11/28/2021

पाकिस्तान के संविधान की विशेषताएं

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पाकिस्तान के संविधान की पृष्ठभूमि 

आजादी के बाद से एक स्वतन्त्र देश के रूप मे पाकिस्तान का इतिहास काफी उथल-पुथल का रहा है। पाकिस्तान का उदय 15 अगस्त 1947 को हुए भारत के विभाजन का परिणाम है। पाकिस्तान एक इस्लामिक राष्ट्र है वह अपना स्वतन्त्रता दिवस 14 अगस्त की रात्रि को मानता है, क्योंकि जब भारत मे रात्रि के 12 बजे थे और पाकिस्तान मे 14 अगस्त की रात्रि के 11:30 बजे थे।
पाकिस्तान संविधान
महात्मा गांधी और कांग्रेस के विरोध के बाद भी जिन्ना नही माना और उसका द्विराष्ट्रा का सिध्दांत सफल हो गया। इस प्रकार जिन्ना ने हिन्दू और मुसलमानो की दो अलग कौम खड़ी कर दी। उसने कहा कि हिन्दू और मुस्लिम के हित एक दूसरे के विरोधी है यह दोनो कभी एक हाथ नही रह सकते। पाकिस्तान के संविधान पर जिन्ना के विचार का काफी प्रभाव रहा है उसे पाकिस्तान मे कायदे आजम हिन्दी मे राष्ट्र पिता कहा जाता है।
गत 70 वर्षों का पाकिस्तान का राजनीतिक इतिहास लोकतंत्र की असफलता, सैनिक शासन तथा पाकिस्तान की राजव्यवस्था में सेना तथा प्रतिक्रियावादी ताकतों के बढ़ते प्रभाव का इतिहास हैं। 1947 में आजादी के बाद लियाकत अली खान पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री तथा मोहम्मद अली जिन्ना पहले गवर्नर जनरल बने। 1949 में लियाकत अली खान ने पाकिस्तान का नया संविधान बनाने का प्रयास किया। उन्होंने संविधान का उद्देश्य प्रस्ताव 12 मार्च को नेशनल असेम्बली में रखा तथा जो पारित कर दिया गया। 1949 में ही उर्दू को पाकिस्तान की राज भाषा घोषित कर दिया गया, जिसका पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान में अब एक अलग राष्ट्र बांग्लादेश हैं) में तीव्र विरोध हुआ। जिन्ना की 11 सितंबर 1948 में मृत्यु हो गई। 1951 में सेना द्वारा निर्वाचित सरकार का तख्ता पलटने का पहला प्रयास हुआ, लेकिन यह असफल रहा। अक्टूबर 1951 को लियाकत अली खान की हत्या कर दी गई। उनके स्थान पर ख्वाजा नसीमुद्दीन पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री बने। इसके बाद पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता का दौर शुरू हुआ। 1953 मे मोहम्मद अली बोरा नए प्रधानमंत्री बने। 1955 में चुनाव के बाद चौधरी मोहम्मद अली गए प्रधानमंत्री बने। 
1956 में सैनिक कमाण्डर अयूब खान ने पाकिस्तान में पहली बार मार्शल लाॅ लागू किया तथा 1958 में सरकार को बर्खास्त कर वे पाकिस्तान के सैनिक शासक बन गए। इसके साथ ही संविधान निर्माण तथा लोकतंत्र की स्थापना की आशाएं धूमिल हो गई। 1969 तक पाकिस्तान के सैनिक शासन का पहला दौर चला। इसी वर्ष दूसरे सैनिक शासन याहया खान ने अयूब को हटाकर सत्ता अपने हाथ में ले ली। याहया खान ने 1970 में नेशनल असेम्बली के चुनाव कराए, जिनमें ईस्ट पाकिस्तान की अवामी लीग पार्टी को बहुत मिला, लेकिन पश्चिम पाकिस्तान के नेता अवामी लीग को सत्ता नहीं देना चाहते थे। 1971 के सैनिक संघर्ष में ईस्ट पाकिस्तान अलग होकर नया देश बांग्लादेश बन गया। उसके बाद याहया खान ने जुल्फिकार भुट्टों को सत्ता सौंप दी। 1973 में पाकिस्तान के संविधान का निर्माण किया गया। इससे लोकतंत्र की बहाली की उम्मीद बढ़ी, लेकिन 1977 में जनरल जिया उल हक ने भुट्टों की लोकतंत्रिक सरकार का तख्ता पलट कर पाकिस्तान के इतिहास में तीसरे सैनिक शासक बने। अगस्त 1988 में एक विमान दुर्घटना में जिया उल हक की मौत हो गई तथा लोकतंत्र की बहाली की प्रक्रिया पुनः चली। 1988 से 1997 तक बेनजीर भुट्टों तथा नवाज शरीफ लोकतांत्रिक सरकार काम करती रही, लेकिन 1997 में नवाज शरीफ का तख्ता पलट कर 1997 में जनरल परवेज मुशर्रफ ने चौथी बार सैनिक शासन लागू किया। उनके पद छोड़ने के बाद 2008 में फिर लोकतंत्र की बहाली हुई। 2008 के चुनावों में बेनजीर भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी सत्ता मे आई, लेकिन 2013 के चुनावों मे नवाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग पार्टी की जीत हासिल हुई। 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पनामा पेपर लीक भ्रष्टाचार मामले मे लिप्त होने के कारण हटा दिया तथा उन्हें नेशनल असेम्बली का सदस्य चुने जाने के आयोग्य ठहरा दिया हैं। 2018 में तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी से इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने।
इस प्रकार, हम कह सकते हैं कि 1947 से अब तक पाकिस्तान में चार बार सैनिक शासन लागू किया जा चुका हैं। उल्लेखनीय है कि सैनिक शासन के दौरान संवैधानिक व्यवस्था को निलम्बित कर दिया जाता हैं।

पाकिस्तान में संवैधानिक शासन व्यवस्था 

पाकिस्तान के इतिहास में अगस्त 1947 से आज तक तीन संविधान प्रमुख रूप से रहे हैं-- 
(अ) 1956 का पाकिस्तानी संविधान, 
(ब) 1962 का पाकिस्तानी संविधान और 
(स) पाकिस्तान का वर्तमान संविधान (1973 का संविधान) 
1956 में पाकिस्तान के पहले संविधान को मंजूरी दी गई थी, लेकिन 1958 में इसे रद्द कर दिया गया था। 
1962 में पाकिस्तान के दूसरे संविधान को मंजूरी दे दी गई थी। पाकिस्तान का दूसरा संविधान सैनिक शासक अयूब खान से अपनी देख-रेख मे 1 मार्च, 1962 को तैयार किया था तथा इसे 8 जून, 1982 को लागू किया गया था। उन्होने राष्ट्रपति को कार्यकारी शक्ति दी गयी थी तथा प्रधानमंत्री पद को समाप्त कर दिया। इस संविधान में इस्लामिक विचारधारा को अधिक महत्व दिया गया था। इसमे यह भी प्रावधान था कि पाकिस्तान का राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री वही व्यक्ति बन सकता है, जिसने सैनिक अधिकारी के रूप में अनुभव प्राप्त किया हो। 1962 का संविधान 1969 में निरस्त कर दिया गया, जब अयूब खान ने जनरल याहया खान को सत्ता सौंप दी। 
1971 में पाकिस्तान से अलग होकर बांग्लादेश के निर्माण के बाद जुल्फिकार भुट्टों की देख-रेख में पाकिस्तान का तीसरा संविधान 1973 में बनकर तैयार हुआ।  1973 का संविधान पाकिस्तान की संसद द्वारा 14 अगस्त, 1973 को अनुमोदित किया गया, लेकिन अब तक दो बार 1971 से 1988 तक तथा पुनः 1997 से 2008 तक यह संविधान स्थगित रहा हैं, क्योंकि इस अवधि में सैनिक शासन कायम था। कई संशोधनों के साथ वर्तमान में 1973 का संविधान ही पाकिस्तान में लागू हैं।

पाकिस्तान के संविधान की विशेषताएं (pakistan ke samvidhan ki visheshta)

1. इस्लामिक गणराज्य
पाकिस्तान का संविधान इस्लामिक गणराज्य है अर्थात  पाकिस्तान का राज्य धर्म इस्लाम है। वर्तमान के संविधान सहित अब तक के सभी पाकिस्तानी संविधान मे पाकिस्तान को इस्लामिक गणराज्य घोषित किया गया है। पाकिस्तान के संविधान के अनुसार अल्ला की सत्ता को सर्वोपरि माना गया है। अर्थात पाकिस्तान का संविधान बाद मे आता है इससे पहले इस्लाम आता है पाकिस्तान की अधिकांश संवैधानिक संस्थाओं मे इस्लाम का व्यापक प्रभाव देखने को मिलता है। पाकिस्तान मे इस्लामिक कानून अन्य कानूनों  से श्रेष्ट माना जाता है। पाकिस्तान के संविधान के मुताबिक गैर-मुस्लमान पाकिस्तान का राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री नही बन सकता केवल मुसलमान व्यक्ति है पाकिस्तान का राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री बन सकता है। पाकिस्तान के के संविधान के अनुच्छेद 40 मे यह भी कहा गया है की पाकिस्तान मुस्लिम राष्ट्रो के साथ अच्छे संबन्ध बनाने का पूरा प्रयत्न करेगा। पाकिस्तान एक गणराज्य है इसलिए यहा पाकिस्तान का अध्यक्ष (प्रधानमंत्री) पाकिस्तान कि जनता द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुना जाता है।
2. कठोर संविधान
पाकिस्तान के संविधान मे आसानी से संशोधन नही किया जा सकता। पाकिस्तान का संविधान कठोर संविधान है। पाकिस्तान की संसद कानूनों का निर्माण उपस्थित मत देने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत से कर सकती है। अनुच्छेद 239 मे कहा गया है की संविधान संशोधन विधेयक संसद के दोनों सदनों मे कुल सदस्य संख्या के दो तिहाई बहुमत से ही पारित किया जा सकता है अगर संविधान संशोधन कसी प्रज्ञनत को प्रभावित करता है, तो उसे प्रान्त की विधान सभा से भी दो तिहाई बहुमत पारित किया जाएगा। इस प्रकार से पाकिस्तान का संविधान कठोर संविधान की श्रेणी मे आता है।
3. एकीकृत न्यायपालिका
पाकिस्तान के संविधान की एक विशेषता यह भी है कि पाकिस्तान के संविधान मे भारत के संविधान की तरह ही एकीकृत न्यायपालिका की धारणा है। जिसमें शीर्ष पर उच्चतम न्यायालय है तथा निचले स्तर पर जिला न्यायालय है। पाकिस्तान मे न्यायपालिका मे अदालतों को दो वर्गो मे बाँट सकते है--
(अ) उच्च स्तरीय न्यायपालिका
(ब) अधीनस्थ न्यायपालिका
4. कानून और न्याय पर इस्लाम का प्रभाव
लोकतान्त्रिक देशों मे पंथनिरपेक्ष विधि के शासन की व्यवस्था की जाती है लेकिन पाकिस्तान के संविधान मे ऐसा नही है यहाँ कानून व न्याय व्यवस्था को इस्लामिक विधि व विचारधार के अनुसार बनाने का प्रयास किया है। संविधान मे इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई है। अनुच्छेद 227 में कहा गया है कि यथाशीघ्र पाकिस्तान के कानून को कुरान तथा सुन्नाह के अनुसार बदलने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए अनुच्छेद 228 में इस्लामिक कौंसिल की स्थापना का प्रावधान किया गया है। इस कौंसिल के सदस्य इस्लामिक विचारधारा के विद्वान होते है।

5. मौलिक अधिकार
पाकिस्तान के संविधान में नागरिको को मौलिक अधिकार भी दिये गये है। संविधान के भाग तीन से 7 से लेकर 28 तक मौलिक अधिकारों की व्यवस्था है। पाकिस्तान के संविधान द्वारा दिये गये अधिकारों मे प्रमुख है---
1.जीवन व सुरक्षा का अधिकार
2.स्वतंत्रता का अधिकार
3.समानता का अधिकार
4.जीवन सुरक्षा का अधिकार
5.सम्पत्ति का अधिकार
6.बेगार तथा बंधुआ मजदूरी से जुड़े अधिकार
6. आपातकालीन उपलन्ध
पाकिस्तान मे विशेष परिस्थितियों के लिए आपातकाल की व्यवस्था भी की गई है। अनुच्छेद 232 के अन्तर्गत यदि राष्ट्रपति को सन्तुष्टि हो जाए कि बाहरी आक्रमण या युध्द के कारण पाकिस्तान की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो गया है, तो वह राष्ट्रीय आपात की घोषणा कर सकता है। संविधान मे अनुच्छेद 233 में राष्ट्रीय आपाता लगाने की व्यवस्था है, अनुच्छेद 234 में प्रान्तों में राष्ट्रपति शासन तथा अनुच्छेद 235 के अन्तर्गत वित्तीय आपात लगाने की व्यवस्था की गई है।
7. स्थानीय शासन
पाकिस्तान के संविधान से भारत की तरह ही स्थानीय स्वशासन को संवैधानिक मान्यता प्रदान की गई है। अनुच्छेद 141 (अ) मे यह प्रावधान किया गया है कि प्रत्येक प्रान्त में कानून बनाकर स्थानीय स्वरूप शासन की स्थापना करेगा तथा उन्हें प्रशासनिक, राजनीतिक तथा वित्तीय शक्तियों का स्थानान्तरण करेगा। स्थानीय शासन के प्रतिनिधि जनता द्वारा चुने जाएंगे तथा इनके निर्वाचन का दायित्व पाकिस्तान के निर्वाचन आयोग का होगा। यह बदलाव लोकतान्त्रिक विकेन्द्रीकरण की दिशा में एक एक बदलाव है।
8. नीति निदेशक सिध्दांतों की व्यवस्था
पाकिस्तान के संविधान मे भारत के संविधान की तरह ही नीति निदेशक सिध्दांतों का वर्णन किया गया है। संविधान के भाग दो में अध्याय दो के अन्तर्गत इन सिध्दांतों का उल्लेख है। इन निती निदेशक सिध्दांतों मे सामाजिक बुराइयों को दूर करने, नागरिकों को मौलिक अधिकार से सम्बन्धित सुविधाओं को उपलब्ध करने और मुस्लिम देशो से भाई-चारे के सम्बन्ध बनाने आदि के बारें मे उल्लेख किया गया है। यह सिध्दांत पाकिस्तान को कल्याणकारी राज्य बनाने का एक प्रयास है।
9. संघात्मक शासन
पाकिस्तान के संविधान कि एक विशेषता यह भी है कि पाकिस्तान मे चार राज्य है-- पंजाब, सिंध, खैबर पखतुनखा, तथा बलूचिस्तान। इनके अलावा पाकिस्तान मे अन्य क्षेत्र भी शामिल है जिनमें-- इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र, गिलगिट-बाल्टिस्तान, संघ प्रशासित क्षेत्र तथा पाक अधिकृत कश्मीर है। गिलगिट-बाल्टिस्तान को छोड़कर अनुच्छेद 1 में इन क्षेत्रों का उल्लेख है।
संघात्मक व्यवस्था के अन्तर्गत पाकिस्तान की केन्द्र सरकार कई तरीके से प्रज्ञनतों पर नियन्त्रण करती है। प्रान्तों के गवर्नर की नियुक्ति केन्द्र सरकार द्वारा की जाती है तथा वह केन्द्र के अन्तर्गत यदि किसी प्रान्त का शासन संविधान के प्रावधानों के अनुसार नही चल रहा है, तो राष्ट्रपति यहाँ की सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू कर सकता है।
10. संसदात्म प्रणाली
पाकिस्तान कि संसदात्म प्रणाली भारत की संसदात्म प्रणाली से थोड़ी सी अगल है। पाकिस्तान के संविधान में राष्ट्रपति की शक्तियों को बढ़ाकर अध्यक्षात्मक प्रणाली को बढ़ने का प्रयास किया गया है। लेकिन 2010 के संशोधन द्वारा संसदात्मक प्रणाली को पुन: मजबूत किया गया है। संसदात्म प्रणाली के अन्तर्गत पाकिस्तान की मन्त्रिपरिषद् तथा प्रधानमंन्त्री सामूहिक रूप से संसद के निम्न सदन ( राष्ट्रीय सभा ) के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है।
11. राज्य के प्रति स्वामिभक्ति जरूर
पाकिस्तान के संविधान मे राज्य के प्रति स्वामिभक्ति का विशेष महत्व है। अनुच्छेद 5 के अनुसार राज्य के प्रति स्वामी भक्ति दिखाना पाकिस्तान के प्रत्येक नागरिक का मौलिक दायित्व है। संविधान का पालन करना प्रत्येक  नागरिक के लिए अनिर्वाय है। 
यह जानकारी आपके के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगी

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