5/10/2021

मुगलकाल मे स्थापत्य कला

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मुगलकाल में स्‍थापत्‍य कला

mugal kaal me sthapatya kala;मुगलकाल में सभी मुगल बादशाह स्‍थापत्‍य कला के प्रेमी थे, सिर्फ औरंगजेब को छोड़कर औरंगजेब के आलावा सभी मुगल बादशाह महान भवन निर्माणक विशेषकर अकबर, जहांगीर तथा शाहजहां महान निर्माता थें, उन्‍हें कला के प्रति विशेष अनुराग था। मुगल वास्‍तुकला का सही अर्थो में प्रारंभ अकबर के समय से होता है, जो शाहजहां के शासनकाल में अपनी चरम सीमा पर पहुंच गई। मुगल स्‍थापत्‍य हिन्‍दू मुस्लिम पद्धतियों का उचित एंव सुंदर समन्‍वय थीं। मुगलों के पूर्वजों ने स्‍थापत्‍य-कला संबंधी आदर्श पर्शिया से ग्रहण किए परंतु भारत में उन्‍होनें हिन्‍दू स्‍थापत्‍य के आदर्शो को भी अपनाया। हिन्‍दू स्‍थापत्‍य कला ने मुगलों को फर्श बनाने की तकनीक, सड़कें, खंबे तथा दूसरी सजावट संबंधी आदर्श प्रदान किए। 

मुगलकाल में स्‍थापत्‍य कला का विकास 

मुगल काल मे स्थापत्य कला का विकास इस प्रकार था--

1. बाबर के काल में स्‍थापत्‍य कला

भारत में मुगल साम्राज्‍य का संस्‍थापक बाबर भारतीय कारीगंरों की शिल्‍पकला से काफी प्रभावित हुआ था। इस शिल्‍प को उसने ग्‍वालियर में मानसिंह तथा विक्रमाजीत के महलों के शिल्‍प में देखा था। उसने अल्‍बानिया से सिनान के शिष्‍यों को बुलाया था। काल के क्रुर आघातों को सहन करने में बाबर की केवल दो इमारतें सफल रही हैं ये है-- 

(अ) पानीपत की काबुली बाग मस्जिद तथा 

(ब) हिसार जिलें में फतहबाद की मस्जिद। विशालता के सिवा इनमें कोई शिल्‍प सौंदर्य नहीं है। 

बाबर के काल मे स्थापत्य कला का ज्यादा विकास न हो सका बाबर प्रायः युद्धों मे ही व्यस्त रहा।

2. हुमायूं के समय में स्‍थापत्‍य

हुमायूं भी स्‍थापत्‍य कला में रूचि रखता था। लेकिन उसका सारा जीवन संघर्ष और युद्धों मे बीता। पंद्रह वर्ष प्रवास में बीतें। इसलियें इसके काल में कोई विशेष निर्माण कार्य नहीं हुए। हुमायुं द्वारा निर्मित केवल दो मस्जिदें ही विद्यमान हैं-- 

(अ) आगरा के निकट मस्जिद तथा 

(ब) हिसार जिले में फतहबाद की मस्जिद। ये मस्जिदें भी शिल्‍प कला की दृष्टि से विशेष महत्‍वपूर्ण नहीं है। 

3. शेरशाहकालीन स्‍थापत्‍य कला

शेरशाह के काल की दो प्रमुख इमारतें हैं जिनमें एक दिल्‍ली के समीप पुरानें किले की मस्जिद है और दूसरी सहसराम का मकबरा। इनमें सहसराम का मकबरा विशेष रूप से उल्‍लेखनीय है।

4. अकबर के समय में स्‍थापत्‍य कला

अकबर मुगल शासको में प्रथम शासक था जिसने वृहत् पैमाने पर स्‍थापत्‍य का निर्माण करवाया था। उसने अपनी इमारतों में अपने पूर्वजों की ईरानी शैली के प्रयोग को जारी रखा, परंतु इसके साथ ही उसने अपने भवनों में भारतीय कला को भी स्‍थान दिया इसलिए उसकीं इमारतों में हिन्‍दू-मुस्लिम शैली का सम्मिश्रण स्‍पष्‍ट दिखाई देता है। अकबर की इमारतों की प्रमुख विशेषताएं निम्‍नलिखित है--

(अ) अकबर की इमारतें हिन्‍दू शैली की प्रतीक हैं। 

(ब) अकबर की इमारातों में हिन्‍दू शैली का प्रभाव अधिक देखने को मिलता है। 

(स) अकबर ने अपनी इमारतों में डांटदार छतों का प्रयोग किया। 

(द) अकबर ने गोलाकार गुम्‍बद को अधिक महत्‍व दिया। 

(ई) अकबर ने लंबे-लंबे खंबे तथा मीनारों का प्रयोग किया। 

(फ) उसने अपने भवनों में अनेक दरवाजे तथा खिड़कियों का प्रयोग किया। 

इसके अलावा उसने सजावट, नुकीले, गुम्‍बद बड़े-बड़े छज्‍जे, सजावटी स्‍ंतभ आदि का प्रयोग अपने भवनों में किया। 

अकबर के समय में निर्मित कुछ भवन निम्‍नलिखित है--

हुमायूं का मकबरा 

अकबर द्वारा निर्मित यह सबसे पहली इमारत है। इस मकबरें का निर्माण अकबर की सौतेली मां हाजी बेगम ने करवाया था। इसका निर्माण सन् 1564 ई. में प्रारंभ किया गया था तथा सन् 1565 ई. में यह बनकर तैयार हो गया था। 

आगर का लाल किला

स्‍थापत्‍य की दृष्टिकोण से आगरा के किले का विशेष महत्‍व है। यह लगभग डेढ़ मील के क्षेत्रफल में बना हुआ है। इसकी दीवारें प्रायः 70 फीट ऊंची हैं। प्रवेश के लियें दो मुख्‍य द्वार है। प्रथम का नाम अमरसिंह द्वार है तथा दूसरा द्वार पश्चिम में है जिसे दिल्‍ली दरवाजा कहकर पुकारा जाता है। इस विशाल मजबूत किले का निर्माण सन् 1565 ई. में प्रमुख इंजीनियर कासिम खां की देख-रेख में हुआ था। यह लगभग 15 वर्षो में बनकर तैयार हुआ। लगभग चार हजार मजदूर रोज इसके निर्माण में लगे रहते थे तथा इसकी लागत लगभग 35 लाख रूपये आयी थी। इस किले में लगभग पांच-सौ भवनों का निर्माण करवाया था। 

फतेह पूर सिकरी अकबर निम्‍न भवनों का निर्माण करवाया जैस- दीवाने-आम, दीवाने-खास, जोधाबाई का महल, तुर्की सुल्‍तान का महत्‍व, पंचमहल, टकसाल तथा अस्‍पताल, ज्‍योतिष-भवन, विद्यालय, बीरबल का महल, मरियम का भवन, सराय तथा हिरन मीनार, जामा-मस्जिद, बुलन्‍द दरवाजा, शेख सलीम चिश्‍ती का मकबरा इत्‍यादि का निर्माण करवाया था।

5. जहांगीर के समय की स्‍थापत्‍य कला

जहांगीर तो वैसे चित्रकला प्रेमी था। इसलिए इसके शासनकाल में बहुत कम भवनों का निर्माण हुआ। ये भवन स्‍थापत्‍य की दृष्टि से विशेष महत्‍व रखते हैं। जहांगीरकालीन इमारतों का वर्णन निम्‍नानुसार है-- 

सिकन्दरा 

आगरा से लगभग 5 मील दूर सिकन्‍दरा में बने अकबर के मकबरे की शुरूआत स्‍वंय अकबर ने की थी। इस 1653 ई. में जहांगीर ने पूरा किया। भारत  के बौद्धविहारों की शिल्‍पकला शैली के आधार पर बना ये मकबरा मुगलकाल का एक मात्र ऐसा मकबरा है जिसमें गुम्‍बद नहीं है। इसकी ऊपर की मंजिल संगमरमर की बनी है और जालियां स्‍थापत्‍य शैली से प्रभावित हैं।

एतमाद-उद-दौला का मकबरा

आगरा में बना नूरजहां के पिता एतमाद-उद-दौला का मकबरा मुगल काल की प्रथम इमारत है जो पूरी की पूरी संगमरमर से बनी हुई हैं। इसमें सबसे पहले पितरादौरा की पच्‍चीकारी का काम किया गया है। 

जहांगीर का मकबरा

जहांगीर कालीन अन्तिम भवन उसका स्‍वंय का मकबरा हैं। यह लाहौर के निकट शाहदरा में हैं। सम्‍भवतः इसका डिजाइन जहांगीर ने स्‍वंय तैयार किया था परन्‍तु इसे उसकी रानी नूरजहां ने ही पूर्ण किया। सिकन्‍दरे के मकबरे की शैली से बहुत कुछ इसकी शैली मिलती है परन्‍तु इसमें उसकी भव्‍यता और मोहकता का अभाव हैं। 

6. शाहजहां कालीन स्‍थापत्‍य कला

शाहजहां मुगल-युग का एक महान शासक था। इसके काल को स्‍थापत्‍य कला का स्‍वर्ण काल कहते है। डॉ. ईश्‍वरी प्रसाद के अनुसार, ‘‘मुगल-काल का सबसे महान निर्माता शाहजहां था। उसका राज्‍य-काल भारतीय स्‍थापत्‍य-कला के इतिहास में स्‍वर्णयुग के नाम से प्रसिद्ध है। भारतीय वैभव और कला का पूर्ण विकास इस सम्राट द्वारा बनवाये भव्‍य भवनों और मकबरों में झलकता है। इमारतों की विशालता और साथ ही साथ उनकी सुकुमारता और सौन्‍दर्य भारतीय कला और कारीगरी की विशेषतायें हैं जो दूसरे देशों की इमारतों में कदाचित ही देखने को मिलेगी। स्‍वच्‍छ और निर्मल संगमरमर की बनी हुई इमारतें अपनी भव्‍यता के लिये संसार में प्रसिद्ध है।‘‘

कुछ महत्‍वपूण इमारतें जिनका निर्माण शाहजहां के काल में हुआ था--

दिल्‍ली का लाल किला

शाहजहां ने दिल्‍ली के पास एक नये नगर की स्‍थापना की, जिसका नाम  उसने अपने नाम के आधार पर ‘शाहजहांबाद‘ रखा। इस नगर में उसने लाल किले का निर्माण करवाया। दिल्‍ली के लाल किले की इमारतें हैं- दीवाने-खास, रंग-महल, दीवाने-आम। 

दिल्‍ली की जामा-मस्जिद 

लाल किले के निकट ही शाहजहां ने दिल्‍ली में जामा-मस्जिद का निर्माण करवाया था। यह आकार में पर्याप्‍त बड़ी तथा सुन्‍दर इमारत है। सन् 1644 ई. में इसका बनवाना आरम्‍भ हुआ था तथा सन् 1658 ई. तक यह बनकर तैयार हो गयी थीं। 

ताजमहल

ताजमहल दुनिया भर मे प्रसिद्ध है। शाहजहां द्वारा निर्मित भवनों में ताजमहल एक अनुपम तथा अद्वितीय कलापूर्ण कृति है। दुनिया के 7 अजूबों मे से एक ताजमहल है। इस मकबरे का निर्माण शाहजहां ने अपनी सर्वप्रिय बेगम अर्जुमंदबानू बेगम की याद में किया था। आगरा में यमुना के दाहिने किनारे पर ताजमहल स्थित हैं। इस निर्माण सन् 1631 ई. के लगभग प्रारम्‍भ हुआ था तथा 1653 ई. तक यह बनकर पूर्ण हो गया। इस प्रकार मकबरे के पूर्ण होने में लगभग 22 वर्ष लगे और लगभग पचास लाख रूपया इसके निर्माण का व्‍यय आया।

7. औरंगजेब तथा उसके बाद स्‍थापत्‍य कला

औरंगजेब अपने पिता के स्‍वभाव के विपरीत किसी भी कला से अनुराग से  नही रखता था। इसने बहुत ही कम भवनों का निर्माण करवाया तथा जो कुछ भी उसने बनवाया उसे कला की दृष्टि से निम्‍न स्‍तर का ही कहा जा सकता है। औरंगजेब ने अपनी बेगम रविया-उद-दौरानी की कब्र पर औरंगाबाद में एक मकबरा बनाया था जो बीबी के मकबरे ने नाम से प्रसिद्ध है। लाहौर की बादशाही मस्जिद भी उसने ही बनवाई थीं। लेकिन इसमे भी सौंदर्य का अभाव हैं। औरंगजेब की मृत्‍यु के बाद मुगल स्‍थापत्‍य को पुनः पनपने का अवसर नहीं मिला तथा उत्तरकालीन मुगल सम्राटों के काल में जिन इमारतों का निर्माण किया गया वे बहुत निम्‍न कोटि की प्रतीत होती हैं एंव स्‍थापत्‍य शिल्‍प का खोखलापन प्रकट करती है। मुगल स्‍थापत्‍य शैली के पतन के अंतिम चरण में निर्माण कार्य मुगल वंश के हाथ से निकलकर अवध के नवाब आदि आंचलिक क्षत्रपों के हाथ में आ गया। निर्माणविद् तथा वास्‍तुविद् हिन्‍दू, सिख और मुस्लिम राज्‍यों में आ गये। जहां के शासकों ने उन्‍हें अपने यहां रख लिया। इन्‍होंने जो नगर, महल आदि बनाये उनमें कुछ तो वास्‍तुकला के श्रेष्‍ठ तथा कुछ हास्‍यास्‍पद नमूने थे। 

निष्‍कर्ष 

अकबर के काल में जिस स्‍थापत्‍य शैली का विकास हुआ उसमें जहांगीर और शाहजहां के काल में अनेक परिवर्तन हुये। शाहजहां के काल में स्‍थापत्‍य शैली में हिन्‍दू प्रभाव घटने लगा। सजावट इमारतों में विभिन्‍न चटख रंगों का प्रयोग होने लगा। इमारतों में संगमरमर का प्रयोग लाल पत्‍थर का प्रयोग भी बढ़ गया। ताजमहल इसका उदाहरण हैं।

यह जानकारी आपके लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगी 

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