरिका, इंग्‍लैंड, फ्रांस की सेना की मदद से विटोरिया के युद्ध में ऑस्ट्रिया को पराजित किया, परंतु इटली के लिए वह शौर्य की बात नहीं हुई। इटली में यह धारणा बन चुकी थी कि इटली की सरकार एंव सेना निर्बल है। 

2. मित्र राष्‍ट्रों द्वारा विश्‍वासघात और उपेक्षा

लन्‍दन की संधि (26 अप्रैल,1916)  के तहत मित्र राष्‍ट्रों ने इटली को ट्रेण्टिनों, टीस्‍ट, इस्ट्रिया, फ्यूम, टेल्‍मेशियन, तटीय क्षेत्र, टायरोल और अल्‍बानिया देने का गुप्‍त वचन दिया था। लेकिन विजय उपरांत बुडरो-बिल्‍सन ने इस संधि को अस्‍वीकार कर दिया। अतः उसे केवल ट्रेण्टिनों, डाल्‍मेशिया और दक्षिणी टायरोल ही दिय गये। अतः अन्‍य प्रदेश न मिलने से इटली अत्‍यन्‍त क्रोधित था। जब इसका लाभ उठाकर सितम्‍बर, 1919 में डेन्जिया नामक एक कवि ने फासिस्‍टों की मदद से फ्यूम पर अधिकार कर लिया। इससे फासिस्‍टों को यश और महत्‍व मिला तथा जनता इटली के गणतंत्र से घृणा और फासीवाद से प्रेम करने लगी। 

3. इटली की आर्थिक दुर्दशा

युद्ध के बाद  इटली की अर्थव्‍यवस्‍था चरमरा गई थी। युद्ध में इटली को जन धन कभी क्षति हुई थी। युद्ध के पश्‍चात् सबसे बड़ी समस्‍या बेकारी की थी। कारखाने बंद हो रहे थे। आवश्‍यक उपभोक्‍ता वस्‍तुओं का अभाव था। महंगाई, भुखमरी बढ़ गई थीं। इटली की मुद्रा लीरा का मूल्‍य अत्‍यधिक घट गया। व्‍यापार मंदा पड़ गया। आर्थिक क्षेत्र में पैदा हुई इस दुर्दशा के लिए भी सरकार की दुर्बलता का ही दोषारोपण किया गया। इस कारण फासीवाद के लिए मार्ग प्रशस्‍त होने लगा। 

4. साम्‍यवाद का बढ़ता प्रभाव

इटली में युद्ध के बाद उत्‍पन्‍न आर्थिक संकट से साम्‍यवाद का  प्रभाव बढ़ने लगा। बेरोजगारी बेकारी और भुखमरी तथा बंद होते कारखानों के कारण हड़तालें और कारखानों पर कब्‍जों की घटनांए बढ़ गई। इनके पीछे साम्‍यवादी विचारधारा के मजदूर वर्ग का हाथ था। साम्‍यवाद और समाजवाद दोनों का प्रभाव बढ़ता जा रहा था। युद्ध के बाद बेकार हो गए  सैनिक एंव रोजगार के लिए भटकते मजदूरों में यह विचारधारा लोकप्रिय हो रही थी। इनसे भयभीत जमींदार और उद्योगपतियों को बेनिटों मुसोलिनी में अपना रक्षक नजर आया। मुसोलिनी ने इन  लोगों में साम्‍यवाद का भय फैला कर पूंजीपतियों व जमींदारों को अपने पक्ष में कर लिया। उसने सत्ता प्राप्‍त करने के लिए असंतुष्‍ट जनता का भी सहयोग प्राप्‍त करने की कोशिश की। वामपंथी विचारधारा में साम्‍यवादी और समाजवादी विचारधारा में मतभेद होने से एकता नहीं थी। इसका लाभ मुसोलिनी ने उठाया।

5. देश में हिगेलवाद का प्रचार

इटली में फासीवाद का विकास जर्मनी के हीगेल नामक व्‍यक्ति ने किया। इसका मानना था, कि राज्‍य सरकार की आत्‍मा है, वह व्‍यक्ति की महत्ता के स्‍थान पर राज्‍य की महत्ता पर बल देता था। उसके इन विचारों ने इटली में फासीवाद को अधिक लाभ पहुंचाया। 

6. मुसोलिनी का उदय

इटली में प्रथम विश्‍व युद्ध के बाद वह की जनता में काफी निराशा थी, और इटली की सरकार भी इस समस्‍या से निजात पाने में अक्षम सिद्ध हुई। राष्‍ट्रवादियों को मुसोलिनी जैसा नेतृत्‍व मिला, जिसने अपने विचारों को आंदोलन का रूप प्रदान किया। मुसोलिनी से प्रभावित लोग यह मानने लगे थे कि मुसोलिनी और उसका दल ही  इटली को निराशा के दलदल से निकाल सकता है। और इसी विश्‍वास ने नाजीदल को शक्तिशाली बनाया।

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