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6/07/2021

भूकंपीय तरंगो का वर्णन

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भूकंपीय तरंगों का वर्णन

भूकंपीय तरंगे तीन प्रकार की होती है। इन्हें P, S तथा L तरंगे कहते है। सीस्मोग्राफ पर सबसे पहले P, उसके बाद S तथा अंत मे L तरंगें अंकित होती है।

1. P- तरंगे 

ये तरंगे ध्वनि तरंगों की तरह होती है तथा इनमें अणुओं का कंपन लहरों की दिशा मे आगे या पीछे होता रहता है। इसी कारण इन्हें अनुदैर्ध्य तरंगे भी कहते है। इन लहरों मे दबाव पड़ता है इसलिए ये दबाव वाली लहरें भी कहलाती है। इनकी उत्पत्ति शैल कणों के संपीड़न से होती है। भूकंप लेखी यंत्र पर इन्हें अंग्रेजी के 'P' अक्षर द्वारा अंकित किया जाता है। ये ठोस भागों मे तीव्र तथा सरल भागों मे धीमी गति से चलती है। इन लहरों की औसत गति 8 किमी. प्रति सेकंड होती है। भूकंप अधिकेन्द्र से प्राथमिक लहरें ठीक 21 मिनट बाद अपने प्रतिध्रुव स्थान पर पहुंचती है। ये लहरें पृथ्वी के प्रत्येक भाग मे यात्रा करती है।

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2. S- तरंगे 

इन्हें अनुप्रस्थ या गौण तरंगे भी कहते है। ये प्रकाश तरंग की भाँति होती है। इनमे अणुओं की गति लहर के समकोण पर होती है। ये प्रारंभिक या P लहरों के बाद प्रकट होती है। इनकी गति P लहरों की तुलना मे कम होती है। ये P लहरों की तुलना मे विध्वंसक होती है। ये तरल भागों से होकर नही गुजरती है।

3. L- तरंगे 

इन्हें पृष्ठीय तरंगें भी कहा जाता है। ये P तथा S तरंगों की तुलना मे अधिक लम्बा मार्ग तय करती है। अधिक गहराई पर जाने पर ये लुप्त हो जाती है। ये लहरें जल से भी होकर गुजरती है। इनकी गति 3 किमी. प्रति सेकंड होती है।

वेग मे भिन्नता के के कारण भूकंपीय तरंगों को तीन युग्मों मे विभिजित किया जाता है--

(अ) P तथा S तरंगों का युग्म

इनकी गति सबसे अधिक होती है।

(ब) Pg तथा Sg तरंगों का युग्म 

इनकी गति सबसे कम होती है।

(स) P* तथा S* युग्मों का युग्य 

इनकी गति उपरोक्त दोनों युग्मों के मध्य की होती है।

इन तरंगों के द्वारा पृथ्वी के आभ्यंतर की संरचना को समझने मे मदद मिलती है। जेफ्रीज ने क्रोएशिया की कल्पा घाटी के 1906 के भूकंप के आधार पर P तथा S तथा S तरंगों के युग्म के अलावा Pg तथा Sg युग्म का पता लगाया। Pg लहर 5.4 किमी. तथा Sg 3.3 किमी. प्रति सेकंड की गति से पृथ्वी के ऊपरी भाग मे यात्रा करती है। ये लहरें जिन शैलों से होकर गुजरती है उनका घनत्व 2.7 होता है। इससे सिद्ध होता है कि पृथ्वी की ऊपरी परत ग्रेनाइट शैलों से निर्मित है। इन दो लहरों से पूर्व Ps तथा Ss लहरों का अंकन किया जाता है, जो न्यून वेग से ऊपरी भाग मे प्रवाहित होती है। कोनार्ड तथा टायर्न ने P* तथा S* तरंगों की खोज की। इनकी गति Pg-Sg तथा P-S के मध्य होती है। इनमें P* लहरें 6 से 7 किमी. प्रति सेकंड का S* लहरें 3 से 4 किमी. प्रति सेकंड की गति से पृथ्वी के मध्यवर्ती भाग को प्रवाहित होती है। डेली तथा जेफ्रीज ने पृथ्वी की मध्यवर्ती परत को ग्लासी बैसाल्ट का बना माना है।

सुनामिस 

अधः सागरीय भूकंपो से उत्पन्न तरंगों को सुनामिस कहा जाता है। सागर तली मे अचानक परिवर्तन व अव्यवस्था के कारण सुनामिस लहरें उत्पन्न होती है। ये लहरें अत्यन्त विनाशकारी तथा प्रबल होती है। इनके साथ सागरीय जल की गति समस्त गहराई तक होती है। क्राकाटोआ ज्वालामुखी (इण्डोनेशिया) उद् गार के समय समुद्र  मे 120 फीट ऊंची सुनामिस लहरें उठी थीं जिनसे सागरीय तट पर 36000 व्यक्ति काल कवलित हो गये थे।

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