7/14/2020

मृदा अपरदन किसे कहते है? मृदा अपरदन के कारण एवं रोकने के उपाय

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मृदा अपदन किसे कहते है? (mrida apardan kise kehte hai)

मृदा अपरदन मृदा के आवरण को हटाना या स्थानान्तरित होना मृदा अपरदन कहलाता है। मृदा अपरदन से आशय मिट्टी के विनाश (नुकसान) से है। वनस्पतिविहीन नरम मृदा पर अपरदन की प्रक्रिया तीव्र होती है। अपरदन की तीव्र गति के कारण भारत मे मिट्टियों की उर्वरा शक्ति प्रतिवर्ष कम होती जा रही है। भूमि के अपरदन की यह समस्या देश के लिए चिन्ताजनक है। मृदा अपरदन का यह परिणाम भूमि तक ही सीमित नही है। इसका फल मनुष्यों को भी भुगतना पड़ता है, क्योंकि इससे भूमि की पैदावार निरंतर क्षीण होती जाती हैं।

मृदा अपरदन के कारण 

1. वायु अपरदन।
2. मानव द्वारा वनों का विनाश।
3. आदिवासियों द्वारा झूमिंग कृषि करना।
4.अवैज्ञानिक तरीके से कृषि करना।

मृदा अपरदन से हानियाँ 

राष्ट्रीय योजना समिति ने भूक्षरण के संयुक्त प्रभावों को निम्र रूप मे स्पष्ट किया हैं---
1. वनस्पति के नष्ट हो जाने के कारण सुखे की लम्बी अवधि होना।
2. जल के अतिरिक्त स्त्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव तथा सिंचाई मे कठिनाई होना।
3. नदियों की तह मे बालू का जमना जिससे धरापरिवर्तन और बंदरगाहों का मार्ग अवरुद्ध होना।
4. उच्चकोटि की भूमि का नष्ट होना एवं कृषि उत्पादन पर दुष्प्रभाव पड़ना।
5. कृषि योग्य भूमि मे कमी आना।

मृदा अपरदन रोकने के उपाय (मृदा संरक्षण) (mrida apardan rokne ke upay)

बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण प्राकृतिक संसाधनों का बड़े पैमाने पर विनाश हुआ है। जिसमे अनेक प्राकृतिक संसाधनों के नष्ट होने का खतरा पैदा हो गया है। इसलिए मृदा संरक्षण द्वारा विनाश रोकना आवश्यक है। मृदा संरक्षण के लिए निम्नलिखित उपाय किये जा सकते हैं---
1. पहाड़ी एवं पर्वतीय क्षेत्रों में सीढ़ीदार खेतों मे फसल उगाना।
2. खेतों मे बँधिकाएं बनाकर नालीदार अपरदन को रोकना।
3. शुष्क प्रदेशों मे पवन की गति को रक्षकमेखला (पेड़ पौधों की बाड़) द्वारा कम करके मृदा अपरदन को रोकना। पहाड़ी ढालों पर तथा बंजर भूमि मे वृक्षारोपण करना तथा पशुओं की चराई पर नियंत्रण रखना।
4. पर्वतीय ढालों एवं ऊँचे-नीचे क्षेत्रों मे बहते हुए जल का संग्रह करना।
5. ग्रामीण क्षेत्रों मे चारागाहों का विकास करना।

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