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8/03/2020

भूस्खलन किसे कहते है? कारण, प्रभाव

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भूस्खलन किसे कहते है (bhuskhalan kise kahate hain)

चट्टानों, मिट्टी अथवा मलबे के ऐसे ढ़ेर जो स्वयं अपने भार के जोर से पहाड़ों की ढ़लानों अथवा नदियों के किनारों पर आ जाते है, भूस्खलन कहलाता है।
पर्वतीय क्षेत्रों में वनो के काटे जाने, बाढ़ो का प्रकोप होने, अधिक वर्षा होने से भूस्खलन की सम्भावनाएं बढ़ जाती है। चट्टानों की प्रकृति, ढाल की प्रवणता तथा ढाल की दिशा मे निर्माण कार्यों के होने से भी भूस्खलन की प्रक्रिया प्रभावित होती है। भूस्खलन प्रक्रिया मे भूमि का एक भाग टूटकर निचले भागों की तरफ गुरुत्वाकर्षण के कारण खिसकता जाता है। तीव्र ढाल कमजोर चट्टानों एवं अधिक वर्षा होने वाले पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन एक प्रमुख प्राकृतिक आपदा के रूप मे काफी जन-धन की हानि करता है।

भूस्खलन के कारण

सामान्यतः भूस्खलन धीरे-धीरे होता है, फिर भी आकस्मिक रख्लन बिना चेतवनी के भी हो सकते है। भूस्खलन होने पर के बारे मे कोई पक्की चेतावनी मौजूद नही है। अतः भूस्खलन की आपदा घटने का पूर्वानुमान लगाना कठिन है। भूविज्ञान, विज्ञान, वनस्पति आच्छादन, क्षेत्र का पूर्व इतिहास और प्रभाव सम्बन्धी जानकारी का प्रयोग करके भूस्खलन की उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों का पता लगाया जा सकता है। भूस्खलन के लिए प्रमुखतया भूकम्प, बाढ़ और चक्रवात की स्थितियां उत्तरदायी होती है। पहाड़ी क्षेत्र मे मानव द्वारा रास्तों के निर्माण करने अथवा कृषि के लिए खड़ी ढाल वाले क्षेत्र बनाना भी भूस्खलन को जन्म देता है।
पर्वतीय क्षेत्रों में जब भूकंप के तीव्र झटके आते है तो ढ़ालों की चट्टानों एवं मिट्टी खिसकने लगती है। यह अत्यधिक खतरनाक होती है। बाढ़ के प्रकोप के कारण कगारों की मिट्टी कमजोर हो जाती है जिससे मिट्टी चट्टानों के साथ खतरनाक होती है। बाढ़ के प्रकोप के कारण कगारों की मिट्टी कमजोर हो जाती है जिससे मिट्टी चट्टानों के साथ खिसकने लगती है। तीव्र चक्रवातों एवं झंझावतों का आना भी भूस्खलन को जन्म देता है।

भूस्खलन के प्रभाव 

भूस्खलन के प्रभाव इस प्रकार हैं--
1. इससे मानव के घर उजड़ जाते है व हजारों मौतें होती है व धन का विनाश होता है। 
2. सड़के, पुल, बाँध टूट जाते है।
3. फसलें नष्ट हो जाती है।
4. वनस्पति व जीव नष्ट हो जाते है।
5. बाढ़ की संभावना बढ़ जाती है। नदियों के बहाव मे बाधा आती है।
पर्वतीय घाटियों मे निवास करने वाले लोग भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदा का सर्वाधिक शिकार होते है। उनके मकान मलबे मे दब जाते है, जिससे भारी जन-धन की हानि होती है। भूस्खलन आपदा प्रबंधन के लियें इसे अपनाया जाना चाहिए--
1. पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों का निर्धारण कर लेना चाहिए एवं ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों मे किसी भी तरह के निर्माण पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए।
2. भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों मे पर्याप्त वृक्षारोपण करना चाहिए एवं ऐसे क्षेत्रों मे पशुचारणता और वृक्षों की कटाई जैसे मानवीय कार्यों को पूर्णतया प्रतिबन्धित कर देना चाहिए।
3. भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों मे उपयुक्त स्थलो पर पत्थर की अवरोधी दीवारें खड़ी कर देनी चाहिए, इससे भूस्खलन की संभावनाएँ कम हो जाती है।
4. भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों मे राहत, बचाव व पुनर्वास जैसे कार्यक्रमों को तत्काल लागू कराने की सुचारू व्यवस्था होनी चाहिए।
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