10/21/2020

औद्योगिक क्रांति का अर्थ, कारण, प्रभाव या परिणाम

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audyogik kranti meaning in hindi;18 वीं शताब्दी के अन्तिम भाग मे यूरोप मे अनेक आश्चर्यजनक औद्योगिक तथा व्यापार मे परिवर्तन हुआ। इन परिवर्तनों से यूरोप मे राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक परिवर्तन हो गया तथा एक नवीन प्रकृति का जन्म हुआ। औद्योगिक क्रांति को इसी के प्रकाश मे समझा जाता है।

औद्योगिक क्रांति का अर्थ, औद्योगिक क्रांति क्या है?

औद्योगिक क्रांति का अभिप्राय उन परिवर्तनों से है जिन्होंने यह संभव कर दिया कि मनुष्य उत्पादन के प्राचीन उपायों को त्यागकर बड़े पैमाने पर विशाल कारखानों मे वस्तुओं का उत्पादन कर सकेगा।" 

एन्साक्लोपीडिया ऑफ सोशल साइन्सेज, खंड आठ मे औद्योगिक क्रांति को परिभाषित करते हुए कहा गया है कि ," वह अर्थिक एवं शिल्प वैज्ञानिक विकास जो अठारहवीं शताब्दी मे अधिक सशक्त एवं तीव्र हो गया था, जिसके फलस्वरूप आधुनिक उद्योगवाद का जन्म हुआ, को औद्योगिक क्रांति कहते है।" 

दूसरे शब्दों में औद्योगिक क्रांति का अर्थ उद्योग क्षेत्र मे हुई अभूतपूर्व उन्नि से है। वैज्ञानिक खोजों और यंत्रों के विकास से कारखानों मे मशीनों द्वारा उत्पादन होने लगा और कुटीर एवं हस्त उद्योग का स्थान फैक्ट्रियों ने ले लिया। ग्रामों का नगरीकरण भी औद्योगिक क्रांति का ही एक परिणाम है।

हैजन ने लिखा है कि ," औद्योगिक क्रांति का अर्थ घरेलू उत्पादन-प्रणाली को कारखानों की उत्पादन प्रणाली मे बदल देना था।" 

एववर्ड ने लिखा है," औद्योगिक प्रणाली तथा श्रमिकों के स्तर मे होने वाले परिवर्तनों को ही औद्योगिक क्रांति की संज्ञा दी जाती है।" 

इंग्लैंड मे औद्योगिक क्रांति के कारण 

1. आवश्यकता की वस्तुयें अधिक उत्पादन होने से तथा जनसंख्या मे कमी होने से इंग्लैंड मे मशीनों से उत्पादन को प्रोत्साहन मिला। मशीनो से उत्पादन होने से वस्तुयें सस्ती भी पड़ती थी तथा उनकी माँग भी बढ़ सकती थी। 

2. इंग्लैंड मे लोहे और कोयले की खदानों के पास-पास होने से पक्का लोहा बनाने और लोहे से मशीने बनाने मे काफी सुविधा होती थी। इस कारण इंग्लैंड मे अन्य यूरोपीयन देशों की अपेक्षा मशीनों का निर्माण पहले शुरू हुआ। मशीनों से कल-कारखाने चलने लगे।

3. समुद्री मार्ग पर ब्रिटेन का एकाधिकार होने से उत्पादित वस्तुओं को निर्यात करने मे सुविधा रही। इससे उत्पादित वस्तुओं की अधिक मात्रा को बाजार उपलब्ध हो गया।

4. उपनिवेशों से इंग्लैंड को कच्चा माल एवं नवीन बाजार उपलब्ध हुए।

5. लम्बे समय से इंग्लैंड के पास बड़ी संख्या मे अर्द्धकुशल कारीगर रहे। जब औद्योगिक क्रांति आरम्भ हुई तो लोग नई मशीनों पर काम करने के लिए उपलब्ध हो गए। ये स्वतंत्र लोग थे और जैसे-जैसे माँग होती ये एक स्थान से दूसरे स्थान पर आ-जा सकते थे।

6. युद्धों के दिनों मे इंग्लैंड को न केवल अपने सैनिकों की अपितु अपने साथी देशो के सैनिकों की आवश्यकताओं को भी पूरा करना पड़ता था। इसके लिए उत्पादन तरीको मे सुधार करना आवश्यक हो गया। युद्धों के बाद बेकारी बढ़ी इसको दूर करने का एक तरीका था उद्योग-धंधो का विकास।

7. ब्रिटेन मे राजनीतिक सुरक्षा इतनी अच्छी थी की लोग बड़े उद्योगों मे आवश्यक पूंजी लगाने मे बिल्कुल भी संकोच नही करते थे। इंग्लैंड के प्रधानमंत्री बालपोल की कुशल नीति से राजनैतिक एवं वित्तीय स्थायित्व बढ़ा। सरकार की संरक्षणवादी नीति से भी औद्योगिक उत्पादन को प्रोत्साहन मिला।

8. इंग्लैंड मे उद्योग तथा व्यापार के लिए निरंतर बढ़ते हुए श्रम की मांग मे श्रमिकों का अभाव था।

9. ब्रिटेन मे बहुत पहले बैंकों की स्थापना हो चुकी थी। सुविकसित बैंकिंग प्रणाली के विकसित होने से उद्योगपतियों को इस प्रकार पूंजी की सरल प्राप्ति ने इंग्लैंड को औद्योगिक क्रांति का संस्थापक बना दिया।

10. पूँजी अधिक मात्रा मे उप्लब्ध होना। औद्योगिक विकास मे बड़े-बड़े कारखाने लगाने के लिए पूँजी की आवश्यकता को वहां के व्यापारी पूरी करते थे। ये व्यापारी पूंजी को औद्योगिक क्षेत्र मे लगाने को तैयार थे।

11. इंग्लैंड के निवासियों का जीवन स्तर उच्च था। जीवन स्तर के विकास का लाभ उद्योगों को ही मिलता है। क्रय शक्ति की अधिकता ने वस्तुओं की मांग बढ़ायी।

औद्योगिक क्रांति के प्रभाव या परिणाम 

audyogik kranti ke prabhav;औद्योगिक क्रांति यद्यपि सर्वप्रथम इंग्लैंड मे सम्पन्न हुई तथा उसके पश्चात सम्पूर्ण यूरोप मे फैली। अरनाॅल्ड टायनवी ने औद्योगिक क्रांति को " एक निरन्तर विकास की प्रक्रिया " और रेम्जेमोर ने " बिना शोर के शांतिपूर्वक होने वाली क्रांति " बताया है जिसने यूरोप और एशिया पर प्रत्यक्ष और परोक्ष अच्छे और बूरे प्रभाव डाले। औद्योगिक क्रांति ने सामाजिक जीवन के राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं धार्मिक पहलुओं पर प्रभाव डाला एवं परिवर्तन किये। औद्योगिक क्रांति के प्रभाव या परिणाम इस प्रकार है--

(अ) सामाजिक प्रभाव 

औद्योगिक क्रांति ने मध्य वर्ग की शक्ति को अभिव्यक्त किया। इस क्रांति के फलस्वरूप संयुक्त परिवार प्रणाली को काफी आघात पहुंचा। फैक्ट्री प्रणाली से मालिक व मजदूरों के परस्पर संघर्ष, श्रमिकों के शोषण, श्रमिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के ह्रास, उनमे स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं उत्पन्न हो गई।

1. बेकारी

मशीनों मे काम करने के लिए अधिक व्यक्तियों की आवश्यकता नही होती। इसलिए बेकारी बढ़ गई।

2. श्रमिको की खराब दशा 

श्रमिकों को वेतन सदैव रुपयों के रूप मे नही दिया जाता था, वेतन को समान के रूप मे भी दिया जाता था, जिनमे से बहुत-सा सामान उनके लिए अनुयायी होता था। इस प्रकार श्रमिकों की दशा बहुत खराब हो गई।  

3. पूँजी और श्रम 

औद्योगिक क्रांति ने दो नवीन वर्गों को जन्म दिया- पूंजीवादी और श्रमिक वर्ग। पूंजीवादी धनी थे, वे श्रमिकों को उनके काम करने के लिए रखते थे। उनको लाभ मे हिस्सा नही मिलता था तथा श्रमिकों को वेतन भी थोड़ा दिया जाता था।

(ब) राजनैतिक प्रभाव 

उन्नीसवीं सदी मे केवल इंग्लैंड मे ही चालीस से अधिक फैक्ट्री अधिनियम बने अधीन काम के घण्टे, न्यूनतम मजदूरी एवं अन्य बातों की व्यवस्था हुई।

1767 ई. मे सरकार को नगरीय मजदूरों को मताधिकार देना पड़ा और फिर 1884 ई. मे ग्रामीण मजदूरों को भी यह अधिकार मिला। इस प्रकार औद्योगिक क्रांति से पनपे वर्गों के प्रभाव के फलस्वरूप राजनीतिक सत्ता, भूपतियों के हाथ से मुक्त हुई और इंग्लैंड मे जनतंत्र का विकास हुआ।

औद्योगिक क्रांति ने उपनिवेश स्थापित करने अथवा अविकसित देशों पर राजनीतिक नियंत्रण स्थापित करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया।

नवीन शहरो के विकास पर राजनैतिक प्रभाव था। आगे चलकर श्रमिकों की खराब दशा ने चार्टिस्ट आंदोलन को जन्म दिया। वे सुधार के लिए समाजवादी मांगों को करने लगे। 

(स) आर्थिक प्रभाव 

औद्योगिक क्रांति मे नवीन आविष्कारों के कारण खदानों की खोज हुई, कारखानों की आवश्यकता हुई तथा इनके लिये बड़ी मात्रा मे कच्चे माल की आवश्यकता हुई। इसके कारण उपनिवेशों का तथा श्रमिकों का शोषण भी होने लगा।

हजारों श्रमिक मशीनों के कारण बेकार होने लगे, श्रमिकों की आर्थिक समस्यायें उत्पन्न होने लगी। अनेक बैंकों की स्थापना हुई। बड़े पैमाने पर उत्पादन से वस्तुओं के दाम भी कम होने लगे तथा सामान्य जनता के लिए उपयोगी वस्तुयें अब दुर्लभ नही रह गई। श्रमिकों ने संगठित होकर मजदूरी बढ़ाने के लिये आंदोलन करना आरंभ किया।

(द) विचारधार पर प्रभाव 

औद्योगिक क्रांति के कारण इंग्लैंड मे इसके आर्थिक क्षेत्र मे राज्य के हस्तक्षेप की अवांछनीयता का सिद्धांत भी शामिल हो गया था। इस प्रकार के सिद्धांत का जन्म फ्रांस मे तुर्गों जैसे विचारकों के प्रभाव मे हुआ था।

(ई) औद्योगिक प्रभाव 

1.बड़े पैमाने पर उत्पादन 

हर प्रकार की वस्तुओं के निर्माण करने मे उन्नति हुई। उत्पादन मे खर्च कम हुआ। व्यक्ति धनी हो गए।

2. फैक्ट्री पद्धति 

घरेलू पद्धति पर निर्माण करने वाले लघु उद्योग समाप्त हो गए। बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियाँ खुलने लगी। कारखानों के साथ बड़े शहरों का विकास हुआ।

3. श्रम का विभाजन

औद्योगिक क्रांति के पहले एक वस्तु एक व्यक्ति के द्वारा बनाई जाती थी। अब इसके विभिन्न हिस्से विभिन्न व्यक्तियों द्वारा बनाए जाने लगे।

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