10/19/2020

पुनर्जागरण के प्रभाव

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पुनर्जागरण के प्रभाव (punarjagran ke prabhav)

punarjagran ke prabhav;पुनर्जागरण ने मानव जीवन के हर पक्ष पर अपना प्रभाव डाला। इससे मानवीय जीवन श्रेष्ठ तथा महत्वपूर्ण हो गया। पारलौकिकता के स्थान पर भौतिकताजन्य सुखों की जरूरत महसूस की गई। कला, साहित्य तथा विज्ञान को समसामयिक समस्याओं के समाधान के लिए प्रथमतः प्रस्तुत किया गया। पुनर्जागरण के निम्म प्रभाव हुये--

1. साहित्यिक एवं वैज्ञानिक प्रभाव 

पूर्व यूरोप की मध्यकालीन मानसिकता मे साहित्य तथा विज्ञान का आधार बहुत कमजोर था। पुनर्जागरण के समय कई विद्वानों ने साहित्य मे वृद्धि की। विज्ञान तथा साहित्य पर कई ग्रंथ लिखे गए। कई वैज्ञानिक उपकरणों का अविष्कार हुआ। 

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2. नये नगरों तथा वर्गों का विकास

व्यापारिक विकास के कारण कई देशो मे बड़े-बड़े नगरो का विकास हुआ। नये नगर शिक्षा, विद्या के केन्द्र थे। 

3. अंधविश्वास एवं अज्ञानता का विशान 

इस आंदोलन का सबसे अधिक प्रभाव बौद्धिक क्षेत्र पर पड़ा। रूढ़िवादी मध्ययुगीन यूरोपीय समाज जिसके जीवन पर चर्च का व्यापक विकृत प्रभाव था पुनर्जागरण से अज्ञानमुक्त होकर तर्कशील होने लगे।

4. राजनीतिक प्रभाव 

सामंतीय व्यवस्था के ढहने तथा यूनानी व लैटिन भाषाओं से प्रभावित होने से हर राष्ट्र ने निज भाषा को विकसित करने का प्रयत्न किया। इंग्लैंड मे कई उत्कृष्ट रचनाएँ लिखी गई। इससे तथा नए राज्यों की स्थापना से यूरोप मे राष्ट्रीयता की भावना का प्रसार हुआ।

5. इतिहास पर प्रभाव 

गोर्थों तथा हूणों के आक्रमणों ने प्राचीन व मध्यकालीन घटना तथ्यों के लेखन के बीच अंतराल ला दिया था। अब जनसाधारण मे पुनः ऐतिहासिक बोध हुआ। 

6. नवीन स्थानों की खोजें 

पुनर्जागरण ने जनता मे निर्भीकता का संचरण किया। दूर-दूर की सामुद्रिक यात्राएं नए-नए स्थानो की खोज हुई। पुर्तगाल मे तो इन यात्राओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से " नाविक विद्यालय " की स्थापना भी की गई।

7. आर्थिक प्रभाव 

पुनर्जागरण ने व्यापारिक जगत को नई दिशा तथा दशा दी। नई खोजों ने संसाधनों एवं बाजारों मे वृद्धि की जिससे उत्पादन मे वृद्धि हुई।

8. कला पर प्रभाव 

पुनर्जागरण काल मे यूनानी, लैटिन कलाओं का प्रसार हुआ। माइकल एंजलो जिसने मोसेज तथा डेविड की मूर्तियों का निर्माण किया और लियोनार्डों द विन्सी एवं सीटियन आदि कलाकारों पर यूनानी प्रभाव स्पष्ट है। स्थापत्य कला मे गथिक शैली की प्रधानता रही। ग्रेविक एवं पेलस्ट्रीना के संगीत मे भी रोमन यूनानी प्रभाव दिखता है।

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