7/11/2020

संसाधन क्या है? संसाधन का महत्व, वर्गीकरण या प्रकार

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संसाधन क्या है? संसाधन का अर्थ (sansadhan kise kahate hain)

मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति अथवा उनकी किसी कठिनाई का निवारण करने वाले या निवारण मे योग देने वाले आश्रय या स्त्रोत को संसाधन कहते है।
दुसरे शब्दों मे, कोई वस्तु या तत्व तभी संसाधन कहलाता है जब उससे मनुष्य की किसी आवश्यकता की पूर्ति होती है, जैसे जल एक संसाधन है क्योंकि इससे मनुष्यों व अन्य जीवों की प्यास बुझती हैं, खेतो मे फसलों की सिंचाई होती है और यह स्वच्छता प्रदान करने, भोजन बानने और भी आदि मानव की बहुत सी  महत्वपूर्ण आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। इसी प्रकार वे सभी प्रदार्थ जो मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति मे सहायतक होते है उन्हें संसाधन कहा जाता है।

संसाधनो का महत्व (sansadhan ka Mahtva)

संसाधन मानव जीवन को सरल व सुखद बनाते हैं, संसाधनों के बिना हम जीवन की कल्पना भी नही कर सकते। आदिकाल मे मनुष्य पूर्णतः प्रकृति पर निर्भर था। धीरे-धीरे मनुष्य ने अपनी बुद्धि-कौशल से प्रकृति के तत्वों का अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु अधिकाधिक उपयोग किया। आज संसार के वे देश अधिक उन्नत व सम्पन्न माने जाते है जिनके पास अधिक संसाधन है। आज संसाधन की उपलब्धता हमारी प्रगति का सूचक बन गया है। इसीलिए संसाधनों का हमारे जीवन मे बड़ा महत्व है।

यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रकृति का कोई भी तत्व तभी संसाधन कहलाएगा जब वह किसी मानवीय आवश्यकता की पूर्ति मे सहायक हो। किसी वस्तु या पदार्थ को संसाधन बनाना मनुष्य के हाथ मे है। मनुष्य अपनी बुद्धि, कौशल तकनीकी ज्ञान से प्राकृतिक तत्वों को अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उपयोगी एवं मूल्यवान बना लेता है। इस प्रक्रिया से प्राकृतिक तत्व संसाधन बन जाते हैं। संक्षेप मे हम कह सकते है कि प्राकृतिक साधन संसाधन तब बनते है जब मनुष्य अपने बुद्धि, कौशल तथा तकनीकी ज्ञान से उन्हें अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए रूपान्तरण कर और अधिक उपयोग एवं मूल्यवान बना लेता है। सामान्यतः संसाधन प्राकृतिक होते है। मेकनाल के अनुसार प्राकृतिक संसाधन वे है जो प्रकृति के द्वारा प्रदान किए जाते है तथा मानव के लिए उपयोगी है।

संसाधनो का वर्गीकरण या प्रकार (sansadhan ka vargikaran)

1. स्वामित्व के आधार पर संसाधन 

(अ) व्यक्तिगत संसाधन
किसी व्यक्ति की सम्पत्ति, स्वास्थ्य दक्षता आदि।
(ब) राष्ट्रीय संसाधन
राष्ट्रयी संसाधनों के अन्तर्गत राष्ट्र की सम्पदा, सैन्य शक्ति, नागरिकों की देशभक्ति आदि राष्ट्रीय संसाधन हैं।
(स) विश्व संसाधन
मानव मात्र की समृद्धि व कल्याण के लिए संसार की भौतिक और अभौतिक वस्तुएं।

2. पुन: पूर्ति के आधार पर संसाधन 

(अ) पुनः पूर्ति संसाधन
ऐसे संसाधन जिनका उपयोग होने पर भी उनके गुणों को बनाये रखा जा सके, जैसे-खाद के उपयोग द्वारा कृषि भूमि को कृषि योग्य बनायें रखना।
(ब) पुनः आपूर्तिहीन संसाधन
ऐसे संसाधन जिनका उपयोग एक बार ही किया जा सकता हैं, एक से अधिक बार उनका उपयोग नही किया जा सकता। जैसे, पेट्रोल, डिजल, कोयला आदि।
(स) बारम्बार प्रयोग वाले संसाधन
वे संसाधन जिनका उपयोग एक बार हो जाने के बाद भी उनमे संशोधन कर उनका उपयोग पुनः किया जा सके। जैसे धात्विक खनिज लोहा, तांबा आदि।
(द) सनातन प्राकृतिक संसाधन
ऐसे संसाधन जो उपयोग करने पर भी नष्ट नही होते। जैसे सौर ऊर्जा, जल इत्यादि।

3. वितरण के आधार पर संसाधन 

(अ) सर्व सुलभ संसाधन
ऐसे संसाधन जो सभी स्थानों पर उपलब्ध हो जैसे की वायु।
(ब) सामान्य सुलभ संसाधन
जो संसाधन अधिकरत स्थानों पर उपलब्ध है जैसे- मिट्टी, कृषि योग्य भूमि।
(स) विरल संसाधन
जो संसाधन सीमित स्थानों पर उपलब्ध है, जैसे कोयला, सोना, चूना , यूरेनियम आदि।
(द) एकल संसाधन
जो संसाधन संसार मे एक या दो स्थानों पर उपलब्ध है, जैसे क्रोमोलाइट धातु जो प्राकृतिक रूप से केवल ग्रीनलैंड मे मिलती है।

4. प्रयोग के आधार पर वर्गीकरण 

(अ) अप्रयुक्त संसाधन
संसाधनो का उपयोग जब तक नही किया जाता, तब तक उन्हें अप्रयुक्त संसाधन कहते है। जैसे कुछ खनिजों के भण्डारों का पता होने पर भी उनका दोहन और उनका कोई उपयोग भी नही हो पाता।
(ब) अप्रयोजनीय संसाधन
वर्तमान मे उपलब्ध तकनीक के बल पर जिन संसाधनों का उपयोग निकट भविष्य मे नही हो सकता, अप्रयोजनीय संसाधन कहलाते है।
(स) संभाव्य संसाधन
जिन संसाधनों का ज्ञान होने पर भी तकनीक या योजना के अभाव मे अभी उपयोग नही हो पा रहा है किन्तु भविष्य मे उपयोग की संभावना है, संभाव्य संसाधन कहलाते है। जैसे नदियों का बहता हुआ जल नहर बन जाने के बाद सिंचाई के काम आ सकता है। बांध बन जाने के बाद विद्युत उत्पादन हो सकता है।
(द) गुप्त संसाधन 
जब तक किसी पदार्थ के गुण और मानवीय हितों की पूर्ति हेतु आवश्यक प्रयोग ज्ञात न हो, तब तक वह पदार्थ गुप्त संसाधन कहलाता है, जैसे जब तक पेट्रोलियम पदार्थ के गुण व प्रयोग मनुष्य को ज्ञात न थे, तब तक गुप्त संसाधन की श्रेणी मे था।

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